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अमेरिका का ईरान पर भीषण हमला, दक्षिणी तट पर तेज़ धमाकों की आवाज़ें
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अमेरिका का ईरान पर भीषण हमला, दक्षिणी तट पर तेज़ धमाकों की आवाज़ें

نظرة سريعة

अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हमला किया है, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 'भारी चोट पहुँचाने' की धमकी दी है।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

لماذا يهم

अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर हमले के जवाब में हमला किया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

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अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान पर फिर से हमला किया है.

हमले के चंद घंटों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'भारी चोट पहुँचाने' की धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा कि ये हमले "कल ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों पर जो बमबारी की थी, उसके जवाब में किए गए हैं."

उन्होंने चेतावनी दी कि 'अगर ऐसा फिर हुआ, तो इसका जवाब इससे भी कहीं अधिक कठोर होगा.'

ईरानी मीडिया के अनुसार, देश के दक्षिणी तटीय इलाक़ों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गई हैं और फ़ारस की खाड़ी में ईरान के नियंत्रण वाले द्वीपों को निशाना बनाया गया है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना था कि ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़र रहे तीन कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाया था और उसी के जवाब में अमेरिका ने उस पर अटैक किया है.

वहीं, ईरान ने कहा कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में बुधवार तड़के बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए.

ट्रंप की पहले की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा, "हम अभद्रता का जवाब अभद्रता से नहीं देते, बल्कि कार्रवाई से देते हैं निडर होकर और पूरे साहस के साथ."

चाबहार पर भी हुआ अटैक

ईरान के तटीय इलाक़ों के अन्य हिस्सों, जिनमें कोनारक और चाबहार शहर भी शामिल हैं, से भी कई विस्फोटों की आवाज़ें सुने जाने की ख़बर है.

ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि बंदर अब्बास में आठ विस्फोट हुए, जबकि दक्षिणी ईरान के सीरिक और जास्क बंदरगाहों पर दो-दो मिसाइलें गिरीं.

इसमें यह भी कहा गया कि अबू मूसा द्वीप पर दो प्रोजेक्टाइल गिरे. इस द्वीप के स्वामित्व को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है.

ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, बंदर अब्बास में एयर डिफ़ेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं.

अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान की सीमा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन ईरानी मीडिया ने चाबहार में बिजली कटौती और बुशेहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक बैरक में आग लगने की ख़बर दी है.

ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, चाबहार में कटी हुई तीन बिजली लाइनों में से दो को तेज़ी से बहाल कर दिया गया है, जबकि तीसरी लाइन भी जल्द चालू हो जाएगी.

बुधवार शाम एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने "कुछ देर पहले" संपर्क किया था और वह "बेहद शिद्दत से" समझौता करना चाहता है.

ट्रंप ने आगे कहा, "मुझे नहीं पता कि वे समझौता करने के लायक हैं या नहीं. मुझे नहीं पता कि वे समझौते का पालन करेंगे भी या नहीं, यही सबसे बड़ी समस्या है."

इससे पहले तुर्की में नेटो शिखर सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, "हमने मंगलवार रात उन पर बहुत ज़ोरदार हमला किया, बहुत ज़ोरदार."

उन्होंने कहा कि अमेरिका "संभवतः आज रात फिर उन पर ज़ोरदार हमला करेगा."

ट्रंप ने कहा, "मैंने उन्हें पहले ही थोड़ी चेतावनी दे दी थी. हम आज रात फिर उन पर ज़ोरदार हमला करने वाले हैं."

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय ईरान पर सबसे उच्च स्तर के हमले नहीं कर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में होने वाले हमलों में ईरान के अहम बुनियादी ढांचे, जैसे पुलों और समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों (डिसैलिनेशन प्लांट), को निशाना बनाया जा सकता है.

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के तट से दूर स्थित उसके प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप पर क़ब्ज़ा कर सकता है. उन्होंने दावा किया कि तेहरान इसके ख़िलाफ़ "कुछ भी नहीं" कर पाएगा.

उन्होंने दोहराया कि "आज रात बड़ा हमला हो सकता है." इसके बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हमला होता है, तो वह ईरान के और अंदरूनी इलाक़ों को निशाना बनाएगा.

नेटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा था कि अब ईरान के साथ उनका हिसाब ख़त्म हो चुका है.

उन्होंने ये भी कहा था कि वार्ताकार ईरान से बात करके अपना वक़्त बर्बाद कर रहे हैं.

ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से ख़ुश नहीं हैं और उन्होंने अमेरिका का यह रुख़ दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

उन्होंने आगे कहा, "मेरी पूरी बात सत्ता परिवर्तन को लेकर नहीं है." ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म कराने की दिशा में काफ़ी प्रगति की है.

ट्रंप ने कहा कि ईरान अब मध्य पूर्व का धौंस जमाने वाला देश नहीं रहा. उन्होंने आज पहले कही गई अपनी टिप्पणी दोहराते हुए ईरान के नेतृत्व को सनकी बताया.

ट्रंप के रुख़ में बदलाव

ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख़ में कुछ बदलाव आया है.

कई हफ्तों तक यह आशावाद बना हुआ था कि बीच-बीच में लड़ाई छिड़ने के बावजूद बातचीत आगे बढ़ रही है और आख़िरकार सफल होगी.

लेकिन अब ऐसा लगता है कि ट्रंप इस निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं कि यह संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है.

अब वह आशावाद काफ़ी कम हो गया है और ट्रंप ने लंबे समय तक फिर से हमले शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया है, जिसकी शुरुआत आज रात से भी हो सकती है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बैठक के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "देखते हैं आगे क्या होता है. मैं उनसे ख़ुश नहीं हूँ.''

अगर बातचीत पूरी तरह विफल हो जाती है और युद्धविराम ख़त्म हो जाता है, तो घरेलू राजनीति में ट्रंप के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है. उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता शुरुआत से ही इस युद्ध को लेकर असहज रहे हैं.

कुछ नेताओं ने खुलकर सवाल उठाया कि युद्धविराम बढ़ाने वाले 14 सूत्रीय समझौते से अमेरिका को आख़िर मिला क्या और क्या तेहरान पर यह भरोसा किया जा सकता है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खुला रखेगा.

अगर फिर से लड़ाई शुरू होती है, तो कैपिटल हिल में मौजूद कुछ सांसदों की नज़र में यह साबित होगा कि उनकी आशंकाएं सही थीं.

'उनसे बात करना समय की बर्बादी, वे झूठ बोलते हैं'

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से कहा था, ''मेरे हिसाब से यह अब ख़त्म हो चुका है. मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता. वे घटिया लोग हैं.''

ट्रंप ने कहा, "जहां तक मेरा सवाल है, यह मामला ख़त्म हो चुका है. उनसे बात करना समय की बर्बादी है. वे झूठ बोलते हैं.''

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार चाहें तो बातचीत कर सकते हैं, लेकिन 'वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं.'

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के वार्ताकारों को लेकर कहा, "वे वास्तव में मानसिक रूप से बीमार हैं. उनके नेता मानसिक रूप से बीमार लोग हैं. मेरी नज़र में उनसे निपटना सिर्फ़ समय की बर्बादी है.''

ट्रंप ने आगे कहा कि वह "स्टीव विटकॉफ़ और जेराल्ड कुशनर से बात करेंगे." लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "वार्ता की मेज़ पर वापस लौटना तेहरान के ऊपर निर्भर है."

एक अन्य सवाल के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "सब लोग इस बात से सहमत हैं कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. हम एक समझौते तक पहुंच गए मगर बाद में वे मीडिया के सामने यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं थी.''

ट्रंप का यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच हुए जवाबी हमलों के बाद आया. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम (सीज़फायर) समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.

क्या बंद हुआ बातचीत का रास्ता?

कैरी डेविस, बीबीसी संवाददाता

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अभी एक महीने भी पुराना नहीं है.

तकनीकी रूप से युद्धविराम (सीज़फायर) अप्रैल की शुरुआत से लागू हुआ. हालांकि, पहले भी दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जवाबी हमलों के दौरान सीज़फायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं.

अब बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम (सीज़फायर) अब ख़त्म हो गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार बातचीत जारी रख सकते हैं.

उनके इस बयान से एक तरफ़ समझौते का रास्ता बंद होता दिखता है, तो दूसरी तरफ़ बातचीत की थोड़ी गुंज़ाइश भी बनी रहती है.

उनका यह रुख़ पहले दिए गए बयानों जैसा ही है. उस समय भी उन्होंने ईरान को समझौता करने पर कई फ़ायदे देने का संकेत दिया था. वहीं, समझौता न होने पर कड़ी कार्रवाई और तबाही की चेतावनी भी दी थी.

ट्रंप के ताज़ा बयान से उनकी नाराज़गी और निराशा भी झलकती है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे दोनों देशों के बीच फिर से तनाव और सैन्य टकराव बढ़ेगा?

ट्रंप के बयानों में बार-बार बदला रुख़

21 अप्रैल - आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद ट्रंप ने 21 अप्रैल को कहा कि वह दो सप्ताह का युद्धविराम आगे बढ़ाना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही फिर बमबारी शुरू होगी. हालांकि, उसी दिन बाद में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर अमेरिकी हमले रोक दिए गए हैं.

11 मई - कुछ दिनों बाद ट्रंप ने कहा कि सीज़फायर "किसी तरह जीवनरक्षक सिस्टम पर टिका हुआ है."

11 जून - ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्धविराम समाप्त हो चुका है. उन्होंने ईरान पर बहुत कड़ी कार्रवाई की धमकी दी. लेकिन उसी शाम उन्होंने प्रस्तावित हमले रोक दिए.

17 जून - युद्ध समाप्त करने के शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर करते समय ट्रंप ने कहा, "अगर उन्होंने ठीक व्यवहार नहीं किया, तो हम फिर से बमबारी शुरू कर देंगे."

8 जुलाई - ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि सीज़फायर ख़त्म हो चुका है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार बातचीत जारी रख सकते हैं.

ما الذي يجب مراقبته

توقعات الذكاء الاصطناعي — احتمالات وليست حقائق

  • ईरान पर और बड़े हमले हो सकते हैं, जिसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।

    مرجح · خلال أيام

  • ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है।

    محتمل · خلال أسابيع

أسئلة مفتوحة

  • नुकसान की वास्तविक सीमा क्या है?
  • क्या बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है?
  • क्या यह संघर्ष बढ़ेगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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