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Geriबांग्लादेशी महिला से शादी: गुजरात में परिवार पर निर्वासन का ख़तरा
बांग्लादेशी महिला से शादी: गुजरात में परिवार पर निर्वासन का ख़तरा
Gelişiyor
BBC हिंदी30.06.2026Law5 dk okumaIndia

बांग्लादेशी महिला से शादी: गुजरात में परिवार पर निर्वासन का ख़तरा

Hızlı Bakış

गुजरात के आणंद ज़िले में तरुण पटेल की बांग्लादेशी पत्नी काजल पर 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' के तहत अवैध रूप से रहने का आरोप है. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है, जिससे परिवार सदमे में है. तरुण भारतीय नागरिकता और निर्वासन रोकने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.

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कहा जाता है कि प्यार की कोई सरहद नहीं होती. लेकिन गुजरात में आणंद ज़िले के लांभवेल के रहने वाले तरुण पटेल के लिए अब 'सरहद' ही सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है.

बांग्लादेश की एक महिला से शादी कर घर बसाने वाले तरुण आज अपने परिवार को बिखरने से बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं.

क़रीब एक दशक पुरानी सीमापार हुई यह शादी अब परिवार के लिए एक क़ानूनी मुश्किल बन गई है.

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि उन्हें पता चला था कि बांग्लादेशी महिला भारत में ग़ैरक़ानूनी रूप से रह रही थी. इसके बाद अब उन पर निर्वासन का ख़तरा मंडरा रहा है.

गुजरात पुलिस के 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' से पहले तक सब कुछ सामान्य था लेकिन इस अभियान ने अचानक परिवार की ज़िंदगी बदल दी.

अब तरुण का एकमात्र मक़सद यह सुनिश्चित करना है कि उनके बच्चों को मां का साथ न खोना पड़े.

फ़ोन कॉल

तरुण को 2 जून का वह दिन आज भी याद है, जब पुलिस उनके घर पहुंची. इसकी वजह एक साधारण फ़ोन कॉल थी.

वह बताते हैं, "काजल की मां बांग्लादेश में रहती हैं. वहां की अस्थिर स्थिति के कारण वो अपनी मां को लेकर चिंतित थी. उन्होंने अपनी मां का हालचाल जानने के लिए फ़ोन किया था. उसी कॉल को ट्रेस किया गया और फिर पुलिस मेरे घर पहुंच गई."

तरुण का कहना है, "पुलिस ने उनका फ़ोन चेक किया और उसमें सेव 'काजोल्स मॉम' नंबर देखकर पूछा कि यह किसका नंबर है. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी बांग्लादेशी हैं और यह कॉल उनकी मां को की गई थी. इसके बाद काजल से पूछताछ की गई, उन्हें पुलिस थाने ले जाया गया और हिरासत में रखा गया."

पुलिस का कहना था कि उनके पास कोई वैध दस्तावेज़ नहीं है, न पासपोर्ट और न ही शादी के पंजीकरण का कोई प्रमाण, इसलिए उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्या काजल नियमित रूप से बांग्लादेश में अपने परिवार से संपर्क में रहती थीं?

इस सवाल के जवाब में तरुण पटेल ने कहा, "काजल कभी-कभी अपनी मां से बात करती थी. जिस फ़ोन कॉल को ट्रेस किया गया, वह उस समय की थी जब उनकी मां की सर्जरी हुई थी. बांग्लादेश में हालात अस्थिर थे और मां भी बीमार थीं, इसलिए काजल बहुत चिंतित थी."

"वह रोने लगी और मुझसे कहने लगी कि उसे अपनी मां से बात करनी है. इसलिए मैंने अपने मोबाइल फ़ोन से उसके लिए एक आईएसडी कॉल की. बातचीत के दौरान उन्होंने सिर्फ़ इतना पूछा, 'मां, आप कैसी हैं? आपकी तबीयत कैसी है? कोई गंभीर बात तो नहीं हुई?'"

"बस इतना ही. उसी एक कॉल को ट्रेस किया गया. उसने कभी किसी ग़लत जगह फ़ोन नहीं किया."

आणंद के पुलिस अधीक्षक जीजी जसानी ने बीबीसी गुजराती के नचिकेत मेहता से कहा, "यह साबित हो चुका है कि काजल गुजरात में ग़ैरक़ानूनी रूप से रह रही हैं. जब वह बांग्लादेश से गुजरात आई थीं, तब उनके पास न तो पासपोर्ट था और न ही शादी के पंजीकरण का कोई प्रमाण."

फ़ेसबुक पर दोस्ती से प्यार और फिर शादी तक

साल 2012 में बांग्लादेश के गोपालपुर गांव की रहने वाली 'काजुली' की मुलाक़ात फ़ेसबुक पर तरुण से हुई. दोस्ती प्यार में बदल गई और दोनों ने शादी करने का फ़ैसला किया.

तरुण ने उन्हें पासपोर्ट बनवाकर गुजरात आने को कहा. लेकिन उनके परिवार वाले बांग्लादेशी युवक से शादी करने का दबाव बना रहे थे.

काजुली ने पासपोर्ट बनवाने के लिए एक एजेंट को 12-13 हज़ार रुपये दिए, लेकिन उनके साथ धोखाधड़ी हो गई.

पारिवारिक दबाव के चलते वह बांग्लादेश से भागकर पहले कोलकाता पहुंचीं और वहां से आणंद पहुंच गईं. इसके बाद दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद काजुली ने अपना नाम बदलकर 'काजल' रख लिया.

हालांकि, दस्तावेज़ों के अभाव में उनकी शादी का कभी क़ानूनी पंजीकरण नहीं हो सका.

तरुण कहते हैं, "हमने कभी नहीं सोचा था कि आगे चलकर यह समस्या बन जाएगी. उन परिस्थितियों में वह कोई दस्तावेज़ नहीं ला सकी थी."

मूल रूप से मुस्लिम काजल ने शादी के बाद हिंदू धर्म अपना लिया. तरुण को डर है कि अगर उन्हें बांग्लादेश भेजा गया, तो परिवार उन्हें स्वीकार नहीं करेगा.

सदमे में परिवार

काजल को हिरासत में लिए जाने के बाद से तरुण और उनका परिवार सदमे में है. फ़िलहाल काजल को आणंद स्थित महिला संरक्षण गृह में रखा गया है.

तरुण कहते हैं, "मेरे बच्चे हर दिन रोते हैं और पूछते हैं कि उनकी मां कब लौटेगी. मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है. अगर उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया, तो हमारा परिवार बिखर जाएगा."

काजल की सास इंदुबेन कहती हैं, "काजल के जाने के बाद हममें से कोई भी ठीक से खाना नहीं खा पा रहा है. बच्चे लगातार रोते रहते हैं. काजल मेरे लिए सिर्फ़ बहू नहीं, बल्कि बेटी जैसी थी."

"जो हुआ, वह ग़लत हुआ. काजल के जाने के बाद घर में कोई एक निवाला भी ठीक से नहीं खा पा रहा. बच्चे लगातार रोते रहते हैं. उनकी हालत देखकर मेरा भी दिल भर आता है. काजल के बिना पूरा घर सूना लगता है. मैं बस यही दुआ करती हूं कि वह वापस घर आ जाए."

बीबीसी गुजराती से बातचीत में जागृति महिला संगठन की अध्यक्ष आशा दलाल ने कहा, "काजल लगातार मानसिक तनाव में रहती हैं और अक्सर रोती रहती हैं. उन्हें हर समय अपने परिवार, ख़ासतौर पर अपने दोनों बेटों की याद आती रहती है. उसका सबसे बड़ा डर यह है कि अगर उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया, तो वह शायद कभी भारत वापस नहीं आ पाएंगी."

"अधिकारियों की अनुमति मिलने पर हम कभी-कभी उन्हें दूर से अपने बच्चों को देखने की इजाज़त देते हैं. इससे उन्हें थोड़ा सुकून मिलता है."

"लेकिन वह अब भी उदास रहती है. हम उसे लगातार समझाने और शांत करने की कोशिश करते हैं, लेकिन आख़िर वह भी इंसान है और कई बार अपनी भावनाओं पर क़ाबू नहीं रख पातीं."

आशा दलाल ने कहा, "आश्रय गृह में वह सभी लोगों से घुल-मिलकर रहती हैं और दूसरों की मदद भी करती हैं. फ़िलहाल हम काजल का पूरा ध्यान रख रहे हैं. आगे की कार्रवाई सरकार और अदालत के निर्देशों के अनुसार की जाएगी."

क़ानूनी लड़ाई

इस समय तरुण का सिर्फ़ एक ही मक़सद है, किसी भी क़ीमत पर काजल को बांग्लादेश वापस भेजे जाने से रोकना.

इसके लिए वह हर स्तर पर गुहार लगा रहे हैं और हाई कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटा चुके हैं.

उनकी वकील ज़ैनब सैयद ने बीबीसी न्यूज़ गुजराती से कहा, "हम अदालत में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देंगे, ताकि काजल को भारतीय नागरिकता मिल सके. संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है."

"यह अधिकार भारत में रहने वाले हर व्यक्ति पर लागू होता है, सिर्फ़ भारतीय नागरिकों पर नहीं. इसलिए हम इन बिंदुओं को अदालत के सामने रखेंगे."

ज़ैनब ने आगे कहा, "अगर कोई व्यक्ति किसी भारतीय नागरिक से शादी करता है और कई वर्षों तक उसके साथ रहता है, तो परिस्थितियों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए वह नागरिकता के लिए पात्र हो सकता है."

"हमारी कोशिश होगी कि काजल को बांग्लादेश वापस न भेजा जाए और उसे भारतीय नागरिकता मिले."

तरुण ने आणंद से सांसद मितेश पटेल से भी गुहार लगाई है.

बीबीसी गुजराती से बातचीत में पटेल ने कहा, "जब मैं दिल्ली जाऊंगा, तो इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने रखूंगा."

ऑपरेशन डेल्टा हंट

गुजरात सरकार के मुताबिक, "गुजरात की आंतरिक सुरक्षा, शांति और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने" के लिए पुलिस ने 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' नाम से एक व्यापक अभियान शुरू किया है.

अहमदाबाद के चंडोला झील इलाक़े में पुलिस ने एक 'मेगा डिमॉलिशन' अभियान भी चलाया था.

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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