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GeriUAE denies secret deal to release Iran funds, Qatar denies secret deal with Iran
UAE denies secret deal to release Iran funds, Qatar denies secret deal with Iran
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BBC हिंदी13.06.2026Dünya10 dk okumaIndia

UAE denies secret deal to release Iran funds, Qatar denies secret deal with Iran

Hızlı Bakış

  • The UAE has denied reports of a secret deal to release billions of dollars frozen due to US sanctions, calling them baseless.
  • Qatar has also denied a secret deal with Iran to prevent attacks, calling it false and damaging to mediation efforts.

Yapay zekâ özeti

Neden Önemli?

Reports suggest secret deals between Iran and UAE/Qatar regarding frozen funds and attacks, amidst ongoing US-Iran tensions and mediation efforts. Both UAE and Qatar have denied these claims.

Yazı boyutu

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 10 मिनट

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण फ़्रीज़ हुए अरबों डॉलर को जारी करने के लिए ईरान से गोपनीय समझौता की रिपोर्टों को यूएई ने आधारहीन बताते हुए पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में चार सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि यूएई ने ईरान के फ़्रीज़ हुए अरबों डॉलर जारी करने पर सहमति जताई है और तीन अरब डॉलर जारी भी कर दिए हैं.

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच जंग समाप्त करने को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में है.

राजनयिकों और जानकारों का कहना है कि इन वार्ताओं में अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत विदेशी बैंकों में फ़्रीज़ ईरानी तेल राजस्व के अरबों डॉलर जारी करने का मुद्दा भी शामिल हो सकता है.

इस बीच, ईरान से क़तर के गुप्त समझौते को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं.

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि क़तर ने ईरानी हमले रोकने के लिए तेहरान के साथ सीक्रेट डील की है. हालांकि क़तर ने इस दावे को 'झूठा और अविश्वसनीय' क़रार दिया है और ऐसी ख़बरों को 'मध्यस्थता के प्रयासों को नुक़सान पहुँचाने वाला' बताया है.

दरअसल, ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग के बीच मध्यस्थता की कोशिश हो रही है लेकिन कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के निकलने और हमले से बचने के लिए कई देश ईरान के साथ 'गोपनीय बातचीत' कर रहे हैं.

ईरान ने भी कई मौक़ों पर कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के निकलने को लेकर यूरोप के देश भी उसके साथ बातचीत कर रहे हैं. हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है.

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होर्मुज़ स्ट्रेट से वैश्विक तेल आयात का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है और जबसे जंग शुरू हुई है वैश्विक तेल बाज़ार में क़ीमतें उंची बनी हुई हैं.

बीते फ़रवरी में जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला किया तो ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया था और कहा था कि बिना उसकी अनुमति के किसी जहाज़ को गुजरने की इजाज़त नहीं होगी.

रॉयटर्स की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में दावा किया है, "यूएई कुल 10 अरब डॉलर जारी करने पर सहमत हुआ है, जिनमें से तीन अरब डॉलर से अधिक पहले ही जारी किए जा चुके हैं."

इस व्यवस्था की जानकारी रखने वाले दो अन्य सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि 'ईरान की कुल 20 अरब डॉलर की संपत्ति फ़्रीज़ है और यूएई पर ईरानी हमलों को रोकने के बदले यह सहमति बनी है.'

समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि तीन अरब डॉलर की पहली किस्त पहले ही उपलब्ध करा दी गई है.

हालांकि रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि ट्रांसफ़र के लिए तय की गई राशि यूएई की है या यूएई की बैंकिंग प्रणाली में लंबे समय से फ़्रीज़ ईरानी खातों की है, या किसी अन्य जगह से जारी हो रही है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, व्हाइट हाउस ने इस बारे में टिप्पणी मांगने पर कोई जवाब नहीं दिया.

हालांकि वॉशिंगटन में उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने या किसी बैठक में शामिल होने के बदले ईरान को धनराशि जारी नहीं की जाएगी.

उन्होंने कहा कि 'संभावित समझौते की रूपरेखा इस तरह की है कि तेहरान को आर्थिक लाभ तभी मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा.'

ईरान ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

ईरानी हमले रोकने के बदले भुगतान का दावा

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह समझौता यूएई-ईरान संबंधों में एक बड़ा बदलाव है. जंग के अधिकांश समय दोनों देशों के बीच खुली दुश्मनी रही.

रिपोर्ट के मुताबिक़, "ईरानी हमलों के कारण दुबई के होटल खाली हो गए, कुछ प्रवासी देश छोड़कर चले गए और सुरक्षा को लेकर देश की प्रतिष्ठा को झटका लगा, जबकि यही ख़ासियत उसे एक प्रमुख कारोबारी केंद्र के रूप में अलग पहचान दिखाती है."

रिपोर्ट के अनुसार, "इस समझौते की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि यह क़दम अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को हल करने का एक रास्ता देता है, जिसमें किसी भी पक्ष को अपनी लाल रेखा पार नहीं करनी पड़ती है."

"ईरान दावा कर सकता है कि उसने जंग में हुए नुक़सान का मुआवज़ा हासिल किया, जबकि वॉशिंगटन कह सकता है कि उसने कोई भुगतान नहीं किया, जबकि अबू धाबी और दुबई को सुरक्षा मिलेगी. साथ ही इसे क्षेत्रीय भरोसे को बहाल करने में निवेश के रूप में भी पेश किया जा सकता है."

रिपोर्ट के मुताबिक़, "इस व्यवस्था की जानकारी रखने वाले एक दूसरे सूत्र ने बताया कि भुगतान के बदले ईरान, यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमले रोक देगा. साथ ही दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरेंगे, जिसमें ख़ुफ़िया जानकारी साझा करना और आर्थिक सहयोग शामिल होगा."

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने इसी तरह की व्यवस्था के लिए 'कम से कम दो अन्य अरब देशों से भी संपर्क' किया है.

रिपोर्ट के अनुसार, "यूएई पर ईरान का आख़िरी सीधा हमला एक महीने से अधिक समय पहले हुआ था. चार मई को ओमान की खाड़ी में स्थित फ़ुजैराह बंदरगाह पर उसने हमला किया गया था."

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, ''बातचीत कई हफ़्ते पहले शुरू हुई थी, लेकिन पिछले हफ़्ते ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड के अधिकारियों के अबू धाबी दौरे के बाद इसमें तेज़ी आ गई. वहां उन्होंने यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और अबू धाबी के डिप्टी शेख तहनून बिन ज़ायद अल नाह्यान से मुलाक़ात की."

"उस यात्रा के बाद यूएई अधिकारियों ने तेहरान का दौरा किया, जहां इस व्यवस्था से जुड़े अन्य पहलुओं पर बात हुई थी."

यूएई की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएई-ईरान व्यवस्था एक जटिल वित्तीय पृष्ठभूमि में आगे बढ़ने वाली है, जिसमें दुबई की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. दुबई यूएई का प्रमुख कारोबारी केंद्र है और तेहरान की सबसे अहम आर्थिक जीवनरेखाओं में से एक माना जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार, "दुबई के बैंकों में लंबे समय से ईरान से जुड़े बड़े खाते फ़्रीज़ हैं. इनमें से अधिकांश अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण निष्क्रिय पड़े हैं. ये प्रतिबंध प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश को अमेरिकी वित्तीय नेटवर्क से बाहर किए जाने के जोख़िम में डालते हैं."

"11 अप्रैल को एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने कहा था कि अमेरिका क़तर और अन्य विदेशी बैंकों में रखी गई ईरानी संपत्तियां जारी करने पर सहमत हो गया है, हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने तुरंत इस दावे का खंडन कर दिया था."

रॉयटर्स की रिपोर्ट पर यूएई ने क्या कहा

यूएई के विदेश मंत्रालय ने शनिवार तड़के एक बयान जारी कर फ़ंड ट्रांसफ़र संबंधी रिपोर्टों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है.

यूएई के बयान में कहा गया है, "ये आरोप पूरी तरह ग़लत और बेबुनियाद हैं और कोई भी फ़्रीज़ ईरानी धनराशि यूएई के ज़रिए जारी, हस्तांतरित या उपलब्ध नहीं कराई गई है."

बयान के अनुसार, "इन दावों में तीन अरब डॉलर के कथित हस्तांतरण की बात भी शामिल थी."

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये आरोप पूरी तरह ग़लत और बेबुनियाद हैं.

मंत्रालय ने मीडिया संस्थानों से भी अपील की कि वे 'तथ्यों की पुष्टि करें, आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और अपुष्ट जानकारी या बेबुनियाद आरोपों को प्रकाशित या प्रसारित करने से बचें.'

जानकार क्या कहते हैं?

फ़ाउंडेशन फॉर डिफ़ेंस ऑफ़ डेमोक्रेसीज़ में फ़ेलो मैक्स मीज़लिश ने रॉयटर्स की रिपोर्ट पर कहा है कि यूएई के इस कथित क़दम से अमेरिकी अधिकतम दबाव की नीति बिखरती दिख रही है.

मैक्स मीज़लिश ने एक्स पर लिखा, "ईरान पर प्रतिबंधों को लागू कराने में यूएई की कमज़ोर भूमिका इस बात से साफ़ दिखाई देती है कि वहां बड़ी मात्रा में ईरानी धन मौजूद है, जो लंबे समय से फ़्रीज़ ईरानी खातों से अलग भी हो सकता है. इसका मतलब है कि अब जारी किए जा रहे अरबों डॉलर ऐसी राशि हो सकती है, जिनके बारे में यूएई के बैंक और नियामकों को सालों से जानकारी थी, लेकिन उन्हें कभी रोका नहीं गया."

उन्होंने कहा कि रॉयटर्स भी यह तय नहीं कर सका कि हस्तांतरण के लिए रखी गई यह धनराशि यूएई की है या यूएई के बैंकिंग सिस्टम में ईरानी खातों की है या किसी और स्रोत से आई है.

मीज़लिश के अनुसार, "आसान भाषा में कहें तो यह वही पैसा हो सकता है, जिसे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग यूएई से रोकने की उम्मीद करता. ईरान इस धन का इस्तेमाल अपने सहयोगी समूहों को मदद देने, चीन से बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े सामान ख़रीदने और दूसरी गतिविधियों के लिए कर सकता था."

"अगर अमेरिका ने युद्ध शुरू होने से पहले कार्रवाई की होती, तो यही धनराशि ईरान से जुड़े लेनदेन करने वाले यूएई के बैंकों के लिए प्रतिबंधों का कारण बन सकती थी. अब इस धन को जारी करना दिखाता है कि ईरान पर दबाव बनाने की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति किस तरह कमज़ोर पड़ जाती है."

क़तर के साथ सीक्रेट डील- वॉशिंगटन पोस्ट का दावा

उधर, वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें दावा किया गया कि क़तर ने अपने गैस कॉम्प्लेक्स रास लाफ़ान को हमलों से बचाने के लिए ईरान के साथ गुप्त बातचीत की थी.

मार्च के मध्य में क़तर पर ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस उत्पादन फ़ैसिलिटी रास लाफ़ान से धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए.

इस हमले में उस संयंत्र के कुछ हिस्से नष्ट हो गए, जो दुनिया की कुल गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा मुहैया कराता है. इससे चीन और अन्य देशों के साथ अरबों डॉलर के कांट्रैक्ट जोखिम में पड़ गए.

अमेरिका और ईरान के बीच प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे क़तर के संघर्ष में खिंचने से जंग समाप्त करने की उसकी कोशिशों को भी झटका लगा.

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़, "जंग की शुरुआत में क़तर ने दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस उत्पादन फ़ैसिलिटी रास लाफ़ान को ईरानी हमलों से बचाने के लिए तेहरान के साथ कथित रूप से एक सीक्रेट समझौता करने की कोशिश की थी."

रिपोर्ट के अनुसार, "क़तर ने ईरान को प्रस्ताव दिया था कि अगर रास लाफ़ान को निशाना नहीं बनाया जाता, तो वह खुद गैस उत्पादन रोक देगा. इससे वैश्विक ऊर्जा क़ीमतों में बढ़ोतरी होती और अमेरिका-इसराइल पर युद्ध जल्दी समाप्त करने का आर्थिक दबाव बनता."

रिपोर्ट में कहा गया है कि 'क़तर को ईरान से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला, लेकिन इसके बावजूद युद्ध के तीसरे दिन रास लफ़ान में उत्पादन रोक दिया गया.'

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, "बाद में सामने आई उपग्रह तस्वीरों में वहां किसी प्रत्यक्ष नुकसान के संकेत नहीं मिले, हालांकि क़तर ने सुरक्षा ख़तरों को इस फ़ैसले की वजह बताया."

"क़तर ने इन सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है. उसका कहना है कि ईरान के साथ किसी प्रकार की कोई सीक्रेट डील नहीं हुई और उत्पादन रोकने का फ़ैसला केवल कर्मचारियों, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए लिया गया था."

दावे पर क़तर का जवाब

वॉशिंगटन पोस्ट का नाम लेते हुए इसमें कहा गया है, "इसका उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रहे मध्यस्थता प्रयासों को नुकसान पहुंचाना, क़तर की प्रतिष्ठा को धूमिल करना और क़तर और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को कमज़ोर करना है."

"रास रास लाफ़ान एलएनजी सुविधा को बंद करने के लिए नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने को लेकर वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पूरी तरह निराधार है. संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद क़तरी अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि एलएनजी अनुबंधों पर फ़ोर्स मेज्योर (एहतियातन बंदी) घोषित करने का फ़ैसला इसलिए लिया गया क्योंकि कर्मचारियों की सुरक्षा की गारंटी अब नहीं दी जा सकती थी. यह फ़ैसला क़तर की सेना के जोखिम आकलन के बाद लिया गया था"

"क़तरएनर्जी की तथ्यों को साझा करने और राजनीतिक मामलों से दूर रहने की एक स्थापित प्रतिष्ठा है. यह संकेत देना कि क़तरएनर्जी ने जानबूझकर फ़ोर्स मेज्योर घोषित करने के कारणों को ग़लत तरीके से पेश किया, पूरी तरह अस्वीकार्य है."

"क़तर हमेशा व्यावसायिक हितों से ऊपर अपने लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा. इस फ़ैसले की दोबारा व्याख्या करने या इसे ग़लत रूप में पेश करने की कोई भी कोशिश निराधार है और पाठकों को गुमराह कर सकती है."

Açık Sorular

  • What is the true nature of UAE-Iran financial dealings?
  • Did Qatar truly strike a secret deal with Iran?
  • How will these reports affect ongoing mediation efforts?

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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