Eilmeldung
INTLTwo Girls Seriously Injured in Suspected Attack at German High SchoolARترامب يهدد إيران بضربات جديدة بعد انتهاء الهدنةCN新北啟動油品專案稽查 問題油品及加工製品全面下架ARربع النهائي: 8 منتخبات تتنافس على 4 مقاعد في نصف النهائيDEMerz zufrieden mit Nato-Gipfel: "Europäische Trittbrettfahrerei vorbei"ARالأرجنتين تقلب تأخرها 0-2 إلى فوز 3-2 على مصر في كأس العالمARلوبان تعلن ترشحها للرئاسة الفرنسية رغم حكم قضائي بسوار مراقبةITInter, nuove intercettazioni sull'inchiesta arbitrale: coinvolto RocchiITAttentato Ranucci, Lavitola interrogato: "Qualcosa non torna"ITMeloni: "Spese Difesa, tempi e modi li stabiliamo noi". Aiuti a Kiev e colloqui Israele-LibanoINTLTwo Girls Seriously Injured in Suspected Attack at German High SchoolARترامب يهدد إيران بضربات جديدة بعد انتهاء الهدنةCN新北啟動油品專案稽查 問題油品及加工製品全面下架ARربع النهائي: 8 منتخبات تتنافس على 4 مقاعد في نصف النهائيDEMerz zufrieden mit Nato-Gipfel: "Europäische Trittbrettfahrerei vorbei"ARالأرجنتين تقلب تأخرها 0-2 إلى فوز 3-2 على مصر في كأس العالمARلوبان تعلن ترشحها للرئاسة الفرنسية رغم حكم قضائي بسوار مراقبةITInter, nuove intercettazioni sull'inchiesta arbitrale: coinvolto RocchiITAttentato Ranucci, Lavitola interrogato: "Qualcosa non torna"ITMeloni: "Spese Difesa, tempi e modi li stabiliamo noi". Aiuti a Kiev e colloqui Israele-Libano
Newsgather
Backगुजरात: हाईकोर्ट की फटकार के बाद सूरत नगर निगम ने तोड़े गए मकानों के पीड़ितों को राहत देने का वादा किया
गुजरात: हाईकोर्ट की फटकार के बाद सूरत नगर निगम ने तोड़े गए मकानों के पीड़ितों को राहत देने का वादा किया
In Entwicklung
BBC हिंदी13 sa öncePolitik5 dk okumaIndia

गुजरात: हाईकोर्ट की फटकार के बाद सूरत नगर निगम ने तोड़े गए मकानों के पीड़ितों को राहत देने का वादा किया

Auf einen Blick

गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत नगर निगम को गैरकानूनी तरीके से तोड़े गए कच्चे मकानों के पीड़ितों के लिए आवास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। निगम ने अगली सुनवाई से पहले प्रस्ताव पेश करने का वादा किया है।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

सूरत के नासिरनगर इलाके में मई के अंत में 100 से ज़्यादा कच्चे मकानों को तोड़ा गया था, जिससे लोग बेघर हो गए थे। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट में मामला पहुंचा।

Schriftgröße

Author, अजित गढ़वी

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 3 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

गुजरात में सूरत ज़िले के नासिरनगर इलाके में मई के आख़िर में अचानक 100 से ज़्यादा कच्चे मकान तोड़ दिए गए थे.

इसके बाद इस मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट में क़ानूनी लड़ाई शुरू हुई. दो जुलाई को हाईकोर्ट ने सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एसएमसी) को कड़ी फटकार लगाई.

अदालत ने कहा कि "ग़ैरक़ानूनी तरीके से मकान तोड़े जाने के कारण बेघर हुए परिवारों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की ज़िम्मेदारी है."

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उनके रहने की व्यवस्था या तो उसी जगह की जाए या फिर किसी दूसरी जगह.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद नासिरनगर के विस्थापित लोगों में दोबारा घर मिलने की उम्मीद जगी है. 30 मई को जब उनके घर तोड़े गए थे, तब भीषण गर्मी पड़ रही थी.

अब सूरत में पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. नासिरनगर में एक-दो परिवारों ने तंबू लगाकर अपना सामान उसमें रखा हुआ है और वहीं रह रहे हैं.

वहीं, ज़्यादातर परिवारों ने अलग-अलग इलाकों में किराए के मकान ले लिए हैं या फिर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सामुदायिक हॉल में शरण ली है.

'गैरकानूनी तरीके से घर तोड़े जाने के बाद हम बेघर हो गए'

नासिरनगर के निवासी मोहम्मद इरफ़ान ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मैं पिछले 45 वर्षों से नासिरनगर में रह रहा हूं. ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से घर तोड़े जाने के बाद हम बेघर हो गए. कभी हमें खाना मिल जाता है और कभी नहीं मिलता. हमारे बच्चों की पढ़ाई भी रुक गई है. मेरी दुकान भी चली गई और मैं बेरोजगार हो गया हूं."

उन्होंने कहा, "अब कोर्ट का यह निर्देश आया है, जिससे हमें कुछ राहत मिली है. लेकिन अभी स्थायी समाधान नहीं मिला है. हमारी उम्मीद है कि जहां हमारा घर था, उसी जगह हमें फिर से घर मिले."

सहीम अहमद शेख़ का घर भी नासिरनगर में हुई तोड़-फोड़ की कार्रवाई में टूट गया था. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के ताज़ा निर्देश से फ़िलहाल उन्हें संतोष है, लेकिन अब उन्हें बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है.

उन्होंने कहा, "हमारे परिवार में कुल नौ लोग थे. अब सभी अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं. इस समय हमने अपना घर और बहुत कुछ खो दिया है. जहां हमें रखा गया है, वहां बच्चों की पढ़ाई की भी ठीक व्यवस्था नहीं है. काम-धंधा भी नहीं हो पा रहा है. हमें भारी नुक़सान उठाना पड़ा है."

वहीं, शबनम बानू ने कहा, "हमने 27 दिन खुले आसमान के नीचे गुज़ारे. हमारे सिर पर कोई छत नहीं थी. अदालत का आदेश आने के बाद हमें इस हॉल में रहने की जगह दी गई. लेकिन यहां भी कोई ख़ास सुविधा नहीं है."

उन्होंने बताया, "कुछ सामाजिक संस्थाओं के लोग आते हैं और हमें खाना देकर जाते हैं. जब ऐसा नहीं होता, तो हम अपने पैसों से थोड़ा-बहुत खाना ख़रीदकर लाते हैं."

शबनम बानू ने कहा, "बच्चों को स्कूल भेजने में भी दिक्क़त होती है. हमारे बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. हमारी बस यही इच्छा है कि जितनी जल्दी हो सके, हमें उसी जगह दोबारा घर बनाकर दिए जाएं."

'कोर्ट ने निर्देश तो दिया, लेकिन घर कब मिलेगा, यह नहीं पता'

नासिर नगर के निवासी मोहसिन पठान ने कहा, "फ़िलहाल हमारे रहने की व्यवस्था एक सामुदायिक हॉल में की गई है, लेकिन यहां खाने-पीने या दूसरी ज़रूरी सुविधाओं का इंतज़ाम नहीं है. हमारे बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं. कोर्ट ने यह निर्देश तो दिया है, लेकिन हमें घर कब मिलेगा, यह नहीं पता. हम पहले से ही ग़रीब थे और अब हमारी हालत और ख़राब हो गई है."

2 जुलाई को सूरत के तत्कालीन पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने अदालत में हलफ़नामा दाख़िल किया.

इसके अलावा, टोरेंट पावर के एक अधिकारी की ओर से भी एक हलफ़नामा पेश किया गया. यह गुजरात में स्थित भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की एकीकृत बिजली कंपनियों में से एक है.

कथित रूप से सूरत नगर आयुक्त की जानकारी के बिना ही इन मकानों को तोड़ दिया गया, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इसके विरोध में प्रभावित निवासियों ने तोड़फोड़ वाली जगह पर धरना भी दिया.

इसके बाद एक उप नगर आयुक्त के नेतृत्व में जांच समिति बनाई गई. 30 जून को समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट आने के तुरंत बाद सूरत नगर निगम के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया.

नगर निगम आयुक्त के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस निखिल करियल ने मौखिक आदेश में कहा, "प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि यह तोड़फोड़ अवैध थी. इसलिए नगर निगम की ज़िम्मेदारी है कि इस अवैध कार्रवाई से विस्थापित हुए लोगों के लिए या तो उसी स्थान पर आवास उपलब्ध कराया जाए या फिर उन्हें किसी अन्य जगह बसाया जाए."

अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई से पहले नगर आयुक्त को इस संबंध में एक प्रस्ताव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा.

9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

30 मई को सूरत पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में नासिरनगर में 100 से अधिक कच्चे मकान तोड़ दिए गए थे. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था.

हैरानी की बात यह थी कि नगर निगम ने दावा किया कि उसने इस तोड़फोड़ के लिए कोई आदेश नहीं दिया था. निगम का कहना था कि उसके अधिकारी वहां केवल एक सड़क के लिए सीमांकन करने गए थे.

सूरत पुलिस ने भी इस कार्रवाई से ख़ुद को अलग बताने की कोशिश की थी. हालांकि, जिन लोगों के मकान टूटे थे, उनमें से 26 लोगों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की. इसी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि अगर यह तोड़फोड़ बिना किसी आधिकारिक आदेश के हुई थी तो प्रभावित लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई करना पुलिस की ज़िम्मेदारी थी.

गुजरात हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को तय की है. अदालत ने इससे पहले सूरत के नगर आयुक्त एम. नागराजन को इस मामले में हलफ़नामा दाख़िल करने का निर्देश दिया है.

Worauf zu achten ist

KI-Ausblick — Möglichkeiten, keine Fakten

  • नगर आयुक्त अगली सुनवाई से पहले आवास व्यवस्था के लिए एक प्रस्ताव अदालत में पेश करेंगे।

    Sehr wahrscheinlich · Innerhalb von Tagen

Offene Fragen

  • पीड़ितों को घर कब तक मिलेंगे?
  • नगर निगम क्या प्रस्ताव पेश करेगा?
  • तोड़फोड़ के लिए कौन जिम्मेदार था?

Verwandte Themen

This article was originally published by BBC हिंदी.

Ähnliche Meldungen

Mehr zu diesem Themaगुजरात