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अहमदाबाद: मलाला और ऐन फ़्रैंक की किताबें पढ़ने वाले छात्रों पर हमला
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BBC हिंदी2 hours agoCrime5 min readIndia

अहमदाबाद: मलाला और ऐन फ़्रैंक की किताबें पढ़ने वाले छात्रों पर हमला

स्कूल द्वारा किताबों को रीडिंग प्रोग्राम से हटाने के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर बजरंग दल के सदस्यों ने हमला किया।

Quick Look

अहमदाबाद के वस्त्रापुर में मलाला यूसुफ़ज़ई और ऐन फ़्रैंक की किताबें पढ़ने वाले छात्रों के समूह पर हमला हुआ। यह समूह स्कूल द्वारा इन किताबों को हटाने के फ़ैसले का शांतिपूर्ण विरोध कर रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है।

AI-generated summary

Why It Matters

अहमदाबाद के एक स्कूल ने अभिभावकों की आपत्ति के बाद मलाला यूसुफ़ज़ई और ऐन फ़्रैंक की किताबों को अपने रीडिंग प्रोग्राम से हटा दिया था।

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महिला अधिकारों पर लिखने वाली लेखिकाओं मलाला यूसुफ़ज़ई और ऐन फ़्रैंक की किताबें पढ़ने वालों पर अहमदाबाद में हमला हुआ है.

शहर के कुछ छात्रों, पेशेवरों, प्रोफ़ेसरों और अधिकार कार्यकर्ताओं के एक ग्रुप पर यह हमला गुरुवार को हुआ था. एक स्कूल के यूसुफ़ज़ई और ऐन फ़्रैंक की किताबों को अपने 'बुक क्लब' से हटाने के फ़ैसले के विरोध में किताबें पढ़ रहे थे.

शहर के वस्त्रापुर इलाके में ज़िला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय के पास एक बग़ीचे में क़रीब 50 लोग ऐन फ़्रैंक की जीवनी 'अ डायरी ऑफ़ यंग गर्ल' और मलाला यूसुफ़ज़ई की जीवनी 'आई एम मलाला' पढ़ रहे थे.

साथ ही वे जॉर्ज ऑरवेल, भगत सिंह, बीआर आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और अरुंधति रॉय जैसे लेखकों की रचनाएं भी पढ़ रहे थे. 'अहमदाबाद यूथ एंड स्टूडेंट्स कलेक्टिव' ने ऐसी किताबें पढ़कर विरोध करने की योजना बनाई थी.

कुछ अभिभावकों की आपत्ति के बाद अहमदाबाद के एक स्कूल ने 'आई एम मलाला' और ऐन फ़्रैंक की किताब को अपने रीडिंग प्रोग्राम से हटा दिया है. दोनों किताबें वैकल्पिक पठन के लिए रखी गई थीं.

ज़िला शिक्षा अधिकारी ने पहले स्कूल को ऐसी किताबें शामिल नहीं करने का निर्देश दिया था, जो अभिभावकों की 'धार्मिक भावनाओं' को प्रभावित कर सकती हैं या उन्हें 'आहत' कर सकती हैं.

इस फ़ैसले की छात्रों और सिविल सोसायटी के संगठनों ने आलोचना की. उन्होंने कहा कि इससे छात्रों की अलग-अलग तरह के साहित्य और विचारों तक पहुंच सीमित हो सकती है.

यूथ एंड स्टूडेंट्स कलेक्टिव ने कहा कि उनका रीडिंग प्रोग्राम इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध के तौर पर था. लेकिन स्थानीय समय के मुताबिक़, शाम क़रीब 6.30 बजे कथित तौर पर बजरंग दल से जुड़े लोगों का एक ग्रुप पार्क में पहुंचा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई.

किताबें पढ़ते हुए विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि ग्रुप के कुछ सदस्यों के पास लाठियां थीं, उन्होंने भगवा रंग की पट्टियां पहन रखी थीं और वे किताबें पढ़ रहे लोगों की पिटाई कर रहे थे.

आयोजकों में से एक स्वाति गोस्वामी ने बीबीसी को बताया कि ग्रुप ने कहा था कि वे 'आई एम मलाला' नहीं पढ़ने देंगे. गोस्वामी ने आरोप लगाया, "उसने मेरा हाथ पकड़ा और जोर से खींचा और मेरे बाल खींचे."

आयोजकों ने यह भी आरोप लगाया कि एक अन्य पाठक मैत्री छाई को पीठ पर कई बार थप्पड़ मारे गए. आद्या छत्रोला ने आरोप लगाया कि वो अपने फ़ोन पर घटना की रिकॉर्डिंग कर रही थीं, उन्हें धमकी दी गई और कहा गया कि अगर उन्होंने वीडियो अपलोड करना बंद नहीं किया तो उन्हें 'ग़ायब' कर दिया जाएगा.

प्रदर्शनकारी वस्त्रापुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे. वस्त्रापुर पुलिस इंस्पेक्टर गीता चौधरी ने बीबीसी को बताया कि जिन लोगों ने मारपीट किए जाने का दावा किया था, उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया है. उन्होंने कहा कि इसके बाद 20 लोगों के ख़िलाफ़ दंगा करने का मामला दर्ज किया गया. इनमें से छह लोगों की पहचान हो चुकी है और तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

चौधरी ने कहा कि पुलिस ने घटना में शामिल अन्य लोगों के ख़िलाफ़ भी आगे की कार्रवाई की है.

इन किताबों में क्या है?

दोनों समूहों के बीच विवाद शुरू होने से पहले बीबीसी ने किताब पढ़ने वालों से बात की थी. इनमें से एक मैत्री ने कहा कि वह बचपन से मलाला यूसुफ़ज़ई, उनके साहस और लड़कियों की शिक्षा के लिए लड़ने के उनके दृढ़ संकल्प के बारे में पढ़ती रही हैं. उन्होंने कहा, "मैंने ऐन फ़्रैंक के बारे में भी पढ़ा है. जब मैं स्कूल में थी, तब उनकी किताब हमारे बुक क्लब में शामिल थी."

उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहती कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस तरह के महान साहित्य को पाठ्यक्रम से हटा दिया जाए." उन्होंने कहा कि विरोध के दौरान पढ़ी जा रही किताबें केवल उनके लेखकों की निजी कहानियों तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने कहा, "ये सभी लेखक हमें सत्ता के ढांचों के ख़िलाफ़ संघर्ष की कहानियां बताते हैं और छात्रों को ये किताबें ज़रूर पढ़नी चाहिए."

रीडिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाली एक अन्य पाठक ख्याति ने कहा कि उन्हें लेखिका अरुंधति रॉय की रचनाएं पढ़ना पसंद है और वह फ़िलहाल 'आज़ादी' पढ़ रही हैं. छात्रों के पढ़ने पर रोक लगाने से उनकी विचारों की स्वतंत्रता छीनी जा सकती है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमारी आज़ादी खतरे में है. हमें और हमारे बच्चों को ऐसी किताबें पढ़ने की अनुमति नहीं है, जो हमारे दिमाग को खोल सकती हैं. यह आज़ादी के लिए ख़तरा है. ऐसा नहीं होना चाहिए."

रीडिंग प्रोग्राम में शामिल रहे अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर सावन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनियाभर में व्यापक रूप से सराही गई साहित्यिक रचनाओं की आलोचना की जा रही है और छात्रों को उन्हें पढ़ने से रोका जा रहा है. उन्होंने कहा, "हम कहना चाहते हैं कि ऐसी चीज़ों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. लोगों को ऐसी हर घटना के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए."

विवाद तब शुरू हुआ जब अहमदाबाद के एक स्कूल ने छात्रों के रीडिंग प्रोग्राम में 'आई एम मलाला' और ऐनी फ़्रैंक की किताबों को शामिल किया. कुछ अभिभावकों ने इन किताबों को लेकर स्कूल से शिकायत की थी, जिसके बाद यह मामला ज़िला शिक्षा विभाग के पास पहुंचा. ज़िला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने इससे पहले बीबीसी गुजराती से बात करते हुए कहा था कि विभाग को धार्मिक भावनाओं से जुड़ी शिकायत मिली थी.

उन्होंने कहा, "हमने स्कूल से कहा कि ऐसी कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी बच्चे की धार्मिक भावनाएं आहत हों. अगर ऐसी कोई गतिविधि हुई है, तो उसे रोका जाना चाहिए."

बजरंग दल के नेता ज्वलित मेहता ने बाद में घटना का एक वीडियो पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने वाली एक युवा महिला के तौर पर उन्हें मलाला से कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर के मुद्दे पर मलाला ने भारत के ख़िलाफ़ टिप्पणियां की थीं और वह नहीं चाहते कि देश में उनकी किताब पढ़ी जाए. उन्होंने कहा कि संगठन के सदस्य विरोध कर रहे लोगों से रीडिंग सेशन रोकने के लिए कहने के लिए पार्क गए थे.

मानवाधिकार कार्यकर्ता फ़ादर सेड्रिक प्रकाश ने शांतिपूर्ण रीडिंग सेशन में शामिल लोगों पर हुए 'भयावह और बर्बर हमले' की निंदा की. फ़ादर सेड्रिक प्रकाश ने पुलिस से घटना में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा, "इस रीडिंग सेशन का मक़सद सिर्फ मलाला और ऐन फ़्रैंक को पढ़ना नहीं था. इसका मकसद ऐसे दूसरे लेखकों को भी पढ़ना था, जो सत्ता पर सवाल उठाते हैं और लोगों को स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए प्रेरित करते हैं."

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  • पुलिस द्वारा मामले में आगे की गिरफ़्तारियां

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  • क्या गिरफ़्तार किए गए लोगों के अलावा अन्य संदिग्धों की पहचान हुई है?
  • स्कूल प्रशासन का इस हमले पर क्या रुख है?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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