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शेख़ हसीना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से भारत के ख़िलाफ़ बांग्लादेश में भारी ग़ुस्सा
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शेख़ हसीना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से भारत के ख़िलाफ़ बांग्लादेश में भारी ग़ुस्सा

نظرة سريعة

बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को भारत में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ़्रेंस की अनुमति दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव और शाकिब अल हसन के घर पर हमले जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

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शेख़ हसीना 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने के बाद से भारत में रह रही हैं और उन्हें मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है।

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बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को भारत में सीधे मीडिया से बातचीत की अनुमति दिए जाने पर कड़ा ऐतराज़ जताया है.

बांग्लादेश सरकार ने कहा, "उस कार्यक्रम के ज़रिए शेख़ हसीना और उनके सहयोगियों ने बांग्लादेशी राज्य और देश के लोगों का मज़ाक उड़ाया है."

इस वर्चुअल प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान शाकिब अल हसन के देखे जाने के बाद उनके घर पर बुधवार रात हमले का दावा किया जा रहा है.

बांग्लादेश अवामी लीग ने एक्स पर बयान जारी किया है, "बांग्लादेश के मशहूर क्रिकेट आइकन शाकिब अल हसन के आवास पर पेट्रोल बम से एक भयावह हमला हुआ. यह हमला उस प्रेस कॉन्फ़्रेंस के कुछ घंटों बाद हुआ जिसमें विश्व प्रसिद्ध स्टार क्रिकेटर ने सम्मानित पार्टी अध्यक्ष शेख़ हसीना के साथ हिस्सा लिया था."

अवामी लीग के बयान में कहा गया है, "प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस से जुड़ी रिपोर्टें प्रकाशित कीं तो उनके ख़िलाफ़ न्यायपालिका का इस्तेमाल कर मुक़दमे दायर किए जाएंगे."

अवामी लीग ने इस हमले को कथित लोकतंत्र निर्माण के नाम पर पार्टी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ जारी कथित जनसंहार अभियान का एक और उदाहरण बताया और फ़ासीवाद करार दिया है.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है. वह पांच अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही भारत में हैं.

हालांकि, पिछले दो सालों में यह पहली बार है जब उन्होंने वर्चुअल माध्यम से सीधे पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया.

उन्होंने ऐसे समय में इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया जब बांग्लादेश में 5 अगस्त को लेकर कई सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

बांग्लादेश ने जताई कड़ी आपत्ति

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "सरकार ने पहले ही इस कार्यक्रम के बांग्लादेश-भारत द्विपक्षीय संबंधों के पुनर्निर्माण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी. इसके बावजूद, ढाका ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम की अनुमति दिए जाने पर गहरा खेद ज़ाहिर करता है."

बुधवार शाम शेख़ हसीना ने दिल्ली के फ़ॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस को वर्चुअली संबोधित किया.

उन्होंने फिर एलान किया कि वह बांग्लादेश लौटेंगी. उन्होंने कहा कि वह दिसंबर तक लौटेंगी, लेकिन कोई तय तारीख़ नहीं बताई.

इसके कुछ ही समय बाद रात करीब 11 बजे बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के फ़ेसबुक पेज पर एक बयान जारी किया गया.

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, "भारतीय धरती पर शेख़ हसीना का प्रेस कॉन्फ़्रेंस उस दिन हुआ जब बांग्लादेश की जनता जुलाई क्रांति की दूसरी वर्षगांठ मना रही है. यह बांग्लादेश की संप्रभुता पर हमला है और जुलाई क्रांति के शहीदों का अपमान है."

बयान में आगे कहा गया, "इस देश की जनता ने जुलाई क्रांति की भावना को अपनाते हुए दृढ़ संकल्प लिया है कि हमारा राष्ट्र कभी भी फ़ासीवाद के उन अंधेरे दिनों में वापस नहीं जाएगा और बांग्लादेश कभी किसी का वफ़ादार या संरक्षित राज्य नहीं बनेगा. जनसंहार की दोषी (शेख़) हसीना और उनका माफ़िया गिरोह अब कभी बांग्लादेश की राजनीति में जगह नहीं पाएगा."

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, "बांग्लादेश संप्रभुता, समानता, पारस्परिक सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दख़ल न देने और राष्ट्रीय गरिमा के आधार पर भारत के साथ रचनात्मक, पारस्परिक रूप से लाभकारी और भविष्य की ओर देखने वाले संबंध बनाए रखना चाहता है."

बयान में शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भी निराशा ज़ाहिर की गई है.

इसमें कहा गया है, "अफ़सोस की बात है कि बांग्लादेश और भारत के बीच 2013 में हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत दोषी अपराधी (शेख़) हसीना को वापस भेजने के लिए बांग्लादेश की ओर से बार-बार किए गए अनुरोधों पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है."

"इसके उलट, किसी भी बहाने से उन्हें सार्वजनिक रूप से मीडिया से बातचीत का अवसर देना इस देश के लोगों की भावनाओं को आहत करता है और बांग्लादेश और भारत के बीच मज़बूत द्विपक्षीय संबंधों के निर्माण के लिए बेहद नुक़सानदेह है."

भारत का पक्ष

इससे पहले बीते मंगलवार को पत्रकारों ने भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर प्रतिक्रिया मांगी थी.

उनसे पूछा गया था कि बुधवार को शेख़ हसीना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर भारत का क्या रुख़ है, जिसको लेकर बांग्लादेश पहले ही चिंता जता चुका है.

जवाब में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "उस कार्यक्रम का आयोजन एक निजी संस्था कर रही है. भारत सरकार का उससे कोई संबंध नहीं है. वहां व्यक्त किए गए किसी भी विचार या बयान का समर्थन भारत सरकार नहीं करती और हमारा उनसे कोई संबंध नहीं है."

इससे एक दिन पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से भी इस बारे में बात की थी और भारत से सहयोग मांगा था.

उन्होंने कहा था, "बांग्लादेश को उम्मीद है कि भारत यह सुनिश्चित करने में सहयोग करेगा कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना समेत प्रतिबंधित अवामी लीग से जुड़ा कोई भी व्यक्ति राजनीतिक बयान देने या बांग्लादेश के भीतर अस्थिरता पैदा करने वाली किसी गतिविधि के लिए भारत की धरती का इस्तेमाल नहीं करेगा."

उनका कहना था, "मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में मौत की सज़ा पाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना दिल्ली से कोई राजनीतिक बयान न दें और न ही कोई राजनीतिक गतिविधि चलाएं."

बांग्लादेश में हसीना की ख़बर पर बैन

बीबीसी बांग्ला की एक स्टोरी के मुताबिक़, प्रेस कॉन्फ़्रेंस को लेकर अवामी लीग की घोषणा के बाद बांग्लादेश सरकार ने अदालत के बैन का हवाला देते हुए मीडिया को उनके बयानों की रिपोर्टिंग न करने की चेतावनी दी थी.

बांग्लादेश सरकार के प्रधानमंत्री के सूचना और प्रसारण सलाहकार डॉ. ज़ाहेद उर रहमान ने इसकी जानकारी दी थी.

ढाका में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने कहा था कि न्यायाधिकरण ने शेख़ हसीना के 'नफ़रती' बयानों के प्रसार पर रोक लगा दी है और यह बैन मीडिया और सोशल मीडिया सहित सभी पर लागू होगा.

अंतरिम सरकार के दौरान शेख़ हसीना की अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण निलंबित कर दिया था और इस साल हुए संसदीय चुनाव में पार्टी हिस्सा नहीं ले सकी.

पांच दिसंबर 2024 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मीडिया और सोशल मीडिया पर शेख़ हसीना के 'नफ़रती भाषण' के प्रसार पर रोक लगा दी थी.

डॉ. ज़ाहेद उर रहमान ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि बांग्लादेश सरकार मीडिया को शेख़ हसीना के बयान से जुड़ी ख़बरें प्रसारित न करने की चेतावनी देती है.

उन्होंने कहा, "वह फिर बोलेंगी. अगर किसी ने ऐसी ख़बर दी है कि वह कल बोलेंगी, अगर कोई इसकी अग्रिम घोषणा करता है या उसे प्रकाशित करता है, तो यह निश्चित रूप से अदालत के आदेश का उल्लंघन होगा. इस संबंध में हम कार्रवाई करेंगे."

ما الذي يجب مراقبته

توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق

  • शेख़ हसीना दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने का प्रयास करेंगी।

    محتمل · خلال أشهر

أسئلة مفتوحة

  • भारत सरकार शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध पर क्या निर्णय लेगी?
  • क्या बांग्लादेश भारत के साथ कूटनीतिक संबंधों में कोई ठोस कदम उठाएगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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