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Zurückट्रंप ने कहा- ईरान के साथ समझौता अंतिम नहीं, फिर से 'बम गिराने' की धमकी
ट्रंप ने कहा- ईरान के साथ समझौता अंतिम नहीं, फिर से 'बम गिराने' की धमकी
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BBC हिंदी17.6.2026Welt3 Min. LesezeitIndia

ट्रंप ने कहा- ईरान के साथ समझौता अंतिम नहीं, फिर से 'बम गिराने' की धमकी

Auf einen Blick

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए समझौते को अंतिम नहीं बताया है और कहा है कि अगर ईरान ठीक से व्यवहार नहीं करता है तो अमेरिका फिर से उन पर बम गिराएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जिस समझौते पर सहमति बनी है वो समझौता अभी अंतिम नहीं है.

जी-7 शिखर सम्मेलन में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सीसी के साथ खड़े ट्रंप ने कहा, "अगर वो (ईरान) ठीक से व्यवहार नहीं करते हैं, तो हम सीधे फिर से उनके सिर के ठीक ऊपर बम गिराने लगेंगे."

उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका ईरान में निवेश नहीं कर रहा है. यह उन रिपोर्ट्स के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के फ़ाइनल सेटलमेंट के लिए राज़ी होने के बदले में ईरान के लिए एक इन्वेस्टमेंट फ़ंड की इजाज़त देने को तैयार था.

मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा था कि डील के तहत "ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा."

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मिलने वाले हैं.

हालांकि, समझौते का विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.

इस समझौते पर सहमति अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में रविवार को बनी थी. इसे 'समझौता ज्ञापन' कहा गया है, लेकिन अब तक यह नहीं मालूम कि इसमें क्या लिखा है.

समझौता अंतिम नहीं है

सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि "समझौते पर पूरी तरह हस्ताक्षर हो चुके हैं" और इसका पूरा पाठ "बहुत जल्द" प्रकाशित किया जाएगा.

यह संघर्ष विराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाएगा, जिसके दौरान दोनों पक्ष अंतिम समझौते के विवरण पर बातचीत करेंगे.

ट्रंप ने कहा है कि इस समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के फिर से खोल दिया जाएगा और ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकेबंदी समाप्त हो जाएगी.

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी वार्ता भी इस सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है.

लेकिन यह समझौता शांति समझौता नहीं है, बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय संपादक जेरेमी बोवेन बताते हैं, "यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत के स्तर जैसे सबसे जटिल मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए टाल देता है."

यह भी सवाल बना हुआ है कि लेबनान में इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्ध के लिए इस समझौते का वास्तव में क्या अर्थ होगा. ईरान का कहना है कि यह भी समझौते का हिस्सा होना चाहिए.

अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के ब्युर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं.

जी-7 देशों ने क्या मांग की

जी-7 नेताओं ने ईरान समझौते के बाद एक मज़बूत समझौते की मांग की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने से पहले कि ईरान के साथ समझौता "अंतिम नहीं" है, जी7 देशों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में आगे होने वाले "मज़बूत" समझौते का आह्वान किया गया था.

जी7 देशों - अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान - ने कहा कि वे मध्य पूर्व में हुई "महत्वपूर्ण प्रगति को स्वीकार करते हैं" और समझौते को लागू करने में "समर्थन देने और योगदान करने के लिए तैयार हैं".

बयान में कहा गया, "हम राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से सुनिश्चित किए गए समझौता ज्ञापन के बाद एक मज़बूत और व्यापक कूटनीतिक समझौते का दृढ़ समर्थन करते हैं, जो पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा ला सकता है."

भू-राजनीतिक मुद्दों पर जारी इस बयान में यूक्रेन युद्ध, उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में तनाव तथा ताइवान जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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