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जयशंकर बोले- हमारे लिए 'इंडिया फ़र्स्ट', कई स्रोतों से सस्ती ऊर्जा आपूर्ति करेंगे सुनिश्चित
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BBC हिंदी5/24/2026Politics7 min readIndia

जयशंकर बोले- हमारे लिए 'इंडिया फ़र्स्ट', कई स्रोतों से सस्ती ऊर्जा आपूर्ति करेंगे सुनिश्चित

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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ कहा कि भारत अपने हितों को प्राथमिकता देता है, जैसे अमेरिका 'अमेरिका फर्स्ट' की बात करता है। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई स्रोतों से किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

AI-generated summary

Why It Matters

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है, जिसे 'इंडिया फर्स्ट' कहा गया है। यह बयान तब आया जब अमेरिका ने भारत को तेल खरीदने की स्वतंत्रता की बात कही थी, जिस पर भारत में चिंता जताई गई थी।

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भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि 'जैसे अमेरिका अपने हितों को प्राथमिकता देता है उसी तरह भारत भी अपने हितों को प्राथमिकता देता है.

अमेरिकी विदेश मंत्री भारत के चार दिवसीय दौरे पर हैं और भारत पहुंचने से पहले उन्होंने कहा था कि 'भारत जितना चाहे तेल अमेरिका से ख़रीद सकता है.'

अमेरिका के इस रुख़ को लेकर भारत में विपक्ष और विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी और कहा था कि अमेरिका पर पूरी तरह से निर्भर होना रणनीतिक रूप से बहुत बड़ी ग़लती होगी.

इससे पहले मार्च में अमेरिका के उप-विदेशमंत्री क्रिस्टोफ़र लैंडौ ने कहा था कि चीन के साथ व्यापार समझौतों से सबक़ लेते हुए भारत के साथ होने वाले व्यापार समझौते में अमेरिका अपने हितों की रक्षा को लेकर अधिक स्पष्टता रखेगा.

जयशंकर ने कहा कि 'अमेरिका की तरह ही हम भी इंडिया फ़र्स्ट की बात करते हैं.'

रविवार को दिल्ली में दिए गए विदेशमंत्री एस जयशंकर के बयान को भारत का जवाब माना जा रहा है और यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

जयशंकर ने क्या कहा

प्रेस कॉंफ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक सवाल के जवाब में कहा, "जहां तक अमेरिका का सवाल है तो ट्रंप प्रशासन बहुत साफ़ शब्दों में अपनी विदेश नीति में अमेरिका फ़र्स्ट की बात करता है. जहां हमारी बात है तो हम इंडिया फ़र्स्ट की बात करते हैं. दोनों ही देश अपने-अपने देश के हित को सामने रखते हुए बात करते हैं."

उन्होंने आगे कहा, "ऐसे बहुत से क्षेत्र होंगे जिसमें हम दोनों के राष्ट्रीय हित साथ-साथ चल सकते हैं, साथ काम कर सकते हैं और इसीलिए हमारे बीच रणनीतिक साझेदारी है. लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे भी होंगे जहां वह साथ काम नहीं कर सकते, ऐसे में हमें उन स्थितियों को संभालना होगा."

ऊर्जा के मुद्दे पर बात करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, "हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि हमारे पास कई स्रोत हों, बड़े स्रोत हों, विश्वसनीय स्रोत हों और सस्ते स्रोत हों. अमेरिका इनमें से कई पैमानों पर ख़रा उतरता है लेकिन कई और देश भी हैं."

"इसलिए हम कई स्रोतों से सबसे किफ़ायती दरों पर ऊर्जा की आपूर्ति को सुनिश्चित करेंगे और जारी रखेंगे क्योंकि आख़िरकार हमारी ज़िम्मेदारी अपने लोगों को ऊर्जा किफ़ायती और ख़रीदने लायक दरों पर उपलब्ध कराने की है."

उन्होंने आगे कहा, "लेकिन हम नहीं चाहते कि ऊर्जा बाज़ार में कोई रुकावट आए, उसमें किसी किस्म की गड़बड़ी आए क्योंकि उससे उसकी दरों पर असर पड़ता है. हमने उस पर चर्चा की और मैंने भारतीय दृष्टिकोण रखा कि हम मज़बूती के साथ यकीन करते हैं कि ऊर्जा को बाज़ार पर छोड़ा जाना चाहिए."

अमेरिकी विदेश मंत्री, उप-विदेश मंत्री ने क्या कहा था

इसी साल मार्च में 'रायसीना डायलॉग 2026' में शामिल होने भारत आए अमेरिका के उप-विदेश मंत्री क्रिस्टोफ़र लैंडौ ने कहा था कि भारत के साथ व्यापार और आर्थिक संबंध के विस्तार में अमेरिका चीन के साथ दो दशक पहले की गई ग़लतियों को नहीं दोहराएगा.

उन्होंने कहा, "मतलब हमने कहा- 'आप इन सभी बाज़ारों में विस्तार कर सकते हैं और फिर अगली चीज़ हमने पाई कि आप तो हमें कई व्यावसायिक क्षेत्रों में मात दे रहे हैं.' अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि वह जो भी क़दम उठाए वह उसके लोगों के लिए न्यायसंगत हो."

कांग्रेस ने अमेरिकी उप-विदेश मंत्री के बयान के बाद भारत सरकार की विदेश नीति की आलोचना की थी. रक्षा विश्लेषक प्रवीण साहनी ने भी भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए थे.

23 से 26 मई तक भारत के दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत आने से पहले कहा था कि 'भारत हमसे जितना तेल ख़रीदना चाहता है, उतना हम देने के लिए तैयार हैं.'

विपक्षी दलों और विशेषज्ञों ने एक बार फिर से लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि भारत ने महसूस कर लिया है कि अमेरिका के भरोसे रहना ख़तरे से ख़ाली नहीं है.

एच-1 वीज़ा पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से जे-1 वीज़ा, एफ़-1, एच-1बी वीज़ा को लेकर अमेरिका की ओर से किए गए बदलाव के बारे में पूछा गया.

इस पर रुबियो ने कहा, "जो बदलाव अभी हो रहे हैं या हमारे माइग्रेशन सिस्टम का जो आधुनिकीकरण हो रहा है, वह भारत-केंद्रित नहीं है. यह ग्लोबल है. इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है. हम आधुनिकीकरण के एक दौर में हैं."

"मैं आपसे स्पष्ट और ईमानदार रहूंगा क्योंकि इस बारे में बात करना ज़रूरी है. अमेरिका में हमें प्रवासियों से जुड़े संकट का सामना करना पड़ा है. यह भारत की वजह से नहीं है, लेकिन, व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में दो करोड़ से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं, और हमें उस चुनौती का समाधान करना है."

रुबियो से जब पूछे गए असहज सवाल

प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री को कुछ असहज सवालों का भी सामना करना पड़ा.

उनसे भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ अमेरिका में नस्लीय टिप्पणियों को लेकर सवाल पूछे गए.

जिस पर मार्को रुबियो ने कहा, "मैं इन टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से लूंगा. मुझे यकीन है कि कुछ लोगों ने ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर ऐसी बातें कही होंगी, क्योंकि दुनिया के हर देश में मूर्ख लोग होते हैं."

उन्होंने कहा, "यहां भी ऐसे लोग हैं और अमेरिका में भी ऐसे लोग हैं जो हर समय बेवकूफ़ी भरी टिप्पणियां करते रहते हैं. अमेरिका एक बहुत स्वागत करने वाला देश है. हमारे देश को दुनिया भर से आने वाले लोगों ने समृद्ध बनाया है."

भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर मार्को रुबियो ने कहा, "हमारे व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द यहां आ सकते हैं. पिछले हफ्ते या उससे पहले भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका आया था."

"हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा, दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा और हमारे राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा."

उन्होंने कहा कि दोनों देश कई क्षेत्रों में सहयोग जारी रखे हुए हैं. मसलन, पैक्स सिलिका में भारत को आमंत्रित किया गया.

रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों पर भी सफ़ाई देते हुए कहा कि रिश्तों ने अपना 'मोमेंटम नहीं खोया' है.

रुबियो ने कहा, "अमेरिका-भारत संबंधों ने अपनी कोई लय नहीं खोई है. मैं समझ सकता हूं कि कुछ लोग ऐसा क्यों कहते हैं. मैं इससे सहमत नहीं हूं. यह भारत के बारे में नहीं है. यह व्यापार के मामले में, अमेरिका के बारे में है."

उन्होंने ट्रंप के बयानों पर सफ़ाई देते हुए कहा, "राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि, 'भारत के साथ व्यापार को लेकर तनाव पैदा करने का कोई तरीक़ा निकालते हैं.' राष्ट्रपति ने कहा, 'अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जो व्यापार व्यवस्था है वह आगे नहीं चल सकती. एक बहुत बड़ा असंतुलन बन गया है और इसे एड्रेस करने की ज़रूरत है'."

दरअसल, ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही व्यापार को लेकर अलग रुख़ अपनाया है. उन्होंने भारत समेत दुनियाभर के देशों पर टैरिफ़ लगाए.

रूस से तेल ख़रीदने पर ट्रंप ने भारत पर 25 फ़ीसदी अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया था.

कांग्रेस ने रुबियो के बयान पर उठाए सवाल

भारत की ओर से अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ख़रीदारी के मार्को रुबियो के बयान पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को एक्स पर लिखा, "आज मार्को रुबियो ने एक बार फिर एक्स पर बयान देकर देश को चौंका दिया है. उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है."

उन्होंने लिखा, "रुबियो के बयान का अर्थ है कि भारत को अमेरिका से अपना वार्षिक आयात दोगुना करना पड़ेगा."

उन्होंने सरकार से पांच सवाल किए और कहा कि सरकार ट्रेड डील को रद्द क्यों नहीं कर रही है, प्रधानमंत्री ऊर्जा खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की बात करते हैं और फिर अमेरिका से रिकॉर्ड आयात पर सहमति क्यों दी.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • अमेरिका और भारत के बीच एक टिकाऊ और फायदेमंद व्यापार समझौता होगा।

    Likely · Medium term

  • भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कई देशों से आपूर्ति जारी रखेगा।

    Very likely · Medium term

Open Questions

  • भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की विशिष्ट शर्तें क्या होंगी?
  • ऊर्जा आपूर्ति के लिए भारत किन अन्य देशों पर निर्भर रहेगा?
  • एच-1बी वीज़ा नियमों में बदलाव का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
  • अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यापार संबंधी बयानों का भारत-अमेरिका व्यापार पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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