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पश्चिम बंगाल: फाल्टा सीट पर टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर ख़ान को मिले वोट, जानें क्या है वजह
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BBC हिंदी5/24/2026Politics4 min readIndia

पश्चिम बंगाल: फाल्टा सीट पर टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर ख़ान को मिले वोट, जानें क्या है वजह

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पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर वोटों की गिनती जारी है, जहां बीजेपी के देबांग्शु पांडा भारी बढ़त बनाए हुए हैं. आश्चर्यजनक रूप से, टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर ख़ान को भी वोट मिले, जिन्होंने मतदान से पहले हटने का ऐलान किया था.

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प्रकाशित 9 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर वोटों की गिनती जारी है और यहां भारतीय जनता पार्टी के देबांग्शु पांडा सवाल लाख से ज़्यादा वोटों से भारी बढ़त बनाए हुए हैं.

राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए दूसरे नंबर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के शंभु नाथ कुर्मी हैं. कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर है और उसके प्रत्याशी अब्दुर रज़्ज़ाक हैं.

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर ख़ान के नाम पर भी वोट मिले हैं, हालांकि मतदान से पहले उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का एलान किया था.

यहां 21 मई को फिर से मतदान कराया गया था और रविवार को इस सीट पर मतगणना जारी है.

जहांगीर ख़ान ने दोबारा मतदान से सिर्फ़ दो दिन पहले 19 मई को चुनाव से हटने का एलान किया था.

उन्होंने इसकी वजहों में नई सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विकास संबंधी वादों का ज़िक्र किया.

हालांकि टीएमसी ने कहा कि जहांगीर ख़ान का फ़ैसला पार्टी का नहीं है.

हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भारी बहुमत मिला और वह पहली बार राज्य की सत्ता में आई. शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने.

फाल्टा सीट क्यों रही चर्चा में

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए थे और चार मई को परिणाम आए थे. इन चुनावों में बीजेपी ने 207 सीटें और टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं.

दूसरे चरण के मतदान के दौरान फाल्टा सीट पर भी मतदान हुआ था. हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर अनियमितताएं पाईं और उसके बाद 21 मई को दोबारा मतदान की घोषणा की थी.

फाल्टा विधानसभा पहले से चर्चाओं में रहा था. बीजेपी का आरोप था कि स्थानीय टीएमसी नेता जहांगीर ख़ान लोगों का उत्पीड़न करते हैं. तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी को इस सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी.

चुनाव प्रक्रिया के दौरान यहां ऑब्ज़र्वर बनाए गए यूपी के चर्चित आईपीएस अजयपाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था.

इसमें अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को चेतावनी दी थी. वीडियो में वह कहते दिखे, "अच्छी तरह से समझ लें, किसी ने बदमाशी की तो कायदे से इलाज किया जाएगा. कहीं से ख़बर आई कि किसी ने कोई ख़ुराफ़ात की, किसी को परेशान करने की कोशिश की तो उसकी अच्छी से ख़बर ली जाएगी. जहांगीर के घरवाले भी ये सुन लें. उसे बता देना. बार-बार ख़बरें आ रही हैं कि धमकाया जा रहा है. उसे बता देना, बाद में रोना-पछताना मत."

इस वीडियो के वायरल होने के बाद अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने आईपीएस अजयपाल शर्मा की निंदा की थी और हटाए जाने की मांग की थी.

चुनावी मैदान से हट गए जहांगीर ख़ान

माना जा रहा था कि फाल्टा सीट पर टीएमसी के जहांगीर ख़ान का मुकाबला बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज़्ज़ाक मोल्ला से है. सीपीआई (एम) के संभू नाथ कुर्मी को भी चुनावी मैदान में गिना जा रहा था.

जहाँगीर ख़ान के ख़िलाफ़ मतदाताओं को कथित धमकी और चुनावी अनियमितताओं के मामले में पांच, 10 और 15 मई को कुल पांच एफ़आईआर दर्ज़ हुई थीं.

हालांकि 18 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने फाल्टा में फिर से मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक जहांगीर ख़ान की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी.

लेकिन एक दिन बाद ही जहांगीर ख़ान ने अचानक चुनावी रेस से बाहर होने की घोषणा कर दी. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फ़ैसला है न कि पार्टी का.

इस मामले पर जहाँगीर ख़ान ने कहा, "मैं फाल्टा की मिट्टी का बेटा हूँ. मैं हमेशा फाल्टा में शांति और विकास चाहता हूँ. मेरा सपना फाल्टा को सुंदर बनाना था. मुख्यमंत्री फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज देंगे और इसी वजह से मैं 21 मई को होने वाले मतदान से ख़ुद को अलग कर रहा हूँ."

उनकी इस घोषणा पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 'जहांगीर ख़ान भाग गए क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिला.'

जहांगीर ख़ान को वोट क्यों पड़े

चुनाव आयोग ने 21 मई को फाल्टा की सभी 285 बूथों पर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था.

आयोग ने 29 अप्रैल को हुए पहले के मतदान के दौरान "गंभीर चुनावी गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने" की रिपोर्ट मिलने के बाद यह फैसला लिया था.

नियमों के मुताबिक़, इस तरह के दोबारा मतदान में उम्मीदवारों की सूची और ईवीएम कॉन्फ़िगरेशन इस्तेमाल किया जाता है, जो पहले मतदान में था.

जहांगीर ख़ान का दक्षिण 24 परगना जिले में पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ थी. इसी वजह से लगातार तीन चुनाव और एक उपचुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उन्हें नया उम्मीदवार बनाया था.

चूंकि ईवीएम पर उनका नाम और टीएमसी का चुनाव चिह्न बना रहा, इसलिए मतदान करने पहुंचे लोगों के पास उसे दबाने का विकल्प मौजूद था.

यह वोट टीएमसी समर्थकों ने जानबूझकर दिया हो, या कुछ लोग उनके राजनीतिक एलान से अनजान रहे हों, या कुछ मतदाता उदासीन रहे हों.

जहांगीर ख़ान ने चुनावी मैदान से हटने का एलान तो किया लेकिन उन्होंने किसी और का समर्थन नहीं किया था.

वाम मोर्चे का प्रदर्शन

मई में हुए पांच राज्यों के चुनाव के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भारत से वामपंथ की विदाई हो गई है.

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के हाथों हार के बाद वाम मोर्चा धीरे-धीरे कमज़ोर होता गया और उसकी जगह बीजेपी मज़बूत होती गई.

वाम मोर्चे की एकमात्र केरल में सरकार थी. हालिया विधानसभा चुनावों में वो भी चली गई और कहा जा रहा है कि 70 सालों में पहली बार ऐसा है कि देश में वाम मोर्चे की कोई सरकार नहीं है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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