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Atrásवो तस्वीरें जिनकी वजह से जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन की देश-विदेश में है चर्चा
वो तस्वीरें जिनकी वजह से जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन की देश-विदेश में है चर्चा
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BBC हिंदीhace 1 horaPolítica2 min de lecturaIndia

वो तस्वीरें जिनकी वजह से जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन की देश-विदेश में है चर्चा

En resumen

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच ने बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

Resumen generado por IA

Por qué importa

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रश्नपत्र लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 'चलो संसद' मार्च निकाला, जिस पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की।

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कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई के चलो संसद मार्च में पुलिस की सख़्ती पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने भी सवाल उठाए हैं।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बयान जारी कहा है, ''आंसू गैस और लाठीचार्ज। मेट्रो सेवाएं निलंबित, मोबाइल इंटरनेट बंद। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़रूरी और अत्यधिक बल प्रयोग की ख़बरें सामने आई हैं।"

"प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित लाखों छात्रों के मुद्दे पर भारत में प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने हिंसक कार्रवाई की।''

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है, ''भारतीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान कथित ग़ैर-क़ानूनी आचरण और बल प्रयोग के सभी आरोपों की तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।''

वहीं मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने कहा है कि 20 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने भारत की संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान कई लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कथित ग़ैर-क़ानूनी और अत्यधिक बल प्रयोग सहित सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

पुलिस की कार्रवाई में दर्जनों बड़ी संख्या में लोग ज़ख़्मी भी हुए हैं। एक महिला प्रदर्शनकारी की हालत गंभीर बताई जा रही थी। हालांकि बाद में अस्पताल प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि उसकी हालत में सुधार है।

दिल्ली पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसने क़ानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए कार्रवाई की है।

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा है, ''20 जुलाई को हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के अधिकारियों सहित दिल्ली पुलिस और केन्द्रीय पुलिस बलों के कुल 118 पुलिसकर्मियों से ज़्यादा को चोटें आई हैं।''

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में स्वतः संज्ञान लेने और याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वीडियो दिखाकर अदालत का समय "बर्बाद" न करें और क़ानून के तहत उपलब्ध उचित प्रक्रिया का पालन करें।

मामले का उल्लेख कार्यवाही शुरू होने पर चीफ़ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष किया गया।

स्वतः संज्ञान लेने की मांग करते हुए एक वकील ने कहा कि यह मामला दिल्ली पुलिस की ओर से हज़ारों स्टूडेंट्स पर की गई कार्रवाई से जुड़ा है।

स्टूडेंट्स कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' आह्वान के तहत संसद की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार की मांग कर रहे थे।

जब याचिकाकर्ता वकील ने प्रदर्शन के दिन वाले वीडियो दिखाने की बात कही तो इस पर चीफ़ जस्टिस ने वकील से कहा, "हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना समय भी बर्बाद मत कीजिए।"

गौरतलब है कि चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की ही एक टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ था।

Preguntas abiertas

  • पुलिस कार्रवाई में घायल महिला प्रदर्शनकारी की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • पुलिस बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच कब और कैसे होगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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