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Geriपीएम मोदी ने ट्रंप की मौजूदगी में भारतीय नागरिकों की मौत का किया ज़िक्र लेकिन अमेरिका का नहीं लिया नाम, विपक्ष क्या बोला
पीएम मोदी ने ट्रंप की मौजूदगी में भारतीय नागरिकों की मौत का किया ज़िक्र लेकिन अमेरिका का नहीं लिया नाम, विपक्ष क्या बोला
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BBC हिंदी17.06.2026Dünya5 dk okumaIndia

पीएम मोदी ने ट्रंप की मौजूदगी में भारतीय नागरिकों की मौत का किया ज़िक्र लेकिन अमेरिका का नहीं लिया नाम, विपक्ष क्या बोला

Hızlı Bakış

फ्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया, लेकिन अमेरिका का नाम नहीं लिया। विपक्ष ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया.

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुक़सान झेलना पड़ा है. साथ ही होर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री व्यापाार में आई बाधा की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा है.इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार के ज़रिये सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है. इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि नाविक बिना डर के काम कर सकें.

ओमान के तट पर 9 जून को कमर्शियल जहाज़ 'सेटेबेलो' पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीयों की मौत हो गई थी. लिहाजा भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाने को अहम माना जा रहा है.

'सेटेबेलो' के अलावा दो भारतीय जहाजों पर भी हमला हुआ था, लेकिन इसमें किसी की जान नहीं गई थी.

फ़्रांस के एवियन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाक़ात हुई.

'ऑपरेशन सिंदूर' और भारत पर लगाए गए भारी अमेरिकी टैरिफ़ से दोनों देशों के रिश्तों में आए तनाव के बाद ट्रंप और मोदी की ये पहली आमने-सामने की मुलाक़ात थी.

जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की दो दिवसीय यात्रा पूरी कर फ़्रांस पहुंचे थे. भारत को इस शिखर सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया था.

जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप है, जिसमें कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.

जी-7 सम्मेलन में पीएम मोदी क्या बोले

पीएम मोदी ने समुद्र में नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए आपस में जुड़ी दुनिया के देशों के बीच सहयोग की अपील की.

उन्होंने कहा, ''आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी है. दुनिया के देश पहले से ज़्यादा एक दूसरे पर निर्भर हैं. किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती. मोबिलिटी,डेटा, पूंजी और टेक्नोलॉजी आपस में सभी देशों को जोड़ते हैं.''

उन्होंने कहा ''ऐसे समय में पार्टनरशिप की अहमियत स्वाभाविक तौर पर बढ़ जाती है लेकिन ये तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो. आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति कोई खनिज,टेक्नोलॉजी या बाज़ार नहीं है बल्कि आपसी विश्वास है.''

उन्होंने कहा, ''हमें विश्वास है कि टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को हथियार के तौर पर नहीं बल्कि दुनिया की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. सप्लाई चेन को हथियार के तौर पर नहीं बल्कि दुनिया की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. हमारा विश्वास है कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे.हमें भरोसा है कि ग्लोबल संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे.''

अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को ख़त्म करने के लिए एक शांति समझौते पर सहमति बनने की घोषणा की गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि जल्द ही होर्मुज़ से जहाज़ों की आवाजाही शुरू हो जाएगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओर से समुद्री में नाविकों की 'सुरक्षा का मुद्दा उठाने के तरीके' पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है.

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के भाषण के एक अंश को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''जी-7 मीटिंग में अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश का सिर झुका दिया.''

''उनका कायराना बयान इस देश के साथ एक भद्दा मज़ाक है.हमारे लोगों का अपमान है.हिन्दुस्तान के तीन नाविकों की अमेरिका ने क्रूर हत्या कर दी और नरेंद्र मोदी अमेरिका का नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. उन्होंने कई सिविलियन्स को जान गंवानी पड़ी कह कर छोड़ दिया. मृतकों का नाम आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया, परनाला सुरेश था है. इतना सम्मान तो देना चाहिए था.जो अपने देश का ना हुआ वह किसका होगा? लानत है मोदी जी!''

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''ग़ज़ब की बेशर्मी है भाई अमेरिकी सेना ने हमारे तीन जहाजों पर मिसाइल से हमला किया, तीन भारतीयों की हत्या कर दी.लेकिन लाल आंखें दिखाना तो दूर, मोदी ट्रंप के साथ "हीं हीं खी खी" कर रहे हैं.ट्रंप मोदी को बच्चों की तरह थपकी दे रहे हैं.''

भारत के विरोध दर्ज कराने पर अमेरिका ने क्या कहा था

अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच 28 फ़रवरी को जंग शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद ईरान ने अपने तट से सटे होर्मुज़ स्ट्रेट में नाकाबंदी कर दी थी.

इसके बाद दुनिया भर में तेल के दाम भारी उछाल देखा गया था. चूंकि दुनिया भर की तेल और गैस सप्लाई का 20 फ़ीसदी इस रास्ते से गुजरता है इसलिए ये संकट और गहरा गया.

इस बीच. ईरान के साथ अपने युद्धविराम का ऐलान करते हुए अमेरिका ने ईरानी समुद्री तटों पर नाकाबंदी के लिए अमेरिकी नौसेना को यहां उतार दिया.

अमेरिका ने ऐलान किया था कि उसके निर्देशों का पालन न करने वाले जहाज़ों पर हमला किया जाएगा.

9 जून को अमेरिकी सेना ने ओमान के तट पर कमर्शियल जहाज़ 'सेटेबेलो' पर हमला किया था.

इस जहाज़ पर 24 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया था, जबकि तीन नाविकों की मौत हो गई थी.

इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में भारतीय क्रू मेंबर्स वाले दो अन्य जहाज़ों पर हमला किया गया था.

हालांकि उनमें किसी की मौत नहीं हुई और सभी नाविकों को बचा लिया गया.

भारत ने तीन नाविकों के मारे जाने पर अमेरिका से विरोध दर्ज कराया था.

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस पर बात की थी.

जयशंकर ने कहा था इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री से 'कड़ा विरोध' दर्ज कराया और कहा कि इस तरह का 'घातक हमला उचित नहीं' है.

लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''रुबियो ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.''

भारत की ओर से अपने नाविकों की मौत पर विरोध दर्ज़ कराए जाने के बावजूद अमेरिका के कड़े जवाब पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा था.

कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद न अफ़सोस, न माफ़ी. उल्टा अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है. उनके शब्द पढ़िए, अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें. कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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