राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी: आठ लोग न्यायिक हिरासत में, जांच जारी
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और गबन के आरोप में आठ लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में चोरी करते पकड़े गए रमाशंकर मिश्रा ने पैसे लौटा दिए थे, जिन्हें ट्रस्ट के लॉकर से बरामद किया गया। सबसे प्रभावशाली टिन्नू यादव पर भी आरोप हैं।
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राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और गबन के आरोप में आठ लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में चोरी करते पकड़े गए रमाशंकर मिश्रा ने पैसे लौटा दिए थे, जिन्हें ट्रस्ट के लॉकर से बरामद किया गया।
राम सखा बगिया, मंदिर अयोध्या के रानी बाग क्षेत्र में स्थित है. ये सखा संप्रदाय से जुड़े शहर के पाँच प्रमुख मंदिरों में से एक है. रमाशंकर मिश्रा का परिवार इसी परिसर में रहता है.
27 साल के रमाशंकर उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन्हें राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और ग़बन मामले में न्यायिक हिरासत में रखा गया है.
रमाशंकर के पिता छद्दु लाल मिश्रा पुजारी हैं और अयोध्या के प्राचीन हनुमानगढ़ी मंदिर में कीर्तन करते हैं. लेकिन उन्होंने इस पूरे विवाद से ख़ुद को अलग रखा है.
परिवार में केवल रमाशंकर की भाभी साधना मिश्रा ही हैं, जो मीडिया से बात कर रही हैं. पर उनके लिए भी अब एक जैसे सवालों का बार-बार जवाब दे पाना मुश्किल हो रहा है.
साधना मिश्रा कहती हैं कि घर में एक ही कमरा है, इसलिए रमा शंकर पिछले तीन सालों से अलग रह रहे थे.
राम मंदिर में नौकरी के सवाल पर वह बताती हैं, ''नौकरी क़रीब छह साल पहले लगी थी. उससे पहले वो कैमरा चलाते थे. तो जब मंदिर में नोटों की गिनती की नौकरी लगी, तब वहाँ से 16-17 हज़ार आ जाते थे और कैमरा चलाने पर चार-पांच हज़ार रुपए. यही थी उनकी कमाई. "
"मगर कसम खाकर कह सकते हैं कि आज तक हमने या उनके पिता ने कभी उनसे पैसे नहीं लिए. पिता जी ने हमेशा से कहा था कि अपना कमाओ, खाओ और जोड़कर रखो.''
परिवार का कहना है कि रमाशंकर निर्दोष हैं और इस पूरे प्रकरण में केवल छोटे कर्मचारियों को फंसाने की कोशिश हो रही है. पर पुलिस का दावा है कि मंदिर के काउंटिंग रूम की सीसीटीवी फ़ुटेज में रमा शंकर मिश्रा भी चोरी करते नज़र आए हैं इसलिए उन्हें गिरफ़्तार किया गया है.
पुलिस के बरामदगी पंचनामा के मुताबिक़, पूछताछ के दौरान रमाशंकर ने चोरी की बात स्वीकार की. लेकिन यह भी दावा किया कि उन्होंने ये पैसे ट्रस्ट को लौटा दिए थे.
इसके बाद पैसों को ट्रस्ट के एक लॉकर में सुरक्षित रख दिया गया. पुलिस ने इसी लॉकर से कुल 7,32,170 रुपए और कुछ आभूषण बरामद करने का दावा किया है.
इस मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने कुल आठ लोगों पर एफ़आईआर दर्ज करवाई थी, पुलिस ने इन्हें हिरासत में लिया, पूछताछ की और फिर ये सभी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए.
ये आठ लोग हैं - राम शंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और राम शंकर मिश्रा.
'सबसे प्रभावशाली टिन्नू यादव'
इन सभी में सबसे ज़्यादा चर्चा जिस नाम की है, वो है राम शंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव. अयोध्या के स्थानीय लोग और पत्रकारों के मुताबिक़ मंदिर के प्रबंधन में सबसे अधिक प्रभाव उन्हीं का था.
अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार इंदू भूषण पांडेय टिन्नू यादव के प्रभाव के बारे में बताते हुए कहते हैं, ''अनिल मिश्रा, चंपत राय, गोपाल राव के बाद टिन्नू का ही प्रभाव पूरे कैंपस में दिखता था. और आज से नहीं प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही. टिन्नू जिसको चाहते थे वो आता था, जिसको चाहते थे निकाल देते थे, वाकी-टॉकी बकायदा लिए रहते थे, वहीं से कमांड करते थे...गिनने वाले को भी और प्राइवेट सिक्योरिटी थी उसको भी. इतने प्रभावशाली थे टिन्नू.''
टिन्नू का परिवार अयोध्या के स्वर्ग द्वार इलाक़े में रहता है. उनके बारे में अभी तक जो दावे हैं, उसके अनुसार वह पहले चंपत राय के ड्राइवर थे, फिर बाद में मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन की देखरेख करने लगे.
परिवार से बात करने के लिए हम उनके घर पहुंचे. टिन्नू के घर के ठीक बगल में उनके तीन और भाइयों के मकान है. इस मामले में टिन्नू के भतीजे मनीष यादव को भी नामज़द किया गया है, इसलिए हमने दोनों ही घरों के लोगों से बात करने की कोशिश की, आधे घंटे इंतज़ार किया पर कोई जवाब नहीं आया.
आसपास के लोग भी इस विषय पर बात करने से बचते नज़र आते हैं. वैसे दूसरे टीवी चैनलों के माध्यम से पहले खुद टिन्नू यादव, फिर उनकी पत्नी पूनम यादव और बाद में उनके भाई ने मीडिया के सामने आकर कहा कि उनके खिलाफ़ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं.
पर ट्रस्ट के पूर्व लेखाप्रभारी महिपाल सिंह ने टिन्नू यादव पर आरोप लगाते हुए एक विश्वस्त सूत्र से हुई बातचीत में बताया, ''मैं वहां का प्रभारी था, मैंने जब काउंटिंग में गड़बड़ी को पकड़ा और उसकी शिकायत गोपाल राव और चंपत राय से की तो अगले दिन टिन्नू ने मुझे धमकी दी. सारे सीसीटीवी फ़ुटेज डिलीट करवा दिए और अनिल मिश्रा जी ने मेरी जगह किसी और को इस काम में लगा दिया.''
'बिना किसी मानदेय काम करते थे सुभाष श्रीवास्तव'
टिन्नू यादव ट्रस्ट के वेतनभोगी कर्मी थे जबकि कैनरा बैंक से रिटायर हुए कैशियर सुभाष श्रीवास्तव बिना किसी मानदेय कैश काउंटिंग स्टाफ़ के प्रभारी के तौर पर अपनी सेवाएं देते थे.
उनका काम दानपात्रों से निकाली गई नक़दी को काउंटिंग रूम तक पहुंचाना, गिनती की प्रक्रिया की निगरानी करना और आख़िर में रक़म एसबीआई को सौंपना था.
पुलिस का आरोप है कि उन्होंने निगरानी में लापरवाही बरती और चोरी में भी भूमिका निभाई. हमने उनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
नाम न छापने की शर्त पर एक पड़ोसी के मुताबिक़ सुभाष श्रीवास्तव काफ़ी लंबे समय से संघ से जुड़े हुए थे. उनकी उम्र तकरीबन 71 वर्ष है और रिटायरमेंट के बाद से ही मंदिर में अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी थी.
रही बात बाकी छह अभियुक्तों की तो इनकी नियुक्ति वाराणसी की निजी कंपनी 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' के ज़रिए हुई थी.
कंपनी के डायरेक्टर गौरव सिंह ने बीबीसी को बताया, ''हमने कुल 22 कर्मचारी भारतीय स्टेट बैंक के कहने अनुसार, उपलब्ध कराए थे. वो कौन लोग थे, उनकी जॉइनिंग कब हुई, उनकी सैलरी कितनी थी...ये तमाम जानकारियां एसबीआई के पास हैं. हमारे पास जो जानकारी थी उसे हमने एसआईटी को सौंप दिया है. इस विषय पर मैं और बात नहीं कर सकता.''
दरअसल, जो आठ लोग पकड़े गए उनमें से चार एक दूसरे के संबंधी हैं. जैसे मनीष यादव टिन्नू यादव के भतीजे और अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा के जीजा हैं. ऐसे में इन सभी की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं.
आय के स्रोतों की पड़ताल
अभियुक्त अनुकल्प मिश्रा पहले से राम मंदिर में काम करते थे, जबकि कार मैकेनिक का काम करने वाले लवकुश मिश्रा के परिवार का दावा है कि उन्हें यहां काम करते हुए ज़्यादा वक़्त नहीं बीता था.
हमने अनुकल्प और लवकुश मिश्रा दोनों के घरों का दौरा किया, पर परिवार के लोग बात करने के लिए तैयार नहीं हुए. अनुकल्प के घरवालों ने तो हमारे सामने ही घर के दरवाज़े बंद किए और फिर गुज़ारिश करने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया.
आस-पड़ोस के लोग दावा करते हैं कि दोनों की आर्थिक स्थिति में अचानक आए बदलाव को उन्होंने महसूस किया है. पुलिस भी अभियुक्तों की संपत्ति और आय के स्रोतों की पड़ताल कर रही है.
दावा है कि पुलिस ने 26 जून को हुई तलाशी में अनुकल्प मिश्रा के बताए अनुसार, ट्रस्ट के लॉकर से 16,82,40 रुपए, तो लवकुश मिश्रा के बताए अनुसार 14,25000 रुपए बरामद किए हैं.
दोनों का कहना था कि उन्होंने ये पैसे ट्रस्ट को वापस कर दिए थे.
वहीं अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर बीस लाख रुपये से अधिक नक़दी, विदेशी मुद्रा और कुछ सोने के आभूषण बरामद होने का दावा है. दूसरी तरफ़ अभियुक्त करुणेश पांडेय से क़रीब 18 लाख रुपए बरामद किए गए हैं.
अविनाश शुक्ला का परिवार प्रतापगढ़ का रहने वाला है. वह अपने बड़े भाई के साथ अयोध्या के कौशलपुरी स्थित एक योग सेंटर में रहा करते थे.
उनके पिता ने बताया कि अविनाश को अयोध्या गए हुए एक साल हुआ था, पर वह वहाँ क्या कर रहे थे, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
वहीं अयोध्या के जयराजपुर खंडासा के रहने वाले करुणेश के घर पर ताला जड़ा मिला. हमने आसपास के लोगों से बात करने का प्रयास किया पर किसी ने इस मामले पर कोई बात नहीं की.
रुदौली स्थित अनुकल्प मिश्रा के गांव में भी हमें कुछ ऐसे ही अनुभव से गुज़रना पड़ा, पुलिस इन सभी अभियुक्तों द्वारा हाल के वर्षों में खरीदी गई संपत्ति की भी जांच कर रही है.
'बुलडोज़र कार्रवाई की तैयारी'
अयोध्या के कौशलपुरी स्थित अनुकल्प मिश्रा का एक आवास जांच के दायरे में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुकल्प ने ये मकान एक साल पहले भोजपुरी और अवधि गायक दिवाकर द्विवेदी से लिया था.
इस संबंध में और जानकारी जुटाने के लिए हमने दिवाकर द्विवेदी से संपर्क किया, उन्होंने हमें बताया, ''यह प्रॉपर्टी मेरी पत्नी वंदना द्विवेदी के नाम से थी. एक डीलर के माध्यम से इसे हमने रविंद्र कुमार मिश्रा जी को बेचा था. रविंद्र मिश्रा लवकुश के पिता हैं. ये ज़मीन लगभग 800 स्क्वॉयर फिट की है.''
ज़मीन का सौदा कितने में हुआ? इस सवाल पर वो कहते हैं कि वह अभी बाहर हैं और सटीक जानकारी दे पाने फ़िलहाल अक्षम हैं.
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने लवकुश मिश्रा से जुड़ी एक संपत्ति पर नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि अगर परिवार घर के नक्शे से जुड़ी प्राधिकरण की दुविधाओं को दूर नहीं कर पाता है, तो एक हफ़्ते के भीतर कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया है, ''आगे आने वाले दिनों में कुछ और लोगों की गिरफ़्तारी हो सकती है. साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ सकता है. पर फ़िलहाल कथित चोरी और ग़बन के इस मामले में आठ अभियुक्तों की ही पहचान हो पाई है और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है.''
अब आने वाले दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट और अदालत में दाख़िल होने वाले दस्तावेज़ यह तय करेंगे कि इस मामले की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ इन आठ लोगों तक सीमित रहती है, या फिर जिन लोगों के संरक्षण और निगरानी में यह पूरी व्यवस्था चल रही थी, उनकी जवाबदेही भी तय होती है.
Bundan Sonra Ne Olabilir?
Yapay zekâ öngörüsü — kesinlik taşımaz
कुछ और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
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Açık Sorular
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