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Geriपटना में रेलवे स्टेशन पर पत्थरबाज़ी और ट्रेनों को रोका गया, परीक्षार्थी किस बात से थे ग़ुस्से में
पटना में रेलवे स्टेशन पर पत्थरबाज़ी और ट्रेनों को रोका गया, परीक्षार्थी किस बात से थे ग़ुस्से में
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BBC हिंदी14.06.2026Siyaset5 dk okumaIndia

पटना में रेलवे स्टेशन पर पत्थरबाज़ी और ट्रेनों को रोका गया, परीक्षार्थी किस बात से थे ग़ुस्से में

Hızlı Bakış

पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात बिहार पुलिस प्रोहिबिशन एक्साइज़ कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के परीक्षार्थियों ने हंगामा किया. ट्रेनों की उचित व्यवस्था न होने का आरोप लगाते हुए छात्रों ने पत्थरबाज़ी की, जिससे पुलिस अधिकारी घायल हुए और ट्रेनों को रोका गया.

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पटना में रेलवे स्टेशन पर पत्थरबाज़ी और ट्रेनों को रोका गया, परीक्षार्थी किस बात से थे ग़ुस्से में

प्रकाशित एक मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

बिहार की राजधानी पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात स्टूडेंट्स ने हंगामा कर दिया. इस हंगामे के दौरान पत्थरबाज़ी की गई जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को भी चोटें आई हैं.

स्टूडेंट्स को खदेड़ने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया. इसके लिए सुरक्षाबलों ने लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े.

यह हंगामा शनिवार रात उस वक़्त शुरू हुआ जब बिहार पुलिस प्रोहिबिशन एक्साइज़ (मद्य निषेध विभाग) कॉन्स्टेबल की भर्ती परीक्षा के लिए स्टूडेंट्स को कटिहार की ओर जाना था.

लेकिन स्टूडेंट्स ने ट्रेनों की उचित व्यवस्था न किए जाने का आरोप लगाया और अन्य ट्रेनों को भी रोक दिया.

इस हंगामे का असर रविवार सुबह तक जारी रहा. हालाँकि रेलवे का कहना है कि उसने स्टूडेंट्स की भीड़ को देखते हुए देर रात स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की थी.

इस मामले पर पटना के ज़िलाधिकारी डॉक्टर त्यागराजन ने कहा, "ये सभी छात्र ट्रेन की व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे. जबकि स्पेशल ट्रेनों का इंतज़ाम किया गया था. स्टेशन पर पहले से दो स्पेशल ट्रेनें खड़ी थीं."

स्टेशन पर भारी हंगामा

स्थानीय पत्रकार प्रीति प्रभा के मुताबिक़, ये सभी स्टूडेंट्स बिहार पुलिस के मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले थे. परीक्षा दो पालियों में होनी थी, जिसके लिए हज़ारों अभ्यर्थी रात में ही स्टेशन पहुंच गए.

ट्रेन की पर्याप्त व्यवस्था न होने से नाराज़ स्टूडेंट्स ट्रेन के आगे पटरी पर बैठ गए और रेल प्रशासन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी शुरू कर दी. वे पर्याप्त ट्रेनों की मांग करने लगे.

मौक़े पर पहुंची पुलिस के लाठीचार्ज से नाराज़ स्टूडेंट्स ने पुलिस पर भी पथराव किया. इस दौरान स्टूडेंट्स के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.

इस पथराव में पटना ज़ोन के आईजी जितेंद्र राणा भी घायल हो गए हैं.

जितेंद्र राणा ने बताया, "यहां पर लगभग 200-250 छात्र थे, वे ट्रेन को रवाना नहीं होने दे रहे थे. जब आरपीएफ़, जीआरपी और ज़िला पुलिस ने उनको समझाने का प्रयास किया तो उनकी ओर से पथराव किया गया."

क्या पहले से नहीं की गई पर्याप्त व्यवस्था?

पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर हालात तब बिगड़ गए जब यहां से कटिहार के लिए चलाई गई एग्ज़ाम स्पेशल ट्रेन स्टेशन पहुंची. यह ट्रेन क़रीब 11:30 बजे रात पालटिपुत्र स्टेशन पर पहुंची.

पूर्व मध्य रेलवे के प्रवक्ता सरस्वती चंद्र के मुताबिक़, "शनिवार रात पाटलिपुत्र स्टेशन पर बिहार एक्साइज़ कॉन्स्टेबल की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी बड़ी तादाद में थे. उन्होंने सीमांचल एक्सप्रेस ट्रेन को रोका. उसमें बहुत सारे छात्र चढ़ भी गए, लेकिन कुछ तथाकथित छात्रों ने वहीं उपद्रव करने की कोशिश की."

वहीं पूर्व मध्य रेलवे के आईजी (रेलवे सुरक्षा बल) अमरेश कुमार के मुताबिक़, "क़रीब 11:45 बजे रात में तीन सौ से चार सौ की संख्या में छात्र दिखने वाले कुछ लोग आए और उनका मक़सद ट्रेन में यात्रा करना न होकर अन्य लोगों को परेशान करना दिख रहा था. वे सीधे आकर पटरी पर बैठ गए."

इस घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी स्टूडेंट ने न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस को बताया, "बिहार पुलिस की परीक्षा थी, इसी वजह से यहां बहुत भीड़ थी. इसके लिए कोई स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई गई थी."

उन्होंने बताया, "जो भी ट्रेनें आ रही थीं, उनमें भीड़ थी. ट्रेन नहीं आई, इसलिए पथराव हुआ. यहां प्रशासन था, लेकिन जब पथराव हुआ तो प्रशासन भी पीछे हट गया."

हालांकि इस घटना के बाद डीआरएम दानापुर की ओर से रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि "बिहार कॉन्स्टेबल परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, पूर्व मध्य रेलवे (दानापुर मंडल) की ओर से परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए दो परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया गया है."

क्या स्टूडेंट्स को परीक्षा छूट जाने का डर था?

परीक्षा के लिए उचित व्यवस्था नहीं किए जाने के विरोध में स्टूडेंट्स पाटलिपुत्र स्टेशन पर पटरी पर धरने पर बैठ गए. इस दौरान उन्होंने एक मालगाड़ी को भी रोक दिया.

अमरेश कुमार के मुताबिक़, बिहार पुलिस के महानिदेशक ने कहा कि "छात्रों को बता दें अगर स्पेशल ट्रेन ट्रेन से जाने पर उनकी परीक्षा छूट जाती है तो उनका एग्ज़ाम फिर से होगा या कोई अन्य व्यवस्था की जाएगी."

अमरेश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "अगर छात्र रात 2:30 बजे पर भी ट्रेन से रवाना हो जाते, तो वे सुबह 7 बजे तक पहुंच जाते, जबकि परीक्षा दस बजे से शुरू होने वाली थी. लेकिन छात्र कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. इसके बाद सुरक्षा बलों को बुलाया गया, लाठीचार्ज की गई और आंसू गैस के गोले छोड़े गए."

अमरेश कुमार ने बताया है कि हंगामा करने वाले स्टूडेंट्स थे या नहीं यह जांच के बाद पता चलेगा, लेकिन ऐसा लग रहा था कि उनका ज़ोर परीक्षा रद्द कराने पर ज़्यादा था.

स्टूडेंट्स ने इस हंगामे के बीच पटरी पर मौजूद पत्थर उठाकर पत्थरबाज़ी शुरू की दी, जिससे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन के शीशे टूटे और रेलवे की संपत्ति को नुक़सान हुआ है.

पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ (प्रवक्ता) सरस्वती चंद्र ने बताया, "उनके (हंगामा करने वालों) ऊपर हल्का बल प्रयोग किया गया. उसके बाद वो हट गए. रेलवे ने रात 2:30 बजे कटिहार जाने के लिए एक स्पेशन ट्रेन लगा दी थी. वो ट्रेन सुबह 5:47 बजे रवाना हुई है."

उन्होंने कहा, "हमलोगों को अंदाज़ा था और हम लोगों ने तुरंत स्पेशल ट्रेन की घोषणा कर दी लेकिन छात्र नियमित ट्रेन में जाना चाह रहे थे. कुछ छात्र उसमें चढ़ भी गए. उसमें पर्याप्त जगह भी थी, लेकिन कुछ संभावित असामाजिक तत्व थे, उन्होंने पथराव किया. उन लोगों के ऊपर बल प्रयोग किया. हमारे सारे पैसेंजर सुरक्षित हैं."

उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस और आरपीएफ़ हंगामा करने वालों की पहचान करने की कोशिश कर रही है इस संबंध में उचित कार्रवाई की जाएगी.

सियासी गलियारे में हंगामे की गूंज

पाटलिपुत्र स्टेशन पर स्टूडेंट्स के हंगामे के बाद बिहार में सियासी गलियारों से आवाज़ आना शुरू हो गई है.

पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा, "बच्चों के लिए सारी उम्मीदें ख़त्म हो गई हैं. चारों तरफ से रास्ते बंद हो गए हैं. अग्निवीर के बाद से अब तक बच्चों के सपने उनका भरोसा सब टूट चुका है."

पप्पू यादव ने कहा, "यह अलग बात है कि ट्रेन में जनता का पैसा लगा है. उन्हीं की ट्रेन है. हमें तोड़फोड़ से बचना चाहिए. लेकिन लोगों के भीतर इतना आक्रोश बढ़ता जा रहा है तो वे अपना गुस्सा कहीं भी निकाल देते हैं. देश में बच्चे, युवा महिलाएं, किसान बेटी, ग़रीब आदमी, आम आदमी और मध्यम वर्ग सुरक्षित नहीं है."

बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने पाटलिपुत्र स्टेशन पर हुई घटना के बाद कहा, "मुझे नहीं लगता है कि कोई छात्र तोड़-फोड़ करता है. ज़रूर कोई असामाजिक तत्व है जो इस तरह की घटना को अंजाम देते हैं. सरकार इसकी जांच कराएगी और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

उन्होंने कहा, "विपक्ष के उकसावे का शिकार परीक्षार्थियों को नहीं होना चाहिए. संयम के साथ वो भारत के भविष्य हैं. और जिस तरह से हाल के दिनों में पढ़ाई की तैयारियों के बजाय छात्रों का एक समूह इस तरह की गतिविधियों में बार-बार उलझता जा रहा है. यह उनके भविष्य के लिए भी ठीक नहीं है."

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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