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Geriरेप के अभियुक्त की बेल पर रिहाई के बाद समर्थकों ने जेल के गेट पर किया स्वागत, वीडियो वायरल
रेप के अभियुक्त की बेल पर रिहाई के बाद समर्थकों ने जेल के गेट पर किया स्वागत, वीडियो वायरल
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BBC हिंदी23.05.2026Crime5 dk okumaIndia

रेप के अभियुक्त की बेल पर रिहाई के बाद समर्थकों ने जेल के गेट पर किया स्वागत, वीडियो वायरल

Hızlı Bakış

गाजियाबाद में रेप के आरोपी सुशील प्रजापति की जेल से रिहाई के बाद समर्थकों ने फूल माला पहनाकर और नारेबाज़ी कर स्वागत किया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सुशील और उसके समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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Author, मृदुलिका झा

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 42 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद ज़िले में रेप के एक अभियुक्त की बेल पर रिहाई के बाद समर्थकों ने जेल के गेट पर ही उसका स्वागत शुरू कर दिया.

इसका वीडियो वायरल है. आरोप है कि अभियुक्त सुशील प्रजापति के डासना जेल से बाहर निकलते ही लोगों ने उसे फूल माला पहनाई और नारेबाज़ी करते हुए गाड़ियों का काफ़िला मुरादनगर में उसके घर तक गया.

वीडियो में कई लोग, अभियुक्त का किसी सेलिब्रिटी की तरह स्वागत करते दिख रहे हैं.

वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

सुशील प्रजापति पर एलएलबी की एक छात्रा के साथ बलात्कार का आरोप है.

आठ अगस्त 2025 को ग़ाज़ियाबाद की रहने वाली एक लॉ की छात्रा ने मुरादनगर थाने में सुशील के ख़िलाफ़ बलात्कार का मुक़दमा दर्ज कराया था.

बीबीसी के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के अनुसार, सर्वाइवर की मुलाक़ात अभियुक्त सुशील से नवंबर 2021 में हुई थी.

क्या है मामला

अभियुक्त ने मेरठ में रह रही छात्रा को ग़ाज़ियाबाद कोर्ट में चेंबर दिलाने का वादा किया था.

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एफ़आईआर के मुताबिक़, वकील से मिलवाने का वादा कर अभियुक्त, छात्रा को अपने साथ एक फ्लैट में ले गया. वहां कोल्ड ड्रिंक में नशा मिलाकर उसे पिलाया और बलात्कार किया.

अभियुक्त पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत, धारा 65 यानी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध, 123 यानी नशीला पदार्थ देना और 351 (3) यानी धमकी की धाराएं लगाई गईं.

मुरादनगर पुलिस ने इसी साल 11 अगस्त को सुशील प्रजापति को गिरफ़्तार कर डासना जेल भेज दिया. लगभग नौ महीने बाद 17 मई को अभियुक्त की ज़मानत पर रिहाई तो हुई लेकिन दोबारा नए मामले में एफ़आईआर हो गई.

दरअसल, अभियुक्त के समर्थक रिहाई वाले दिन जेल के दरवाजे पर पहुंच गए और फूल मालाएं पहनाकर उसका स्वागत किया.

वायरल वीडियो में सुशील प्रजापति को समर्थकों के कंधों पर बैठे और फूलमालाएं पहने हुए देखा जा सकता है.

जेल के मुख्य गेट के पास से जुलूस शुरू हुआ. गाड़ियों का काफ़िला एक तरह से शक्ति प्रदर्शन करते हुए मुरादनगर तक गया.

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इसके बाद पुलिस ने संज्ञान लेते हुए सुशील और उसके लगभग दर्जन भर समर्थकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया.

बीबीसी के पास ताज़ा एफआईआर की जो कॉपी है, उसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की दो धाराएं लगाई गई हैं, धारा 285 और 281.

बीएनएस की धारा 281 सार्वजनिक रोड पर लापरवाही से वाहन चलाने और धारा 285 सार्वजनिक रास्ते में बाधा या ख़तरा पैदा करने से संबंधित है

एफ़आईआर में लिखा है कि सुशील प्रजापति का उनके समर्थकों ने जेल के बाहर स्वागत किया. इससे सड़क पर आने-जाने वालों को काफ़ी मुश्किल हुई.

एफ़आईआर के मुताबिक़, अभियुक्त और उसके अज्ञात साथी सड़क पर लापरवाही से गाड़ियां चलाते हुए मुरादनगर की तरफ़ गए, जिससे आम लोगों के जीवन को ख़तरा हो सकता था.

डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "पुलिस की जानकारी में आते ही तुरंत एफ़आईआर दर्ज हुई. अब क़ानूनी कार्रवाई जारी है. दोषी पाए जाने पर सबको सख़्त सजा मिलेगी."

इस सवाल पर कि क्या जेल के सामने पुलिस व्यवस्था नहीं थी, अगर हां तो इस भीड़ भाड़ पर उसी वक्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

इस पर डीसीपी ग्रामीण ने कहा कि पुलिस एक्टिव थी, तभी मामला संज्ञान में आते ही जल्द से जल्द मुक़दमा दर्ज हुआ. उस वक्त क्या-कैसे हुआ, इस बारे में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.

नई एफ़आईआर में शिकायतकर्ता खुद जेल चौकी प्रभारी हैं. चौकी इंचार्ज प्रदीप कुमार के मुताबिक़, अभियुक्त समेत बाकियों ने जेल के गेट से कुछ दूर जाकर स्वागत किया और वीडियो बनाई.

उन्होंने कहा कि चौकी वहां से कुछ सौ मीटर की दूरी पर है. घटना का पता चलते ही पुलिस ने खुद रिपोर्ट लिखी.

सर्वाइवर ने क्या कहा?

बीबीसी हिन्दी से बातचीत में सर्वाइवर ने बताया, "सब कुछ साफ़ है. रेप के मामले में नौ महीने जेल काट चुका अभियुक्त बेल पर छूटा, तो उसका स्वागत हुआ."

उन्होंने कहा, "ऐसा मामला न सिर्फ़ ग़लत करने वालों को ताक़त देगा, बल्कि किसी भी सर्वाइवर की हिम्मत तोड़ सकता है."

उन्होंने कहा, "मैंने धमकियों के बाद भी रिपोर्ट लिखवाई. अभियुक्त ने पहले भी ज़मानत की अर्जी लगाई थी, जो ग़ाज़ियाबाद कोर्ट में ख़ारिज हो गई."

"इसके बाद वो हाई कोर्ट तक चला गया. अब मैं इस बेल को भी चुनौती देने की तैयारी कर रही हूं."

संगठन ने झाड़ा पल्ला

अभियुक्त को हिंदू युवा वाहिनी की एक इकाई का पूर्व नगर अध्यक्ष बताया जा रहा है. बीबीसी ने इस मामले पर संगठन के एक पदाधिकारी से भी बात की.

हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिलाध्यक्ष जितेंद्र त्यागी ने कहा, "सुशील प्रजापति कुछ साल पहले संगठन का नगर अध्यक्ष रह चुका है, लेकिन कार्यकाल पूरा होते ही उसे हटा दिया गया."

सुशील प्रजापति पर रेप के आरोप पर उन्होंने कहा, "संगठन में हज़ारों लोग थे. हम किस-किसकी ख़बर रखेंगे. वैसे भी हम लड़की के साथ हैं. उस शख़्स से हमारा कोई संबंध नहीं. इसके अलावा अगस्त 2022 में ही हिंदू युवा वाहिनी की सारी यूनिट्स बंद हो चुकी हैं."

बलात्कार के आरोप में लगभग नौ महीने जेल में रह चुके और हाल में बेल पर छूटे अभियुक्त के परिवार से भी बीबीसी ने बात करने की कोशिश की.

सुशील के बड़े भाई पुष्पेंद्र कुमार ने कहा, "रिहाई वाले दिन घर से दो गाड़ियां डासना गई थीं, जिसमें सिर्फ़ परिवार के लोग थे."

वे कहते हैं, "जेल के सामने सड़क काफ़ी संकरी है. ज़्यादा गाड़ियों और भीड़भाड़ की वजह से लगा कि सारे लोग हमारे साथ हैं. हां, ये बात ज़रूर है कि बच्चों ने सुशील को माला पहना दी थी. यही एक नादानी हो गई. उसपर हम शर्मिंदा भी हैं."

पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले

यह पहली बार नहीं है कि यौन अपराधों के अभियुक्तों या दोषियों का इस तरह स्वागत देखा गया है.

कर्नाटक के हावेरी ज़िले में जनवरी 2024 में एक युवती के साथ गैंग रेप हुआ था. मुख्य अभियुक्तों को मई 2025 में हावेरी सेशन कोर्ट से बेल मिलते ही समर्थकों ने गाड़ियों के काफ़िले के साथ जुलूस निकाला, जिसमें कुछ अभियुक्त विक्ट्री साइन दिखा रहे थे.

मामला के तूल पकड़ने पर पुलिस ने बेल की शर्तें तोड़ने का मामला दर्ज करते हुए उन्हें दोबारा जेल भेज दिया.

वहीं जम्मू के कठुआ जिले में ख़ानाबदोश समुदाय की एक बच्ची के बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी.

इस मामले में भी शुरुआत में अभियुक्तों के समर्थन में जम्मू में रैलियां और प्रदर्शन हुए थे.

अगस्त 2022 में तत्कालीन गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो गैंगरेप मामले के 11 दोषियों को सजा में छूट देते हुए समय से पहले रिहा कर दिया था.

तब गोधरा सेंट्रल जेल के बाहर उनका फूल-मालाओं और मिठाइयों से स्वागत हुआ था. वह वीडियो भी वायरल हुआ, जिस पर देश भर में आक्रोश दिखा था.

वो कहती हैं, "अव्वल तो सर्वाइवर डर और शर्मिंदगी से रिपोर्ट दर्ज ही नहीं कराना चाहती. हिम्मत करके वो ऐसा करे तो उसे समाज का सहयोग मिलना चाहिए, लेकिन इसकी बजाए अभियुक्त या दोषी का ही स्वागत जैसी बातें हों, तो उसका हौसला टूट सकता है."

उषा विश्वकर्मा के मुताबिक, ऐसे उदाहरण से आपराधिक सोच वालों को बल मिलेगा क्योंकि रेप जैसे गंभीर आरोप के बाद भी समाज और परिवार उनके साथ दिख रहा है.

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