عاجل
ARرومانيا تسقط طائرة مسيّرة في مجالها الجوي للمرة الأولى منذ بدء حرب أوكرانياARالحرس الثوري الإيراني يعلن تدمير مقر أمريكي في الأردن ومنظومة باتريوت في أربيلARترامب يبحث تصعيد العمليات ضد إيران بعد انهيار الهدنةARتطورات في التوترات بين واشنطن وطهران: جهود دبلوماسية لتهدئة التصعيدARلوفروف: مبادرة ترامب حول أوكرانيا لم تنجح.. وروسيا ستتحقق أهدافها عسكريا أو سلمياARخليل الحيّة رئيساً للمكتب السياسي لحماس: حارس لمسار قديم أم قائد مرحلة جديدة؟ARمدرب مانشستر سيتي يعلن عودة رودري بعد جراحة وراحةARأسعار النفط تبلغ 100 دولار للبرميل للمرة الأولى منذ مايو/أيارARأزمة الكهرباء في ليبيا تزيد من حدة الخلاف بين تكالة والدبيبةARالداخلية المصرية توضح تفاصيل سرقة سيارة رئيس سابق بالإسكندريةARرومانيا تسقط طائرة مسيّرة في مجالها الجوي للمرة الأولى منذ بدء حرب أوكرانياARالحرس الثوري الإيراني يعلن تدمير مقر أمريكي في الأردن ومنظومة باتريوت في أربيلARترامب يبحث تصعيد العمليات ضد إيران بعد انهيار الهدنةARتطورات في التوترات بين واشنطن وطهران: جهود دبلوماسية لتهدئة التصعيدARلوفروف: مبادرة ترامب حول أوكرانيا لم تنجح.. وروسيا ستتحقق أهدافها عسكريا أو سلمياARخليل الحيّة رئيساً للمكتب السياسي لحماس: حارس لمسار قديم أم قائد مرحلة جديدة؟ARمدرب مانشستر سيتي يعلن عودة رودري بعد جراحة وراحةARأسعار النفط تبلغ 100 دولار للبرميل للمرة الأولى منذ مايو/أيارARأزمة الكهرباء في ليبيا تزيد من حدة الخلاف بين تكالة والدبيبةARالداخلية المصرية توضح تفاصيل سرقة سيارة رئيس سابق بالإسكندرية
Newsgather
رجوعअमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर समझौता, क्या यह स्थायी शांति की ओर पहला कदम है?
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर समझौता, क्या यह स्थायी शांति की ओर पहला कदम है?
يتطور
BBC हिंदी18‏/6‏/2026العالم4 د قراءةIndia

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर समझौता, क्या यह स्थायी शांति की ओर पहला कदम है?

نظرة سريعة

अमेरिका और ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर एक समझौता किया है, जिसे ट्रंप प्रशासन अपनी बड़ी जीत बता रहा है। यह समझौता दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों में एक स्थायी परमाणु समझौते तक पहुंचने की कोशिशों को तेज करता है।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

حجم الخط

Author, डेनियल बुश

पदनाम, वॉशिंगटन संवाददाता

प्रकाशित 6 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का मतलब एक तरह से होर्मुज़ स्ट्रेट का दोबारा खुलना है. जबकि बाकी लगभग सभी मुद्दों पर अंतिम समझौते तक पहुंचने की कोशिश जारी रहेगी.

फ़्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक लंबी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसे अपने देश की बड़ी जीत के तौर पर पेश किया.

बाद में दोनों देशों ने पुष्टि की कि इस मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक दस्तख़त किए गए और अब ये पूरी तरह लागू हो चुका है.

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों से जो बातचीत साझा की है उसके मुताबिक़ दोनों देशों को अब भी एक व्यापक और अंतिम शांति समझौते तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना है. इस समझौते के तहत ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने का लक्ष्य हासिल करेंगे.

ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि यह समझौता सुनिश्चित करता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा और न ही इसे विकसित करेगा या बनाएगा.

लेकिन अधिकारियों की ओर से बातचीत के दौरान पढ़े गए समझौते के मूल टेक्स्ट से ऐसा लगता है कि ये मूल दावे से कमतर है.

इसके बजाय,युद्धविराम की अवधि बढ़ाने वाला यह समझौता दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच अगले 60 दिनों में एक स्थायी परमाणु समझौते तक पहुंचने की कोशिशों को तेज करता दिखता है.

2015 में मूल ईरान परमाणु समझौते तक पहुंचने में ओबामा प्रशासन को 20 महीने की बातचीत करनी पड़ी थी.

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

तो क्या ट्रंप प्रशासन केवल दो महीनों में ऐसा कर पाएगा?

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की योजना क्या है?

फिलहाल,समझौते का टेक्स्ट केवल इतना सुनिश्चित करता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में अपने हाई एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को कम रिफ़ाइंड स्टैंडर्ड पर ले आएगा.

बुधवार को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसे ईरान की ओर से दी गई एक "अहम रियायत " बताया.

लेकिन ऐसा करने के तरीके और इससे जुड़ी डेडलाइन जैसे तक़नीकी ब्योरे तय किए जाने बाकी हैं.

इन मुद्दों पर अगले 60 दिनों की बातचीत के दौरान सहमति बनाने की कोशिश होगी, जिसकी औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को प्रस्तावित हस्ताक्षर के बाद होगी.

शॉर्ट वीडियो देखिए

ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि अमेरिका ईरान को कोई पैसा नहीं देगा. यह राष्ट्रपति के लिए एक अहम मुद्दा है, क्योंकि वह 2016 में ओबामा प्रशासन की ओर से ईरान को दिए गए 1.7 अरब डॉलर के भुगतान की आलोचना करते रहे हैं.

अपनी राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए ट्रंप लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका ईरान समझौता पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समझौते से बेहतर है.

पैसा देने के मुद्दे को भी उन्होंने यह साबित करने के लिए इस्तेमाल किया है कि उन्होंने ईरान के प्रति सख़्त रवैया अपनाया है.

लेकिन इस समझौते के टेक्स्ट के मुताबिक़ ,अमेरिका "क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर कम से कम 300 अरब डॉलर की एक अंतिम और आपस में सहमति के आधार पर योजना" तैयार करने में सहयोग करेगा, जिसका मक़सद ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करना है.''

ट्रंप के समझौते पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह समझौता अमेरिका को ईरान को एक भी डॉलर देने के लिए बाध्य नहीं करता.

लेकिन समझौते में इस्तेमाल की गई वास्तविक भाषा काफी अस्पष्ट है और इससे यह संभावना खुली रहती है कि बातचीत के जरिये युद्ध का कोई समाधान निकलता है तो अमेरिका ईरान को भविष्य में कुछ भुगतान कर सकता है.

यह ट्रंप और उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के लिए एक बड़ी राजनीतिक समस्या बन सकता है.

दोनों ने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि वे कोई नया "अनंत युद्ध" शुरू नहीं करेंगे.

किसी दूसरे देश में दखल देने की नीति रखने वाले 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' समर्थक भी इस व्यवस्था पर आपत्ति जता सकते हैं.

शॉर्ट वीडियो देखिए

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

भले ही ईरान को मिलने वाली कोई भी आर्थिक सहायता सीधे अमेरिका की ओर से न आए.

इस समझौते की आलोचना तेजी से शुरू हो गई है, यहां तक कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी.

कांग्रेस के कई सांसद ट्रंप प्रशासन से इस समझौते और उससे जुड़ी अनिश्चितताओं पर विस्तृत जानकारी और ब्रीफ़िंग की मांग कर रहे हैं.

कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने समझौते पर संदेह जताया है. एक प्रमुख रिपब्लिकन सीनेटर ने इसकी खुलकर आलोचना करते हुए कहा कि ट्रंप ने ईरान को बहुत अधिक रियायतें दे दीं और बदले में जो हासिल किया वो पर्याप्त नहीं है.

लुइसियाना के निवर्तमान सीनेटर बिल कैसिडी ट्रंप समर्थित प्रतिद्वंद्वी के ख़िलाफ़ प्राइमरी का चुनाव हार गए थे.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगी है. साथ ही उसने यह सीख लिया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने या धमकी देने की रणनीति काम करती है, और भविष्य में वह इसका लाभ उठाने की कोशिश करेगा."

रिपब्लिकन नेता ने कहा, " ये पिछले कई दशकों में विदेश नीति की सबसे बड़ी गलती है."

डेढ़ पन्ने के इस समझौते में कई अन्य अहम मुद्दों को भी बहुत कम जगह दी गई है.

हिज़्बुल्लाह का पैसा रोकना संभव हो पाएगा?

जब युद्ध शुरू हुआ था, तब ट्रंप ने कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक ईरान को क्षेत्र में सक्रिय उसके सहयोगी या प्रॉक्सी समूहों जैसे हिज़्बुल्लाह को वित्तीय सहायता देने से रोकना है.

यह इसराइल की भी एक प्रमुख चिंता थी. इसराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर इस युद्ध की शुरुआत की थी और लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ अलग सैन्य अभियान भी चलाया था.

इस अहम समझौते के तहत दुश्मनी खत्म करने का प्रावधान हिज़्बुल्लाह पर भी लागू होता है. लेकिन समझौते में इस संगठन का ज़िक्र इसके अलावा लगभग नहीं के बराबर है.

शॉर्ट वीडियो देखिए

यह भी साफ़ नहीं है कि अगली दौर की वार्ताओं में ईरान पर हिज़्बुल्लाह और क्षेत्र के अन्य प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देना बंद करने के लिए दबाव डाला जाएगा या नहीं.

बुधवार को जारी किए गए समझौते के टेक्स्ट में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का भी विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है.

यह भी उन प्रमुख मुद्दों में से एक था,जिसे ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने युद्ध की शुरुआत में अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया था.

इस सप्ताह जिनेवा में जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए वो किसी अंतिम और व्यापक समझौते तक पहुंच पाएगा या नहीं,यह अभी अनिश्चित है.

समझौते के मुताबिक़ दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर आगे की वार्ताओं को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है. लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर इस समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है.

ट्रंप ने कहा, "अगर 60 दिनों में समझौता नहीं हो पाया, तो भी कोई बात नहीं. हम फिर से बमबारी शुरू कर देंगे."

مواضيع ذات صلة

This article was originally published by BBC हिंदी.

أخبار ذات صلة

المزيد حول هذا الموضوعईरान