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बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की जीत के पांच कारण और इसके मायने
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बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की जीत के पांच कारण और इसके मायने

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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराया। विश्लेषकों ने छात्र विरोध, भरत तिवारी की मौत, बीजेपी की कलह, जेडीयू की अनुपस्थिति और सम्राट चौधरी को निशाना बनाने को जीत के मुख्य कारण बताया।

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बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद ख़ाली हुई थी, जिसके लिए 30 जुलाई को मतदान हुआ था।

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जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनाव रणनीतिकार बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत गए हैं. ये सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद ख़ाली हुई थी.

बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए मतदान 30 जुलाई को हुआ था. इस दौरान 35 फ़ीसदी से भी कम मतदान हुआ जिसको लेकर अलग-अलग आशंकाएं जताई गई थीं.

सभी 32 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद प्रशांत किशोर, बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार से 19,324 से अधिक वोटों से जीत गए हैं. उन्हें कुल 64151 वोट मिले जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 44827 वोट मिले.

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर प्रशांत किशोर को बधाई देते हुए लिखा, "लोकतंत्र के महापर्व में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनता ने जन सुराज को चुना है. मैं जनता के इस निर्णय का सम्मान करते हुए श्री प्रशांत किशोर जी को उनकी जीत पर हार्दिक बधाई देता हूँ."

विश्लेषक प्रशांत किशोर की जीत के लिए पांच कारण गिना रहे हैं.

1. स्टूडेंट प्रोटेस्ट

बांकीपुर में जिस समय मतदान के लिए चुनाव प्रचार चल रहा था उसी दौरान देश की राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रही थी.

20 जुलाई को चलो संसद मार्च के दौरान सीजेपी के आंदोलनकारियों पर जब दिल्ली पुलिस और सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया तो इसकी गूंज देश के कई हिस्सों में सुनाई दी. इसके बाद देश के कई हिस्सों समेत 22, 23 और 25 जुलाई को बिहार के कई इलाक़ों में विरोध प्रदर्शन हुए.

25 जुलाई को 'बिहार बंद' बुलाया गया और सिवान ज़िले में आंदोलनकारियों पर कार्रवाई के दौरान एके-47 से फ़ायरिंग का एक वीडियो भी वायरल हुआ. इस दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई आंदोलनकारियों को जेल भेजा गया.

पटना के वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं कि सीजेपी के प्रदर्शनों ने इस चुनाव में भी असर डाला है.

वो कहते हैं, "दिल्ली में प्रदर्शन के बाद बिहार के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए, सैकड़ों विद्यार्थियों को गिरफ़्तार किया गया. जेपी आंदोलन के बाद ऐसा पहली बार देखा गया जब स्टूडेंट्स राजभवन या सीएम सचिवालय तक पहुंच गए थे. ये सारा इलाक़ा बांकीपुर सीट में ही आता है."

"दिल्ली के प्रदर्शन का असर बहुत हद तक इस चुनाव में हुआ है."

वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद भी इस तर्क पर सहमति जताते हुए कहते हैं कि इस चुनाव में छात्रों का प्रदर्शन भी एक अहम फ़ैक्टर था.

2. भरत तिवारी की 'एनकाउंटर' में मौत

बिहार के भोजपुर ज़िले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के 26 साल के युवक भरत भूषण तिवारी की 17 जून को कथित पुलिस एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

भोजपुर के एसपी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया था, "पुलिस टीम ने ख़ुद और लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, जो भरत भूषण के पांव में लगी थी."

हालांकि भरत तिवारी के परिजनों और पुलिस ने इस दावे को ख़ारिज किया और इस घटना को सोची-समझी साज़िश बताया था.

लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि भरत तिवारी मामले में न्यायिक आयोग गठित करने के बाद भी एक्शन नहीं हो रहा था और इसी बीच उनके परिजनों ने पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाक़ात की थी.

वो कहते हैं, "सम्राट चौधरी ने इस मामले में काफ़ी समय बाद एक्शन लिया, एसटीएफ़ के जवान को काफ़ी समय बाद गिरफ़्तार किया गया. हालांकि ये भी अफ़वाहें उड़ीं की भरत तिवारी के परिजन प्रशांत किशोर के चुनाव प्रचार में शामिल होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लेकिन इस मामले ने जनता की भावनाओं को झंझोड़ दिया."

3. बीजेपी के अंदरख़ाने थी कोई कलह?

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने अभिषेक कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने नामांकन भी दाख़िल किया था.

हालांकि, अगले ही दिन अभिषेक कुमार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था और उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया गया था.

सुरूर अहमद और लव कुमार मिश्रा दोनों का मानना है कि इस सीट से बिहार बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उम्मीदवार एकदम नए चेहरे को बनाया गया.

सुरूर अहमद कहते हैं, "इस सीट पर कायस्थ समुदाय का अच्छा ख़ासा वोट है और अजय आलोक जैसे नेता भी उम्मीदवारी की दौड़ में थे लेकिन बीजेपी ने अचानक उम्मीदवार ही बदल दिया. इसी बीच एक बीजेपी नेता की ओर से ये बयान दिया गया कि इस सीट से कोई भी जीत जाएगा. इससे बीजेपी के वोटरों में एक भाव गया कि उन्हें 'टेकेन फ़ॉर ग्रांटेड' लिया जा रहा है."

लव कुमार मिश्रा कहते हैं, "एक आशंका ये भी है कि नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके साथ के नेताओं ने इस सीट पर जीत के लिए मेहनत नहीं की. कह सकते हैं कि प्रशांत किशोर ने बीजेपी की कमज़ोरियों को उजागर किया है."

4. जेडीयू और कम मतदान कितना बड़ा फ़ैक्टर?

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अब गठबंधन सरकार में जेडीयू 'छोटे भाई' की भूमिका में आ चुका है.

लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान जेडीयू की उपस्थिति काफ़ी नहीं दिखी.

वो कहते हैं, "बांकीपुर उपचुनाव के दौरान देखा गया कि जेडीयू मैदान में नहीं थी और बीजेपी अकेले मैदान में थी."

सुरूर अहमद कहते हैं कि 35 फ़ीसदी से कम मतदान होना भी बीजेपी के ख़िलाफ़ गया क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान जो उम्मीदवार बदले गए उससे ग़लत संदेश गया.

वो दावा करते हैं कि प्रशांत किशोर मैदान में न होते तो वोटिंग प्रतिशत 24 फ़ीसदी भी हो सकता था.

5. सम्राट चौधरी रहे निशाने पर

चुनाव प्रचार के दौरान लगातार देखा गया कि प्रशांत किशोर सिर्फ़ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाना बना रहे थे.

सुरूर अहमद कहते हैं कि प्रशांत किशोर के क़ानूनी मामलों को सम्राट चौधरी ने मुद्दा बनाया, और वो सरकार के कामकाज की बात करते रहे, दूसरी ओर बांकीपुर का पूरा इलाक़ा काफ़ी समृद्ध है.

वो कहते हैं, "बांकीपुर सीट के इलाक़े में विधायक, सांसद, जज और वकीलों के घर हैं. एक तरह से ये इलाक़ा काफ़ी शिक्षित और समृद्ध है तो इस दौरान प्रशांत किशोर की सम्राट चौधरी को निशाना बनाने की रणनीति ने भी काम किया."

लव कुमार मिश्रा कहते हैं, "प्रशांत किशोर ने कभी भी नितिन नबीन या किसी और वरिष्ठ नेता को अपने भाषणों में ज़िक्र नहीं किया. उन्होंने जो भी अटैक किया सम्राट चौधरी पर ही किया. अपने भाषणों में वो सम्राट चौधरी को करप्ट और क्रिमिनल बताते रहे."

प्रशांत किशोर की जीत के मायने

उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को विश्लेषक सांकेतिक मानते हैं.

लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि ये जीत सिंबोलिक है और इसके आगे प्रशांत किशोर पैन इंडिया अपनी छवि बनाने के बारे में सोचेंगे.

वो कहते हैं कि विपक्ष चाहे तो उनको पंजाब और यूपी चुनाव में एक एंटी बीजेपी चेहरे के तौर पर चुनाव प्रचार में ले जा सकता है.

लव कुमार मिश्रा कहते हैं, "मतदान से पहले बिहार पुलिस ने रात दो बजे 64 लोगों को गिरफ़्तार किया था. इसके बाद प्रशांत किशोर ने सीनियर एसपी के ख़िलाफ़ चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर को शिकायत की. तो प्रशांत किशोर की इस जीत का मिला-जुला असर होगा."

सुरूर अहमद कहते हैं कि अभी वक़्त बताएगा कि प्रशांत किशोर की जीत आगे क्या होगा लेकिन बीजेपी के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा सकता है.

أسئلة مفتوحة

  • प्रशांत किशोर की जीत का बिहार की राजनीति पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव होगा?
  • बीजेपी की आंतरिक कलह का भविष्य में पार्टी पर क्या असर होगा?
  • प्रशांत किशोर पैन इंडिया अपनी छवि कैसे बनाएंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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