عاجل
AR80 لغما تُغلق الممر المركزي لهرمز والسفن تلجأ للمسارين الشمالي والجنوبيARأوكرانيا تشن هجوماً بطائرات مسيرة على موسكو ومصفاة نفط كبرىARآندي بورنام يعود إلى البرلمان البريطاني.. هل يطيح بكير ستارمر؟ARمتحف بوشكين يعرض لوحات نادرة لفناني عصر النهضة من مقتنيات خاصةARما الذي نعرفه عن أموال إيران المجمدة؟ARسويسرا تؤكد عدم انعقاد المحادثات الأمريكية الإيرانية الجمعة بعد تأجيل زيارة فانسARتوخيل في ملاعب البيسبول، بوكيتينو يدعم ميسي، وألفارو يدافع عن لاعبيه في كأس العالمARبوكيتينو يدعم ميسي.. وألفارو يدافع عن لاعبيه.. والأرجنتين تواجه معضلة الهجومARانقسام أوروبي حول التفاوض مع روسيا وسط مخاوف من تحركات أمريكية منفردةARنائب الرئيس الأمريكي: ملتزمون بتنفيذ تعهداتنا من مذكرة التفاهم مع إيرانAR80 لغما تُغلق الممر المركزي لهرمز والسفن تلجأ للمسارين الشمالي والجنوبيARأوكرانيا تشن هجوماً بطائرات مسيرة على موسكو ومصفاة نفط كبرىARآندي بورنام يعود إلى البرلمان البريطاني.. هل يطيح بكير ستارمر؟ARمتحف بوشكين يعرض لوحات نادرة لفناني عصر النهضة من مقتنيات خاصةARما الذي نعرفه عن أموال إيران المجمدة؟ARسويسرا تؤكد عدم انعقاد المحادثات الأمريكية الإيرانية الجمعة بعد تأجيل زيارة فانسARتوخيل في ملاعب البيسبول، بوكيتينو يدعم ميسي، وألفارو يدافع عن لاعبيه في كأس العالمARبوكيتينو يدعم ميسي.. وألفارو يدافع عن لاعبيه.. والأرجنتين تواجه معضلة الهجومARانقسام أوروبي حول التفاوض مع روسيا وسط مخاوف من تحركات أمريكية منفردةARنائب الرئيس الأمريكي: ملتزمون بتنفيذ تعهداتنا من مذكرة التفاهم مع إيران
Newsgather
Backकॉमेडी शो में मेडिकल छात्रा की टिप्पणी पर विवाद, FIR दर्ज
कॉमेडी शो में मेडिकल छात्रा की टिप्पणी पर विवाद, FIR दर्ज
يتطور
BBC हिंदी4 g önceOther10 dk okumaIndia

कॉमेडी शो में मेडिकल छात्रा की टिप्पणी पर विवाद, FIR दर्ज

نظرة سريعة

मुंबई की एक मेडिकल छात्रा सेजल पवार के कॉमेडी शो में मृत पुरुषों के जननांगों पर की गई टिप्पणी से नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में कॉमेडियन प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और सेजल पवार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

ملخص مُنشأ بالذكاء الاصطناعي

لماذا يهم

कॉमेडी शो में आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर यह नया विवाद तब सामने आया है जब कुछ समय पहले इसी तरह के एक शो में हिमांशु जांगड़ा की टिप्पणियों पर भी हंगामा हुआ था।

حجم الخط

Author, मृदुलिका झा

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 20 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 10 मिनट

बिरयानी के बदले सेक्सुअल फ़ेवर मांगने को लेकर हिमांशु जांगड़ा पर उठा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक नया विवाद सामने आ गया. यह मामला भी कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो से जुड़ा है, जहां हिमांशु ने विवादास्पद बातें की थीं.

ताज़ा विवाद के केंद्र में एक मेडिकल छात्रा सेजल पवार हैं. वह मुंबई में एमबीबीएस थर्ड ईयर की छात्रा हैं. लगभग तीन महीने पुराने शो में होस्ट प्रणीत मोरे क्राउड वर्क के दौरान सेजल से बात करते हैं. वह उनसे एनाटॉमी और पोस्ट मार्टम पर सवाल कर रहे थे.

सेजल बता रही हैं कि शवों की मेडिकल जांच कैसे होती है. इस बीच वह कहती हैं कि डॉक्टर कई बार मृत पुरुषों के जननांगों को लेकर मज़ाक करते हैं.

जब वह यह बात कर रही थीं तब भी प्रणीत ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि हंसते हुए उकसाते रहे. यह वीडियो क्लिप तब वारयल नहीं हुई, बल्कि हिमांशु प्रकरण के बाद तेज़ी से फैली.

सोशल मीडिया पर सेजल पवार की इस टिप्पणी को लेते हुए यूज़र सवाल करने लगे कि वह तो मेडिकल प्रोफ़ेशन से हैं. जब वह शवों तक का सम्मान नहीं करेंगी, तो मरीज़ों के साथ कैसा व्यवहार करती होंगी.

यहां तक कि कई यूज़र उन्हें मेडिकल कॉलेज से निकालने तक की मांग तक कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर बात हो रही है कि मेडिकल छात्रों के अध्य्यन के लिए शरीर दान करने वाले मृतकों तक की गरिमा का ध्यान नहीं रखा जा रहा.

इस बीच, मुंबई के केईएम अस्पताल, जहां सेजल पढ़ रही हैं, उसका प्रशासन भी हरकत में आ गया. अस्पताल की ही दो सदस्यीय कमेटी वीडियो क्लिप की समीक्षा कर रही है और सेजल को छुट्टी पर भेज दिया गया है.

सीमा कौन तय करेगा - दर्शक, कानून या कॉमेडियन?

हिमांशु और प्रणीत अपने कथित मज़ाक के लिए पहले ही माफ़ी मांग चुके हैं. हाल में क्लिप वायरल होने के बाद सेजल पवार ने भी एक वीडियो डालकर माफ़ी मांगी.

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

उन्होंने कहा, "मैं पहली बार कॉमेडी शो में गई थी. मैंने वहां पर कई बातें की थीं. गाना भी गाया था. लेकिन वही कमेंट वायरल हो गया. मैं मानती हूं कि मैंने बहुत ग़लत बात की थी. अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो मैं माफ़ी चाहती हूं. आगे से ऐसा कभी नहीं होगा."

अब महाराष्ट्र साइबर सेल ने प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और सेजल पवार के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है.

एएनआई में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, उन पर आरोप भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(iv), 75(3), 294 और 353(2) के साथ-साथ आई टी एक्ट की धारा 67 के तहत लगाए गए हैं.

साइबर पुलिस का कहना है कि यूट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे इस कंटेंट में महिलाओं और मृतकों से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं.

आरोप है कि कॉमेडियन प्रणीत मोरे के होस्ट किए गए प्रोग्राम्स की क्लिप रिकॉर्ड की गईं और उन्हें सोशल मीडिया पर फैलाया गया ताकि कमर्शियल फ़ायदा हो सके.

प्रणीत मोरे के शो से जुड़ी दो वायरल क्लिप्स पर कार्रवाई के बाद बहस अब सिर्फ़ हिमांशु जांगड़ा या सेजल पवार तक सीमित नहीं रह गई है.

सवाल यह उठ रहा है कि क्या कॉमेडी के नाम पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट सामान्य होता जा रहा है. और अगर ऐसा है तो इसकी सीमा कौन तय करेगा - दर्शक, क़ानून या कॉमेडियन?

'ह्यूमर अक्सर एक तरह का पावर प्ले होता है'

बीबीसी ने इस बारे में मिरांडा हाउस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की प्रोफ़ेसर रीमा भाटिया से बात की.

वह कहती हैं, "ह्यूमर अक्सर एक तरह का पावर प्ले होता है. यानी हम अक्सर उन्हीं लोगों या कम्युनिटी को लेकर मज़ाक करते हैं, जिनके बारे में हम मानते हैं कि हम उनसे बेहतर या ज़्यादा ताकतवर हैं. ट्रेडीशनली इसी तरह के मज़ाक होते रहे, जैसे वाइफ़ जोक्स, जिसमें पत्नी कमतर मानी जाती रही और हंसी का केंद्र रही."

"इसका उल्टा रिएक्शन भी होता है, यानी जिन लोगों को दबाया जाता रहा, वह पलटवार करते हैं. मेडिकल छात्रा की बात सुनें तो भी यही लगता है कि जैसे वह कहना चाहती हों कि देखो हम महिलाएं भी पुरुषों पर जोक्स कर सकती हैं. हालांकि नैतिक तौर पर दोनों ही पक्ष ग़लत हैं."

भारत ही नहीं, लगभग पूरी दुनिया में आपत्तिजनक कंटेंट कॉमेडी की तरह परोसा जाने लगा है.

ब्रिटिश कॉमेडियन रिकी गेर्विस अपने डार्क ह्यूमर के लिए जाने जाते हैं. लेकिन साल 2009 में उन्होंने रेप को ही कॉमेडी का विषय बना दिया.

एक विवादास्पद जोक में गेर्विस एक काल्पनिक ड्रिंक ड्राइविंग का जिक्र करते हैं, जहां वह बूढ़ी महिला का बलात्कार कर देते हैं, जो अल्ज़ाइमर बीमारी से जूझ रही थी. कॉमेडियन का मज़ाक यहां खत्म होता है कि "चूंकि क़िस्मत से उसे अल्ज़़ाइमर था. इसलिए वह भरोसेमंद गवाह नहीं थी."

इस मज़ाक में शराब पीकर गाड़ी चलाने से लेकर रेप और बीमारी तक का इस्तेमाल किया गया. विवाद बढ़ने पर गेर्विस ने अपना बचाव किया था, यह कहते हुए कि उन्होंने व्यंग्य किया था.

क्या लोग अश्लील या बोल्ड पंचलाइन पर ज़्यादा हंसते हैं?

बीबीसी से बात करते हुए मध्य प्रदेश के इंदौर के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर उज्ज्वल सरदेसाई कहते हैं, "कई बार हम किसी ऐसी बात पर, जिसे हम ग़लत मानते हैं, नाराज़ होने की बजाय हंसकर प्रतिक्रिया देते हैं. मनोविज्ञान में इसे रिएक्शन फ़ॉर्मेशन कहा जाता है. यह एक तरह का डिफ़ेंस मेकेनिज़्म है. ऐसा तब होता है, जब हम किसी भी वजह से सीधा विरोध नहीं करना चाहते."

"कई बार ऑडियंस को यह डर भी रहता है कि कथित कॉमेडी पर उनका भड़क जाना उन्हें कम कूल दिखा सकता है. यही वजह है कि ऐसे लोग भी अश्लील मज़ाक पर हंसते हैं, जो उससे सहमति नहीं रखते. स्टैंड अप कॉमेडी में आमतौर पर लोग झेंप मिटाने के लिए हंसते हैं, या फिर जोक्स करते हैं."

अक्सर दिखता है कि किसी कॉमेडी शो में अचानक कोई द्विअर्थी बात आ जए तो कमरे या हॉल में हंसी की आवाज़ बढ़ जाती है.

इसके पीछे भी मनोविज्ञान है. अमेरिकी बिहेवियरल साइंटिस्ट ए पीटर मैकग्रा ने हंसी के मनोविज्ञान पर एक स्टडी की थी. 'बिनाइन वायलेशन- मेकिंग इममॉरल बिहेवियल फ़नी' नाम से यह अध्ययन पीयर-रिव्यूड जर्नल साइकोलॉजिकल साइंस में छपा था.

इसके मुताबिक, लोग अक्सर उन बातों पर हंसते हैं, जिनके बारे में अक्सर खुलकर बातचीत नहीं की जाती. यौन संबंध और शरीर कुछ ऐसे ही विषय हैं. मतलब जिस चीज़ को सोसायटी संवेदनशील मानती है, वही कॉमेडी में आ जाए तो लोगों को ज़्यादा मज़ेदार लगता है.

इसके लिए बाकायदा एक टर्म है- बिनाइन वायलेशन थ्योरी. इसके मुताबिक, हमें हंसी तभी आती है जब कोई बात या घटना किसी नियम को तोड़ती दिखे.

मसलन, कोई शख्स गिरता दिखे तो आसपास बहुत से लोग हंस पड़ते हैं अगर नुक़सान ज़्यादा गंभीर न हो.

लेकिन हर कोई क्यों नहीं हंसता?

एक ही मज़ाक सुनकर एक व्यक्ति जोर से हंस सकता है, जबकि दूसरा शख्स नाराज़ हो सकता है. दरअसल कॉमेडी की समझ का उम्र, परवरिश और व्यक्तिगत तजुर्बे से संबंध है. हो सकता है कि जो कॉमेडी एक कॉलेज छात्र को हंसाए, वही उसके परिवार में बड़ों को भद्दी लग जाए.

प्रोफ़ेसर रीमा भाटिया कहती हैं, "पढ़ाई-लिखाई, अनुभव कई चीजें के साथ सोच बदलती है. यही वजह है कि पीढ़ी दर पीढ़ी किसी बात को मज़ाक मानने या न मानने की सोच भी बदलती है. मसलन, जोरू का ग़ुलाम टर्म को पहले ह्यूमर माना जाता है, आज बहुत कम लोग होंगे, जो ऐसी बात करें."

मज़ाक की आड़ में कई आपत्तिजनक बातों को नॉर्मलाइज किया जा रहा है. अगर लिंग या धर्म को लेकर बार-बार अपमानजनक बातें कॉमेडी की शक्ल में परोसी जाएं तो कुछ लोग उसे कम गंभीर मान सकते हैं.

प्रणीत मोरे के शो की क्लिप्स वायरल होने के बाद भी यही सवाल उठा. यूज़र मान रहे हैं कि जब महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा या कंसेंट जैसे विषयों पर बार-बार मज़ाक हो, तो उससे इन मुद्दों की गंभीरता कम हो सकती है.

लेकिन क्या इससे सीधे अपराध बढ़ते हैं?

अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जो यह साबित करता हो कि कॉमेडी शो देखने से कोई शख्स अपराध करने लगे. लेकिन चिंता उस माहौल को लेकर है, जो ग़लत को नॉर्मलाइज कर रही है.

इससे समाज की सोच ज़्यादा पूर्वाग्रही हो सकती है. खासकर तब, जबकि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा बढ़ी है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के मुताबिक, साल 2021 से साल 2023 के बीच महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ दर्ज अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दिखी.

इस दौरान महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले लगभग 4.28 लाख से बढ़कर लगभग 4.48 लाख हो गए, जबकि बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध लगभग 1.49 लाख से बढ़कर 1.77 लाख के करीब पहुंच गए.

यानी जो समूह पहले से ही वल्नरेबल है, उसके साथ हो रहे अपराधों पर हंसना उस पर ख़तरा बढ़ा सकता है.

लेकिन ऐसा नहीं कि सिर्फ़ एक ही जेंडर निशाने पर है.

महिलाओं के कपड़ों, शरीर, उम्र, शादी या रिश्तों पर जोक्स अक्सर सुनाई पड़ जाते हैं. लेकिन पुरुष भी इससे बचे हुए नहीं. उनकी ऊंचाई, गंजापन, कमाई, नौकरी, प्यार में असफलता, यहां तक कि तथाकथित मर्दानगी पर बहुत से मज़ाक चलते हैं.

एक पुरुष को कैसा होना चाहिए, कितना कमाना चाहिए, कितना मजबूत होना चाहिए, जैसी बातों को लेकर भी कई तरह के मज़ाक किए जाते हैं. जो इन पर खरे नहीं उतरते, वह कई बार मज़ाक का शिकार हो जाते हैं.

यानी कॉमेडी की दुनिया में महिलाओं और पुरुषों, दोनों से जुड़े स्टीरियोटाइप्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. सेजल, जो कि एक मेडिकल प्रोफे़शनल हैं, उनका मज़ाक भी मृत पुरुषों के जननांगों से जुड़ा हुआ था.

हर डबल मीनिंग मज़ाक कानून की नज़र में अश्लील होता है?

जब भी किसी कॉमेडी शो, फिल्म, वेब सीरीज़ या सोशल मीडिया वीडियो को लेकर विवाद होता है, एक शब्द बार-बार सुनाई देता है, अश्लीलता. लेकिन कब इन्हें अश्लील माना जा सकता है कि कार्रवाई हो?

इसका जवाब उतना सीधा नहीं है जितना पहली नज़र में लगता है.

इसपर बीबीसी से बातचीत के दौरान सुप्रीम कोर्ट की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा, "कॉमेडी में इस्तेमाल होने वाली अश्लील भाषा को लेकर कोई अलग क़ानून नहीं है. ऐसे मामलों में कंटेंट के संदर्भ और उसके असर को देखा जाता है. अगर कंटेंट डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म पर है, तो आईटी एक्ट और दूसरी क़ानूनी धाराएं लग सकती हैं."

वह कहती हैं कि संविधान के अनुच्छेद 51A(e) में साफ़ कहा गया है कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए. लेकिन यह फ़ंडामेंटल ड्यूटी है, जिसे न मानने पर सज़ा का कोई अलग क़ानून नहीं है.

ताज़ा विवाद को देखें तो ऐसा लगता है कि पुलिस ने सांकेतिक तौर पर एफ़आईआर की है. हिमांशु के मामले में अगर उसकी कथित डेट भी सामने आकर शिकायत करे तो सज़ा हो सकती है, वरना केस ख़ारिज होने के ज़्यादा चांस हैं.

फ़िल्मों और ओटीटी प्लेटफ़ार्म पर गालियों के इस्तेमाल को लेकर भी अक्सर बहस होती है. लेकिन अदालतें सब पर रोक नहीं लगा देतीं. यौन चर्चा अश्लील नहीं, बल्कि ग़लत यह है कि किस इरादे से उस पर बात हुई.

ऐसे मामलों का संदर्भ खंगालने के बाद भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत कई धाराएं लगाई जाती हैं, जैसा ताज़ा मामले में हुआ.

अगर मज़ाक किसी धर्म, जाति या समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाला माना जाता है, तो अश्लीलता से अलग कई दूसरी आपराधिक धाराएं भी लग सकती हैं.

सेजल और हिमांशु के मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे क्या मोड़ लेती है, यह अभी साफ़ नहीं है. लेकिन इस विवाद से एक बार फिर यह सवाल आ रहा है कि क्या कॉमेडी के नाम पर हर सब्जेक्ट को छूने की आज़ादी मिलनी चाहिए, या फिर कानून और समाज को इस पर कोई एक्शन लेना चाहिए.

أسئلة مفتوحة

  • कॉमेडी की सीमाएं कौन तय करेगा?
  • क्या कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता सामान्य हो रही है?
  • कानूनी कार्रवाई का अंतिम परिणाम क्या होगा?

مواضيع ذات صلة

This article was originally published by BBC हिंदी.

أخبار ذات صلة

चीन में महिलाएँ क्यों पहन रही हैं पुरुषों के कपड़े?
Other·3 g önce

चीन में महिलाएँ क्यों पहन रही हैं पुरुषों के कपड़े?

चीन में युवा महिलाएँ पुरुषों के कपड़े अपना रही हैं, बेहतर क्वालिटी, कम दाम, ज़्यादा आराम और कम बॉडी शेमिंग जैसी वजहों से। यह ट्रेंड शाओहोंग्शु जैसे सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहा है, जहाँ महिलाएँ पुरुषों के कपड़ों की सुविधा और कम कीमत की सराहना कर रही हैं।

BBC हिंदी
हवाई यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? - बीबीसी पड़ताल
يتطور·3 g önce

हवाई यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? - बीबीसी पड़ताल

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार है, लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाएं, विवाद और आंकड़ों से सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज विकास के साथ मजबूत नियम और नियंत्रण की कमी है, जिससे पायलटों की थकान और कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

BBC हिंदी
कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता: सीमा कौन तय करेगा?
يتطور·4 g önce

कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता: सीमा कौन तय करेगा?

मुंबई में एक मेडिकल छात्रा सेजल पवार के स्टैंड-अप कॉमेडी शो में मृत पुरुषों के जननांगों पर की गई टिप्पणी से नया विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में महाराष्ट्र साइबर सेल ने सेजल, कॉमेडियन प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की है. यह घटना कॉमेडी की सीमा और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर बहस छेड़ रही है.

BBC हिंदी
المزيد حول هذا الموضوعकॉमेडी