दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' ज़ी5 से हटाई गई, मेकर्स ने कहा जल्द वापसी होगी
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मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' ज़ी5 पर रिलीज़ होने के कुछ दिन बाद ही हटा दी गई. ज़ी5 ने कहा कि फ़िल्म जल्द ही वापस आएगी, जबकि निर्देशक ने सेंसरशिप पर सवाल उठाए.
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Why It Matters
फ़िल्म 'सतलुज', जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, ज़ी5 पर रिलीज़ होने के तुरंत बाद हटा दी गई. निर्देशक ने सेंसरशिप पर सवाल उठाए.
प्रकाशित 6 मिनट पहले
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मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' नाम से ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी5 पर तीन जुलाई को रिलीज़ हो गई थी, लेकिन पांच जुलाई को इसे प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया.
ज़ी5 के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस बारे में एक बयान जारी करके कहा है, "'सतलुज' भले ही थम गई हो, लेकिन उसने जो चर्चा छेड़ी थी, वो अब भी जारी है. आपके अपार प्यार के लिए दिल से धन्यवाद. हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इसे फिर से आपके बीच लेकर आएंगे."
ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर इस फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद फ़िल्म के निर्देशक हनी त्रेहन ने कहा था, "इस फ़िल्म में कोई कांट-छांट नहीं की गई है और न ही इसके मूल स्वरूप से कोई समझौता किया गया है."
इस फ़िल्म का मूल नाम 'पंजाब 95' था. अलग-अलग कारणों से इसकी रिलीज़ लंबे समय से अटकी हुई थी.
इस फ़िल्म को 7 फ़रवरी 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किए जाने की घोषणा की गई थी और इसका टीज़र भी जारी कर दिया गया था.
हालांकि बाद में इसकी रिलीज़ एक बार फिर टाल दी गई.
फ़िल्म में दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं.
बयान में क्या कहा गया है?
रविवार पांच जुलाई को शाम 8.30 बजे ज़ी5 के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक बयान प्रकाशित किया गया.
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ज़ी5 ने फ़िल्म को सब्सक्राइब करने, देखने और समर्थन देने वाले सभी दर्शकों का धन्यवाद किया है.
बयान में लिखा गया है, "रिलीज के बाद से 'सतलुज' को दर्शकों का ज़बरदस्त प्यार और समर्थन मिला है. हम सतलुज और उससे जुड़े रचनात्मक नज़रिये के साथ मज़बूती से खड़े हैं."
ज़ी5 ने कहा है, "अगले आदेश तक 'सतलुज' भारत में उपलब्ध नहीं होगी. फ़िल्म को जल्द से जल्द दोबारा उपलब्ध कराने के लिए सभी उचित विकल्पों पर काम किया जाएगा."
फ़िल्म की रिलीज़ क्यों टलती रही?
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मार्च 2025 में बीबीसी पंजाबी ने फ़िल्म के रिलीज़ न हो पाने को लेकर निर्देशक हनी त्रेहन से बातचीत की थी.
हनी त्रेहन ने बीबीसी से कहा था कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफ़सी) ने शुरुआत में फ़िल्म में 21 कट लगाने को कहा था.
लेकिन जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, कट की संख्या 120 से भी अधिक हो गई. यह मेरी समझ से परे है. कई कट ऐसे थे, जिनका कोई कारण भी नहीं बताया गया.
उस समय हनी त्रेहन ने कहा था, "यह जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है और मुझसे कहा जा रहा है कि जसवंत सिंह खालड़ा का नाम ही हटा दिया जाए. इसका मतलब तो यह हुआ कि उनका नाम लेना ही अपराध है. ऐसी सभी मांगें मंज़ूर नहीं की जा सकतीं."
उन्होंने कहा, "जिन लोगों को फ़िल्म से कोई आपत्ति है, मैं चाहता हूं कि वे आकर मुझसे बात करें. अगर उनकी कोई वाजिब आपत्ति होगी, तो मैं उसे स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं. मैं एक शांति प्रिय और कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं."
उन्होंने आगे कहा, "जिस किसी को भी आपत्ति है, उसके लिए मैं न्यायपालिका में लड़ने को तैयार हूं. लेकिन अगर आप मुझे अदालत ही नहीं जाने देंगे, तो फिर मैं क्या कर सकता हूं?"
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
जसवंत सिंह खालड़ा का 6 सितंबर 1995 को अमृतसर के कबीर पार्क स्थित उनके घर से अपहरण कर लिया गया था. इसके बाद वो कभी घर वापस नहीं लौटे.
अदालत में सीबीआई की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जसवंत सिंह खालड़ा एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे और शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के महासचिव रह चुके थे.
सीबीआई के मुताबिक़, 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में चरपमंथ के साथ-साथ पुलिस अत्याचार, हिरासत में मौतों और कथित फ़र्ज़ी पुलिस मुठभेड़ों की घटनाओं को लेकर लगातार चर्चा में रहा.
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने जून 1984 से दिसंबर 1994 के बीच अमृतसर, मजीठा और तरनतारन के तीन श्मशान घाटों में मिले अज्ञात शवों का ब्योरा सार्वजनिक किया था.
उनका दावा था कि ये लावारिस शव पुलिस की अवैध कार्रवाइयों के गवाह हैं.
खालड़ा के इस दावे को इस तथ्य से बल मिला कि इनमें से ज़्यादातर शव पुलिस ही श्मशान घाटों तक लाई थी.
सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक़, जसवंत सिंह खालड़ा ने इन कथित घटनाओं के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी.
रिपोर्ट में कहा गया, "स्थानीय पुलिस को यह पसंद नहीं आया और उसने उनका अपहरण करने की साज़िश रची. इसी आपराधिक साज़िश के तहत स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने 6 सितंबर 1995 को कबीर पार्क स्थित उनके घर से खालड़ा का अपहरण कर लिया."
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
फ़िल्म 'सतलुज' की वापसी की संभावना है, लेकिन सेंसरशिप संबंधी मुद्दे अनसुलझे रह सकते हैं.
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Open Questions
- फ़िल्म को फिर से कब रिलीज़ किया जाएगा?
- सेंसरशिप के पीछे क्या कारण थे?

