US proposes tariffs on India and 59 other countries over forced labor concerns
Hızlı Bakış
- The US Trade Representative has proposed imposing additional tariffs of 10-12.5% on India and 59 other countries.
- This action is due to their failure to effectively implement import restrictions on goods produced with forced labor, as per a Section 301 investigation.
Yapay zekâ özeti
Neden Önemli?
The US Trade Representative's Office has launched an investigation under Section 301 of the Trade Act of 1974, finding that 60 economies have failed to effectively implement import bans on goods produced with forced labor. This has led to a proposal for additional tariffs ranging from 10% to 12.5%.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत समेत 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने का प्रस्ताव क्यों दिया?
प्रकाशित 15 मिनट पहले
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अमेरिका के ट्रेड रिप्रेज़ेंटिव ने भारत समेत 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने का प्रस्ताव दिया है.
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेज़ेंटिव (यूएसटीआर) कार्यालय ने मंगलवार को सेक्शन 301 के तहत की गई जांच रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये देश वस्तुओं के उत्पादन में जबरन मज़दूरी (फ़ोर्स्ड लेबर) को समाप्त करने में विफल रहे हैं.
यह ख़बर ऐसे समय आई है, जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत के लिए अमेरिकी टीम भारत के तीन दिवसीय दौरे पर है. इस दौरे की घोषणा हाल ही में भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की थी.
यूएसटीआर के बयान के अनुसार, "अपने अधिकांश प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से होने वाले आयात पर कम से कम 10 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया गया है. इन देशों में बने सामान में जबरन मज़दूरी के इस्तेमाल की जांच के बाद यह कदम उठाया गया है."
प्रस्तावित टैरिफ़ के दायरे में चीन, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, इसराइल, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर और हांग कांग समेत कई अन्य देश शामिल हैं.
ब्लूमबर्ग के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस व्यापक टैरिफ़ व्यवस्था को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था.
ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को भारत समेत दुनिया के 100 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी.
ट्रंप ने तब कहा था कि यदि कोई देश अमेरिकी सामान पर अधिक आयात शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश से आने वाले सामान पर अधिक टैरिफ़ लगाएगा. उन्होंने इसे 'रेसिप्रोकल टैरिफ़' नाम दिया था.
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इसी साल फ़रवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ़ को अवैध ठहराया था. उस समय इसे ट्रंप प्रशासन की एक महत्वपूर्ण नीति को लगे बड़े झटके के रूप में देखा गया था.
यूएसटीआर के बयान में क्या कहा गया है?
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अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय के बयान के अनुसार, "1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह निष्कर्ष निकाला गया है कि 60 अर्थव्यवस्थाएं जबरन मज़दूरी से बने सामानों पर आयात प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही हैं."
"यह स्थिति उचित नहीं है और इससे अमेरिकी व्यापार पर बोझ पड़ता है. इसलिए इन्हें ट्रेड एक्ट की धारा 301(बी) के तहत कार्रवाई योग्य माना गया है."
इन 60 देशों से अमेरिका अपने कुल आयात का 99.40 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है.
यूएसटीआर ने 'उत्पादन में जबरन मज़दूरी से जुड़े आयात प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं की विफलता' विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने कहा, "हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन मज़दूरी से बने सामानों के आयात की समस्या का समाधान न करना स्वीकार्य नहीं है."
उन्होंने कहा, "इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी कर्मचारियों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है. हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे."
बयान के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने जांच के दायरे में आने वाली अर्थव्यवस्थाओं के सभी उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, फ़ेडरल रजिस्टर नोटिस के एनेक्स-ए में दी गई छूटें लागू रहेंगी.
किन देशों पर कितना टैरिफ़ प्रस्तावित?
अमेरिका के ट्रेड रिप्रेज़ेंटिव की रिपोर्ट के अनुसार, भारत समेत 54 देश ऐसे हैं जो जबरन मज़दूरी से पूरी तरह या आंशिक रूप से बने सामानों के आयात पर क़ानूनी प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं.
वहीं, छह देश इस क़ानूनी व्यवस्था को लागू करने में पूरी तरह असफल रहे हैं. इनमें कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ के देश, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान शामिल हैं.
जिन अर्थव्यवस्थाओं ने जबरन मज़दूरी से बने सामानों पर आयात प्रतिबंध लागू किया है, या व्यापार समझौते के तहत ऐसा करने का वादा किया है, या आंशिक व्यवस्था लागू की है, उनके लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ प्रस्तावित किया गया है.
अन्य सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ का प्रस्ताव रखा गया है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने सेक्शन 301 के तहत टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक विशेष व्यवस्था का भी प्रस्ताव दिया है. इसके तहत कुछ अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले परिधानों और कपड़ा उत्पादों की एक निश्चित मात्रा को कम टैरिफ़ दर पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा सकेगी.
अमेरिकी सरकारी एजेंसी ने कहा है कि नए टैरिफ़ तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होंगे. इन्हें लागू करने से पहले सार्वजनिक टिप्पणियां और समीक्षा आमंत्रित की जाएंगी.
सूचना के अनुसार, लिखित टिप्पणियां भेजने की अंतिम तिथि 6 जुलाई तय की गई है. वहीं, धारा 301 के तहत गठित पैनल की सार्वजनिक सुनवाई 7 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है.
भारत की प्रतिक्रिया
नए टैरिफ़ प्रस्ताव को लेकर भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, "अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने भारत समेत 60 अर्थव्यवस्थाओं के ख़िलाफ़ उन उपायों को लेकर अपनी जांच पूरी कर ली है, जो इन देशों ने कुछ वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए लागू किए हैं."
"इस जांच के आधार पर यूएसटीआर ने 1974 के अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत इन 60 देशों से होने वाले आयात पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने का प्रस्ताव दिया है."
"धारा 232 के तहत पहले से शुल्क के दायरे में आने वाले उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं को इस प्रस्तावित टैरिफ़ से बाहर रखा गया है."
Bundan Sonra Ne Olabilir?
Yapay zekâ öngörüsü — kesinlik taşımaz
Public comments and panel hearings will lead to adjustments in the proposed tariff rates or scope.
Muhtemel · Haftalar içinde
Affected countries, particularly India and China, will likely protest the tariffs and may consider retaliatory measures.
Çok muhtemel · Haftalar içinde
The US Supreme Court's previous ruling might influence the legal challenges to these new tariffs.
Olası · Aylar içinde
Açık Sorular
- Will these proposed tariffs be implemented, and if so, when?
- What specific goods will be subject to the tariffs?
- What will be the exact impact on the Indian economy and its trade with the US?
- Will there be retaliatory measures from the affected countries?
