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शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में 9 में से सिर्फ़ 3 सांसद पहुंचे, संजय राउत बोले- 'शिंदे को बेईमानी महंगी पड़ेगी'
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BBC हिंदी18.06.2026Siyaset7 dk okumaIndia

शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में 9 में से सिर्फ़ 3 सांसद पहुंचे, संजय राउत बोले- 'शिंदे को बेईमानी महंगी पड़ेगी'

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शिवसेना (यूबीटी) की दिल्ली में सांसदों की बैठक में 9 में से केवल 3 सांसद पहुंचे। पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने अनुपस्थित 6 सांसदों को व्हिप का उल्लंघन करने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने और उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। राउत ने एकनाथ शिंदे पर बेईमानी का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी ने महाराष्ट्र की राजनीति में गंदगी फैलाई है।

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शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दिल्ली में संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय में सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें कुल नौ में से तीन सांसद ही शामिल हुए. छह सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए.

बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे मौजूद रहे. इनके साथ पार्टी के इकलौते राज्यसभा सांसद संजय राउत भी शामिल हुए.

पार्टी में टूट की चर्चाओं के बीच बुलाई गई इस बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, "जो सांसद इस बैठक में नहीं पहुंचे वो पार्टी व्हिप का उल्लंघन है. उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा. हम चाहेंगे कि उनकी सदस्यता रद्द हो."

उन्होंने आगे कहा, "ये जो 6 सांसद नहीं आए हैं मीटिंग में, उनके क्षेत्र के लोग ग़ुस्से में हैं. वो सड़कों पर उतरे हैं. इस बार की बेईमानी एकनाथ शिंदे को भी और इन पांच-छह गद्दारों को भी बहुत महंगी पड़ेगी."

संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "बीजेपी ने भारतीय राजनीति में जो गंदगी फैलाई है, ख़ासकर महाराष्ट्र में, तो उनको भी क़ीमत चुकानी पड़ेगी."

दिल्ली में हुई इस बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे मौजूद रहे. इनके साथ पार्टी के इकलौते राज्यसभा सांसद संजय राउत भी शामिल हुए.

पार्टी में टूट की चर्चा

कुछ दिनों से ख़बरें आ रही हैं कि शिवसेना के 9 में से 6 से 7 सांसद या तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले हैं या अलग गुट बना सकते हैं.

इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के दक्षिण मुंबई से सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है और माना जा रहा है कि इस पत्र से 'सांसदों की टूट' की ख़बरों को बल मिला है.

14 जून यानी रविवार को उद्धव ठाकरे ने अपने आवास 'मातोश्री' पर पार्टी के सांसदों की बैठक बुलाई थी. हालांकि, इस बैठक में पांच सांसद व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रहे और उन्होंने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई थी. तभी से वास्तव में 'सांसदों की टूट' की चर्चाएं शुरू हो गई थीं.

इनमें यवतमाल के सांसद संजय देशमुख, परभणी के सांसद संजय जाधव, हिंगोली के सांसद नागेश पाटील, शिर्डी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे और धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं थे.

वहीं, दक्षिण मुंबई के सांसद अरविंद सावंत, दक्षिण-मध्य मुंबई के सांसद अनिल देसाई, उत्तर-पूर्व मुंबई के सांसद संजय दीना पाटिल और नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे बैठक में मौजूद थे.

इसके बाद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई ने पत्र जारी कर पार्टी के सभी सांसदों की बैठक बुलाई जो 18 जून, गुरुवार को हुई. इस पत्र के जरिए सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी जिसमें सिर्फ़ तीन सांसद पहुंचे.

संजय राउत की पोस्ट

16 जून दोपहर के बाद अचानक शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के टूटने की ख़बरों ने जोर पकड़ लिया. इसके बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. कितने सांसद टूटेंगे, कौन टूटेगा, इस तरह की ख़बरें मीडिया में आने लगीं.

इसके बाद रात क़रीब 11 बजे सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की, जिससे इन ख़बरों को कुछ हद तक और बल मिला.

संजय राउत ने कहा, "अपना सपना मनी..मनी! महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज रात हर एक सांसद को 15 करोड़ रुपये का एडवांस दिया जा रहा है. यह जानकारी चौंकाने वाली और घृणित है!"

संजय राउत की सोशल मीडिया पोस्ट पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने जवाब देते हुए कहा, "सिर्फ 15 करोड़? इतनी सस्ती कीमत पर क्यों जा रहे हैं? हमारी पार्टी के (बागी नेताओं) को 4 करोड़ रुपये मिले थे और अगले 36 महीने के कार्यकाल में हर महीने 1 करोड़ रुपये मिलने वाले हैं. हनी प्लस मनी."

तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने गए 28 में से 20 सांसदों ने हाल ही में बगावत की है. महुआ मोइत्रा ने इसी संदर्भ में यह ट्वीट किया.

महुआ मोइत्रा के इस जवाब पर संजय राउत ने 17 जून सुबह रिप्लाई दिया. इसमें उन्होंने कहा, "अपना सपना मनी मनी! नहीं नहीं, महुआ जी, प्रत्येक सांसद की न्यूनतम आधार कीमत 50 करोड़ रुपये (पचास खोके) तय हुई है. 15 करोड़ रुपये सिर्फ एडवांस हैं."

उन्होंने आगे कहा, "उनकी कीमत बढ़ गई है, क्योंकि शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस ब्रांड लेबल हैं."

अरविंद सावंत का लोकसभा अध्यक्ष को पत्र

शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष को आधिकारिक पत्र सौंपा है. इसमें पार्टी ने मांग की है कि शिवसेना (यूबीटी) को ही संसद में एकमात्र आधिकारिक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाती रहे.

किसी भी अलग गुट, बागी गुट या स्वतंत्र समूह को कोई पहचान, दर्जा, सुविधा या विशेषाधिकार न दिया जाए, ऐसी मांग की गई है.

ऐसी किसी भी मांग पर फैसला लेने से पहले उद्धव ठाकरे गुट को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए, ऐसा भी पत्र में कहा गया है.

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत उपलब्ध प्रावधानों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखती है.

यह पत्र शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल के नेता और सांसद अरविंद सावंत ने भेजा है.

इससे पहले, 16 जून की सुबह अरविंद सावंत ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, "ऑपरेशन करने के लिए टाइगर के पास दांत तो होने चाहिए. देश के सामने मौजूद कई समस्याओं पर बात करने के बजाय गोदी मीडिया सिर्फ दंतहीन तथाकथित बाघ कहलाने वालों की चर्चा कर रहा है. लोकतंत्र पर हो रहा हमला इससे कहीं अधिक गंभीर विषय है."

सुषमा अंधारे ने क्या कहा?

उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे ने कहा है कि यह बगावत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के रास्ते में बाधा डालने के लिए कराई जा रही है.

उन्होंने कहा, "देवेंद्र फडणवीस की दिल्ली जाने की महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है. देवेंद्र फडणवीस दिल्ली न पहुंचें, इसके लिए फडणवीस की ही पार्टी के दिल्ली के नेता दिल्ली से नऱ्हे तक लंबा स्पीडब्रेकर लगाने की तैयारी में हैं. ऐसे में फडणवीस जी, आप कैसे बचेंगे?

"यह ठाकरे के नेतृत्व का सवाल नहीं है. टीएमसी और आप भी टूट चुके हैं. यह सभी पार्टियों के साथ हो रहा है, क्योंकि परिसीमन विधेयक के बाद भाजपा बदले की भावना से भरी हुई है. वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. ऐसे में देवेंद्र जी, आपकी महत्वाकांक्षा का क्या होगा? हमारी चिंता छोड़ दीजिए. हमने पहले ही सत्ता के बिना रहने का फैसला कर लिया है. हमने संघर्ष का रास्ता चुना और नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ नौ सांसद और 20 विधायक चुनकर लाए. असली किसान तो बोता ही रहता है. जिनके पास वह कला नहीं होती, वे चोरी करते हैं. अब आप सोचिए कि आपका क्या होने वाला है?"

शिंदे की शिवसेना के सांसद नरेश म्हस्के ने क्या कहा?

एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसद नरेश म्हस्के ने कहा, "उद्धव ठाकरे गुट के सांसद उद्धव ठाकरे से नाराज हैं. सिर्फ सांसद ही क्यों, उनके विधायक और नगरसेवक भी नाराज हैं. हर कार्यकर्ता नाराज है. सभी उन्हें छोड़कर जा रहे हैं. इसकी वजह हमसे पूछने के बजाय उन्हें खुद तलाशनी चाहिए थी. उन्होंने बालासाहेब के हिंदुत्व के विचारों को छोड़ दिया. उन्होंने कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया."

"शिवसेना की विचारधारा हिंदुत्व की है और वह कभी भी कांग्रेस के साथ नहीं जाएगी. इसलिए अगर एकनाथ शिंदे हिंदुत्व की विचारधारा पर काम कर रहे हैं, 24 घंटे काम कर रहे हैं, हर कार्यकर्ता के लिए काम कर रहे हैं और लोग हमारे साथ आ रहे हैं, तो इसमें हमारी क्या गलती है?"

'ऑपरेशन टाइगर'

पिछले कुछ दिनों से 'ऑपरेशन टाइगर' शब्द मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नौ सांसदों में से सात सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं. दावा किया जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होंगे.

इसी को लेकर सांसद संजय राउत से 'ऑपरेशन टाइगर' पर सवाल पूछा गया. उन्होंने अपने अंदाज में इस चर्चा को खारिज कर दिया.

लेकिन अगले 48 घंटों में ही सांसद संजय राउत के बयान में भी बदलाव देखने को मिला.

16 जून को दिल्ली दौरे पर गए संजय राउत से इस मुद्दे पर फिर सवाल पूछा गया. उन्होंने कहा, "शिवसेना में पहले भी ऐसा हो चुका है. इसके बावजूद पार्टी खड़ी है. हमारी पार्टी को संघर्ष का बड़ा अनुभव है. पिछले 60 वर्षों में हमने ऐसे कई झटके देखे हैं. हमारी पार्टी सिर्फ सांसदों और विधायकों की पार्टी नहीं है. यह एक कैडर आधारित पार्टी है. सांसद और विधायक आते-जाते रहते हैं. हमारी पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है."

क्या सात सांसद जा सकते हैं? इस पर उन्होंने कहा, "हमारे सामने ऐसी कोई जानकारी या घटनाक्रम नहीं आया है. हमारे भी दिन आएंगे."

इससे पहले संजय राउत ने कहा था कि कोई भी सांसद कहीं नहीं जा रहा है. दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी की बैठक में सांसदों ने शपथ तक ली थी. उन्होंने कहा, "हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है. उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए थे. कुछ सांसद ऑनलाइन मौजूद थे. इनमें से कुछ सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर विश्वास जताया. किसी ने भगवान की कसम खाई, किसी ने साईंबाबा की कसम खाई, किसी ने अपने बेटे की कसम खाई और अंत तक पार्टी के साथ रहने की बात कही."

एकनाथ शिंदे की शिवसेना की प्रतिक्रिया?

एकनाथ शिंदे की शिवसेना के वरिष्ठ नेता कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि 'ऑपरेशन टाइगर' अंतिम चरण में है. इतना ही नहीं, उनके दावे के अनुसार 16 विधायक और 7 सांसदों के दल बदल को लेकर अंतिम बातचीत पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ पार्टी में शामिल होने की तारीख तय होना बाकी है. कृपाल तुमाने ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे गुट के 16 विधायकों का 'ऑपरेशन टाइगर' मानसून सत्र के बाद होगा.

उदय सामंत ने कहा, "कितने सांसद बैठक में मौजूद थे और कितने नहीं, यह हमें मीडिया के जरिए पता चल रहा है. मुझे नहीं लगता कि शिवसेना को सांसद तोड़ने की जरूरत है. यूबीटी के सांसदों के संबंध में हमारा किसी से कोई संपर्क नहीं हुआ है. 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर जैसा माहौल बनाया जा रहा है, वैसी यूबीटी के सांसदों की कोई बैठक नहीं हुई है. जब मैं शिर्डी में था, तब सांसद वाकचौरे मेरे बगल में थे. मेरी उनसे कोई मुलाकात नहीं हुई. एकनाथ शिंदे ने भी यूबीटी के किसी सांसद से मुलाकात नहीं की है."

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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