عاجل
DEZwei Tote und drei Schwerverletzte bei schwerem Unfall auf der B6KR교원 3단체, 교육교부금 개편 논의 중단 촉구… "재정 축소 명분 안 돼"RUIran Vows Response to US Aggression Over Strait of HormuzKRPower outage causes major delays on Seoul Subway Line 1CN铁路旅游计次票助力暑期出行 优惠活动丰富多样ARارتفاع أسعار النفط وسط تصاعد التوترات في الشرق الأوسط وبيانات تجارية أميركيةCNAnthropic Claude Cowork 擴展至手機與網頁版RUЦены на аренду квартир в Бейруте выросли на 20-30% из-за конфликта с ИзраилемCN世足賽16強熱度飆升,玩運彩資深玩家創10戰全勝紀錄CN銀泰佶公司涉嫌詐貸、販售股票 負責人林室融等11人遭起訴DEZwei Tote und drei Schwerverletzte bei schwerem Unfall auf der B6KR교원 3단체, 교육교부금 개편 논의 중단 촉구… "재정 축소 명분 안 돼"RUIran Vows Response to US Aggression Over Strait of HormuzKRPower outage causes major delays on Seoul Subway Line 1CN铁路旅游计次票助力暑期出行 优惠活动丰富多样ARارتفاع أسعار النفط وسط تصاعد التوترات في الشرق الأوسط وبيانات تجارية أميركيةCNAnthropic Claude Cowork 擴展至手機與網頁版RUЦены на аренду квартир в Бейруте выросли на 20-30% из-за конфликта с ИзраилемCN世足賽16強熱度飆升,玩運彩資深玩家創10戰全勝紀錄CN銀泰佶公司涉嫌詐貸、販售股票 負責人林室融等11人遭起訴
Newsgather
Backममता बनर्जी को टीएमसी के बाग़ी विधायकों ने अध्यक्ष पद से हटाया, जानिए अब उनके पास क्या हैं विकल्प
ममता बनर्जी को टीएमसी के बाग़ी विधायकों ने अध्यक्ष पद से हटाया, जानिए अब उनके पास क्या हैं विकल्प
يتطور
BBC हिंदी23.06.2026سياسة6 dk okumaIndia

ममता बनर्जी को टीएमसी के बाग़ी विधायकों ने अध्यक्ष पद से हटाया, जानिए अब उनके पास क्या हैं विकल्प

نظرة سريعة

तृणमूल कांग्रेस के बाग़ी विधायकों ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया और अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुना। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि पार्टी का भविष्य अदालती फैसलों पर निर्भर करेगा।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

لماذا يهم

तृणमूल कांग्रेस के बाग़ी विधायकों ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया और अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुना। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा झटका माना जा रहा है।

حجم الخط

ममता बनर्जी को टीएमसी के बाग़ी विधायकों ने अध्यक्ष पद से हटाया, जानिए अब उनके पास क्या हैं विकल्प

प्रकाशित 4 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की संस्थापक ममता बनर्जी हैं लेकिन यह पार्टी अब उनके नियंत्रण से दूर होती दिख रही है.

तृणमूल कांग्रेस के बाग़ी विधायकों ने सोमवार को कोलकाता में हुई बैठक में पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया.

विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि पूर्व मंत्री अरूप रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है.

विधायक संदीपन साहा, जावेद ख़ान और ऋतब्रत बनर्जी को महासचिव घोषित किया गया. पूर्व कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम, पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और रथिन घोष को बाग़ी गुट का उपाध्यक्ष बनाया गया जबकि रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमान को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया.

ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "हमने चुनाव आयोग के सभी नियमों का पालन किया है. हम इस घटनाक्रम की जानकारी चुनाव आयोग को भी देंगे. सब कुछ क़ानूनी तरीक़े से किया गया है."

जब उनसे पूछा गया कि ममता बनर्जी अब भी तृणमूल की अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी महासचिव हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्हें कालीघाट में हो रहे घटनाक्रम से कोई मतलब नहीं है. उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है.

कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी का आवास है.

उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कालीघाट से क्या घोषणा हुई है. वहाँ लोगों की नियुक्तियां हो रही हैं, लेकिन अगले ही दिन उनके इस्तीफ़े की ख़बर भी आ रही है. उनके बारे में चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है."

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

विधायक, सांसद बिछड़ रहे हैं बारी-बारी

महाराष्ट्र में जैसे शिव सेना ठाकरे परिवार के पास नहीं रही, पश्चिम बंगाल में टीएमसी के साथ भी वैसा ही होता दिख रहा है. अभी शिव सेना की कमान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है लेकिन वह बाल ठाकरे की तस्वीर अपनी पार्टी की बैठकों में ज़रूर लगाते हैं. शिंदे बाल ठाकरे की विरासत पर अपना दावा करते हैं.

लेकिन पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बाग़ी गुट ने सोमवार को ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं लगाई.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बेलेघाटा विधायक और ममता बनर्जी के क़रीबी कुणाल घोष ने इन घटनाक्रमों को हास्यास्पद बताया. उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी के बिना तृणमूल कांग्रेस की कल्पना नहीं की जा सकती."

कुणाल घोष ने कहा, "यह एक कॉमेडी शो है. जिस व्यक्ति को तृणमूल से निकाला जा चुका है, वही विशेष सत्र बुला रहा है. मामला अदालत में है और हमें विश्वास है कि न्याय मिलेगा. हम ऐसे हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते. तृणमूल मतलब ममता बनर्जी. बाक़ी सब सर्कस है."

तृणमूल कांग्रेस की स्थापना ममता बनर्जी ने 1998 में की थी. पार्टी ने 2011 में 34 साल पुराने लेफ्ट फ्रंट शासन को हराकर सत्ता हासिल की थी. 2026 विधानसभा चुनाव में तृणमूल की बीजेपी से हार के बाद पार्टी में बग़ावत शुरू हुई.

तीन जून को पार्टी के 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने के उनके दावे का समर्थन किया था. ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि अब उनका समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है.

विधानसभा में तृणमूल के 80 विधायकों में से 14 ने ममता बनर्जी के समर्थन में अपना रुख़ स्पष्ट किया है जबकि एक विधायक जेल में हैं. लोकसभा में भी पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होने का फ़ैसला किया है और एक अलग गुट बना लिया है.

इन 20 सांसदों ने एक नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया है और केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला किया है. नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया एक अनजान सी पार्टी है.

ममता के लिए बहुत बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल के इस घटनाक्रम पर वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सायंतन घोष मानते हैं कि यह ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका है.

घोष ने एक्स पर लिखा है, ''बंगाल के इस विश्वासघात के दौर में सबसे बड़ा नाम फिरहाद हकीम का है. बाग़ी गुट की बैठक अब तक ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकती है. यह सिर्फ़ कुछ विधायकों की बैठक नहीं थी. इसमें पार्षद, विधायक और संगठन के ऐसे नेता शामिल हुए, जिनका ज़मीनी स्तर पर वास्तविक प्रभाव है.''

''देबाशीष कुमार जैसे नेता सिर्फ़ नाम नहीं हैं, आज भी उनकी ज़मीन पर पकड़ और समर्थन मौजूद है. यही बात इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है. हालांकि दोनों गुटों के लिए असली अग्निपरीक्षा कोलकाता नगर निगम चुनाव होंगे. वही चुनाव तय करेंगे कि संगठनात्मक ताक़त ममता बनर्जी के साथ है या उन बाग़ियों के साथ, जो ख़ुद को ज़मीनी कार्यकर्ताओं की असली आवाज़ बता रहे हैं.''

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

टीएमसी की कमान किसके पास होगी, यह मामला अब अदालत में है. ममता बनर्जी के गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट में ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने के फ़ैसले को चुनौती दी थी. दरअसल, ममता बनर्जी ने शोभनदेब चटोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के लिए नामित किया था लेकिन विधायकों का समर्थन ऋतब्रत के साथ था.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी गुट को अंतरिम राहत नहीं दी थी. हालांकि अदालत ने सभी पक्षों से हलफ़नामा मांगा है ताकि इस बड़े सवाल की जांच की जा सके कि विपक्ष के नेता को मान्यता देने में स्पीकर ने अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर काम किया या नहीं.

ममता बनर्जी समर्थक खेमे के कुछ विधायकों में शामिल मदन मित्रा ने द क्विन्ट से कहा, "हम इन सभी क़दमों को अदालत में चुनौती देंगे."

उनका कहना है कि असली पार्टी ऑर्गेनाइजेशनल पार्टी है, न कि विधायक दल. मित्रा का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपनी पार्टी संरचना के अनुसार, अध्यक्ष-केंद्रित पार्टी है.

मदन मित्रा ने कहा कि पार्टी संविधान में साफ़ लिखा है कि अध्यक्ष के पास सभी मामलों में अंतिम अधिकार है. यह संविधान चुनाव आयोग के पास विधिवत जमा है.

पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष एसोसिएशन बॉडी के सर्वोच्च होंगे. उनके पास राष्ट्रीय कार्यसमिति में बहुमत सदस्यों को नामित करने, पदाधिकारियों की संख्या तय करने और चुनावी भागीदारी समेत राष्ट्रीय एजेंडा निर्धारित करने का अधिकार है.

क्या हैं विकल्प

19 जून को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के ममता समर्थक गुट के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाक़ात की और अलग हुए 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी. अभिषेक, ममता बनर्जी के भतीजे और राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं साथ ही पार्टी महासचिव हैं. इस दौरान सांसद सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा भी उनके साथ थे.

उन्होंने दलील दी कि किसी राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार है. उनका कहना था कि अलग ब्लॉक बनाना या किसी अन्य पार्टी में शामिल होना भी स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने के बराबर है.

इसके अलावा, किसी दूसरी पार्टी में विलय तभी वैध माना जाएगा, जब मूल राजनीतिक दल यानी संगठनात्मक पार्टी के दो-तिहाई सदस्य विलय का फ़ैसला लें.

अभिषेक बनर्जी ने तर्क दिया कि वैध विलय के लिए पूरे राजनीतिक संगठन के दो-तिहाई समर्थन की ज़रूरत होती है, जिसमें राष्ट्रीय समिति, राज्य समितियां, फ्रंटल संगठन और पार्टी पदाधिकारी शामिल हैं.

हालांकि, संविधान की दसवीं अनुसूची में यह तय नहीं है कि स्पीकर को दलबदल या अयोग्यता याचिकाओं पर कितने समय में फ़ैसला लेना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्पीकर को उचित समय के भीतर फ़ैसला लेना चाहिए.

अभिषेक बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, "हमने स्पीकर से इस मामले पर जल्द से जल्द फ़ैसला देने का अनुरोध किया है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में सामान्यतः तीन से चार महीने के भीतर निर्णय होना चाहिए."

चुनाव चिह्न किसे मिलेगा?

ममता बनर्जी गुट के लिए चुनाव चिह्न की लड़ाई भी आसान नहीं होगी. चुनाव चिह्न के मामले में अक्सर उसी गुट को बढ़त मिली है, जिसके पास विधायकों या सांसदों का बहुमत रहा है.

जुलाई 2022 में शिव सेना के एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग का रुख़ किया था. उन्होंने अपने गुट को असली शिव सेना के रूप में मान्यता देने और पार्टी के आधिकारिक धनुष-बाण चुनाव चिह्न की मांग की थी.

चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के पक्ष में फ़ैसला दिया. इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को अपनी पार्टी का नाम बदलकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) या शिवसेना (यूबीटी) रखना पड़ा और नया चुनाव चिह्न मशाल मिला.

2023 में ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इस मामले की सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है और जुलाई में फिर शुरू होने की उम्मीद है.

इस बीच ठाकरे गुट को 2024 लोकसभा चुनाव और उसके छह महीने बाद विधानसभा चुनाव नए नाम और नए चिह्न के साथ लड़ना पड़ा.

इसी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार भी अपनी ही पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न अपने भतीजे अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट से हार गए. इस मामले की सुनवाई भी शिव सेना विवाद के साथ होने की संभावना है. शरद पवार को भी 2024 के दोनों बड़े चुनाव नए चिह्न के साथ लड़ने पड़े.

तृणमूल नेता और पूर्व पार्टी कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के संसदीय और विधायी गुटों में हुए विभाजन की जानकारी दी थी. उन्होंने पार्टी के खातों से होने वाले सभी वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने की मांग की थी.

ما الذي يجب مراقبته

توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق

  • चुनाव आयोग और अदालतें पार्टी के भविष्य और चुनाव चिह्न पर निर्णय लेंगी।

    مرجح · خلال أشهر

  • पार्टी में और अधिक विभाजन हो सकता है।

    محتمل · خلال أسابيع

أسئلة مفتوحة

  • चुनाव चिह्न किसे मिलेगा?
  • अदालत का अंतिम फैसला क्या होगा?
  • पार्टी का भविष्य क्या होगा?

مواضيع ذات صلة

This article was originally published by BBC हिंदी.

أخبار ذات صلة

गुजरात: हाईकोर्ट की फटकार के बाद बेघर हुए नासिरनगर के लोगों को घर मिलने की उम्मीद
يتطور·1 sa önce

गुजरात: हाईकोर्ट की फटकार के बाद बेघर हुए नासिरनगर के लोगों को घर मिलने की उम्मीद

गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को गैरकानूनी तरीके से तोड़े गए मकानों के पीड़ितों के लिए आवास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। 30 मई को 100 से अधिक कच्चे मकानों को तोड़ा गया था, जिससे लोग बेघर हो गए थे।

BBC हिंदी
المزيد حول هذا الموضوعममता बनर्जी