Breaking
FRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendie en Gironde : Évacuation maritime du Cap Ferret face à la progression du feuFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainFRAffaire Jeffrey Epstein : les connexions du diplomate français Fabrice Aidan examinées par le Quai d’OrsayFRLe Parlement valide l’interdiction des réseaux sociaux aux moins de 15 ansFRZelensky annonce une nouvelle vague de mobilisation russe pour l'automneFRLes Incendies de Forêt en France 2026 : État des Lieux et Contexte SécuritaireFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendie en Gironde : Évacuation maritime du Cap Ferret face à la progression du feuFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainFRAffaire Jeffrey Epstein : les connexions du diplomate français Fabrice Aidan examinées par le Quai d’OrsayFRLe Parlement valide l’interdiction des réseaux sociaux aux moins de 15 ansFRZelensky annonce une nouvelle vague de mobilisation russe pour l'automneFRLes Incendies de Forêt en France 2026 : État des Lieux et Contexte Sécuritaire
Newsgather
Backबढ़ती उम्र में दिमाग को तेज़ रखने के 3 सरल तरीके
बढ़ती उम्र में दिमाग को तेज़ रखने के 3 सरल तरीके
Health
BBC हिंदी5/24/2026Health4 min readIndia

बढ़ती उम्र में दिमाग को तेज़ रखने के 3 सरल तरीके

Quick Look

जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ रही है, उनके जीवन का एक लंबा हिस्सा बीमारियों से घिरा हुआ बीत रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव करके दिमाग की सेहत को सुधारा जा सकता है।

AI-generated summary

Font size

जैसे-जैसे लोगों के जीने की उम्र बढ़ती जा रही है, उनके सेहतमंद रहते हुए जीने का समय दुनिया के कई हिस्सों में कम हुआ है.

यानी लोग लंबा तो जी रहे हैं पर उनके जीवन का एक लंबा हिस्सा बीमारियों से घिरा हुआ बीत रहा है.

बढ़ती उम्र के साथ डिमेंशिया का ख़तरा बढ़ता जा रहा है जो बुढ़ापे में दिमाग को तेज़ बनाए रखने की ज़रूरत को बताता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि विकसित होती तकनीक ने हमारे कामों को आसान बनाकर हमारी याद्दाश्त पर भी असर डाला है क्योंकि अब हर चीज़ याद रखने की ज़रूरत नहीं रह गई है.

स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में स्थित हेरियट-वाट यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक एलन गो कहती हैं कि बढ़ती उम्र के साथ भी दिमाग को तेज़ बनाए रखना मुश्किल नहीं है. न ही इसके लिए कोई कठिन टास्क करने की ज़रूरत है.

वे कहती हैं, "हम किसी भी उम्र में रोज़मर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव से भी दिमाग की सेहत सुधार सकते हैं."

वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि उम्र बढ़ने के साथ दिमाग को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए हमें खुद को कुछ चुनौतीपूर्ण कामों में लगाना चाहिए.

ये काम चुनौतीपूर्ण होते हुए भी सरल व मनोरंजक हो सकते हैं. इसके जरिए हमारे दिमाग का कॉग्निटिव रिज़र्व यानी संज्ञानात्मक भंडार बनता है, दिमाग को बढ़ती उम्र की क्षति से बचाता है.

ऐसा करने के तीन सरल तरीके बताए गए हैं-

1- रास्तों को पहचानना दिमाग तेज़ करेगा

दिमाग के हिप्पोकैम्पस नामक हिस्से को मजबूत रखकर अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है.

यह हिस्सा ही नेविगेशन व रास्तों की पहचान के लिए के लिए अहम है.

अध्ययन से पता लगा है कि दिशाओं को ध्यान रखने के पेशे से जुड़े होने के चलते टैक्सी व एम्बुलेंस चालकों के दिमाग का हिप्पोकैम्पस हिस्सा मजबूत रहता है.

यूके के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के न्यूरोलॉजिस्ट डेनिस चान को अल्ज़ाइमर के शुरूआती लक्षणों की पहचान करने में विशेषज्ञता हासिल है.

वे कहते हैं, "कई साल से हम देख रहे हैं कि रास्ता भटक जाना अल्ज़ाइमर के पीड़ितों का एक शुरुआती लक्षण है. ऐसे में ज़रूरी है कि जितनी जल्दी संज्ञानात्मक बीमारों की पहचान हो, उतनी जल्दी अल्ज़ाइमर का इलाज किया जा सकता है."

अब लोग रास्तों का पता लगाने के लिए तकनीक पर ज़्यादा निर्भर हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों का सुझाव है कि अगर लोग मोबाइल जीपीएस के बिना रास्ता ढूंढने की कोशिश करें, नई जगहों पर घूमें व दिशाओं का ध्यान रखें तो यह मददगार हो सकता है.

साथ ही ओरिएंटियरिंग जैसे खेल खेलना भी मददगार होगा.

2- सामाजिक रूप से सक्रिय रखें

दोस्तों और परिवार से जुड़े रहना दिमाग के लिए बहुत फ़ायदेमंद माना गया है. शोध में पाया गया है कि यह हमें कॉग्नेटिव डिक्लाइन यानी संज्ञानात्मक गिरावट से बचाता है.

एक बड़ी ऑब्जर्वेशनल स्टडी में देखा गया कि जो लोग अधेड़ उम्र में और उसके बाद भी सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें स्मृति लोप या डिमेंशिया का खतरा 30-50% तक कम होता है.

दरअसल सामाजिक संपर्क तनाव कम करते हुए दिमाग को कई तरह से सक्रिय रखता है. यह भी पाया गया है कि सौ साल से अधिक जीने वाले ऐसे लोग दिमाग के स्तर पर स्वस्थ होते हैं जो ज्यादा सामाजिक मेलजोल रखते हैं.

एक शोध में यह भी पाया कि सामाजिक रूप से सक्रिय रहना डिमेंशिया के लक्षणों को टाल भी सकता है.

1,923 बुजुर्ग लोगों पर एक स्टडी की गई थी. इन सभी को आगे चलकर डिमेंशिया हुआ.

लेकिन स्टडी में पाया गया कि जो प्रतिभागी सामाजिक मेलजोल कम रखते थे, वे सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों के मुक़ाबले पांच साल पहले इससे पीड़ित हो गए.

इसका कारण यह निकला कि मेलजोल के चलते उनमें तनाव कम था, जिससे वे जीवन की चुनौतियां ज़्यादा बेहतर ढंग से संभाल पाए.

वहीं, शोध से लंबे समय तक तनाव में रहने के असर को मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस में न्यूरॉन के नुकसान से जोड़ा गया है.

किंग्स कॉलेज लंदन की महामारी विज्ञानी पामेला अल्मेडा-मेज़ा कहती हैं, "लोगों से चर्चा करने, बहस करने और विचारों को साझा जैसे काम हमारे दिमाग के लिए एक सुरक्षात्मक कारक हो सकते हैं."

वो कहती हैं, "जब हम दूसरों के साथ बातचीत करते हैं, तो हम भाषा से लेकर याददाश्त और भविष्य की योजना बनाने तक में दिमाग के कई हिस्सों का इस्तेमाल कर रहे होते हैं."

वहीं, मनोवैज्ञानिक एलन गो का कहना है, "अच्छे सामाजिक संबंध शारीरिक तनाव पैदा करने वाले कारकों की चेन को कम करते हैं."

3. जीवन भर सीखते रहना दिमाग तेज़ करेगा

नई चीजें सीखना दिमाग को स्वस्थ रखने का बेहतरीन तरीका है, जैसे - नई किताब पढ़ना, बागवानी करना या कोई नई स्किल सीखना.

इससे भी डिमेंशिया का ख़तरा उतना ही कम होता है. यह दिमाग में नई कोशिकाएं और कनेक्शन बनाने में मदद करता है.

दरअसल हमारा मस्तिष्क चुनौतियों और रोज़ नए कामों पर फलता-फूलता है क्योंकि ऐसा करने से मस्तिष्क के वे क्षेत्र मजबूत होते हैं जिन पर उम्र बढ़ने का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है.

हम जब दिमाग को सक्रिय रखते हैं, तो यह संज्ञानात्मक गिरावट की गति को धीमा करता है.

न्यूरोलॉजिस्ट डेनिस चान कहते हैं, "सीखने की प्रक्रिया नई मस्तिष्क कोशिकाएं बनाती है और साथ ही मौजूदा कोशिकाओं को मजबूत करती है. जो उम्र बढ़ने और कोशिकाओं के खत्म होने के खिलाफ एक ढाल के रूप में काम करती है. इससे लोगों को अल्ज़ाइमर के खिलाफ ताक़त मिलती है."

अल्मेडा-मेज़ा और उनके सहयोगियों ने छोटी उम्र के बच्चों से लेकर 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के ऊपर एक लंबा अध्ययन किया.

Related Topics

This article was originally published by BBC हिंदी.

Related Stories

More on this topicदिमाग