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भारत से बांग्लादेश हुआ नाराज़, भारतीय राजनयिक को किया तलब
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BBC हिंदी6/16/2026World4 min readIndia

भारत से बांग्लादेश हुआ नाराज़, भारतीय राजनयिक को किया तलब

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दिल्ली हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन संबंधी "परेशानियों" का सामना करने के बाद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान ढाका लौट गए. बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने इस घटना पर नाराज़गी जताते हुए भारतीय उच्चायोग के राजनयिक को तलब किया.

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Why It Matters

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान को दिल्ली हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोका, जिसके बाद वे नाराज़ होकर ढाका लौट गए. इस घटना पर बांग्लादेश ने भारत के प्रति नाराज़गी जताई है.

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भारत से बांग्लादेश हुआ नाराज़, भारतीय राजनयिक को किया तलब

Author, रकीब हसनत

पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

दिल्ली हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन संबंधी 'परेशानियों' का सामना करने के बाद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान अपने देश वापस लौट गए. बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर खलीलुर रहमान ने इस घटना के प्रति नाराज़गी जताई है.

उन्होंने कहा, "यह एक अप्रत्याशित घटना है. यह दुर्भाग्यपूर्ण भी है. विदेश मंत्रालय इस संबंध में उचित कार्रवाई कर रहा है."

विदेश मंत्री ने सोमवार दोपहर को पत्रकारों से बातचीत में ये टिप्पणियां कीं. बाद में सोमवार दोपहर को ही बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उच्चायोग के राजनयिक पवन कुमार बधे को तलब किया. वे फ़िलहाल ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त हैं.

प्रधानमंत्री के सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को दिल्ली आए थे, लेकिन इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे पर लंबे समय तक रोके रखा. हालांकि बाद में उन्हें प्रवेश की अनुमति मिल गई थी लेकिन वो नाराज़ होकर ढाका लौट गए.

हालांकि, हवाई अड्डे पर पूछताछ के बाद, दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग सहित विभिन्न पक्षों के प्रयासों के कारण उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति मिल गई थी.

लेकिन उन्होंने दिल्ली में प्रवेश करने के बजाय ढाका लौटने का फैसला किया और रात में कोलंबो (श्रीलंका) चले गए. फिर वे सोमवार दोपहर ढाका पहुंचे.

बीबीसी न्यूज़ बांग्ला को यह जानकारी ढाका स्थित विदेश मंत्रालय के विभिन्न स्रोतों से मिली.

जब बीबीसी बांग्ला ने इस घटना के बारे में ज़ाहिद उर रहमान से संपर्क किया, तो उन्होंने इस पर बात करने से इनकार कर दिया.

मामला क्या है

प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान को रविवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया था.

इस दौरान दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के अधिकारी उनका स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे.

बाद में, भारतीय सरकार के विभिन्न स्तरों पर और बांग्लादेश में उच्च स्तर पर उनसे बार-बार संपर्क किया गया. भारतीय इमिग्रेशन विभाग ने उन्हें सूचित किया कि उन्हें देश में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए.

ढाका में विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि लंबे इंतजार और पूछताछ का सामना करने के बाद रहमान ने हवाई अड्डे से ही वापस लौटने का फ़ैसला किया.

उसके बाद, बांग्लादेश उच्चायोग ने उनके लिए कोलंबो के रास्ते अपने देश लौटने की व्यवस्था की. वह रविवार को लगभग 1 बजे रात दिल्ली से कोलंबो के लिए रवाना हुए. इसके अगले दिन वे कोलंबों से वापस अपने देश लौट गए.

बांग्लादेश ने जताई नाराज़गी

बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर खलीलुर रहमान ने सोमवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, "विदेश मंत्रालय इस संबंध में उचित कार्रवाई कर रहा है."

बांग्लादेश में विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यह घटना निश्चित रूप से स्वागत योग्य नहीं है. हमें इस तरह की घटना की उम्मीद नहीं थी."

इसी बीच, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन कुमार को तलब किया और उन्हें विरोध पत्र सौंप दिया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम ने बीबीसी बांग्ला को पुष्टि की कि उन्हें सोमवार को दोपहर 3 बजे तलब किया गया था.

कौन हैं ज़ाहिद उर रहमान

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में शेख़ हसीना की सरकार गिर गई थी. उनकी सरकार के पतन से पहले ही भारत में ज़ाहिद उर रहमान के यूट्यूब चैनल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

रहमान शेख़ हसीना की अवामी लीग सरकार के अंतिम दौर में टेलीविजन टॉक शो के ज़रिए मशहूर हुए थे.

ख़बरों के मुताबिक़ वे अपने शो में भारत सरकार और बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी की आलोचना के लिए भी जाने जाते थे.

इस साल फरवरी में हुए चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सत्ता में आने के बाद, प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ने उन्हें राज्य मंत्री के दर्जे के साथ नीति और रणनीति तथा सूचना और प्रसारण मामलों के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया.

प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंध काफ़ी बिगड़ गए थे.

लेकिन बांग्लादेश में तारिक़ रहमान के सत्ता में आने के बाद दोनों देश आपसी संबंधों को सुधारने में दिलचस्पी दिखा रहे थे.

Open Questions

  • इमिग्रेशन अधिकारियों ने ज़ाहिद उर रहमान को क्यों रोका?
  • क्या यह घटना भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित करेगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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