عاجل
FRPerturbations sur le RER A après un vol de câbles électriquesFRUn nouvel incendie de forêt se déclare au sud-est d'Athènes, attisé par de forts ventsCRYPTO-FRLe Sénat américain adopte une loi de sanctions contre la Russie ciblant les cryptomonnaiesFRMali : au moins dix militaires tués dans une attaque jihadiste à SanFRLa Russie affirme avoir abattu 456 drones ukrainiens lors d'attaques nocturnes faisant plusieurs mortsFRIncendies en France : le feu fixé en Lozère, progresse dans la Drôme, un suspect écrouéFRLa fintech Revolut obtient une licence bancaire en FranceFRUne éclipse solaire partielle visible en France le 12 aoûtFRPerpignan : cinq policiers blessés après un refus d'obtempérer et un choc frontal sur la RD 900FRDe faux sites de streaming et escroqueries en ligne surfent sur la sortie du film L'OdysséeFRPerturbations sur le RER A après un vol de câbles électriquesFRUn nouvel incendie de forêt se déclare au sud-est d'Athènes, attisé par de forts ventsCRYPTO-FRLe Sénat américain adopte une loi de sanctions contre la Russie ciblant les cryptomonnaiesFRMali : au moins dix militaires tués dans une attaque jihadiste à SanFRLa Russie affirme avoir abattu 456 drones ukrainiens lors d'attaques nocturnes faisant plusieurs mortsFRIncendies en France : le feu fixé en Lozère, progresse dans la Drôme, un suspect écrouéFRLa fintech Revolut obtient une licence bancaire en FranceFRUne éclipse solaire partielle visible en France le 12 aoûtFRPerpignan : cinq policiers blessés après un refus d'obtempérer et un choc frontal sur la RD 900FRDe faux sites de streaming et escroqueries en ligne surfent sur la sortie du film L'Odyssée
Newsgather
رجوعडैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाते बच्चों के वायरल वीडियो के बाद क्या बदला
डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाते बच्चों के वायरल वीडियो के बाद क्या बदला
يتطور
BBC हिंदीقبل 14 ساعةEducation5 د قراءةIndia

डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाते बच्चों के वायरल वीडियो के बाद क्या बदला

मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले में स्कूली बच्चों का स्टॉप डैम पार करने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने रेलिंग लगवाई है और स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए हैं।

نظرة سريعة

मध्य प्रदेश के विदिशा में स्कूली बच्चों द्वारा जान जोखिम में डालकर डैम पार करने का वीडियो वायरल होने के बाद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और हाई कोर्ट के संज्ञान लेने पर प्रशासन ने रेलिंग लगवाई और स्कूल की नई व्यवस्था की घोषणा की।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

لماذا يهم

विदिशा जिले के पलोह गांव में स्कूली बच्चों द्वारा जान जोखिम में डालकर स्टॉप डैम पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।

حجم الخط

डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाते बच्चों के वायरल वीडियो के बाद क्या बदला - ग्राउंड रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले के एक स्टॉप डैम के पिलर्स को पार करने के लिए जोखिम भरी छलांग लगाते हुए कुछ स्कूली बच्चों का वीडियो पिछले हफ़्ते सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.

जिले के पलोह गांव में बने इस डैम को स्कूली बच्चों के जोखिम उठाकर पार करने का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक सक्रिय हो गए. प्रशासन ने स्टॉप डैम पर अब लोहे की रेलिंग लगवा दी है.

साथ ही, गांव में ही नौवीं और दसवीं तक की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा हुई है. जिन बच्चों को पहले आगे की पढ़ाई के लिए नदी पार करनी पड़ती थी, उनका दाख़िला पास के बंधेरा गांव के हाई स्कूल में कराने का फ़ैसला भी लिया गया.

लेकिन जब बीबीसी की टीम इस गांव में पहुंची तो ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने बताया कि भले ही यह वीडियो एक हफ़्ते पहले वायरल हुआ हो लेकिन यहां के बच्चे पिछले 7-8 सालों से ऐसे ही जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे थे.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सात जुलाई को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं.

यह मामला बीते बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के संज्ञान में आ चुका है. हाई कोर्ट ने भी प्रशासन से निरीक्षण रिपोर्ट तलब करते हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत जरूरी क़दम उठाने के निर्देश दिए थे.

इन कार्रवाइयों के बीच बीबीसी ने जब मौके पर जाकर बात की तो डैम पार करके स्कूल जाने को मजबूर रहे कई विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए.

स्टॉप डैम के किनारे खड़े 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र देव शर्मा साल भर पुराने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हैं जिसके लिए उन्हें नदी के पार जाना पड़ता था.

उन्होंने कहा, "मैंने भी नौवीं और दसवीं की पढ़ाई इसी हाई स्कूल से की है. तब मैं भी इसी डैम के पिलरों पर छलांग लगाकर स्कूल जाता था. करीब चार फीट की छलांग लगानी पड़ती थी."

विदिशा के एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बीबीसी से कहा, "इस संबंध में पहले कोई जानकारी नहीं थी. वीडियो आने के बाद बच्चों का दाखिला पास के बंधेरा गांव के हाई स्कूल में कराया गया है."

साथ ही उन्होंने कहा, "स्टॉप डैम पर रेलिंग लगाई गई है ताकि ग्रामीण और बच्चे आवश्यकता पड़ने पर इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से पार कर सकें."

वायरल वीडियो में दिख रहे छात्रों में केशव गुर्जर भी शामिल थे. 10वीं कक्षा में पढ़ रहे केशव डैम से एक किलोमीटर दूर और 11वीं में पढ़ने वाले देव शर्मा के घर के सामने रहते हैं.

जब हमने उनसे पूछा कि क्या वह भी उस वीडियो में थे?

तो उन्होंने कहा, "जी, वीडियो में मैं भी था. मेरे अलावा चार लड़कियां थीं और भी बाकी स्कूल के ही स्टूडेंट थे. हम लोग स्कूल जा रहे थे, तभी किसी ने वीडियो बना लिया."

यह पूछने पर कि आख़िर बच्चे इतने ख़तरनाक रास्ते से क्यों जाते थे? केशव अपने मासूम से चेहरे के साथ बोलते हैं, "मजबूरी है भैया".

केशव ने कहा, "सड़क वाले रास्ते से जाएं तो करीब 15 किलोमीटर जाना पड़ता है और 15 किलोमीटर वापस आना पड़ता है. इतनी दूर साइकिल से जाएंगे तो कैसे पढ़ाई होगी?"

"और अगर साइकिल में दिक़्क़त हो जाए तो और परेशानी होगी. इसलिए हम लोग समय बचाने के लिए डैम वाले रास्ते से जाते थे."

चार किलोमीटर दूर बंधेरा गांव की रहने वाली ऋचा गिरि गोस्वामी बताती हैं कि यह सिर्फ़ उनकी पीढ़ी की कहानी नहीं है.

वह कहती हैं, "हमारे बड़े भाई, बहन और उनसे पहले वाले भी इसी रास्ते से जाते रहे हैं. करीब 10-12 साल से सभी लोग इसी डैम से होकर स्कूल जा रहे थे."

ऋचा कहती हैं, "जिस रास्ते ने पूरे देश का ध्यान एक वायरल वीडियो के जरिए खींचा, हमारे लिए तो वह रोज़मर्रा की ज़िंदगी थी. और हमसे पहले जो पढ़ने गए, उनके लिए भी."

गांव के लोगों का कहना है कि मिडिल स्कूल के बाद सबसे बड़ी समस्या आगे की पढ़ाई की थी.

पलोह में उस समय हाई स्कूल नहीं था. बच्चों को या तो विदिशा शहर जाना पड़ता या फिर बेतवा नदी के उस पार स्थित स्कूल में दाखिला लेना पड़ता.

केशव के पिता तरुवर सिंह गुर्जर बताते हैं कि परिवार ने दूसरा विकल्प क्यों चुना.

वह कहते हैं, "मुख्य समस्या यह थी कि मिडिल स्कूल के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को विदिशा शहर जाना पड़ता था. वहां जाने के लिए पहले रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है और उसके बाद दो हाईवे भी पार करने पड़ते हैं."

वे आगे कहते हैं, "निजी स्कूल में पढ़ाने की हमारी आर्थिक हालत स्थिति नहीं थी. इसलिए हमने बच्चों का दाखिला बेतवा नदी के उस पार पलोह के हाई स्कूल में कराया. यह जानते हुए कि वहां जाने के लिए इस स्टॉप डैम के पिलरों पर छलांग लगाकर नदी पार करनी पड़ती थी."

ग्रामीणों का दावा है कि यह समस्या प्रशासन तक पहले भी पहुंचाई गई थी.

छात्र देव शर्मा ने एसडीएम और अन्य अधिकारियों समेत ग्राम सरपंच के सामने कहा, "मैंने सरपंच से कई बार शिक़ायत की थी कि यहां कोई रेलिंग या व्यवस्था कर दी जाए ताकि बच्चों को छलांग न लगानी पड़े. चार-पांच बार शिक़ायत की. मेरे साथ जाने वाले बच्चों ने भी कई बार कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. हमारी बात को अनदेखा कर दिया गया."

हालांकि, मौजूदा सरपंच पूजा अहिरवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले को आगे नहीं बढ़ाया.

वह कहती हैं, "मैंने आगे किसी से नहीं कहा. मुझसे पहले भी सरपंच थे, उन्होंने भी कुछ नहीं किया. इसलिए हमने ज़्यादा आगे कोशिश नहीं की. बारिश के समय तो बच्चे इस रास्ते से जाते भी नहीं थे."

पलोह में वायरल वीडियो के बाद कुछ बदलाव जरूर हुए हैं. लेकिन यह सिर्फ़ एक गांव की कहानी नहीं है.

मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में राज्य के बदहाल शिक्षा व्यवस्था की तस्वीरें सामने आती रही हैं.

विदिशा से करीब 120 किलोमीटर दूर सागर ज़िले के रहली विकासखंड का बेलखेड़ी कलां गांव से भी ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है.

बारिश के दिनों में यहां के बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है.

पानी बढ़ने पर बच्चे कपड़े संभालते हुए, एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करते हैं. गांव के लोगों का कहना है कि यह स्थिति हर मानसून में बनती है.

इस मामले के सामने आने के बाद रहली जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रवि पाटीदार ने कहा कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है.

उन्होंने कहा, "इस संबंध में हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. मौके का निरीक्षण कराया जाएगा और जो भी आवश्यक होगा, उसके आधार पर आगे व्यवस्था की जाएगी."

और सागर से करीब 300 किलोमीटर दूर मंडला ज़िले में तस्वीर थोड़ी अलग है.

मंडला ज़िले की सिंघनपुरी पंचायत में छोटे बच्चों की कक्षाएं पिछले कई वर्षों से गाय के तबेले में लग रही हैं. पक्के स्कूल भवन के अभाव में बच्चे उसी अस्थायी जगह पर पढ़ाई करते हैं.

गांव के सरपंच प्रताप सिंह मरावी बताते हैं कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई.

वह कहती हैं, "मैंने ग्राम पंचायत से लेकर जनसुनवाई तक आवेदन दिए हैं. करीब पांच साल हो गए, लेकिन अभी तक कोई अधिकारी देखने नहीं आया. वहां भवन भी नहीं बना है. मेरा प्रयास यही है कि स्कूल का भवन बने, क्योंकि वहां स्थिति काफ़ी गंभीर है."

मंडला जिला प्रशासन का कहना है कि अब इस मामले में कार्रवाई शुरू हो चुकी है.

मंडला के कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे कहते हैं, "यह मामला संज्ञान में आया था. उसके बाद पत्राचार किया गया और शासन ने स्कूल को स्वीकृति भी दे दी है. अब इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है."

विदिशा, सागर और मंडला तीनों जिलों की समस्याएं अलग-अलग हैं.

कहीं बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए स्टॉप डैम के खंभों पर छलांग लगानी पड़ रही थी. तो कहीं नदी पार करनी पड़ रही है. और कहीं पर स्कूल है ही नहीं, इसलिए तबेले में कक्षाएं चल रही हैं.

ये तस्वीरें ऐसे समय की हैं जब मध्य प्रदेश सरकार के बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान है.

याचिका में रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि राज्य के हजारों सरकारी स्कूल जर्जर इमारतों में चल रहे हैं. बड़ी संख्या में स्कूलों में बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.

वहीं, लगभग 40 प्रतिशत यानी एक लाख 15 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं.

ما الذي يجب مراقبته

توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق

  • मध्य प्रदेश सरकार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।

    مرجح جداً · خلال أسابيع

أسئلة مفتوحة

  • राज्य के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति कब सुधरेगी?
  • खाली पड़े शिक्षक पदों को भरने के लिए सरकार की निश्चित समयसीमा क्या है?

مواضيع ذات صلة

This article was originally published by BBC हिंदी.

أخبار ذات صلة

المزيد حول هذا الموضوعविदिशा