عاجل
TRKolombiya'da 7,4 büyüklüğünde deprem: Can kayıpları varTRTBMM'de Tarihi Oylama: 50 Yıllık Terör Belası Tarihe GömüldüTRKuvözdeki bebeğe şiddet davasında Adli Tıp raporu: İlliyet bağı kurulamadıTRTrump, İran'dan Gelen Suikast Tehdidinden Sonra Gizli Uçuşla Türkiye'den AyrıldıTRSuriye'deki Gizli Nükleer Tesiste ABD ve İsrail Arasında Gizli GörüşmelerTRİsrail, Lübnan'ın Güneyinde Hizbullah Operasyon Hücresine Hava Saldırısı DüzenlediTRKolombiya'da Büyük Deprem: Can Kaybı Artıyor, Sokağa Çıkma YasağıTRAvrupa'da Doğal Gaz Fiyatları Hürmüz Boğazı Belirsizliğiyle %8 YükseldiTRDolphin Tayfunu: Pekin'de Yağışlar Hayatı Etkilemeye Devam EdiyorTRİran, İsrail'e Ait İHA'yı Elektronik Harp İle İndirdiği İddia EdiliyorTRKolombiya'da 7,4 büyüklüğünde deprem: Can kayıpları varTRTBMM'de Tarihi Oylama: 50 Yıllık Terör Belası Tarihe GömüldüTRKuvözdeki bebeğe şiddet davasında Adli Tıp raporu: İlliyet bağı kurulamadıTRTrump, İran'dan Gelen Suikast Tehdidinden Sonra Gizli Uçuşla Türkiye'den AyrıldıTRSuriye'deki Gizli Nükleer Tesiste ABD ve İsrail Arasında Gizli GörüşmelerTRİsrail, Lübnan'ın Güneyinde Hizbullah Operasyon Hücresine Hava Saldırısı DüzenlediTRKolombiya'da Büyük Deprem: Can Kaybı Artıyor, Sokağa Çıkma YasağıTRAvrupa'da Doğal Gaz Fiyatları Hürmüz Boğazı Belirsizliğiyle %8 YükseldiTRDolphin Tayfunu: Pekin'de Yağışlar Hayatı Etkilemeye Devam EdiyorTRİran, İsrail'e Ait İHA'yı Elektronik Harp İle İndirdiği İddia Ediliyor
Newsgather
رجوعममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट: मेयर फिरहाद हकीम का इस्तीफ़ा, पार्टी में टूट जारी
ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट: मेयर फिरहाद हकीम का इस्तीफ़ा, पार्टी में टूट जारी
مُلِح
BBC हिंदी4‏/6‏/2026سياسة4 د قراءةIndia

ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट: मेयर फिरहाद हकीम का इस्तीफ़ा, पार्टी में टूट जारी

نظرة سريعة

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एक बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। कोलकाता के मेयर और ममता के करीबी फिरहाद हकीम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया है, जिससे पार्टी में टूट जारी है।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

حجم الخط

प्रकाशित एक घंटा पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट बढ़ता जा रहा है. पार्टी के नए चुने गए 80 विधायकों में से क़रीब 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया है.

ऋतब्रत बनर्जी और उनके क़रीबी सहयोगी संदीपन साहा को पार्टी से निकालने के बावजूद यह टूट नहीं रुकी. अभी पार्टी इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि ममता बनर्जी के क़रीबी कहे जाने वाले कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

पार्टी छोड़कर जा रहे लगभग 100 पार्षदों के बाद हकीम पहले भी इस्तीफ़े की पेशकश कर चुके थे, लेकिन ममता बनर्जी ने उसे स्वीकार नहीं किया था.

तृणमूल के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने बुधवार को कहा, "आज की प्रशासनिक बैठक के दौरान यह साफ़ हो गया कि नगर निगम वास्तव में निष्क्रिय हो चुका है. हमारी नेता ममता बनर्जी ने आज उन्हें इस्तीफ़ा देने की अनुमति दे दी."

दरअसल, पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री ने बुधवार को राज्य सचिवालय नबन्ना में एक बैठक बुलाई थी जिसमें हकीम समेत टीएमसी के कई विधायक शामिल हुए थे. इसमें वे नेता भी मौजूद थे जिनकी मुखर बयानबाज़ी ने पार्टी की परेशानी बढ़ाई थी.

दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निकाले गए बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए हैं.

विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु ने बाग़ी विधायकों की ओर से सौंपे गए समर्थन पत्र को स्वीकार करते हुए विपक्ष के नेता के लिए आवंटित कक्ष की चाबी ऋतब्रत को सौंप दी.

हालांकि पश्चिम बंगाल की तीन बार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते सोमवार को कहा था, "आप कुछ विधायकों और सांसदों को डराकर या लालच देकर तृणमूल कांग्रेस को कमज़ोर नहीं कर सकते. बल्कि, इससे पार्टी और अधिक मज़बूत हो रही है."

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

ममता बनर्जी ने दावा किया था कि तृणमूल कांग्रेस और मज़बूत होकर उभरेगी.

हालांकि, बुधवार को टूट की पहले से आशंका के कारण टीएमसी ने पार्टी से जुड़ी सभी कमेटियां और संगठन भंग कर दिए थे.

ममता के लिए अभी सबसे मुश्किल समय है क्योंकि उनके सबसे क़रीबी नेता भी साथ छोड़ रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम है फिरहाद हकीम.

फिरहाद हकीम कौन हैं?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

कोलकाता से निकलने वाले अंग्रेज़ी अख़बार द टेलीग्राफ़ के अनुसार, फिरहाद हकीम टीएमसी के अल्पसंख्यक समुदाय के प्रमुख नेताओं में से एक हैं.

वह साल 2018 से कोलकाता के मेयर पद रहे हैं और राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं.

कोलकाता पोर्ट सीट से विधायक फिरहाद हकीम ममता बनर्जी के वफ़ादार सहयोगी माने जाते रहे हैं.

ममता बनर्जी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखने वाले हकीम शहरी विकास विभाग की ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं.

दिसंबर 2018 में सोभनदेब चट्टोपाध्याय के पद छोड़ने के बाद उन्हें कोलकाता का मेयर बनाया गया था. यह एक ऐतिहासिक पल था. हकीम, 150 साल पुरानी कोलकाता नगर निगम के पहले मुस्लिम मेयर बने थे.

2021 में कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक और वार्ड संख्या 82 के पार्षद के रूप में उन्होंने दूसरी बार मेयर पद की ज़िम्मेदारी संभाली थी.

मंगलवार को तारक सिंह ने भी कोलकाता नगर निगम में मेयर-इन-काउंसिल के सदस्य पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) पर 2010 से तृणमूल कांग्रेस का नियंत्रण रहा है.

अभिषेक बनर्जी को नोटिस का मामला

फिरहाद हकीम के कोलकाता मेयर के पद से इस्तीफ़ा कोई अचानक घटना नहीं थी.

इससे पहले टेलीग्राफ़ की 20 मई 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मेयर रहते फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी-कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) की ओर से अभिषेक बनर्जी से कथित रूप से जुड़ी संपत्तियों को भेजे गए नोटिसों से खुद को अलग कर लिया था.

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की ज़िम्मेदारी नगर निगम के कार्यकारी विभाग की होती है और यह निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

केएमसी ने अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार के सदस्यों और एक कंपनी से कथित रूप से जुड़ी कई संपत्तियों के स्वीकृत भवन नक्शे और अन्य संबंधित दस्तावेज़ों की जांच के लिए नोटिस जारी किए.

जब नोटिस का मामला आया तो फिरहाद हकीम ने कहा, "यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. जिसे नोटिस मिला है, वह इस मामले को बेहतर तरीक़े से समझा सकता है. मैं किसी व्यक्तिगत मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकता. मैं यहां सिर्फ़ कोलकाता नगर निगम के क़ानूनों की व्याख्या करने के लिए हूं."

हुमायूं कबीर- 'ये तो होना ही था'

हालिया विधानसभा चुनाव से पहले ही टीएमसी से निष्कासित होने के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर ने ताज़ा टूट पर कहा कि 'ये तो होना ही था.'

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "अगर पार्टी के निर्णय लेने की शक्ति ममता बनर्जी के हाथ में होती, तो आज पार्टी की यह स्थिति नहीं होती."

हुमायूं कबीर ने कहा, "पहली ग़लती उन्होंने 2020 में की, जब उन्होंने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगे किया. लोकसभा में सभी वरिष्ठ सांसदों की अनदेखी करते हुए उनके भतीजे को लोकसभा में नेता चुना गया."

"शुभेंदु अधिकारी आज मुख्यमंत्री हैं, लेकिन एक समय वे टीएमसी में थे. उन्हें भी किनारे कर दिया गया और उनके भतीजे को आगे लाया गया. यह भी ग़लत था. मैंने छह महीने पहले ही कहा था कि टीएमसी बंगाल का चुनाव हारेगी, सत्ता खो देगी और पार्टी भी बिखर जाएगी. आज वही हो रहा है."

टीएमसी को टूट की आशंका पहले से थी?

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी सभी कमेटियां और उससे जुड़े सभी संगठन भंग कर दिए गए हैं.

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने टूट की आशंका के बीच बुधवार को यह एलान किया.

टीएमसी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी गई, "गहन विचार के बाद यह तय किया गया कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियां और उससे जुड़े सभी संगठन तुरंत भंग किए जाते हैं."

आगे कहा गया है, "पार्टी अब हर स्तर पर आत्म-मंथन, कामकाज की समीक्षा और संगठन की जांच करेगी. इस प्रक्रिया से जो नतीजे निकलेंगे, उसके आधार पर मुख्य संगठन और उससे जुड़े सभी संगठन दोबारा बनाए जाएंगे और सही समय पर इसकी घोषणा की जाएगी."

उधर, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस और अधिक मज़बूत होकर उभरेगी.

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने राज्य की क़ानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा.

दरअसल, कुछ दिन पहले उनके भतीजे और टीएमसी के नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ था. उन्होंने इसके लिए बीजेपी पर आरोप लगाया था.

हालांकि अभिषेक बनर्जी पर हमले की बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने निंदा की है.

एएनआई से शनिवार को उन्होंने कहा, "मैं लोगों से अपील करता हूं कि वो क़ानून को अपने हाथों में न लें. बंगाल की जनता में टीएमसी और अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ आक्रोश है. हमें बंगाल में सुधार लाने की ज़रूरत है."

ममता बनर्जी ने कहा, "देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के सांसद के साथ जिस तरह मारपीट की गई, वह बेहद चौंकाने वाला है. डॉक्टरों को बुलाया गया, लेकिन अस्पताल को उनका इलाज न करने के निर्देश दिए गए. यह कैसी हास्यास्पद और तानाशाही कार्यप्रणाली है?"

"इस स्थिति का वर्णन करने के लिए अब शब्द नहीं बचे हैं, क्योंकि जब भाषा भी जवाब दे दे, तो इसका मतलब है कि दमन अपनी सारी सीमाएं पार कर चुका है."

مواضيع ذات صلة

This article was originally published by BBC हिंदी.

أخبار ذات صلة

المزيد حول هذا الموضوعममता बनर्जी