पश्चिम बंगाल चुनाव हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट, 20 सांसदों के अलग गुट बनाने का दावा
نظرة سريعة
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट की खबरें आ रही हैं। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके साथ 20 लोकसभा सांसद हैं और वे नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं।
ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي
لماذا يهم
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबरें आ रही हैं। कुछ सांसद अलग गुट बनाने और दूसरी पार्टी में विलय की बात कर रहे हैं।
प्रकाशित 2 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 5 मिनट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद लोकसभा सांसदों की पार्टी छोड़कर जाने की ख़बरें छन-छन कर आ रही हैं.
तृणमूल कांग्रेस की बाग़ी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है उनके साथ पार्टी के 20 सांसद हैं. उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से सदन में अपने गुट के सांसदों को अलग बिठाने की मांग की है.
रविवार (14 जून 2026) को दिल्ली पहुंचने के बाद काकोली घोष और शताब्दी रॉय के साथ पार्टी के कुछ सांसद लोकसभा स्पीकर बिरला के घर पहुंचे थे.
इससे पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर उनसे मुलाक़ात की.
इस बीच, फ़िलहाल ममता बनर्जी के साथ देने का दावा करने वाले पार्टी सांसद कीर्ति आज़ाद और सागरिका घोष ने भी ओम बिरला के घर पहुंचकर उन्हें चिट्ठी दी. कीर्ति आज़ाद ने कहा कि संविधान के ख़िलाफ़ जाकर पार्टी में विभाजन नहीं हो सकता.
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर कहा है कि टीएमसी को सदन में सिर्फ़ एक पार्टी के तौर पर देखा जाए, किसी दूसरे गुट को मान्यता न दी जाए.
काकोली घोष दस्तीदार ने क्या कहा?
लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं. पार्टी के 13 राज्यसभा सांसदों में से चार ने इस्तीफ़ा देने के साथ पार्टी भी छोड़ दी है.
काकोली घोष दस्तीदार ने ओम बिरला से मुलाक़ात करने के बाद पत्रकारों से कहा, ''हम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के चुने हुए सांसद थे. हमने लोकसभा स्पीकर को एआईटीसी से अपनी नाराज़गी के बारे में बताया. हमने संसद में अलग से बैठने की मांग की और कहा कि नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं. हमारे साथ 20 सांसद हैं जो तृणमूल के 28 सांसदों के दो तिहाई से ज़्यादा हैं. हम एआईटीसी से अलग होकर एनडीए के साथ काम करेंगे.''
काकोली घोष दस्तीदार का साथ दे रहे पार्टी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, "हम नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी में विलय कर रहे हैं. यह क्षेत्रीय पार्टी है. एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है. अब असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फ़ैसला अदालत करेगी."
इससे पहले बाग़ी गुट की केंद्रीय मंत्री और भूपेंद्र यादव से भी उनके घर पर बैठक हुई.
समाचार एजेंसी पीटीआई की ओर से जारी वीडियो में सायोनी घोष और दूसरे सांसद भूपेंद्र यादव के घर से निकलते हुए दिखाई दिए.
बाग़ी सांसदों के बारे में कीर्ति आज़ाद ने क्या कहा
उधर, टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद और सागरिका घोष भी ओम बिरला के आवास पर पहुंचे थे.
कीर्ति आज़ाद ने कहा, ''हमने ओम बिरला जी को चिट्ठी दे दी है. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ और 10वीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 के अनुसार पार्टी में अलग गुट या विभाजन का कोई प्रावधान नहीं है. इस तरह का क़दम ग़ैर संवैधानिक है. इन लोगों ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया.''
सागरिका घोष ने कहा, ''यह बेहद शर्मनाक है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के वे नेता, जिन्होंने ममता बनर्जी के चेहरे और पार्टी के चुनाव चिह्न के सहारे चुनाव जीता आज पार्टी की हार के बाद उसे छोड़कर जा रहे हैं. आपके सिद्धांत कहाँ हैं? आपकी विचारधारा कहाँ हैं?''
उन्होंने कहा, ''आपने पूरे चुनाव अभियान में भाजपा की आलोचना की और अब सत्ता के लिए उसी के पीछे जा रहे हैं. भाजपा ने धनबल और बाहुबल के ज़रिए राजनीतिक दलों को तोड़ने का काम किया है, लेकिन असली शर्म की बात यह है कि टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने, जिनमें कई बार चुने गए जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं, भाजपा में शामिल होने के लिए अपने मूल्यों से समझौता कर लिया. जनता सब कुछ देख रही है. उसे सब याद रहता है और वह समय आने पर इसका जवाब भी देगी."
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी में कहा कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले गुट को अलग न बैठने दिया जाए, इसे सदन में एक ही राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी जाए.
"तृणमूल कांग्रेस के पास इस समय सभी क़ानूनी अधिकार मौजूद हैं. इनमें संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत उचित कार्रवाई करने का अधिकार शामिल है. अगर किसी सांसद का आचरण इन प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो पार्टी उसके ख़िलाफ़ ज़रूरी क़ानूनी कदम उठा सकती है.''
तृणमूल कांग्रेस में टूट का सिलसिला
तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से पहले ही 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ चले गए हैं.
ये गुट ममता के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का विरोध कर रहा है.
पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि 28 में से 20 सांसद उनके साथ हैं.
पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की 35 साल तक चली सरकार को हटाकर सत्ता में आईं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 15 सालों तक प्रदेश में शासन किया.
हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रही है.
पार्टी के नेता एक-एक कर साथ छोड़ रहे हैं. पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ विधानसभा में बग़ावत हुई उसके बाद राष्ट्रीय नेताओं में इस्तीफ़े का सिलसिला शुरू हुआ.
कोलकाता मेयर और ममता के एक और क़रीबी नेता फिरहाद हकीम ने मेयर के बाद से इस्तीफ़ा दे दिया. ममता बनर्जी के घर हुई बैठक में उन्होंने खुद इस्तीफ़े की पेशकश की थी.
राज्यसभा में पार्टी की सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है.
सुष्मिता देव से पहले टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.
ما الذي يجب مراقبته
توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق
तृणमूल कांग्रेस के भीतर और अधिक सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं।
مرجح · خلال أسابيع
यह मामला अदालत तक जा सकता है, जिससे पार्टी की स्थिति और स्पष्ट होगी।
مرجح جداً · خلال أشهر
أسئلة مفتوحة
- क्या काकोली घोष दस्तीदार का दावा सही है?
- क्या यह विभाजन पार्टी को और कमजोर करेगा?
- अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाएगी?
