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رجوعराम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी: क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?
राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी: क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?
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BBC हिंदी15‏/6‏/2026سياسة7 د قراءةIndia

राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी: क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?

نظرة سريعة

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाया है। यूपी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है, लेकिन विपक्षी पार्टियां सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से जांच की मांग कर रही हैं।

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अयोध्या: राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी का क्या है पूरा मामला, अब तक क्या-क्या हुआ?

Author, गौरव गुलमोहर

पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

प्रकाशित 6 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है.

बीती सात जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े करोड़ों रुपये ग़ायब होने का आरोप लगाया था.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि 'राम मंदिर' के चढ़ावे की करोड़ों की रक़म ग़ायब पाई गई है."

वहीं अयोध्या के ज़िलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो भी आरोप लगाए गए हैं, उनके संबंध में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. मामले की जांच जारी है. जांच पूरी होने के बाद संबंधित तथ्यों और जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएगा."

इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चंदा विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. एसआईटी में आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. यह विशेष जांच दल (एसआईटी) सोमवार को अयोध्या पहुंच गया.

उधर विपक्षी पार्टियों ने एसआईटी पर अविश्वास जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से जांच कराने की मांग की है.

जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपेगी.

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर के चढ़ावे या चंदे में हेरफेर को लेकर स्थानीय स्तर पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.

अयोध्या से समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री व पूर्व विधायक पवन पांडेय ने बीबीसी हिंदी से कहा, "यह लूट कोई नई नहीं है. जब से यह ट्रस्ट (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र) बना है तब से भ्रष्टाचार चल रहा है."

उन्होंने कहा, "पहले ट्रस्ट की ज़मीन का घोटाला सामने आया था और बाद में महीपाल सिंह जो चढ़ावे की रक़म की गिनती करवाते थे. उन्होंने चढ़ावे की रक़म की चोरी की शिकायत की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. हम अयोध्यावासी हैं, हम देख रहे हैं जो मंदिर में दस-पंद्रह हज़ार की नौकरी करते थे वो क्या से क्या हो गए."

लेकिन इस बार यह मामला तब राजनीतिक बहस का विषय बन गया जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि 'राम मंदिर' के चढ़ावे की करोड़ों की रक़म ग़ायब पायी गई है. ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है. कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है. न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है. सरकार की चुप्पी संदिग्ध है."

उसी दिन अखिलेश यादव ने एक्स पर दूसरा पोस्ट करते हुए लिखा, "ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठाकर स्पष्टीकरण दिया जाए और आंकड़ों के मिलान के लिए सीसीटीवी के साक्ष्य का सहारा लिया जाए. जैसे ही सारे ट्रस्टी एक साथ बैठेंगे तो सच तत्काल बाहर आ जाएगा क्योंकि उनमें हर कोई एक जैसा नहीं है. इस हेराफेरी की शंका के केंद्र में जब कोई एक व्यक्ति विशेष है ही नहीं तो फिर किसी एक के स्पष्टीकरण का क्या महत्व है."

पिछले नौ दिनों में अखिलेश यादव राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर अपने एक्स हैंडल पर लगातार आठ पोस्ट कर चुके हैं.

स्थानीय भाजपा नेता रजनीश सिंह ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाई गई समर्पण निधि की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की है.

वहीं दूसरी ओर राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने भी पत्रकारों से चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी को गंभीर मामला बताया है.

विनय कटियार ने कहा, "यह गंभीर मामला है. इस पर लोग बलिदान हुए हैं. हमारे और कल्याण सिंह जैसे लोग जेल गए हैं. कल्याण सिंह ने इस्तीफ़ा दिया था. इस समय जितने हैं सब चोर हैं. इनकी छुट्टी विनय कटियार करेगा. ये दो दिन के अंदर या तो भाग जाएंगे या जेल के अंदर जाएंगे."

विपक्ष का एसआईटी पर अविश्वास

आधिकारिक जानकरी के अनुसार 'श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट' के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है.

तीन सदस्यों की टीम तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर शासन को अपनी रिपोर्ट देगी.

वहीं दूसरी ओर अयोध्या के समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले की जांच उच्च न्यायालय से कराने की मांग की है.

अवधेश प्रसाद ने पत्रकारों से कहा, "यह लूट राष्ट्र की सबसे बड़ी लूट है. यह प्रभु श्री राम के मंदिर की लूट है. इसकी ऊंचे स्तर पर जांच होनी चाहिए. उच्चतम न्यायालय द्वारा एक टीम गठित की जाए और वह टीम जांच करे. उसके पहले ट्रस्ट के सभी सदस्य को सस्पेंड कर दिया जाए. जिससे जांच किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो सके. यह धर्म की हानि है."

सपा सरकार में पूर्व मंत्री व विधायक पवन पांडेय ने बीबीसी से कहा, "पहले लेखाधिकारी महिपाल ने चंपत राय से लेकर अनिल मिश्रा से दान के पैसे में हेरफेर की शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसका मतलब है कि यह लूट लगातार चल रही थी."

"मंदिर के भीतर काम करने वालों के पास दो वर्ष के अंदर कई प्लॉट और ज़मीनें हो गईं, आख़िर दो वर्ष में ऐसा कौन सा कारोबार कर लिया कि इतना कुछ हो गया? सरकार एसआईटी से जांच करा रही है, भगवान जाने क्या होगा. प्रभु श्री राम स्वयं अपनी रक्षा करें."

पूर्व लेखा प्रभारी ने क्या बताया?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महिपाल सिंह जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी रहे हैं. राम मंदिर में चढ़ावे की रक़म की गिनती उनकी निगरानी में होती थी.

उन्होंने राम मंदिर के दान में गड़बड़ी का आरोप लगाया है.

महिपाल सिंह के मुताबिक़, उन्होंने जब चढ़ावे की रक़म में कथित गड़बड़ी की शिकायत कार्यालय की साप्ताहिक बैठक में की तो उनकी जगह अन्य लेखा प्रभारी की नियुक्ति कर दी गई, जिसके बाद उन्होंने स्वयं इस व्यवस्था से दूरी बना ली.

जब बीबीसी हिंदी ने महीपाल सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने अपनी जान का ख़तरा बताकर बात करने से इनकार कर दिया.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, "मुझे जान से मारने की धमकी मिली है. मैं बेहद दबाव और तनाव में हूँ. मैं कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हूँ. मैंने अभी तक पब्लिक में जो कुछ कहा है, उसी को आप मेरी बात मान लीजिए."

महीपाल सिंह ने एक यूट्यूब चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में कहा, "हमारी साप्ताहिक बैठक कार्यालय में गोपाल भाई साहब लिया करते थे. गोपाल भाई साहब चंपत राय के बाद सेकेंड पोज़िशन पर हैं. जब मैंने गोपाल भाई साहब को चढ़ावे में गड़बड़ी की बात बताई तो दूसरे दिन मेरे स्थान पर अनिल मिश्र (ट्रस्ट के सदस्य) ने मेरे स्थान पर किसी और को बैठा दिया."

पूर्व लेखा प्रभारी महीपाल सिंह ने इसी इंटरव्यू में चढ़ावे की रक़म के अलावा चढ़ावे की धातुओं में भी गड़बड़ी की बात कही है.

ट्रस्ट का क्या कहना है?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर चढ़ावे में किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है.

उन्होंने वीडियो में कहा है, "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अपने भिन्न-भिन्न कार्यों का ऑडिट समय-समय पर करता रहता है. हुंडी (दान पेटी) काउंटिंग कमरे का भी ऑडिट होता है. हुंडी काउंटिंग कमरे का ऑडिट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासीगण, कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी मिलकर करते हैं. यह कार्य कई दिनों तक चलता है. यही कार्य आजकल हो रहा है. कोई भी उल्लेखनीय बात किसी के भी ध्यान में अभी तक नहीं आई है."

हमने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के वर्तमान चौदह सदस्यों में एक डॉक्टर अनिल मिश्रा से बात करने की कई बार कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नौ जून को एक्स पर पोस्ट कर कई बिंदुओं पर जांच की मांग की है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "कौन है इन सबके पीछे, जो देश की सनातनी आस्था से खिलवाड़ कर रहा है? ⁠चढ़ावे में चोरी का पाप करने वालों को कौन बचा रहा है? ⁠इस अपराध के तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं और कितनी दूर तक जाते हैं? कौन ऐसा अधर्मी है, जिसके हाथ में इस पूरे कांड की लगाम है? इस घपले का सरगना कहाँ छिपा बैठा है?"

भाजपा नेता और कई बार के सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के सवाल पर पत्रकारों से बात करते हुए "बड़े लोगों से डरने" की बात कही है.

बृजभूषण शरण सिंह के बयान को ट्रस्ट के सदस्यों के ताक़तवर होने से जोड़कर देखा जा रहा है.

बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से कहा, "अगर मैं सत्य बोल दूंगा तो बहुत परेशानी में आ जाऊंगा क्योंकि वो (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) बहुत बड़े लोग हैं. सत्य बोलने की हिम्मत अभी हमारी नहीं है. कभी समय आएगा तो बोलेंगे."

रजनीश सिंह ने बीबीसी हिंदी से कहा, "रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू चंपत राय का कई सालों से ड्राइवर है. कोई राम मंदिर में एक कलम लेकर अंदर नहीं जा सकता है लेकिन टिन्नू की गाड़ी के अंदर कुछ भी रहे बिना चेक हुए अंदर तक जाती थी. इस लूट में टिन्नू के अलावा उसका भतीजा मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनिल मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अवनीश मिश्रा जैसे कई नाम हैं. सबके पास करोड़ों की संपत्ति हो गई है जिसकी जांच होनी चाहिए. एक चेन है उसकी ये लोग कड़ी हैं. किसी सहयोगी को पकड़ने से कोई निष्कर्ष निकलने वाला नहीं है. इसके सरगना को पकड़ना ज़रूरी है."

हालाँकि उन्होंने यह भी कहा, "जो सवाल उठे हैं, वे निश्चित रूप से गंभीर हैं और उन्हें लेकर राम भक्तों में चिंता है. इन सवालों के समाधान के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है. हमें उम्मीद है कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट में तथ्यों को सामने लाएगी. अगर जांच में किसी व्यक्ति की ओर से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी."

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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