टिहरी गढ़वाल: 17 साल के दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या का आरोप, दो गिरफ्तार
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उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 17 साल के दलित युवक केतन लाल की पीट-पीटकर हत्या का आरोप है। परिजनों का कहना है कि प्रेम प्रसंग के चलते लड़की के परिवार ने युवक और उसके दोस्त को बंधक बनाकर पीटा। पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
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उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में 17 साल के एक दलित युवक केतन लाल की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि सोमवार को युवक और उसके दोस्त को एक परिवार के लोगों ने घर में बंधक बनाकर पीटा, जिसके बाद युवक की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है।
Author, आसिफ़ अली
पदनाम, देहरादून से बीबीसी हिंदी के लिए
प्रकाशित 3 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में 17 साल के एक दलित युवक की मौत का मामला चर्चा में है.
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सोमवार को युवक और उसके दोस्त को एक परिवार के लोगों ने घर में बंधक बनाकर पीटा, जिसके बाद युवक की मौत हो गई.
पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है.
इस बीच उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस से रिपोर्ट तलब की है.
क्या है पूरा मामला?
मृतक के पिता धनपाल लाल की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि आठ जून की सुबह उन्हें एक फ़ोन कॉल आया. कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम यशवीर सिंह पंवार बताया.
एफ़आईआर में धनपाल लाल ने आरोप लगाया है कि फ़ोन करने वाले ने कहा कि उनका बेटा केतन लाल और उसका दोस्त दिवाकर डिमरी पूरी रात उनके क़ब्ज़े में रहे और उनके साथ मारपीट की गई है.
शिकायत के अनुसार, सूचना मिलने के बाद धनपाल लाल और अन्य परिजन मौक़े पर पहुंचे, जहां केतन और दिवाकर घायल अवस्था में मिले. इसके बाद दोनों को अस्पताल ले जाया गया. केतन की हालत गंभीर थी और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई.
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केतन की एक नाबालिग लड़की से दोस्ती थी. रविवार रात कथित तौर पर लड़की के फ़ोन से केतन को बुलाया गया था. केतन अपने दोस्त दिवाकर डिमरी के साथ वहां पहुंचा था. बताया जा रहा है कि यह बात लड़की के परिजनों को पता चल गई थी.
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मृतक के परिजनों का आरोप है कि इसके बाद दोनों युवकों को बंधक बनाकर पीटा गया. ज़िला पुलिस के मुताबिक़, घटनाक्रम की पूरी सचाई जांच के बाद ही सामने आएगी.
इस मामले में दो अभियुक्त गिरफ़्तार हैं, लड़की के परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाया.
पुलिस ने कहा- यह प्रेम प्रसंग का मामला है
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टिहरी गढ़वाल की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), श्वेता चौबे ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा कि यह प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला है.
उन्होंने कहा, "लड़की भी नाबालिग है. यह प्रेम प्रसंग का मामला है. दोनों के बीच फ़ोन से अच्छी-ख़ासी बातचीत होती थी. लड़की के फ़ोन से ही लड़के को फ़ोन किया गया था, जिसके बाद लड़का अपने दोस्त के साथ वहां पहुंचा था."
एसएसपी के अनुसार, जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि युवक को किसी योजना के तहत बुलाया गया था या फिर मौक़े पर दोनों को साथ देखकर लड़की के पिता ने अचानक आपा खो दिया.
पुलिस के अनुसार, धनपाल लाल की शिकायत के आधार पर थाना लंबगांव में मुकदमा अपराध संख्या 09/2026 दर्ज किया गया है.
पुलिस ने हत्या और जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर किए गए अपराध के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), धारा 3(5) तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है.
पुलिस ने बताया कि इस मामले की जांच का ज़िम्मा चंबा के क्षेत्राधिकारी महेश लखेड़ा को दिया गया है. मौक़े से वैज्ञानिक और दूसरे सबूत जुटाए गए हैं और गवाहों के बयान भी लिए जा रहे हैं.
एसएसपी श्वेता चौबे के अनुसार, अब तक लड़की के पिता यशवीर सिंह पंवार और उसके दादा विद्या सिंह पंवार को गिरफ़्तार किया जा चुका है. दोनों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
पुलिस के मुताबिक़, मृतक का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल से कराया गया है और उसकी वीडियोग्राफ़ी भी कराई गई है. मामले की जांच अभी जारी है.
परिजनों का आरोप- अनुसूचित जाति से होने के कारण हत्या की गई
केतन के पिता धनपाल लाल कहते हैं कि उनका बेटा 12वीं कक्षा का छात्र था और अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा था.
बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, "बेटे के जाने का दुख शब्दों में नहीं बताया जा सकता."
धनपाल लाल ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को अनुसूचित जाति से होने के कारण निशाना बनाया गया. उनके अनुसार, घटना वाली रात केतन रोज़ की तरह घर पर था और माता-पिता को बताकर सोने चला गया था.
धनपाल लाल कहते हैं, "उसके बाद हमें नहीं मालूम कि वह किस समय घर से निकला. मुझे लगता है कि एक सोची-समझी साज़िश के तहत लड़की से फ़ोन करवाकर मेरे बेटे को बुलाया गया था."
धनपाल लाल का आरोप है कि अगले दिन सुबह उन्हें यशवीर सिंह पंवार का फ़ोन आया. उनके मुताबिक़, फ़ोन पर कहा गया कि केतन के हाथ-पांव तोड़ दिए गए हैं.
वह बताते हैं, "मैंने उससे कहा कि तुम्हें इस तरह मारने का अधिकार किसने दिया? अगर कुछ करना भी था तो पुलिस के हवाले कर सकते थे."
धनपाल लाल का दावा है कि बातचीत के दौरान फ़ोन कॉल चालू रखा गया और उन्हें अपने बेटे की आवाज़ सुनाई दे रही थी.
उनके शब्दों में, "मेरा बेटा चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था, 'पापा मुझे आकर बचा लो.'"
धनपाल लाल कहते हैं कि जब वे मौक़े पर पहुंचे तो केतन बेहद गंभीर हालत में था.
आयोग ने लिया संज्ञान, सामाजिक कार्यकर्ता भी बोले
टिहरी की घटना पर उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दलित युवक की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी गढ़वाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.
आयोग ने पुलिस को निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
आयोग के सदस्य राजेश सिंह राजा कोली ने कहा, "अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ अत्याचार और भेदभाव के मामलों में आयोग संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ काम करेगा. दोषियों के ख़िलाफ़ कठोर क़ानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में आयोग निगरानी रखेगा."
सामाजिक संस्था 'इंसानियत मंच' से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता रवि चोपड़ा का कहना है, "समाज के किसी भी वर्ग से जुड़े व्यक्ति को मार देना अपराध है. ऐसे मामलों में न्यायपूर्ण कार्रवाई होना बेहद आवश्यक है."
रवि चोपड़ा ने कहा, "समाज के कमज़ोर वर्गों, चाहे वे जाति के आधार पर हों या धर्म के आधार पर, उनके ख़िलाफ़ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं चिंता का विषय हैं."
उन्होंने कहा, "मैं इस घटना को लेकर बेहद आहत हूं. मानवीय दृष्टिकोण से इसकी निंदा की जानी चाहिए. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी हमारे समाज में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं."
ما الذي يجب مراقبته
توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق
Further arrests may be made as the investigation progresses.
مرجح · خلال أسابيع
The case will likely see significant legal proceedings due to the invocation of the SC/ST Act.
مرجح جداً · خلال أشهر
The Uttarakhand Scheduled Caste Commission will closely monitor the investigation and ensure a fair trial.
مرجح جداً · مستمر
أسئلة مفتوحة
- क्या युवक को सोची-समझी साजिश के तहत बुलाया गया था?
- क्या लड़की के पिता ने अचानक आपा खो दिया था?
- लड़की के परिवार के अन्य सदस्यों की क्या भूमिका थी?
- क्या यह घटना पूरी तरह से प्रेम प्रसंग का मामला था या इसमें जातिगत पहलू भी शामिल था?
