Son Dakika
RUВ Кировской области ввели отпуск топлива по номерам из-за ажиотажного спросаVNChiến sự Mỹ - Iran bùng phát trở lại, Trung Đông và thế giới đối mặt nguy cơ hỗn loạnRUПодробности ДТП с автобусом в Москве: грузовик подрезал автобус на выделенной полосеRUМИД РФ: Киев совершил экологические преступления и теракты в Херсонской областиTRApple'ın İlk Katlanabilir iPhone'unun Batarya Kapasitesi ve Özellikleri SızdırıldıDEUSA und Iran suchen diplomatische Lösung trotz EskalationCNHong Kong privacy watchdog orders removal of dashcam video showing argument with singer David Lui FongJPセブン&アイ、ソフトバンク・PayPayなどから数千億円規模の出資を協議PLPierwszy prąd z polskich farm wiatrowych na BałtykuTRCHP MYK, Kılıçdaroğlu başkanlığında toplandıRUВ Кировской области ввели отпуск топлива по номерам из-за ажиотажного спросаVNChiến sự Mỹ - Iran bùng phát trở lại, Trung Đông và thế giới đối mặt nguy cơ hỗn loạnRUПодробности ДТП с автобусом в Москве: грузовик подрезал автобус на выделенной полосеRUМИД РФ: Киев совершил экологические преступления и теракты в Херсонской областиTRApple'ın İlk Katlanabilir iPhone'unun Batarya Kapasitesi ve Özellikleri SızdırıldıDEUSA und Iran suchen diplomatische Lösung trotz EskalationCNHong Kong privacy watchdog orders removal of dashcam video showing argument with singer David Lui FongJPセブン&アイ、ソフトバンク・PayPayなどから数千億円規模の出資を協議PLPierwszy prąd z polskich farm wiatrowych na BałtykuTRCHP MYK, Kılıçdaroğlu başkanlığında toplandı
Newsgather
Geriतेल बेचने वाला रूस क्या यूक्रेन के हमलों की वजह से पेट्रोल संकट में घिर गया है, कितने दबाव में हैं पुतिन?
तेल बेचने वाला रूस क्या यूक्रेन के हमलों की वजह से पेट्रोल संकट में घिर गया है, कितने दबाव में हैं पुतिन?
Gelişiyor
BBC हिंदी6 sa önceDünya8 dk okumaIndia

तेल बेचने वाला रूस क्या यूक्रेन के हमलों की वजह से पेट्रोल संकट में घिर गया है, कितने दबाव में हैं पुतिन?

Hızlı Bakış

रूस में पेट्रोल और डीज़ल की कमी से लोग परेशान हैं. राजधानी मॉस्को में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. यूक्रेन के ड्रोन और मिसाइल हमलों से तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे यह संकट गहरा गया है. हालांकि पुतिन ने स्थिति को गंभीर नहीं बताया, लेकिन सर्वे बताते हैं कि उनकी लोकप्रियता और अर्थव्यवस्था पर भरोसे में कमी आई है.

Yapay zekâ özeti

Neden Önemli?

रूस में पेट्रोल और डीज़ल की कमी से लोग परेशान हैं. राजधानी मॉस्को में लोग पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं. यूक्रेन के ड्रोन और मिसाइल हमले रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बना रहे हैं.

Yazı boyutu

तेल बेचने वाला रूस क्या यूक्रेन के हमलों की वजह से पेट्रोल संकट में घिर गया है, कितने दबाव में हैं पुतिन?

Author, जेम्स लैंडेल

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 8 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

रूस में पेट्रोल और डीज़ल की कमी से लोग परेशान हैं. राजधानी मॉस्को में लोग पेट्रोल पंप पर लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं, जिससे ईंधन को लेकर चिंता बढ़ गई है.

मॉस्को में हम जहाँ-जहाँ पेट्रोल पंप से गुज़रे, लगभग हर जगह गाड़ियों और ट्रकों की लंबी लाइन लगी हुई थी. कहीं लाइन छोटी थी, कहीं बहुत लंबी. कहीं लाइन बिल्कुल रुकी हुई थी, तो कहीं धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी.

जहाँ कोई लाइन नहीं थी, इसका मतलब था कि वहाँ पेट्रोल पंप पर तेल पूरी तरह ख़त्म हो चुका था और वह बंद था.

हम जिस जगह की बात कर रहे हैं, यह रूस की राजधानी है, जहाँ देश के ज़्यादातर संसाधन आते हैं. लेकिन अभी हालात ये है कि सरकार यहां भी लोगों के लिए पर्याप्त पेट्रोल और डीज़ल का इंतज़ाम नहीं कर पा रही है.

पेट्रोल-डीज़ल के लिए लाइन में खड़े लोग गुस्से से ज़्यादा परेशान और निराश दिखे. हमने पेट्रोल पंप के बाहर लाइन में लगे येकातेरीना और एलमार से बात की.

येकातेरीना ने बताया, "मैं खुश नहीं हूँ. सब लोग घबराए हुए हैं क्योंकि सबको लग रहा है कि तेल खत्म हो जाएगा. लेकिन सब ठीक हो जाएगा. बस तेल की सप्लाई को सही तरीके से बाँटना होगा."

वहीं एलमार कहते हैं, "हालात बहुत खराब हैं. जैसे-जैसे पेट्रोल कम हो रहा है, उसकी कीमत भी बढ़ रही है. पेट्रोल भरवाने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है. मैं अभी दागेस्तान जाने की सोच रहा हूँ, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि गाड़ी से जाऊँ या नहीं, क्योंकि रास्ते में पेट्रोल मिलने की बड़ी दिक्कत है."

मैंने उनसे पूछा कि इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है?

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "हमारे देश में आप खुलकर नहीं कह सकते कि ग़लती किसकी है या किसका दोष है."

रूस में ज़्यादातर लोग राष्ट्रपति की खुलेआम आलोचना करने से बचते हैं.

वहीं वालेरी कहते हैं, "यह बहुत अजीब है कि इतना तेल निकालने वाले देश में भी लोगों को लाइन में लगना पड़ रहा है. इसकी वजह सिर्फ यूक्रेन के मिसाइल हमले नहीं हैं, बल्कि हमारी अपनी तैयारी की कमी भी है."

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लाइनों में लगने की आदत नहीं डालनी है. उम्मीद है कि यह परेशानी जल्द खत्म होगी और ज़्यादा समय तक नहीं चलेगी."

थके हुए अंदाज़ में उन्होंने आगे कहा,"हमने 90 के दशक के मुश्किल दिन भी देखे हैं. हमें वो समय याद है, जब हालात आज से कहीं ज़्यादा खराब थे. इसलिए अब हमें इन चीज़ों से डर नहीं लगता."

यानी अब इस युद्ध का असर रूस के आम लोगों तक भी पहुँचने लगा है.

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूरी कोशिश की है कि आम लोगों को यूक्रेन के साथ जारी इस युद्ध के असर से दूर रखा जाए, जिसे वह "स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन" कहते हैं.

यह युद्ध अब पाँचवें साल में पहुँच चुका है.

मॉस्को की सड़कों पर देखकर ऐसा नहीं लगता कि देश युद्ध में है. बस कहीं-कहीं बहादुर सैनिकों के पोस्टर दिखाई देते हैं.

लेकिन सरकार के लिए जिस बात को नज़रअंदाज़ करना सबसे मुश्किल हो रहा है, वह है यूक्रेन के ड्रोन और मिसाइल हमलों का लगातार बढ़ना.

ये हमले अब रूस के अंदर तक हो रहे हैं और तेल रिफाइनरियों को निशाना बना रहे हैं. मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े रूसी शहरों के ऊपर भी ड्रोन और मिसाइल दिखाई देने लगे हैं.

इसके साथ ही इंटरनेट भी कई जगह बंद किया जा रहा है, ताकि जानकारी ज़्यादा न फैल सके. और अब पेट्रोल-डीज़ल की कमी की परेशानी भी सामने आ गई है.

रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है, लेकिन फिर भी वह अपने ही देश की ज़रूरत के हिसाब से पर्याप्त पेट्रोल और डीज़ल तैयार नहीं कर पा रहा है.

आंद्रेई अपनी पत्नी येकातेरीना के साथ पहली बार पेट्रोल के लिए लाइन में लगे थे. उन्होंने इसका कारण जियोपॉलिटिक्स को बताया और माना कि हालात आगे और खराब हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष एक-दूसरे के करीब आएँगे और शांति समझौते की शर्तों पर बात करेंगे. लेकिन अभी हमें अपने यूरोपीय साझेदारों की तरफ़ से ऐसा होता नहीं दिख रहा. इसलिए लगता है कि हालात अभी और बिगड़ सकते हैं."

सोशल मीडिया पर पेट्रोल के लिए लंबी-लंबी लाइनों की तस्वीरें और वीडियो भरे पड़े हैं. कहीं-कहीं गाड़ियों की लाइनें कई किलोमीटर तक लगी हुई हैं.

सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में लोगों के बीच मारपीट होते हुए भी दिखाई दे रही है.

ब्लैक सी के किनारे बसे अनापा शहर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स कोसैक को तैनात किया गया है.

कई इलाकों में पेट्रोल की तय मात्रा ही दी जा रही है. बहुत-सी जगहों पर लोगों को जैरी कैन (पेट्रोल रखने वाला डिब्बा) में पेट्रोल भरवाने पर भी रोक लगा दी गई है.

साइबेरिया के एक मेयर ने तो लाइन में घंटों खड़े रहने वाले ड्राइवरों के लिए पोर्टेबल टॉयलेट तक लगवा दिए हैं.

कुछ इलाकों में बस सेवाएँ कम कर दी गई हैं. कूड़ा उठाने का काम भी प्रभावित हुआ है. किसान भी डर रहे हैं कि इस बार की फसल पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

यानी लोगों की चिंता सचमुच बहुत बढ़ गई है और यह परेशानी पूरे देश में महसूस की जा रही है.

लेकिन सवाल यह है कि क्या तुर्की की राजधानी अंकारा में बैठक कर रहे नेटो के नेता यह मान सकते हैं कि इस आर्थिक संकट की वजह से रूस की जनता सरकार पर दबाव बनाएगी?

यूक्रेन की राजधानी कीएव में बैठे रणनीतिकारों को यही उम्मीद है. उनका मानना है कि अगर आम रूसी लोग इस परेशानी से बहुत ज़्यादा तंग आ गए, तो वे अपने राष्ट्रपति से युद्ध खत्म करने की मांग कर सकते हैं.

रूसी सरकार इस पूरे मामले पर पूरी नज़र बनाए हुए है.

राष्ट्रपति पुतिन ने भी सरकारी टीवी पर खुद पेट्रोल-डीज़ल की कमी पर बात की.

उन्होंने कहा कि यूक्रेन के हमले "साफ तौर पर दिक्कतें पैदा कर रहे हैं", लेकिन साथ ही यह भी कहा कि "स्थिति गंभीर नहीं है."

फिर भी सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. इसलिए उसने दूसरे देशों से ज़्यादा ईंधन मंगाना शुरू कर दिया है, पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर सब्सिडी दे रही है और कम गुणवत्ता वाले ईंधन की बिक्री की भी अनुमति दे दी है.

हालांकि कुछ लोगों को डर है कि इससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं.

पुतिन और उनके सलाहकार यह भी जानते हैं कि इस ईंधन संकट का असर लोगों की सोच और सरकार के प्रति उनके भरोसे पर पड़ रहा है.

स्वतंत्र संस्था लेवाडा सेंटर के ताज़ा सर्वे के मुताबिक, पुतिन की लोकप्रियता घटकर लगभग 74 फ़ीसदी रह गई है.

सर्वे में यह भी सामने आया कि अब सिर्फ 52 फ़ीसदी रूसी लोगों को लगता है कि देश सही दिशा में जा रहा है. मई में यह आंकड़ा 61 फ़ीसदी था.

दूसरी संस्था गैलप ने पिछले हफ्ते बताया कि पिछले 20 सालों में पहली बार रूसी लोग अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर इतने निराश दिखाई दे रहे हैं. सर्वे में 60 फ़सदी लोगों ने कहा कि उनके इलाके की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.

साथ ही रूस की सरकारी सर्वे एजेंसी 'वीसीओम' के मुताबिक, एक हफ्ते में पुतिन पर लोगों का भरोसा 3.4 फ़ीसदी कम होकर 73 फ़ीसदी रह गया.

क्षेत्रीय सलाहकार कंपनी मैक्रो एडवाइज़री के प्रमुख क्रिस्टोफर वीफर का कहना है कि यह ईंधन संकट रूस की अर्थव्यवस्था के लिए "टर्निंग पॉइंट" साबित हो सकता है.

उनके मुताबिक,"युद्ध की कीमत लगातार बढ़ रही है. ईंधन संकट का पूरा असर जुलाई के आँकड़ों में दिखाई देगा, लेकिन अब यह साफ है कि अगर यह संकट लंबे समय तक चला, तो इस साल के बाकी महीनों में रूस की आर्थिक विकास दर पर बड़ा असर पड़ेगा."

लेकिन क्या यह सब मिलकर रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर पर इतना राजनीतिक दबाव बना पाएगा कि वह अपनी नीति बदल दे?

न्यूयॉर्क की द न्यू स्कूल में अंतरराष्ट्रीय मामलों की प्रोफेसर नीना ख्रुश्चेवा ने बीबीसी से कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पुतिन दबाव में झुकेंगे.

उन्होंने कहा,"जितना ज़्यादा दबाव पुतिन पर पड़ेगा, उतनी ही ज़्यादा संभावना है कि वे और सख्त और आक्रामक कदम उठाएँगे. मामला गंभीर ज़रूर है, लेकिन यह उम्मीद करना कि रूसी जनता सरकार को गिरा देगी, हकीकत से बहुत दूर की बात है."

उन्होंने आगे कहा कि रूस के लोग गुस्से और परेशानी तो महसूस कर रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने हालात को काफी हद तक स्वीकार भी कर लिया है.

उनके मुताबिक, यूरोप की यह उम्मीद सिर्फ एक कल्पना है कि, रूस के आम लोग पुतिन को मजबूर कर देंगे कि वो शांति वार्ता करें.

उधर, जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे लगता है कि पुतिन पीछे हटने के बजाय और ज़्यादा आक्रामक रुख अपना रहे हैं.

इसके बाद पुतिन ने अपने सैन्य अधिकारियों से कहा कि वे इस बात का विश्लेषण करें कि यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगी युद्ध में किस तरह सीधे शामिल हो रहे हैं. उनका दावा है कि यही देश इस युद्ध को और लंबा खींच रहे हैं.

उन्होंने कहा,"भविष्य में ज़िम्मेदारी से फैसले लेने के लिए हमें इस पूरे मामले का विश्लेषण चाहिए."

हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे आगे क्या कदम उठा सकते हैं.

लेकिन उनकी इस बात ने दुनिया के राजनयिक और सैन्य विशेषज्ञों की चिंता ज़रूर बढ़ा दी है.

अब पश्चिमी देशों की राजधानियों में सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है, क्या पुतिन अब युद्ध को और आगे बढ़ाएँगे? अगर हाँ, तो किस तरह?

Bundan Sonra Ne Olabilir?

Yapay zekâ öngörüsü — kesinlik taşımaz

  • ईंधन संकट के कारण रूस की आर्थिक विकास दर पर असर पड़ेगा.

    Muhtemel · Aylar içinde

  • पुतिन दबाव में झुकने के बजाय और सख्त कदम उठा सकते हैं.

    Muhtemel · Haftalar içinde

Açık Sorular

  • क्या पुतिन दबाव में नीति बदलेंगे?
  • युद्ध कब और कैसे खत्म होगा?
  • ईंधन संकट का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा?

İlgili Konular

Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

İlgili Haberler

अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी फटा, 1883 की तबाही की यादें ताज़ा
Gelişiyor·56 dk önce

अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी फटा, 1883 की तबाही की यादें ताज़ा

इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी में हाल ही में हुए विस्फोटों ने 1883 की विनाशकारी क्राकाटोआ त्रासदी की यादें ताज़ा कर दी हैं, जिसने हज़ारों जानें ली थीं और वैश्विक तापमान को प्रभावित किया था।

BBC हिंदी
Bu konuda daha fazlaरूस