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केरल में 18 महीने के बच्चे की मौत: मां और लिव-इन पार्टनर गिरफ़्तार, शरीर पर 51 चोटें
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BBC हिंदी6/2/2026Crime4 min readIndia

केरल में 18 महीने के बच्चे की मौत: मां और लिव-इन पार्टनर गिरफ़्तार, शरीर पर 51 चोटें

Quick Look

केरल में 18 महीने के बच्चे की मौत के मामले में पुलिस ने मां अखिला (21) और उसके लिव-इन पार्टनर अश्कर (31) को गिरफ्तार किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्चे के शरीर पर 51 चोटें और सिगरेट से जलाए जाने के निशान मिले हैं।

AI-generated summary

Why It Matters

केरल पुलिस ने 18 महीने के एक बच्चे की मौत की पुष्टि की है, जिसके शरीर पर 51 गंभीर चोटें थीं। पुलिस का मानना है कि ये चोटें बच्चे की मां के लिव-इन पार्टनर और संभवतः मां ने ही पहुंचाई हैं। बच्चे के शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान भी मिले हैं।

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केरल पुलिस ने पुष्टि की है कि 18 महीने के एक बच्चे की मौत उसके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के कारण हुई. पुलिस के मुताबिक़ बच्चे को ये चोटें उसकी मां के लिव-इन पार्टनर और संभवतः खुद मां ने ही पहुंचाई है.

हालांकि अभी ये जांच का विषय है.

बच्चे के शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान मिले हैं. ये निशान उसके प्राइवेट पार्ट्स, पैरों और उंगलियों समेत कई हिस्सों पर थे.

पुलिस का कहना है कि इन चोटों के कारण अंदरूनी रक्तस्राव हुआ, जिससे बच्चे की मौत हो गई.

तिरुवनंतपुरम ग्रामीण क्षेत्र के तहत आने वाले नेदुमंगड के डिप्टी एसपी के बैजु कुमार ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्चे के शरीर पर 51 चोटों का ज़िक्र है. इसके अलावा कई अन्य छोटी चोटें भी मिली हैं."

पुलिस ने इस मामले में बच्चे की मां अखिला (21) और उसके लिव-इन पार्टनर अश्कर (31) को गिरफ़्तार कर लिया है. बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

जांच अधिकारी ने कहा, "हम दोनों को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लेने की मांग करेंगे ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने ऐसा क्यों किया."

अश्कर पेशे से ड्राइवर जबकि अखिला एक डांसर हैं. पुलिस ने अश्कर और अखिला, दोनों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया है.

तिरुवनंतपुरम ग्रामीण के एसपी जुवनापुडी महेश ने बताया कि पुलिस अश्कर की पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है.

उन्होंने कहा, "अश्कर की पत्नी इस समय अस्पताल में भर्ती है. अश्कर की सास ने शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी बेटी को क़ानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है."

एसपी महेश के मुताबिक़ अश्कर के ख़िलाफ़ सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने का एक मामला भी है.

पुलिस के अनुसार, शनिवार को बच्चे को उल्टी हुई थी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया.

पोस्टमॉर्टम में यह भी पता चला कि बच्चे के दोनों हाथ टूटे हुए थे.

मां और उसके पार्टनर ने दावा किया था कि बच्चा साइकिल से गिर गया था.

हालांकि डिप्टी एसपी बैजु कुमार ने कहा, "अश्कर ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है."

अब तक अश्कर या अखिला के किसी रिश्तेदार या वकील ने सार्वजनिक रूप से उनका बचाव नहीं किया है.

तिरुवनंतपुरम ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के वंचित वर्गों को मुक़दमा लड़ने के लिए क़ानूनी सहायता मुहैया कराता है.

प्राधिकरण ने बताया कि अश्कर की पहली पत्नी की मां की ओर से मिली शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही उन्हें क़ानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

फ़िलहाल एफ़आईआर में मामले का पूरा ब्योरा नहीं है. पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही दोनों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया.

मामले की बाक़ी जानकारियां रिमांड रिपोर्ट में सामने आएंगीं, जो अदालत में पेश की जाएगी.

बैजु कुमार ने कहा, "पहली नज़र में ऐसा लगता है कि दोनों अपने तरीक़े से जीवन जीना चाहते थे और बच्चा उनके लिए बाधा बन रहा था."

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अखिला की मां ने बच्चे की देखभाल करने की पेशकश की थी, ख़ासकर तब जब उसके दोनों हाथ टूट गए थे.

बच्चे के पिता के माता-पिता ने भी उसे अपने पास रखने की इच्छा जताई थी.

बच्चे के पिता ने क़रीब दो साल पहले आत्महत्या कर ली थी. लेकिन अखिला ने किसी को भी बच्चा सौंपने पर सहमति नहीं दी.

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की जीवन आस्था हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

इस मामले को लेकर मनोचिकित्सकों का कहना है कि अपने ही बच्चे के साथ इस तरह के हिंसक व्यवहार के पीछे कई कारण हो सकते हैं, ख़ासकर तब जब मामला लिव-इन जैसे गैर-पारंपरिक संबंधों का हो.

श्री अविट्टोम तिरुनाल अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम के बाल मनोचिकित्सक डॉ. आर. जयप्रकाश कहते हैं, "ऐसे रिश्तों में पुरुष का महिला पर वर्चस्व हो सकता है. महिला को अक्सर यह डर रहता है कि अगर वह पुरुष की बात नहीं मानेगी तो वह उसे छोड़ देगा."

सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, तिरुवनंतपुरम में मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहन रॉय कहते हैं, "आमतौर पर सौतेले माता-पिता भी अपने बच्चों की देखभाल करते हैं. लेकिन कुछ मामलों में पुरुष यह महसूस करता है कि बच्चा उसका जैविक पुत्र नहीं है. उसके भीतर ईर्ष्या पैदा हो सकती है और वह बच्चे को अपने रिश्ते में बाधा के रूप में देख सकता है."

डॉ. रॉय ऐसी हिंसक प्रवृत्ति को मानसिक स्वास्थ्य से भी जोड़ते हैं. उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी समाज में लगभग 20 फ़ीसदी लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझते हुए पाए जाते हैं.

हालांकि अभी ये जांच का विषय है कि बच्चे की मौत में मां की भूमिका थी या नहीं.

डॉ. रॉय और डॉ. जयप्रकाश दोनों का कहना है कि हिंसक प्रवृति की एक वजह नशे की चपेट में आना भी हो सकता है.

डॉ. रॉय कहते हैं, "ऐसे लोगों के लिए स्वस्थ और सकारात्मक रिश्ते बनाना मुश्किल हो जाता है. जब घर में बार-बार हिंसा होती है तो परिवार के सदस्य धीरे-धीरे उसके प्रति संवेदनहीन हो जाते हैं. संभव है कि इस मामले में मां के साथ भी ऐसा हुआ हो."

डॉ. जयप्रकाश का मानना है, "हमें अभी नहीं पता कि मां ने बच्चे को प्रताड़ित किया या चुपचाप सब कुछ होने दिया. लेकिन ऐसे रिश्तों में अक्सर महिला की स्वतंत्रता सबसे पहले प्रभावित होती है."

उन्होंने यह भी कहा कि अपने अनुभव में उन्होंने देखा है कि महिलाएं अक्सर पुरुष के पिछले रिश्ते से हुए बच्चों की देखभाल कर लेती हैं, लेकिन कई पुरुष महिला के पिछले रिश्ते से हुए बच्चों को उतनी सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते.

डॉ. मोहन रॉय का कहना है कि उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामले बढ़ रहे हैं.

उनके मुताबिक़ यह कोई अकेली घटना नहीं है.

उन्होंने कहा, "समस्या हमारी व्यवस्था में भी है. हमारे पास आशा कार्यकर्ता हैं, लेकिन समुदाय स्तर पर जागरूकता की कमी है, जिससे समय रहते हस्तक्षेप नहीं हो पाता."

दवा और थेरेपी के ज़रिए मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है. इसके लिए आपको किसी मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए. अगर आपमें या आपके किसी करीबी में किसी तरह की मानसिक तकलीफ़ के लक्षण हैं तो इन हेल्पलाइन नंबरों पर फ़ोन करके मदद ली जा सकती है:

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय-1800-599-0019

इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेवियर ऐंड एलाइड साइंसेज़- 9868396824, 9868396841, 011-22574820

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरोसाइंसेज़- 080 - 26995000

विद्यासागर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ ऐंड एलाइड साइंसेज़, 24X7 हेल्पलाइन-011 2980 2980

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • पुलिस दोनों अभियुक्तों को पूछताछ के लिए हिरासत में लेगी।

    Very likely · Within days

  • मामले की रिमांड रिपोर्ट में और जानकारियां सामने आएंगी।

    Very likely · Within days

  • अश्कर और अखिला के खिलाफ हत्या का मामला आगे बढ़ेगा।

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • बच्चे की मौत में मां की कितनी भूमिका थी?
  • मां और लिव-इन पार्टनर ने बच्चे को क्यों मारा?
  • क्या अश्कर का कोई आपराधिक इतिहास है?
  • क्या इस घटना में नशीले पदार्थों का सेवन शामिल था?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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