Son Dakika
DE19. Etappe der Tour de France Eine Kneipenschlägerei auf Rädern – und dann kommt der SheriffDEMunich Re übertrifft Gewinnerwartungen im zweiten Quartal deutlichDEDFB verpflichtet Jürgen Klopp: Millionenzahlung an Red Bull und Länderspiele in LeipzigDEJürgen Klopp wird Bundestrainer: Internationale Reaktionen und deutliche WarnungDEBrennerautobahn: Stau durch Blockabfertigung und Klage vor dem EuGHDEMaserninfektionen in den USA auf höchstem Stand seit 35 JahrenDEBlockierte Meerenge: Uno besorgt um isolierte Seeleute in der Straße von HormusDEDrohnenangriffe auf Versandfirma Wildberries Warum die Ukraine das russische Amazon attackiertDETrumps Zölle und der Iran-Krieg treiben US-Lebenshaltungskosten in die HöheDEDeutsche Gesundheitspolitik: Stärkung der ambulanten Versorgung durch paradoxe RegulierungDE19. Etappe der Tour de France Eine Kneipenschlägerei auf Rädern – und dann kommt der SheriffDEMunich Re übertrifft Gewinnerwartungen im zweiten Quartal deutlichDEDFB verpflichtet Jürgen Klopp: Millionenzahlung an Red Bull und Länderspiele in LeipzigDEJürgen Klopp wird Bundestrainer: Internationale Reaktionen und deutliche WarnungDEBrennerautobahn: Stau durch Blockabfertigung und Klage vor dem EuGHDEMaserninfektionen in den USA auf höchstem Stand seit 35 JahrenDEBlockierte Meerenge: Uno besorgt um isolierte Seeleute in der Straße von HormusDEDrohnenangriffe auf Versandfirma Wildberries Warum die Ukraine das russische Amazon attackiertDETrumps Zölle und der Iran-Krieg treiben US-Lebenshaltungskosten in die HöheDEDeutsche Gesundheitspolitik: Stärkung der ambulanten Versorgung durch paradoxe Regulierung
Newsgather
Geriधर्मेंद्र प्रधान: प्रश्नपत्र लीक के विरोध से लेकर इस्तीफ़े की मांग तक का सफ़र
धर्मेंद्र प्रधान: प्रश्नपत्र लीक के विरोध से लेकर इस्तीफ़े की मांग तक का सफ़र
Gelişiyor
BBC हिंदी2 saat önceSiyaset6 dk okumaIndia

धर्मेंद्र प्रधान: प्रश्नपत्र लीक के विरोध से लेकर इस्तीफ़े की मांग तक का सफ़र

Hızlı Bakış

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जो कभी प्रश्नपत्र लीक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए घायल हुए थे, अब नीट परीक्षा लीक को लेकर छात्रों के विरोध और इस्तीफ़े की मांग का सामना कर रहे हैं। यह लेख उनके छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक के राजनीतिक सफ़र और वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।

Yapay zekâ özeti

Neden Önemli?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जो 1997 में प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए घायल हुए थे, अब नीट परीक्षा लीक को लेकर छात्रों के विरोध का सामना कर रहे हैं। यह लेख उनके छात्र राजनीति से केंद्रीय मंत्री बनने तक के सफर और वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करता है।

Yazı boyutu

इसे विडंबना ही कहा जाएगा जो धर्मेंद्र प्रधान कभी खुद प्रश्नपत्र लीक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए पुलिस के डंडे की मार से घायल हुए थे। आज एक और प्रश्नपत्र लीक को लेकर उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे छात्र-छात्राएँ पुलिस के डंडे की मार से ज़ख़्मी हो रहे हैं।

साल 2021 में "द न्यू इंडियन एक्सप्रेस" में छपी एक खबर को मेनस्ट्रीम मीडिया में फिर ख़ूब साझा किया जा रहा है।

इस खबर के अनुसार 1997 में स्वर्गीय जेबी पटनायक की सरकार में ओडिशा में हुए एक प्रश्नपत्र लीक के ख़िलाफ़ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से राज्य सचिवालय के सामने किए गए एक प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान पुलिस लाठी की मार से घायल हुए थे।

प्रधान इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।

इस घटना के 29 साल बाद 20 जुलाई, 2026 को प्रधान के इस्तीफ़े की माँग पर संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारी घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुए।

उस प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले प्रशांत राउत ने बीबीसी से बातचीत करते हुए इस घटना की पुष्टि की।

इस समय भुवनेश्वर के पटिया इलाक़े में स्थित राजा माधवानंद देव (आरएमडी) कॉलेज के अध्यक्ष पद पर कार्यरत राउत ने कहा, "उन दिनों मैं एबीवीपी की भुवनेश्वर शाखा का अध्यक्ष था और धर्मेंद्र प्रधान संगठन के राष्ट्रीय महासचिव। मुझे तारीख़ ठीक से याद नहीं। लेकिन जुलाई 1997 के तीसरे सप्ताह के किसी दिन (शायद 17 या 18 तारीख़) एबीवीपी के सैकड़ों कार्यकर्ता धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में प्लस टू (बारहवीं कक्षा) में हुए प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर रहे थे।"

"सन 1988 से 1997 के बीच लगभग हर साल प्रश्नपत्र लीक हो रहे थे। इसलिए हम उसे डिकेड ऑफ क्वेश्चन लीक (प्रश्नपत्र लीक का दशक) कहा करते थे। प्रदर्शनकारियों को तितर‑बितर करने के लिए रैपिड एक्शन फ़ोर्स (आरएएफ) के जवानों ने हम लोगों पर बेतहाशा डंडे बरसाए, जिसमें हमारे 64 कार्यकर्ता घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती कराए गये। घायलों में मैं और धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे।"

छात्रसंघ चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे प्रधान

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लंबा सियासी सफ़र अस्सी के दशक में छात्र राजनीति से ही शुरू हुआ था।

बचपन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और तालचेर कॉलेज छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए।

बाद में उन्होंने एबीवीपी की ओर से उत्कल यूनिवर्सिटी छात्र यूनियन के अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा, लेकिन तत्कालीन जनता दल छात्र संगठन के नेता और वर्तमान के वरिष्ठ बीजू जनता दल (बीजद) नेता अरुण साहू से हार गए।

असल में उस चुनाव में धर्मेंद्र तीसरे नंबर पर रहे, जबकि कांग्रेस के छात्र संगठन के प्रत्याशी सिंधुज्योति त्रिपाठी दूसरे नंबर पर थे। हालांकि तीनों प्रत्याशियों में वोटों का अंतर बहुत कम था।

प्रधान के छात्र जीवन के बारे में बीबीसी से बात करते हुए सिंधुज्योति त्रिपाठी कहते हैं, "धर्मेंद्र बेहद साधारण छात्र थे। सच पूछा जाए तो अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी की ओर से उनका नाम प्रत्याशी के रूप में घोषित होने से पहले कैंपस में बहुत कम लोग उन्हें जानते। लेकिन उत्कल यूनिवर्सिटी में उन दिनों एबीवीपी का संगठन काफ़ी मज़बूत था, उन्हें अच्छे वोट मिले।"

इस चुनाव में प्रधान को मात देने वाले अरुण साहू बाद में बीजेडी के एक प्रमुख नेता और राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री बने। संयोग से 2019 में उत्कल यूनिवर्सिटी के प्लैटिनम जयंती समारोह के अवसर पर प्रधान और साहू दोनों मंच पर उपस्थित थे।

अपने पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंदी के इस्तीफ़े की मांग के बारे में पूछे जाने पर अरुण साहू ने बीबीसी से कहा, "मेरे नेता और पार्टी के अध्यक्ष नवीन पटनायक स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और मेरी राय उनसे अलग नहीं है।"

प्रधान के राजनैतिक उत्थान के बारे में साहू ने कहा, "आप जानते हैं कि बीजेपी में सभी निर्णय संघ के होते हैं। चूंकि वे लंबे समय तक संघ से जुड़े रहे और वह भी उस समय जब बेजपी की ओडिशा में कोई ख़ास पहचान नहीं थी, इसलिए उन्हें पार्टी और बाद में सरकार में बड़े ओहदे मिलना स्वाभाविक था।"

साहू कहते हैं कि प्रधान के साथ उनके संबंध अच्छे हैं लेकिन आजकल उनसे बात या मुलाक़ात बहुत कम ही होती है।

धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक करियर

उत्कल यूनिवर्सिटी में चुनाव हारने के बावजूद धर्मेंद्र का राजनैतिक उत्थान जारी रहा। अपनी मेहनत और लगन से वे बीजेपी के छात्र और युवा संगठन में सफलता सीढ़ियाँ चढ़ने लगे।

प्रधान साल 1994 में वे एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव बने और 1997 तक इस पद पर बने रहे। 2004 से 2006 तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे। बाद में वे बीजपी के राष्ट्रीय महासचिव भी बने और इस पद पर रहते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक समेत कई राज्यों में राज्य प्रभारी के तहत पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई।

धर्मेंद्र प्रधान का चुनावी करियर साल 2000 में शुरू हुआ, जब उन्होंने बीजेडी‑बीजेपी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में पाललहड़ा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की।

इसके चार साल बाद यानी 2004 में हुए आम चुनाव में वे देवगढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए। अब देवगढ़ संसदीय चुनाव क्षेत्र नहीं रहा, इसे संबलपुर संसदीय क्षेत्र से जोड़ दिया गया है, जहां से वे 2024 में सांसद चुने गए।

लेकिन इसके बाद लंबे समय तक उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।

हालांकि, पार्टी में अपनी अहमियत के कारण वे दो बार दूसरे राज्यों से राज्यसभा सांसद बने। अप्रैल 2012 से अप्रैल 2018 तक बिहार से और फिर अप्रैल 2018 से अप्रैल 2024 तक मध्य प्रदेश से। 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी और प्रधान को पेट्रोलियम राज्य मंत्री बनाया गया, उस समय वे राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। पूरे दो दशक बाद 2024 में उन्होंने फिर से ओडिशा से चुनाव लड़ा और संबलपुर से लोकसभा सांसद बने।

'धर्मेंद्र प्रधान के घर में रुके थे अमित शाह'

प्रधान के सहपाठी सिंधुज्योति त्रिपाठी का मानना है कि पार्टी और सरकार में धर्मेंद्र प्रधान के आगे बढ़ने के पीछे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से उनके गहरे व्यक्तिगत संबंध की अहम भूमिका रही।

वो कहते हैं, "मेरे पास इस बात का कोई सबूत नहीं है, लेकिन मैंने कई विश्वसनीय सूत्रों से सुना है कि जब अदालत ने शाह के खिलाफ तड़ीपार आदेश जारी किया था, तब वे कुछ दिनों तक धर्मेंद्र के तालचेर वाले घर में रहे थे।"

कुछ लोग भले ही प्रधान की सफलता का श्रेय उनके निजी संबंधों को दिया हो। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार रूबेन बनर्जी की माने तो उनकी राजनीतिक प्रतिभा का अंदाज़ा सबसे लंबे समय (24 साल) तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे बीजेडी के अध्यक्ष नवीन पटनायक को शुरू से ही था।

नवीन पटनायक पर अपनी किताब में उन्होंने लिखा है कि जब 2000 चुनाव में वोटों की गिनती चल रही थी और खबर आई कि पाललहड़ा में धर्मेंद्र आगे चल रहे हैं, तो उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए समस्या है।"

बनर्जी ने दावा किया है कि वे खुद उस समय गाड़ी में थे जब नवीन ने यह बात कही थी। हालांकि कई लोग इस किस्से को विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि नवीन उस समय ओडिशा ही नहीं राजनीति में भी नए थे। लेकिन बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत के दौरान बनर्जी ने दोहराया कि यह बात 'सोलह आने' सच है।

ओडिशा में बीजेपी के संगठन का विस्तार किया

ओडिशा में बीजेपी संगठन के विस्तार का मुख्य श्रेय भी बनर्जी प्रधान को ही देते हैं। उनका कहना है कि 2014 में केंद्र में मंत्री बनने के बाद प्रधान हर शनिवार और रविवार ओडिशा में बिताते थे।

इस दौरान वे पार्टी संगठन को मज़बूत करने के बारे में स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते थे। कई लोग इसे मज़ाक में वीकेंड पार्टी कहा करते थे।

2014 से 2019 तक प्रधान के ओएसडी और निजी सचिव रह चुके संबित त्रिपाठी भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य में पार्टी के विस्तार में प्रधान की प्रमुख भूमिका रही है।

उन्होंने बीबीसी से कहा, "वे पूरे राज्य में जमीनी स्तर पर काम कर रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से, उनके नाम से जानते हैं और केंद्र में अपनी पोज़ीशन का इस्तेमाल कर स्थानीय समस्या सुलझाने में हमेशा आगे रहे हैं।"

उनके इस्तीफ़े की मांग पर त्रिपाठी कहते हैं, "यह मांग बिल्कुल जायज़ नहीं है। विपक्ष के द्वारा छात्रों की भावनाओं को "वेपनाइज़" (सशस्त्रीकरण) किया जा रहा है।"

लगभग इस तरह का मत राज्य भाजपा के नेता भी रखते हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता सज्जन शर्मा कहते हैं, "नीट की आड़ में विपक्ष अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेंक रहा है। जब परीक्षा दोबारा सफलतापूर्वक हो चुकी है और बच्चे अपनी सफलता का जश्न मना रहे हैं, उस समय इस आंदोलन के पीछे राजनीति के अलावा और क्या वजह हो सकती है? यह आंदोलन विपक्ष द्वारा सरकार को बदनाम करने की सोची‑समझी चाल है।"

पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता गोलक महापात्र कहते हैं; "नीट तो बस बहाना है। असल में विपक्ष में मची खलबली के पीछे कारण है नई शिक्षा नीति, जिसके तहत शिक्षा व्यवस्था का भारतीयकरण किया गया। पाठ्यक्रम में मुग़लों के राज को सही स्थान दिया गया। नवीन पटनायक आज शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। वे शायद भूल गए हैं कि केवल उनके आख़िरी कार्यकाल में (2019 से 2024) के बीच ओडिशा में 9 बार पेपर लीक हुआ।"

Açık Sorular

  • नीट परीक्षा लीक मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
  • क्या धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे?
  • विपक्ष का आंदोलन कितना प्रभावी होगा?

İlgili Konular

Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

İlgili Haberler

'वक़्त बर्बाद मत कीजिए' वाले बयान पर सीजेआई बोले- कोई याचिका दायर नहीं हुई, रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना
Gelişiyor·50 dakika önce

'वक़्त बर्बाद मत कीजिए' वाले बयान पर सीजेआई बोले- कोई याचिका दायर नहीं हुई, रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उन्होंने छात्र विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई याचिका दायर नहीं हुई थी, केवल एक रिप्रेजेंटेशन भेजा गया था, और मीडिया रिपोर्टिंग को "ग़ैर-ज़िम्मेदाराना" बताया।

BBC हिंदी
4 dk okuma
NEET Paper Leak: Centre Seeks Time on Pradhan's Resignation, NTA Sacks 47 Officials Amid Protests
Gelişiyor·1 saat önce

NEET Paper Leak: Centre Seeks Time on Pradhan's Resignation, NTA Sacks 47 Officials Amid Protests

The NEET paper leak controversy continues with the Centre seeking more time on Union Education Minister Dharmendra Pradhan's resignation demand from the Cockroach Janta Party (CJP). The NTA has sacked 47 officials and begun a major overhaul, while PM Modi promises stricter action and Rahul Gandhi renews criticism. The Supreme Court will hear pleas on police action.

Times of India
4 dk okuma
कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद मार्च' के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप और विवाद
Gelişiyor·1 saat önce

कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद मार्च' के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप और विवाद

दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं, जिसमें कई लोग घायल हुए. राहुल गांधी ने एक पीड़ित छात्र को पेश कर कार्रवाई की मांग की, जबकि दिल्ली पुलिस ने आरोपों को गलत बताया. सीआरपीएफ़ ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

BBC हिंदी
5 dk okuma