Son Dakika
FRIncendie hors norme en Gironde : Phénomène de pyrocumulonimbus sans précédent en FranceFRAttentat à la Marche des fiertés de Berlin : au moins 1 mort et 29 blessésFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainCRYPTO-FRCorée du Sud : Google Play bloque 29 exchanges de dérivés crypto pour non-conformitéFRIncendies près de Bordeaux : transports perturbés, trafic ferroviaire interrompuFRAffaire Jeffrey Epstein : les connexions du diplomate français Fabrice Aidan examinées par le Quai d’OrsayFRIncendie hors norme en Gironde : Phénomène de pyrocumulonimbus sans précédent en FranceFRAttentat à la Marche des fiertés de Berlin : au moins 1 mort et 29 blessésFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainCRYPTO-FRCorée du Sud : Google Play bloque 29 exchanges de dérivés crypto pour non-conformitéFRIncendies près de Bordeaux : transports perturbés, trafic ferroviaire interrompuFRAffaire Jeffrey Epstein : les connexions du diplomate français Fabrice Aidan examinées par le Quai d’Orsay
Newsgather
Geriउधार किट से टी-20 वर्ल्ड कप तक: भारती फुलमाली का प्रेरणादायक सफ़र
उधार किट से टी-20 वर्ल्ड कप तक: भारती फुलमाली का प्रेरणादायक सफ़र
Gelişiyor
BBC हिंदी14.06.2026Spor5 dk okumaIndia

उधार किट से टी-20 वर्ल्ड कप तक: भारती फुलमाली का प्रेरणादायक सफ़र

Hızlı Bakış

भारती फुलमाली, जिन्होंने सात साल तक राष्ट्रीय टीम से बाहर रहने और रूप-रंग को लेकर ट्रोलिंग झेलने के बाद वापसी की, अब टी-20 वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनका सफ़र दृढ़ संकल्प और मेहनत का प्रतीक है।

Yapay zekâ özeti

Yazı boyutu

उधार किट लेकर टीम में सिलेक्ट होने से टी-20 वर्ल्ड कप तक का भारती फुलमाली का सफ़र

Author, जान्हवी मुले और नितेश राऊत

पदनाम, बीबीसी न्यूज़ मराठी

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

वह सात साल तक भारतीय टीम से बाहर रहीं. उन्हें अपने रूप-रंग को लेकर ऑनलाइन ट्रोलिंग झेलनी पड़ी. लेकिन अब भारती फुलमाली महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के अमरावती शहर को क्रिकेट वर्ल्ड कप के नक्शे पर ले आई हैं.

उन्होंने इंग्लैंड में आईसीसी महिला टी-20 वर्ल्ड कप के एक वार्म-अप मैच में अहम भूमिका निभाई, जिसमें भारत ने वेस्ट इंडीज़ को हराया.

विदर्भ की स्थानीय टीम से वर्ल्ड कप तक भारती का सफ़र केवल दृढ़ संकल्प, लगातार मेहनत और समर्पण से ही संभव हुआ. उनका सफ़र यह सिखाता है कि ख़ुद को फिर से कैसे खोजा जा सकता है.

राष्ट्रीय टीम से सात साल दूर रहने के बाद भारती ने ख़ुद को निचले क्रम की बल्लेबाज़ और फ़िनिशर के रूप में फिर से तैयार किया.

महिला प्रीमियर लीग में उनकी शानदार बल्लेबाज़ी ने उनके लिए वर्ल्ड कप का दरवाज़ा खोला.

इस दौरान उन्हें इंटरनेट पर बेरहम ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा, जहाँ कुछ लोगों ने उनके रूप-रंग का मज़ाक उड़ाया. लेकिन भारती ने सब पर जीत हासिल की.

भारती की यात्रा को समझने के लिए हमने उनके माता-पिता से बात की.

'जितनी तारीफ़ करूँ, कम होगी'

भारती की माँ ज्योति फुलमाली अपनी बेटी पर गर्व महसूस करती हैं.

"मुझे गर्व है कि मैं भारती की माँ हूँ. मेरी भारती ने ऐसा नाम कमाया है; आज उसकी वजह से लोग हमें जानते हैं. मैं और क्या कहूँ? चाहे जितनी तारीफ़ करूँ, वह कम ही होगी."

वह आगे कहती हैं, "वहाँ दस लड़के खेल रहे होते और भारती अकेली लड़की होती. लेकिन मैंने उसे कभी खेलने से नहीं रोका. मैं उसे कहती, 'जाओ, खेलो. यही तुम्हारा भविष्य है.' मेरी भारती बहुत अच्छा खेलती है."

भारती के पिता श्रीकृष्ण फुलमाली कहते हैं, "मैं शिक्षक हूँ, लेकिन मैंने अपनी बेटी से बहुत कुछ सीखा है - विनम्रता, दृढ़ संकल्प, बोलने का तरीका और सबसे अहम, धैर्य."

बहुत छोटी उम्र से ही भारती को खेलों से प्यार था, लेकिन क्रिकेट उसके दिल के सबसे क़रीब था.

श्रीकृष्ण फुलमाली कहते हैं, "पहले हम यहीं गली में क्रिकेट खेलते थे. जब वह पाँचवीं-छठी में थी, वह बल्लेबाज़ी कर रही थी. उसके शॉट से गेंद एक गुज़रते वाहन पर लगी और उसका शीशा टूट गया."

"वाहन मालिक घर आकर बहस करने लगा. तभी मैंने तय किया कि गली में खेलना ठीक नहीं है और उसके लिए हमें कुछ प्रयास करना होगा."

इसके बाद श्रीकृष्ण भारती को अमरावती के हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल के मैदान में ले गए. वहाँ दीनानाथ नवाथे क्रिकेट कोचिंग देते थे.

उस समय अमरावती में क्रिकेट की सुविधाएँ बहुत कम थीं और लड़कियों के लिए अलग व्यवस्था नहीं थी.

उधार ली किट से टीम इंडिया तक

भारती शिवकृपा हाई स्कूल में पढ़ती थीं. एक बार उन्हें खेलते देख प्रिंसिपल ने श्रीकृष्ण से कहा कि उनकी बेटी बहुत अच्छा खेलती है और उन्हें उसके लिए कुछ करना चाहिए.

तय हुआ कि भारती को अमरावती के ज्ञानमाता स्कूल के क्रिकेट कैंप में भेजा जाए. उसके ख़र्च का इंतज़ाम करने के लिए श्रीकृष्ण को पैसे उधार लेने पड़े.

उस समय उनका परिवार श्रीकृष्ण की निजी स्कूल शिक्षक की मामूली तनख़्वाह से ही चलता था. भारती के अलावा उनकी दो और बेटियाँ थीं.

ज्योति उन दिनों को याद करती हैं, "उनके पिता कुएँ खोदने का अतिरिक्त काम भी करते थे. उन्हें लगता था कि मेरी बेटियों को किसी चीज़ की कमी नहीं होनी चाहिए. भारती कहती, 'मुझे कुछ नहीं चाहिए. बस बैट-बॉल दे दो'."

एक बार श्रीकृष्ण ने अख़बार में पढ़ा कि अमरावती में चयन ट्रायल हो रहे हैं. उन्होंने तुरंत भारती और उसकी एक बहन को साइकिल पर बैठाया और वहाँ ले गए.

चयन का समय ख़त्म हो चुका था. श्रीकृष्ण ने अनुरोध किया कि उनकी बेटी को मौका दिया जाए. चयनकर्ताओं ने अनुमति दी, लेकिन भारती के पास कोई सामान नहीं था. तो उन्होंने दूसरे खिलाड़ियों से बैट, बूट आदि उधार लिए और किसी तरह किट तैयार कर भारती को खेलने भेजा.

जैसे ही कोच संदीप गवांडे ने उसकी बल्लेबाज़ी देखी, वह दौड़कर श्रीकृष्ण के पास आए और कहा कि उनकी बेटी उनकी टीम के लिए चुनी गई है. उसी पल से भारती का असली सफ़र शुरू हुआ.

विदर्भ की 'लेडी क्रिस गेल'

भारती ने 13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया और बाद में 2011–12 सीज़न में महज़ 17 साल की उम्र में विदर्भ की सीनियर महिला टीम के लिए पदार्पण किया.

अपने आक्रामक स्ट्रोक प्ले की वजह से कुछ लोग उन्हें विदर्भ की 'लेडी क्रिस गेल' कहने लगे.

2019 में भारती ने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय टी-20 में डेब्यू किया. लेकिन गुवाहाटी में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उस सिरीज़ के दो मैचों में वह ज़्यादा रन नहीं बना सकीं.

2023 में डब्ल्यूपीएल के पहले सीज़न में भी किसी टीम ने उन्हें नहीं चुना. लेकिन बिना हताश हुए भारती लगातार मेहनत करती रहीं और अपने खेल को निखारा.

2024 में गुजरात जायंट्स ने उन्हें चुना. भारती ने डब्ल्यूपीएल में कुछ शानदार पारियाँ खेलीं और 2026 में भारत की टी-20 टीम में वापसी की.

अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर उन्होंने बेनोनी में 40 रन बनाए. लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जगह दिलाई.

चयन के समय कप्तान हरमनप्रीत ने कहा, "भारती ने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है और ख़ुद को साबित किया है. उन्होंने डब्ल्यूपीएल में भी अच्छा खेला और अहम मौकों पर अपनी टीम को जीत दिलाई."

भारती ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस सफ़र में हरमनप्रीत ने उन्हें प्रेरित किया.

वह कहती हैं, "मैंने हैरी दीदी को फॉलो किया है. वह मैच-विनर हैं और दबाव में भी अच्छा खेलती हैं. मैं भी वही करना चाहती हूँ - मैं सीखना चाहती हूँ कि दबाव में कैसे खेलना है और खुद को कैसे ढालना है."

विदर्भ से भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली भारती दूसरी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने महिला वर्ल्ड कप खेला. इससे पहले मोना मेश्राम ने 2017 वनडे वर्ल्ड कप में खेला था.

ट्रोल्स का सामना कैसे करें

जब भारती के प्रदर्शन की डब्ल्यूपीएल में तारीफ़ हो रही थी, तभी कुछ लोग उसके रूप-रंग को लेकर ट्रोल करने लगे. उन्होंने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि वह लड़के जैसी दिखती हैं.

भारती ने गुजरात जायंट्स के एक वीडियो में कहा था कि इससे वह आहत हुई थीं.

वह कहती हैं, "जब लोग मेरे रूप या व्यक्तित्व पर सवाल उठाते हैं तो बहुत बुरा लगता है. बहुत सारी टिप्पणियाँ आती हैं और उनमें से कई बहुत नकारात्मक होती हैं. बेशक, अच्छी टिप्पणियाँ भी होती हैं, लेकिन वे कम होती हैं."

छोटे बाल और एथलेटिक, मज़बूत शरीर वाली अन्य महिला खिलाड़ियों को भी इसी तरह के पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है. हाल ही में बीबीसी के एक अध्ययन ने भी यही मुद्दा उजागर किया था.

भारती कहती हैं कि उन्होंने ऐसे ट्रोलिंग और पूर्वाग्रह का सामना करना सीख लिया है: "मैंने इस बारे में अपनी अन्य साथियों से भी चर्चा की. उन्हें भी ऐसी चीज़ों का सामना करना पड़ता है. लोग क्या सोचते हैं, यह हमारे हाथ में नहीं है. लेकिन हम यह तय कर सकते हैं कि हमें क्या करना है और हमारा नज़रिया क्या होना चाहिए. और यह बहुत ज़रूरी है."

भारती के माता-पिता भी ट्रोलिंग से दुखी होते हैं. ज्योति कहती हैं, "लोग यह समझ नहीं पाते कि वह लड़की है या लड़का. आप उसके व्यक्तित्व पर क्यों ध्यान देते हैं? उसके खेल को देखिए, उसकी प्रतिभा को देखिए. मैं लोगों से बस यही कहना चाहती हूँ: उसके बारे में बुरा मत सोचिए और उसे पूर्वाग्रह से मत देखिए."

क्रिकेट का बदलता चेहरा

फ़िलहाल, भारती का सपना है वर्ल्ड कप खेलना और भारत को जीत दिलाना.

İlgili Konular

Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

İlgili Haberler