प्रधानमंत्री मोदी का इंस्टाग्राम वीडियो: युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का केंद्र में इंस्टाग्राम
भारत में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों में इंस्टाग्राम की भूमिका पर नज़र
نظرة سريعة
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करके युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे पर सीधा संबोधन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह युवा पीढ़ी के प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करने की रणनीति है।
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لماذا يهم
भारत में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों ने सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करके युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे पर सीधा संबोधन किया। यह वीडियो आधी रात के क़रीब पोस्ट किया गया था और वर्टिकल फ़ॉर्मेट में रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत 'फ़्रेंड्स' कहकर की, जो उनके आम संबोधन से अलग था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि यह स्टूडेंट्स का प्लेटफ़ॉर्म है। वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार नीरजा चौधरी ने कहा, 'यह साफ़ है कि उन्होंने इंस्टाग्राम का इस्तेमाल क्यों किया क्योंकि यह स्टूडेंट्स का प्लेटफ़ォर्म है।'
दिल्ली विश्वविद्यालय की 22 वर्षीय छात्रा सखी ने बीबीसी से कहा कि जेन ज़ी को लगता है कि मुख्यधारा का मीडिया उनकी नुमाइंदगी नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें लगा कि हमारी कवरेज की कमी है। हम जो कहना चाहते थे, उसे तुरंत सामने नहीं रख पा रहे थे। इसलिए लोग इंस्टाग्राम पर आए।'
सोशल मीडिया रिसर्च के अनुमानों के अनुसार, भारत में इंस्टाग्राम के 50 करोड़ से ज़्यादा अकाउंट हैं, जिनमें से अधिकांश 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के हैं।
राजनीतिक विश्लेषक राहुल वर्मा का कहना है कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन मोदी सरकार के ख़िलाफ़ पहले हुए आंदोलनों से अलग हैं। उन्होंने कहा, 'किसानों के आंदोलन या सीएए विरोधी प्रदर्शनों के विपरीत, जो विशेष नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित थे, यह विरोध प्रशासनिक विफलताओं की वजह से है।'
प्रोफ़ेसर चंद्रचूड़ सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर जेन ज़ी की नाराज़गी और उससे निपटने के सरकारी प्रयासों को केवल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के नज़रिए से देखना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'युवाओं की निराशा कहीं ज़्यादा गहरी, व्यापक और तीव्र है, जिसे केवल डिजिटल अपील के ज़रिए नहीं संभाला जा सकता।'
ما الذي يجب مراقبته
توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
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أسئلة مفتوحة
- क्या सरकार की रणनीति प्रभावी होगी?
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