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सोनम वांगचुक ने अनशन ख़त्म करने के लिए रखीं शर्तें
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BBC हिंदीhace 16 horasPolítica2 min de lecturaIndia

सोनम वांगचुक ने अनशन ख़त्म करने के लिए रखीं शर्तें

En resumen

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को समाप्त करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं, जिनमें सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करना या सांसदों द्वारा संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन शामिल है। वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जहां उनका अनशन जारी है।

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Por qué importa

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां उनका अनशन जारी है।

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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को समाप्त करने की शर्तें सार्वजनिक करते हुए कहा है कि वे कुछ निश्चित परिस्थितियों में ही इसे ख़त्म करेंगे।

उन्होंने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक लिखित संदेश जारी कर ख़ुद के अवैध हिरासत में होने का भी दावा किया।

नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग लेकर सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे।

लेकिन दिल्ली पुलिस 18 जुलाई को वांगचुक को जबरन उठाकर सफ़दरजंग अस्पताल ले गई थी।

हालांकि उनका अनशन वहां भी जारी है।

सोनम वांगचुक ने कहा है कि वो तब तक अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे जब तक कि उनकी तीन शर्तों में से कोई एक पूरी नहीं हो जाती है।

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से सोमवार को शांतिपूर्ण संसद मार्च का आह्वान किया गया है। हालांकि, पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है।

सोनम वांगचुक की शर्तें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार हाल के शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर लेती है या सांसद उन्हें आश्वस्त करते हैं कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा, तो वह अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 20 जुलाई को समाप्त कर देंगे। उनकी भूख हड़ताल का सोमवार को 23वां दिन है।

वांगचुक ने अस्पताल से हाथ से लिखे एक पत्र में तीन ऐसे हालातों का उल्लेख किया, जिनमें वह अपना अनशन खत्म करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में उन्हें "गैरकानूनी हिरासत" में रखा गया है।

वांगचुक के एक्स हैंडल से एक पोस्ट में लिखा गया है, "प्रिय मित्रों और समर्थकों, आप में से कई लोग पूछ रहे हैं कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा? जैसा कि मैंने पहले भी कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि..."

1.सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं, जैसे प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं, की जिम्मेदारी स्वीकार करती है...

या

2. यदि संसद सदस्य और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता संसद पहुंचते हैं और राजनीतिक दल यह आश्वासन देते हैं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे, तो मैं अपना अनशन समाप्त कर दूंगा...

या

3. यदि स्वास्थ्य या अन्य वजहों से मेरे लिए अनशन जारी रखना संभव नहीं रहा, तो वह उस स्थिति में भी अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, बशर्ते विभिन्न दलों के सांसद और नेता अस्पताल आकर मुझे यही आश्वासन दें।''

19 जुलाई की तारीख वाले इस पत्र के आखिर में उन्होंने लिखा, "सफदरजंग अस्पताल में मेरी गैरकानूनी हिरासत से, जहां मेरी आवाजाही, अभिव्यक्ति और सभी तरह के कम्युनिकेशन की आज़ादी पर रोक लगी हुई है।"

वांगचुक का यह संदेश ऐसे समय आया, जब सोमवार को सीजेपी के प्रस्तावित 'संसद मार्च' से पहले जंतर-मंतर पर सैकड़ों समर्थक जुटे हुए थे।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पूरी रात धरना जारी रखने की अपील की।

वहीं, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने रविवार को कहा था कि यदि राजनीतिक नेता यह भरोसा दें कि वे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाएंगे, तो उनके पति अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे।

प्रदर्शनकारी हाल में नीट प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और छात्रों की आत्महत्याओं जैसे मुद्दों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

अस्पताल से छुट्टी पर अदालत ने क्या कहा था

इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने सोनम वांगचुक की अस्पताल से छुट्टी के लिए हाई कोर्ट मे याचिका दायर की थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि 'हर जीवन मूल्यवान है।' लेकिन ये भी कहा कि सोनम वांगचुक की सफ़दरजंग अस्पताल से छुट्टी के मामले में फ़ैसला 'मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।'

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है फ़िलहाल इस मामले पर किसी 'अंतरिम आदेश की ज़रूरत नहीं है'।

हाई कोर्ट ने तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा है। इस याचिका में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होनी है यानी वांगचुक को अगले तीन दिनों तक सफ़दरजंग अस्पताल में ही रहना होगा।

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की ओर से यह याचिका रविवार सुबह चार बजे दाख़िल की गई थी जिसे रविवार होने के बावजूद हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

Qué observar

Perspectiva de IA — posibilidades, no hechos

  • दिल्ली हाई कोर्ट 24 जुलाई को सोनम वांगचुक की अस्पताल से छुट्टी पर सुनवाई करेगा।

    Muy probable · En días

Preguntas abiertas

  • क्या सरकार वांगचुक की शर्तें मानेगी?
  • संसद में शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठेगा या नहीं?
  • मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट क्या होगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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