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पाकिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच को उम्रक़ैद की सज़ा
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BBC हिंदी26/6/2026Crime4 min de lecturaIndia

पाकिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच को उम्रक़ैद की सज़ा

बलूचिस्तान में जबरन ग़ायब किए जाने के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाली डॉ. महरंग बलोच को हत्या और चरमपंथ के आरोपों में दोषी ठहराया गया।

En resumen

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच और सिबग़तुल्लाह को एक अर्द्धसैनिक बल के जवान की हत्या और चरमपंथ के आरोपों में आतंकवाद निरोधी अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है। कार्यकर्ताओं ने आरोपों से इनकार किया है, और मानवाधिकार संगठनों ने इस फ़ैसले की निंदा की है।

Resumen generado por IA

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जबरन ग़ायब किए जाने के मामलों के ख़िलाफ़ लंबे समय से अभियान चलाने वाली प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है।

बलोच याकजेती कमेटी (बीवाईसी) की नेता डॉ. महरंग बलोच को साथी कार्यकर्ता सिबग़तुल्लाह के साथ हत्या और चरमपंथ के आरोपों में दोषी ठहराया गया है।

अभियोजन पक्ष ने दोनों पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक भीड़ को उकसाया, जिसने अर्द्धसैनिक बल के जवान शब्बीर अहमद पर जानलेवा हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

सुनवाई के दौरान कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों से इनकार किया और मुक़दमे का बहिष्कार किया था। साथ ही इस मामले में गिरफ़्तार नेता 12 जून से ज़िला जेल में धरने पर बैठे गए।

एक सुरक्षा अधिकारी ने महरंग बलोच पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बंदरगाह शहर ग्वादर में साल 2024 में आयोजित प्रदर्शन के दौरान 'बेहद भड़काऊ भाषण' दिया था, जिसके बाद 30 से 40 लोगों ने सुरक्षा बलों के एक वाहन पर डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया।

अधिकारी का दावा है कि सुरक्षाकर्मी शब्बीर अहमद बाकी लोगों से अलग हो गए थे और उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया।

क्वेटा की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने कहा कि डॉ महरंग बलोच और सिबग़तुल्लाह "बलोच याकजेती कमेटी की ग़ैरक़ानूनी सभा में सक्रिय थे और फ़ेडरल कॉन्स्टेबुलरी के अधिकारी की हत्या में उनका मक़सद एक था।"

अदालत ने दोनों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई और शब्बीर अहमद के वारिसों को 2 लाख पाकिस्तानी रुपये (719 डॉलर) के ज़ुर्माने का भी आदेश दिया।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, डॉ महरंग बलोच और सिबग़तुल्लाह पहले से ही अलग-अलग आरोपों में दो साल से जेल में बंद हैं।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने फ़ैसले की तत्काल समीक्षा की मांग की है।

आयोग ने आतंकवाद विरोधी न्यायालय (एटीसी) के फ़ैसले की तत्काल समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग की है।

आयोग ने कहा कि सरकार ने "मौलिक अधिकारों की पैरवी को उसी तरह देखने की अपनी नीति जारी रखी है, जिस तरह वह उग्रवाद को देखता है। इसके नतीजे में प्रशासनिक और न्यायिक फ़ैसले एकतरफ़ा और पक्षपातपूर्ण रहे हैं।"

महरंग बलोच की बहन और वक़ील नादिया बलोच तथा कार्यकर्ताओं की क़ानूनी टीम ने कहा कि उन्हें क़ानूनी प्रक्रिया का उचित अवसर नहीं दिया गया और उन्होंने फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला एक 'बेनाम अदालत' ने सुनाया और बचाव पक्ष के वक़ील वीडियो लिंक के ज़रिए गवाही देने वाले प्रत्यक्षदर्शियों से ठीक तरह से जिरह नहीं कर सके।

स्वीडन की कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की।

उन्होंने एक बयान जारी कर मुक़दमे को 'न्याय का मज़ाक' बताया, जो 'पूरी तरह गोपनीयता में' चलाया गया।

उन्होंने पाकिस्तान पर असहमति की आवाज़ों को अपराध की तरह पेश करने का आरोप भी लगाया।

बलूचिस्तान सरकार के एक प्रवक्ता ने एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी से कहा कि अभियोजन पक्ष के पास 'अकाट्य सबूत' हैं और यह मामला राजनीतिक वजहों से प्रेरित नहीं है।

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फ़ाउंडेशन (आईएचआरएफ़) ने डॉ महरंग बलोच और सिबग़तुल्लाह शाह को सुनाई गई उम्रक़ैद की सज़ा की कड़ी निंदा की है।

हेग में स्थित इस फ़ाउंडेशन ने बयान जारी कर कहा, "यह फ़ैसला न्याय का खुला उल्लंघन है और पाकिस्तान में क़ानून के शासन के लिए एक गंभीर झटका है।"

"बीवाईसी की नेता डॉ महरंग बलोच लंबे समय से बलोच लोगों की निडर और शांतिपूर्ण आवाज़ रही हैं। उन्होंने बलोचिस्तान में जबरन ग़ायब किए जाने, ग़ैरन्यायिक हत्याओं और सरकारी दमन के ख़िलाफ़ साहसपूर्वक अभियान चलाया है।"

फ़ाउंडेशन ने डॉक्टर महरंग बलोच को तुरंत रिहा करने की पाकिस्तान सरकार से अपील की है।

डॉ. महरंग बलोच कौन हैं?

बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, महरंग बलोच को 2024 में बीबीसी की 100 वुमेन सूची में शामिल किया गया था।

साल 2009 में कथित तौर पर सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने महरंग बलोच के पिता को उठा लिया था और दो साल बाद उनका शव मिला था जिस पर यातना के निशान थे।

इसके बाद महरंग बलोच ने अभियान चलाना शुरू किया।

साल 2023 के आख़िर में उन्होंने सैकड़ों महिलाओं के साथ 1,600 किलोमीटर की पदयात्रा कर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक मार्च किया था।

उनकी मांग थी कि लापता परिजनों को न्याय मिले। इस यात्रा के दौरान उन्हें दो बार गिरफ्तार किया गया।

उनका संगठन बीवाईसी बलूचिस्तान में जबरन ग़ायब किए जाने और ग़ैरन्यायिक हत्याओं के ख़िलाफ़ अभियान चला रहा है।

पाकिस्तान सरकार ने बीवाईसी पर बलोच उग्रवादियों से संबंध होने के आरोप लगाए हैं जिसका बीवाईसी ने खंडन किया है।

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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