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Telugu film 'Peddi' faces backlash over actress Janhvi Kapoor's portrayal
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BBC हिंदी10.06.2026Kültür4 dk okumaIndia

Telugu film 'Peddi' faces backlash over actress Janhvi Kapoor's portrayal

Hızlı Bakış

  • Telugu film 'Peddi' is facing criticism for its portrayal of actress Janhvi Kapoor, with many viewers feeling her character was reduced to a 'romantic desire' and objectified.
  • Director Buchi Babu has apologized and plans to edit objectionable scenes.

Yapay zekâ özeti

Neden Önemli?

The article discusses the criticism faced by the Telugu film 'Peddi' for its portrayal of actress Janhvi Kapoor. Many viewers and critics feel her character was objectified and lacked depth, a common issue in Telugu cinema where actresses are often reduced to 'romantic desires'.

Yazı boyutu

Author, श्रीनिवास निम्मगड्डा

पदनाम, बीबीसी तेलुगु

प्रकाशित 3 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

अगर आप ज़्यादातर तेलुगु फिल्मों को गौर से देखें तो अक्सर यह राय सुनने को मिलती है कि अभिनेत्रियों की भूमिका को दर्शकों के बीच 'रोमांटिक चाहत' तक सीमित रखा जाता है. इसके अलावा उनकी भूमिकाओं का कोई गहरा उद्देश्य नज़र नहीं आता है.

राम चरण और जाह्नवी कपूर की हालिया फ़िल्म 'पेद्दी' में जाह्नवी कपूर की निभाई गई अचियम्मा की भूमिका भी इसी नज़रिए को दिखाती है.

इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर फ़िल्म की आलोचना भी हो रही है.

फ़िल्म की आलोचना इस बात को लेकर हो रही है कि इसमें जाह्नवी कपूर के अभिनय और हाव-भाव दिखाने से पहले उनके शरीर को क्लोज़-अप एंगल से दिखाया गया है.

फ़िल्म समीक्षक महर्षि ने बीबीसी के लिए लिखे एक रिव्यू में कहा, "ट्रेलर में जाह्नवी को देखकर हमें उम्मीद थी कि वह मंच पर सामंथा की तरह एक सशक्त किरदार निभाएंगी."

"अगर हम ग़ौर से देखें तो वह फ़िल्म के पहले हिस्से में थोड़े समय के लिए ही नज़र आती हैं और फिर दूसरे हिस्से में दोबारा दिखाई देती हैं. नायिका के बिना भी यह फ़िल्म ख़राब नहीं है. ऐसा लगता है कि प्रशंसक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें यह फ़िल्म पसंद आएगी या नहीं."

उस फ़िल्म में जाह्नवी कपूर को देखने वाले लगभग हर इंसान को लगता है कि उन्हें सिर्फ़ उनकी ख़ूबसूरती दिखाने के लिए एक ऐसे किरदार में ढाल दिया गया है जिसकी कोई ज़रूरत नहीं है.

हीरोइन की एंट्री वाली सीन में वो चुन्नी उतारी हुई नज़र आती हैं. आख़िर में दो-तीन सीन में उन्हें साड़ी पहने देखा जाता है.

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'वरानिकी वेय्यी' गाने में हीरो के साथ डांस कर रहीं श्रुति हासन से जलन होने पर वो डांस में उनसे मुक़ाबला करने के लिए अपनी चुन्नी स्टेज पर फेंक देती हैं.

फ़िल्म में जगह-जगह भद्दे कमेंट्स और मिडिल फ़िंगर के इशारे भी देखने को मिलते हैं.

"अगर आप आंखों और होंठों की तारीफ़ कर रहे हैं तो कमर दिखाने का क्या मतलब है?" सोशल मीडिया पर कई लोगों ने जाह्नवी कपूर द्वारा निभाए गए किरदार पर इस तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं.

एक यूज़र ने लिखा, "एक सीन में राम चरण जाह्नवी कपूर की तारीफ़ करते हैं. जब वो उनकी आंखों का वर्णन करते हैं, तो उनके सीने को दिखाया जाता है. जब वो उनके होठों की बात करते हैं, तो उनकी कमर को दिखाया जाता है. क्या इस सीन को एडिट करने वाले एडिटर को वाकई पता है कि आंखें और होंठ क्या होते हैं?"

'माफ़ कीजिए, हम उन हिस्सों में बदलाव करेंगे'

ख़बरों के मुताबिक़, जाह्नवी कपूर भी अपनी भूमिका से नाख़ुश थीं. ईनाडु की रिपोर्ट के अनुसार, जाह्नवी कपूर ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर फ़िल्म 'पेद्दी' की एक समीक्षा को लाइक किया था, जिसमें कैप्शन था, 'भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नायिका का क्रूर अपमान.'

सोशल मीडिया पर जाह्नवी के काम के समर्थन और विरोध में बहस छिड़ने के बाद जाह्नवी ने उस पोस्ट को अनलाइक कर दिया.

हालांकि, जाह्नवी कपूर की अपने प्रशंसकों के साथ अतीत में हुई एक कथित निजी चैट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

कथित तौर पर इस चैट जाह्नवी कपूर ने बातचीत में कहा, "जब मैंने कहा, 'कमर और सीने के शॉट्स नहीं', तो निर्देशक नाख़ुश हो गए. राम सर ने भी निर्देशक को ऐसे एंगल से शॉट न लेने के लिए कहा था. इस बात पर वे नाराज़ हो गए."

हालांकि, बीबीसी ने इस बातचीत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.

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जाह्नवी कपूर की भूमिका को लेकर हो रही आलोचनाओं पर फ़िल्म के निर्देशक बुची बाबू ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखकर जवाब दिया है.

उन्होंने कहा, "एक निर्देशक के तौर पर फ़िल्म का उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना, उन्हें रोमांचित करना और उनसे जुड़ाव बनाए रखना होना चाहिए. यह कभी भी किसी का अपमान या उन्हें असहज महसूस नहीं कराना चाहिए."

"'पेद्दी' के कुछ दृश्यों पर मिली प्रतिक्रिया को हम गंभीरता से लेते हैं. मैं पर्दे पर और पर्दे के बाहर, दोनों जगह महिलाओं का बहुत सम्मान करता हूं. मेरा इरादा कभी भी किसी महिला किरदार को सिर्फ़ 'सेक्सुअल ऑब्जेक्ट' दिखाने का नहीं था."

"अगर फ़िल्म का कोई हिस्सा ऐसा लगा है, तो हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और तहेदिल से माफ़ी मांगते हैं. हमने उन दृश्यों को बदलने का फ़ैसला किया है जो आपत्तिजनक लगे."

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सिनेमा में महिला किरदारों को कम पावरफुल दिखाने और 'सेक्सुअल ऑब्जेक्ट' की तरह दिखाने की वजह क्या है? टॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक ऐसा होना क्यों जारी है?

दरअसल, सिनेमा एक प्रमुख पुरुष प्रधान उद्योग है. सिनेमा समाज पर गहरा प्रभाव डालता है. चूंकि फ़िल्म निर्माताओं, निर्देशकों और कहानीकारों का अधिकांश हिस्सा पुरुष हैं, इसलिए कहानियां और नायक पुरुषवादी दृष्टिकोण से गढ़े जाते हैं.

1975 में 'विजुअल प्लेजर एंड नैरेटिव सिनेमा' शीर्षक से लिखे एक लेख में लारा माल्वे ने लिखा था कि लगभग सभी प्रकार के सिनेमा में महिलाओं की भूमिकाओं पर 'पुरुषवादी नज़रिए' का प्रभुत्व रहा है.

फ़िल्मों में लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के यौन शोषण के कई उदाहरण आज भी मौजूद हैं.

बेकडेल-वालेंस टेस्ट कहता है कि किसी फ़िल्म में कम से कम दो नाम वाली महिलाएं हों, जो आपस में बात करें और उनकी बातचीत किसी पुरुष के बारे में न हो. अगर ये एक बार भी हो जाए तो फ़िल्म टेस्ट पास मानी जाती है.

बीबीसी के 2018 के लेख में बताया गया कि हॉलीवुड ज़्यादातर फ़िल्मों में महिलाओं को सही तरह से नहीं दिखा पाया. ऑस्कर जीतने वाली 89 फ़िल्मों में से आधी से भी कम इस टेस्ट को पास कर पाईं.

दिलचस्प बात ये है कि 1930 के दशक की फ़िल्मों ने सबसे ज़्यादा बार ये टेस्ट पास किया.

स्वीडन में एलेन टेयले ने एक रेटिंग सिस्टम शुरू किया जो उन फ़िल्मों को अलग पहचान देता है जो बेकडेल टेस्ट पास करती हैं. उनका कहना है कि लोग पुरानी तरह की कहानियां ही दोहरा रहे हैं, उन पर सवाल नहीं उठा रहे.

इस स्टडी में पाया गया कि उस समय हॉलीवुड की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्मों में 40% से ज़्यादा युवा महिला किरदारों को भड़काऊ कपड़ों में दिखाया गया था और 35% को सेमी न्यूड दिखाया गया था.

तेलुगु फ़िल्मों में भी महिलाओं के चित्रण पर सवाल उठे हैं. तापसी पन्नू ने एक बार निर्देशक रघुवेंद्र राव की नायिकाओं की कमर पर ज़्यादा फोकस रखने की आलोचना की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी बात वापस ले ली.

Açık Sorular

  • Will the edited scenes in 'Peddi' satisfy the critics?
  • Will this incident lead to a broader change in the portrayal of female characters in Telugu cinema?
  • What was the exact nature of the alleged private chat between Janhvi Kapoor and the director?
  • How will this controversy impact Janhvi Kapoor's career in Telugu cinema?

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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