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Genel Direndž Seth, Hindistan'ın Yeni Kara Kuvvetleri Komutanı Oldu, Çöl'den Keşmir'e Önemli Roller Üstlendi

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जनरल धीरज सेठ ने 30 जून, 2026 को भारत के 31वें आर्मी चीफ़ के रूप में पदभार संभाला। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो 40 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। सेठ का सैन्य करियर चार दशक लंबा है, जिसमें उन्होंने विभिन्न कमानों और रणनीतिक पदों पर कार्य किया है।

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जनरल धीरज सेठ बने भारत के नए आर्मी चीफ़, रेगिस्तान से कश्मीर तक निभा चुके हैं अहम भूमिका

प्रकाशित 6 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 5 मिनट

जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार (30 जून, 2026) को भारत के नए थल सेना प्रमुख की ज़िम्मेदारी संभाल ली. वो भारत के 31वें आर्मी चीफ़ हैं.

जनरल सेठ ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह ली है. जनरल द्विवेदी सेना में 40 साल से ज़्यादा की सर्विस देने के बाद रिटायर हो गए हैं.

धीरज सेठ आर्मी चीफ़ बनने से पहले अप्रैल 2026 में वाइस चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ नियुक्त हुए थे. इसके साथ ही वो दक्षिणी कमान के जनरल ऑफ़िसर कमांडिंग इन चीफ़ की ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं.

जनरल सेठ नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी (एनडीए), खड़कवासला के छात्र रहे हैं. उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था.

जनरल धीरज सेठ को परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (यूवाईएसएम) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसए) मिल चुके हैं.

पिता थे लेफ़्टिनेंट जनरल

थल सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ का सेना से पुराना नाता है. द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जनरल धीरज का एक जाना-माना मिलिट्री परिवार है, उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ 1997 में आर्मी के एडजुटेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे. उस समय जनरल धीरज सेठ ख़ुद कैप्टन थे.

इसी रिपोर्ट के मुताबिक़, उनके भाई रियर एडमिरल रविनीश सेठ भारतीय नौसेना में फ्लैग ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं और जनरल सेठ साल 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी के बाद पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं जो आर्मर्ड कोर से हैं.

पीआईबी की प्रेस रिलीज़ में रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि जनरल सेठ ने क़रीब चार दशक लंबे अपने शानदार सैन्य करियर के दौरान परिचालन, रणनीति, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव हासिल किया है.

उन्होंने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने और उसके दीर्घकालिक आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जनरल धीरज सेठ ने अलग-अलग परिचालन क्षेत्रों में हर स्तर पर कमान संभाली है.

प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि उनकी कमान संबंधी ज़िम्मेदारियों में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसर्जेंसी फ़ोर्स का नेतृत्व शामिल है.

लेफ़्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फ़ॉर्मेशन में से एक सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली.

इसके बाद उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफ़िसर कमांडिंग (जीओसी) के रूप में सेवा दी, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों और औपचारिक सैन्य समारोहों की ज़िम्मेदारी निभाई.

दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिणी कमान के कमांडर रहे

आर्मी कमांडर के पद पर प्रमोशन होने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया.

इस तरह उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक दो परिचालन आर्मी कमानों की कमान संभालने और महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों की रणनीतिक निगरानी की, जो एक बड़ी उपलब्धि है.

उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर भी कार्य किया, जिनका परिचालन योजना, सेना के प्रबंधन और क्षमता विकास पर बड़ा प्रभाव पड़ा.

जनरल धीरज सेठ को सेना के आधुनिकीकरण में उनके योगदान के लिए व्यापक पहचान मिली है.

उन्होंने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए सेना के आधुनिकीकरण, भविष्य की क्षमता निर्माण योजना और दीर्घकालिक सैन्य ढांचे को आकार देने में अहम भूमिका निभाई.

पीआईबी के मुताबिक़, उनका योगदान सेना की परिचालन ज़रूरतों को नई तकनीकों और भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में बेहद महत्वपूर्ण रहा है.

जनरल धीरज सेठ हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं.

इसके अलावा वो फ्रांस के पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ़ कोर्स में भी शामिल हो चुके हैं.

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने क्या कहा?

मंगलवार को रिटायर हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की ताक़त किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि उसके सैनिकों, कमांडरों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों के अटूट विश्वास से आती है.

उन्होंने कहा कि चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना में सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है.

जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर अपनी तैयारी, संतुलन और सतर्कता को लगातार बनाए रखा है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी मामलों में भारतीय सेना ने स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन और ज़िम्मेदारी की भावना के साथ अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया है.

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इस दौरान सेना, नौसेना और वायुसेना ने साझा दृष्टिकोण, आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय के साथ मिलकर काम किया.

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