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Backदिल्ली के मालवीय नगर में 'होटल' में आग, 21 की मौत, 11 विदेशी नागरिक
दिल्ली के मालवीय नगर में 'होटल' में आग, 21 की मौत, 11 विदेशी नागरिक
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BBC हिंदी6/4/2026Crime5 min readIndia

दिल्ली के मालवीय नगर में 'होटल' में आग, 21 की मौत, 11 विदेशी नागरिक

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दिल्ली के मालवीय नगर में एक 'होटल' में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इमारत को ब्रेड एंड ब्रेकफ़ास्ट (बीएनबी) योजना के तहत लाइसेंस मिला था, लेकिन यह होटल के रूप में संचालित हो रहा था। सुरक्षा नियमों की अनदेखी और एग्जिट रूट न होने के कारण मौतों की संख्या बढ़ी।

AI-generated summary

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कमरे में धुआं भर रहा था और विवेक अग्रवाल का दम घुट रहा था. उन्होंने अपने एक कज़िन को फ़ोन किया और कहा, "हम फंस गए हैं हमें किसी तरह बचा लीजिए."

दिल्ली के मालवीय नगर इलाक़े के एक 'होटल' में बुधवार को लगी आग में गुरुग्राम में रहने वाले अग्रवाल परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई.

पेशे से सीए और एक बड़ी कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत विवेक अग्रवाल के रिश्तेदार अजय गुप्ता ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "बुधवार को हमारा परिवार होटल, अस्पताल और मॉर्चरी के चक्कर लगाता रहा. पूरा परिवार ख़त्म हो गया है."

विवेक अग्रवाल के पिता का इलाज साकेत के मैक्स अस्पताल में चल रहा था और उनका परिवार पास ही एक होटल में ठहरा था. उनके तीन रिश्तेदार बुधवार सुबह ही राजस्थान से पहुंचे थे. उनकी मौत भी इस हादसे में हो गई.

बुधवार सुबह मालवीय नगर में फ्लरिश बीएनबी (ब्रेड एंड ब्रेकफ़ास्ट) के नाम से संचालित होटल में लगी आग में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 11 विदेशी नागरिक हैं.

ये सभी अपने परिजनों का इलाज कराने के लिए दिल्ली आए थे.

बुधवार देर शाम दिल्ली पुलिस ने इस होटल के संचालक लवकेश बजाज को गिरफ़्तार कर लिया.

ये इमारत जिसे 'होटल' कहा जा रहा है दस्तावेज़ों में यह होटल के रूप में दर्ज नहीं है.

दिल्ली दमकल विभाग के मुताबिक़, होटल संचालक ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया था. इसके अलावा होटल में फ़ायर सिस्टम भी नहीं था.

दिल्ली के चीफ़ फ़ायर ऑफ़िसर अभिलाष मलिक के मुताबिक़, इस होटल को दिल्ली के पर्यटन विभाग ने बीएंडबी का लाइसेंस दिया था और फ़ायर विभाग से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी.

अभिलाष मलिक के मुताबिक़, "इमारत में एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर पांच मंज़िलें हैं. बेसमेंट में दो कमरे थे, हर मंज़िल पर पांच कमरे थे और टैरेस पर भी चार कमरे थे जिनमें से दो का इस्तेमाल गेस्टरूम की तरह किया जा रहा था."

यहां लगी आग को बुझाना और लोगों को रेस्क्यू करना इमारत की बनावट की वजह से बहुत चुनौतीपूर्ण था.

दिल्ली फ़ायर सर्विस के मुताबिक़, सुबह 8 बजकर 51 मिनट पर मदद के लिए कॉल मिली थी और कुछ ही मिनटों में फ़ायर टेंडर रवाना कर दिए गए थे.

बीबीसी ने घटनास्थल पर रिकॉर्ड किए गए कई ऐसे वीडियो देखें है जिनमें सुबह दस बजकर 50 मिनट के बाद भी लोगों को इमारत से बाहर निकाले जाते हुए देखा जा सकता है.

बीबीसी ने घटनास्थल पर रिकॉर्ड किए गए कई ऐसे वीडियो भी देखें है जिनमें लोग इमारत से कूदकर जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

अभिलाष मलिक ने बचावकर्मियों के सामने आई मुश्किलों के बारे में मीडिया से कहा, "हमें इस आग को बुझाने में चुनौतियां आईं लेकिन चुनौतियां यहां ठहरे लोगों के लिए ज़्यादा थीं."

"बिल्डिंग को इस तरह बनाया गया था कि यहां ठहरे लोगों के लिए निकलने की संभावना ना के बराबर थी. खिड़कियों को स्थायी रूप से सील कर दिया गया था और वेंटिलेशन की कोई गुंज़ाइश नहीं थी."

उन्होंने कहा, "ऐसी इमारत शाफ़्ट की तरह काम करती हैं. आग लगने के कुछ सेकेंड के अंदर ही इमारत में गर्मी और धुआं भर जाता है और लोगों को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है."

क़रीब 25 कमरों के इस 'होटल' ने संचालन के लिए दिल्ली सरकार की ब्रेड एंड ब्रेकफ़ास्ट स्कीम के तहत लाइसेंस लिया था.

इस योजना के तहत आम तौर पर अधिकतम 8 कमरों के संचालन की अनुमति दी जाती है.

कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान राजधानी दिल्ली में पर्यटकों के रहने लायक कमरों की उपलब्धता बढ़ाने के मक़सद से लाई गई बीएंडबी योजना के तहत सिर्फ़ उन्हीं संपत्तियों को पंजीकृत किया जा सकता है जहां मालिक ख़ुद भी रहते हों.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अतुल्य भारत) भोजन और शयन कक्ष संस्थापन (पंजीकरण एवं विनियम) 2007 के तहत ऐसी संपत्ति को होटल, गेस्ट हाउस, हॉस्टल या व्यावसायिक लॉजिग संस्थान की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

हालांकि, दिल्ली के हौजरानी इलाक़े में जहां फ़्लरिश स्टेज़ (पंजीकृत नाम) नाम की ये संपत्ति स्थित है, ऐसे कई और होटल हैं जो बीएंडबी योजना के तहत हुए पंजीकरण के आधार पर चल रहे हैं.

इसी इमारत में नीचे एक रेस्टोरेंट भी है.

बीबीसी ने आस-पास ऐसे कई होटल देखे जो इसी तरह के पंजीकरण के आधार पर चल रहे हैं.

साल 2023 के आंकड़ों के मुताबिक़, दिल्ली में ऐसे 432 घर हैं जो बीएंडबी के रूप में पंजीकृत हैं और इनमें 2200 से अधिक कमरे हैं.

वहीं पिछले सप्ताह ही दिल्ली सरकार ने नई ड्राफ़्ट बीएंडबी पॉलिसी बनाई थी जिसके तहत 8 कमरों और 16 बेड वाली संपत्तियों को भी बीएंडबी की तरह पंजीकृत किया जा सकता है.

इस ड्राफ़्ट नीति के तहत सीसीटीवी कैमरा, पुलिस वैरिफ़िकेशन और सुरक्षा नियमों का पालन ज़रूरी है.

अमेरिकी नागरिक माइकल अपने परिजन का इलाज कराने दिल्ली आए हैं. वह फ़्लरिश बीएंडबी के बगल के ऐसे ही होटल में ठहरे थे.

बीबीसी से बात करते हुए माइकल ने कहा, "इमारत आग में घिरी थी, मैंने कई लोगों को कूदते देखा. यहां सिर्फ़ एक ही एंट्री और एग्ज़िट है, कोई दूसरा रास्ता नहीं था, इस वजह से लोग ख़ुद को बचा नहीं पाए."

माइकल के कई अफ़्रीकी मूल के दोस्त इस आग के बाद से लापता थे.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे लगता है कि एक ही एंट्री और एग्ज़िट होना हादसे में इतनी बड़ी जनहानि का सबसे बड़ा कारण है. मेरे कई दोस्त नहीं मिल रहे हैं, मैं उनके बारे में जानकारी जुटा रहा हूं."

आग लगने के बाद स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए पहुंचे थे.

मैक्स अस्पताल की सिक्योरिटी में कार्यरत वसीम रज़ा और उनके कई दोस्त आग में फंसे लोगों को बचाने में जुटे रहे.

वसीम ने बीबीसी को बताया, "होटल का मेन गेट बाहर से बंद था, कटर से उसे काटना पड़ा. एग्ज़िट बंद हो जाने की वजह से लोग फंस गए और उन तक पहुंचने में हमें मशक्कत करनी पड़ी."

वसीम ने बीबीसी को बताया, "काफ़ी मशक्कत के बाद जब दिल्ली पुलिस के कुछ जवान और हम लोग इमारत के भीतर दाख़िल हो पाए तो हमने देखा पूरी इमारत में धुआं भरा है."

"हमें ऊपर की मंज़िलों पर कई लोग कमरों के भीतर, बेड के नीचे और वॉशरूम में बेहोश मिले. इनमें से अधिकतर की मौत हो चुकी थी. कुछ को हमने सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की और कई को ज़िंदा बाहर निकाला."

दिल्ली के दमकल विभाग ने भी माना है कि होटल से बाहर निकलने का रास्ता नहीं था जिसकी वजह से अधिकतर लोग भीतर ही फंसे रहे गए.

इस घटना के बाद नियमों की अनदेखी और सुरक्षा लापरवाहियों से जुड़े कई गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं.

दिल्ली फ़ायर सर्विस के पूर्व प्रमुख अतुल गर्ग ने बीबीसी से कहा, "यह एक रेसिडेंशियल बिल्डिंग थी जिसने ब्रेड एंड ब्रेकफ़ास्ट का लाइसेंस लिया. यह छह कमरों के लिए मिलता है लेकिन यहां 25 कमरे बना दिए गए थे."

"इमारत का होटल की तरह अवैध इस्तेमाल किया गया. नीचे बेसमेंट में रेस्टोरेंट संचालित हो रहा था, इस बिल्डिंग में हर सुरक्षा नियम का उल्लंघन हो रहा था."

सुरक्षा उपकरणों और एक्ज़िट ना होने को भी हादसे में बड़ी तादाद में मौतों की वजह माना जा रहा है.

अतुल गर्ग कहते हैं, "इलेक्ट्रॉनिक लॉक था, आग लगी तो वो बंद हो गया, लोग नीचे उतरे और जान बचाने के लिए भागे लेकिन बाहर नहीं निकल पाए. एक ही जीना था क्योंकि अगर ये होटल के रूप में अप्रूव होता तो इसमें दो जीने होते."

"यही नहीं ना वहां पानी का टैंक था, ना सीढ़ी थी और ना ही फ़ायर फाइटिंग की कोई और व्यवस्था थी."

वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आपात सेवाओं के रेस्पॉन्स की देरी का सवाल उठाया है.

उन्होंने कहा, "ये पहली घटना नहीं जब आग में फंसे लोग मारे गए. सरकार जांच घोषित कर देती है लेकिन रिपोर्ट नहीं आती है. सरकार को बताना चाहिए कि आपात सेवाओं को पहुंचने में देरी क्यों हुई."

अतुल गर्ग निरीक्षण की कमी पर कहते हैं, "बीएंडबी के लाइसेंस पर होटल चल रहा था, इसकी जांच क्यों नहीं हुई, किसी की तो ज़िम्मेदारी तय होगी. सवाल तो उन अथॉरिटी से भी होना चाहिए जो ऐसी इमारत का लाइसेंस देती है."

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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