عاجل
RUСотни беспилотников летели к МосквеCN台灣首例跨境政治行刑:矢板明夫遇襲是中共鎮壓新手段RUБлогер устроил дрифт на катере в Калининграде, едва не утопив детейCN颱風影響分科測驗 招聯會提前至今日下午開會決定是否如期舉行ARمونديال 2026: الأرجنتين تواجه مصر وسويسرا تواجه كولومبيا في مواجهات حاسمةJPロナルド、W杯敗退に涙「これが最後」 批判にも「慣れた」DEDeutschland erlebt Rekordzahl neuer Start-ups im ersten HalbjahrCN民眾黨團質疑食安事件處置失當 要求擴大檢驗毒物CNHuman Rights Watch Urges Japan to Maintain Aid Ban on MyanmarESAlemania: Pesimismo económico y político sacude al paísRUСотни беспилотников летели к МосквеCN台灣首例跨境政治行刑:矢板明夫遇襲是中共鎮壓新手段RUБлогер устроил дрифт на катере в Калининграде, едва не утопив детейCN颱風影響分科測驗 招聯會提前至今日下午開會決定是否如期舉行ARمونديال 2026: الأرجنتين تواجه مصر وسويسرا تواجه كولومبيا في مواجهات حاسمةJPロナルド、W杯敗退に涙「これが最後」 批判にも「慣れた」DEDeutschland erlebt Rekordzahl neuer Start-ups im ersten HalbjahrCN民眾黨團質疑食安事件處置失當 要求擴大檢驗毒物CNHuman Rights Watch Urges Japan to Maintain Aid Ban on MyanmarESAlemania: Pesimismo económico y político sacude al país
Newsgather
Backइसराइल के कट्टर दक्षिणपंथी नेता की इस हरकत की दुनिया भर में आलोचना, नेतन्याहू भी हुए नाराज़
इसराइल के कट्टर दक्षिणपंथी नेता की इस हरकत की दुनिया भर में आलोचना, नेतन्याहू भी हुए नाराज़
مُلِح
BBC हिंदी21.05.2026العالم5 dk okumaIndia

इसराइल के कट्टर दक्षिणपंथी नेता की इस हरकत की दुनिया भर में आलोचना, नेतन्याहू भी हुए नाराज़

نظرة سريعة

इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने गाजा जा रहे राहत सामग्री के काफिले के कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो पोस्ट किया, जिसकी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस सहित दुनिया भर में आलोचना हुई। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी इसे 'इसराइल के मूल्यों के अनुरूप नहीं' बताया।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

لماذا يهم

इसराइल ने गाजा पर समुद्री नाकाबंदी लागू कर रखी है। हाल ही में, गाजा में मानवीय संकट की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से एक राहत सामग्री का काफिला (फ्लोटिला) तुर्की से रवाना हुआ था।

حجم الخط

इसराइल की नौसेना ने ग़ज़ा की ओर राहत सामग्री ले जा रही नावों के काफ़िले (फ़्लोटिला) में सवार फ़लस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ जो बरताव किया उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है.

अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस, इटली और कनाडा उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर के पोस्ट किए गए वीडियो पर नाराज़गी जताई. वीडियो में वो हथकड़ी पहने और घुटनों के बल बैठे कार्यकर्ताओं का मज़ाक उड़ाते दिखाई दे रहे हैं.

उनकी इस हरकत की आलोचना इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी की. उन्होंने कहा कि यह "इसराइल के मूल्यों के अनुरूप नहीं है."

फ़्लोटिला में सवार 40 से ज़्यादा देशों के 430 लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक मानवाधिकार समूह ने उनकी रिहाई की मांग की है.

यह फ़्लोटिला, बहुत सीमित मात्रा में सहायता सामग्री लेकर गया था. इसका उद्देश्य युद्धग्रस्त ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के मुश्किल हालात की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था.

इसराइल ने इसे 'हमास की सेवा में किया गया एक पीआर स्टंट' कहकर खारिज कर दिया.

क्या हुआ था?

फ़्लोटिला 50 से ज़्यादा नावों का एक काफ़िला है जो पिछले गुरुवार को तुर्की से रवाना हुआ था.

सोमवार सुबह, हथियारबंद इसराइली नौसैनिक कमांडो ने साइप्रस के पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस बेड़े को रोकना शुरू किया. यह क्षेत्र ग़ज़ा तट से लगभग 250 समुद्री मील (460 किलोमीटर) दूर है, जिस पर इसराइल की समुद्री नाकाबंदी लागू है.

इसके आयोजकों ने कहा कि मंगलवार शाम तक सभी नावों को रोक लिया गया, हालांकि एक नाव ग़ज़ा क्षेत्र से लगभग 80 समुद्री मील तक पहुँचने में सफल रही.

आयोजकों ने इसे इसराइल की "अवैध, खुले समुद्र में की गई आक्रामक कार्रवाई" बताया और कहा कि इसराइली कमांडो ने छह नावों पर गोलीबारी की, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और जानबूझकर एक जहाज़ को टक्कर मारी.

इसराइली विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी तरह के लाइव एम्युनिशन का इस्तेमाल नहीं किया गया. उसने ज़ोर देकर कहा कि वह ग़ज़ा पर लागू 'वैध नौसैनिक नाकाबंदी के किसी भी उल्लंघन की अनुमति नहीं देगा.'

मंत्रालय ने यह भी कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को इसराइली जहाज़ों पर स्थानांतरित कर दिया गया है और इसराइल पहुँचने के बाद उन्हें अपने कांसुलर प्रतिनिधियों से मिलने की अनुमति दी जाएगी.

बुधवार सुबह, इसराइली मानवाधिकार संगठन अदाला ने कहा कि कार्यकर्ताओं को "उनकी इच्छा के पूरी तरह विरुद्ध इसराइली क्षेत्र में ले जाया जा रहा है" और उन्हें अशदोद बंदरगाह पर हिरासत में रखा गया है.

संगठन ने कहा, "हमारी कानूनी टीम इन हिरासतों की वैधता को चुनौती देगी और सभी फ़्लोटिला कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग करेगी."

दोपहर में, इसराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसके कैप्शन में लिखा था "इसराइल में आपका स्वागत है." ग्विर इसराइली पुलिस बल की निगरानी करते हैं.

वीडियो में उन्हें अशदोद बंदरगाह स्थित हिरासत केंद्र का दौरा करते हुए दिखाया गया है, जहाँ कार्यकर्ताओं को रखा गया है.

वीडियो में एक महिला कार्यकर्ता, जो "फ्री, फ्री फ़लस्तीन" चिल्ला रही है. उसको सुरक्षाकर्मी ज़मीन पर गिरा देते हैं, जबकि बेन-ग्विर उसके पास से गुजरते हैं और सुरक्षा कर्मियों को प्रोत्साहित करते दिखाई देते हैं.

इसके बाद बेन-ग्विर को इसराइली झंडा लहराते हुए दिखाया गया है, जबकि दर्जनों कार्यकर्ता ज़मीन पर घुटनों के बल बैठे हैं और उनके हाथ पीछे बंधे हुए हैं. वे उनसे हिब्रू में कहते हैं: "इसराइल में आपका स्वागत है. हम ही मालिक हैं."

अन्य कार्यकर्ताओं को जहाज़ के डेक पर घुटनों के बल बैठा दिखाया गया है, जबकि इसराइल का राष्ट्रगान बज रहा है.

दुनिया भर में आलोचना

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने एक्स पर लिखा, "इसराइली मंत्री बेन ग्विर की तस्वीरें अस्वीकार्य हैं. यह किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि इन प्रदर्शनकारियों, जिनमें कई इतालवी नागरिक भी शामिल हैं, के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए जो मानवीय गरिमा का उल्लंघन करता हो. इतालवी सरकार इस मामले में शामिल अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च संस्थागत स्तर पर तुरंत सभी आवश्यक कदम उठा रही है."

इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने बेन-ग्विर की हरकतों को "घृणित" बताया.

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि वीडियो में "पूरी तरह शर्मनाक दृश्य" दिखते हैं और उन्होंने इसराइली दूतावास को "तत्काल स्पष्टीकरण" के लिए तलब किया है.

उन्होंने पहले कहा था कि सरकार "कई ब्रिटिश नागरिकों के परिवारों के संपर्क में है ताकि उन्हें कांसुलर सहायता दी जा सके."

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कार्यकर्ताओं के साथ इसराइल के व्यवहार को "निंदनीय" बताया और कहा कि उन्होंने अधिकारियों को इसराइली राजदूत को तलब करने का निर्देश दिया है.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, "नागरिकों की सुरक्षा और मानव गरिमा का सम्मान हर जगह, हर समय बनाए रखा जाना चाहिए."

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बेन-ग्विर की निंदा करते हुए कहा कि इसराइली अधिकारियों का व्यवहार "अपमानजनक" है.

ऑस्ट्रेलिया, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड्स, बेल्जियम और स्पेन ने कहा कि बेन-ग्विर की हरकतें "अस्वीकार्य" हैं और उन्होंने अपने-अपने इसराइली राजदूतों को तलब किया है.

आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएंटी ने कहा कि वीडियो से पता चलता है कि "ग़ैरकानूनी रूप से हिरासत में लिए गए लोगों के साथ किसी भी तरह का उचित सम्मान या गरिमा नहीं रखी जा रही है." इन कार्यकर्ताओं में कुछ आयरिश नागरिक भी शामिल हैं,

अदाला ने कहा कि यह फुटेज दिखाता है कि इसराइल "कार्यकर्ताओं के खिलाफ दुर्व्यवहार और अपमान की एक आपराधिक नीति अपना रहा है."

एक असामान्य घटनाक्रम में इसराइल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी अपने ही कैबिनेट सहयोगी की आलोचना की.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आपने इस शर्मनाक हरकत के ज़रिए जानबूझकर हमारे देश को नुकसान पहुंचाया है और यह पहली बार नहीं है."

इस पर बेन-ग्विर ने तुरंत जवाब देते हुए कहा, "विदेश मंत्री को यह समझना चाहिए कि इसराइल अब किसी के दबाव में आने वाला देश नहीं रहा."

इसके बाद प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी बेन-ग्विर की आलोचना की.

सरकारी बयान में कहा गया, "इसराइल को पूरा अधिकार है कि वह हमास समर्थक उकसावे वाली नौकाओं को अपने समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करने और ग़ज़ा पहुंचने से रोके. हालांकि, मंत्री बेन-ग्विर ने फ़्लोटिला कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया, वह इसराइल के मूल्यों और मानकों के अनुरूप नहीं है."

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने इसराइली अधिकारियों को निर्देश दिया है कि "उकसावे की कार्रवाई करने वालों को जल्द से जल्द देश से बाहर भेजा जाए."

ग्लोबल सुमुद फ़्लोटिला (जीएसएफ़) का कहना है कि नौका पर मौजूद कार्यकर्ता ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के लिए खाद्य सामग्री, शिशु आहार और चिकित्सीय सहायता लेकर जा रहे थे.

जीएसएफ़ एक अंतरराष्ट्रीय, नागरिक-नेतृत्व वाला अभियान है, जो ग़ज़ा तक मानवीय सहायता पहुंचाने और इसराइल की समुद्री नाकेबंदी का विरोध करने के उद्देश्य से चलाया जाता है.

ग़ज़ा में हालात बेहद ख़राब बताए जा रहे हैं और पिछले साल अक्तूबर में इसराइल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद वहां की 21 लाख आबादी का बड़ा हिस्सा विस्थापित है.

वहीं, इसराइल के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि ग़ज़ा "मदद सामग्री से भरा हुआ" है.

संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ़्ते कहा था कि ग़ज़ा में विस्थापित कई परिवार अब भी भीड़भाड़ वाले टेंटों या बुरी तरह क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने को मजबूर हैं क्योंकि उनके पास कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अप्रैल महीने में इसराइली अधिकारियों ने ग़ज़ा में प्रवेश के लिए जिन राहत सामग्रियों को मंज़ूरी दी थी, उनमें से सिर्फ़ 86 प्रतिशत ही सीमा चौकियों पर उतारी जा सकीं. बाकी सामग्री को वापस भेज दिया गया.

ग़ज़ा युद्ध की शुरुआत सात अक्तूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में दक्षिणी इसराइल पर हुए हमले के बाद हुई थी. इस हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था.

इसके जवाब में इसराइल ने ग़ज़ा में सैन्य अभियान शुरू किया. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस अभियान में अब तक 72,770 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

أسئلة مفتوحة

  • क्या कार्यकर्ताओं को जल्द ही रिहा किया जाएगा?
  • क्या इस घटना के कारण इसराइल पर कोई कूटनीतिक या कानूनी कार्रवाई होगी?
  • क्या इस घटना का गाजा में मानवीय सहायता की पहुंच पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

مواضيع ذات صلة

This article was originally published by BBC हिंदी.

أخبار ذات صلة

المزيد حول هذا الموضوعइतामार बेन-ग्विर