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Backपश्चिम बंगाल: टीएमसी में लगातार हो रहा है हंगामा, दो विधायकों को पार्टी से निकाला गया
पश्चिम बंगाल: टीएमसी में लगातार हो रहा है हंगामा, दो विधायकों को पार्टी से निकाला गया
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BBC हिंदी6/1/2026Politics4 min readIndia

पश्चिम बंगाल: टीएमसी में लगातार हो रहा है हंगामा, दो विधायकों को पार्टी से निकाला गया

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पश्चिम बंगाल में टीएमसी लगातार सुर्खियों में है. हाल ही में पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमले और दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी व संदीपन साहा को पार्टी से निकाले जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

AI-generated summary

Why It Matters

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में लगातार घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. हाल ही में पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमले और दो विधायकों को पार्टी से निकाले जाने की घटनाएँ हुई हैं. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार भी हुआ है.

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प्रकाशित 8 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार के बाद रोज़ाना कोई न कोई ऐसा घटनाक्रम सामने आ रहा है जिसने पार्टी को सुर्ख़ियों में बनाए रखा है.

बीते शनिवार को जहां सोनारपुर में पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर स्थानीय लोगों ने हमला किया और उन पर अंडे फेंके.

वहीं रविवार को टीएमसी के एक और सांसद कल्याण बनर्जी ने ख़ुद पर हमला किए जाने का दावा किया.

सोमवार को एक और मामला सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया.

इसके बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर राज्य की क़ानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा.

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टीएमसी विधायकों को क्यों निकाला गया?

टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने इन विधायकों के निष्कासन की जानकारी दी है.

उन्होंने बताया कि इन दोनों विधायकों को ईमेल और व्हाट्सएप के ज़रिए इस फ़ैसले की जानकारी दे दी गई है. साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को भी इसकी सूचना दे दी गई है.

विधानसभा के जाली हस्ताक्षर कांड के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को सचिवालय में पत्रकारों को संबोधित किया.

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इस दौरान उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के इन दोनों विधायकों ने ही विधानसभा अध्यक्ष से इस घटना के बारे में लिखित शिकायत की थी.

उसके बाद ही विधानसभा सचिवालय ने हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज की.

मुख्यमंत्री शुभेंदु ने बताया कि यह शिकायत मिलने के बाद उन्होंने सीआईडी को इसकी जांच के आदेश दिए थे.

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय के चयन के समर्थन वाले टीएमसी विधायकों के पत्र में कथित तौर पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फ़र्ज़ी होने का आरोप है.

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कई विधायकों के हस्ताक्षर संदिग्ध होने और उपस्थित न होने के बावजूद पत्र में उनके नाम होने के कारण विधानसभा सचिवालय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

इस मामले की जांच अब सीआईडी कर रही है. आरोप है कि कुछ विधायकों के फ़र्ज़ी हस्ताक्षर किए गए. वो लोग उस दिन विधानसभा में मौजूद भी नहीं थे.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस ख़त्म होने के 15 मिनट के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस ने हावड़ा में उलूबेड़िया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और कोलकाता में एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निकालने का फैसला किया.

पार्टी से निकाले जाने के बाद संदीपन ने पत्रकारों से कहा, "पार्टी अनैतिक काम करने वालों का समर्थन करती है. हमें तो पता ही नहीं था कि उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर को प्रस्ताव पर हस्ताक्षर का रूप दे दिया जाएगा."

ऋतब्रत बनर्जी को सीपीएम ने वर्ष 2014 में राज्यसभा में भेजा था. उनकी सदस्यता की मियाद 2020 तक थी. लेकिन 2017 में उनको पार्टी से निकाल दिया गया था.

तीन साल तक वो पार्टीविहीन सांसद रहे. बाद में तृणमूल ने उनको पहले उपचुनाव में डेढ़ साल के लिए राज्यसभा भेजा था और फिर बीते महीने हुए चुनाव में उनको उम्मीदवार बनाया था.

पश्चिम बंगाल में आख़िर क्यों लगातार हंगामा चल रहा है?

पश्चिम बंगाल के वर्तमान राजनैतिक घटनाक्रम पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के असिस्टेंट एडिटर पंकज प्रियदर्शी ने बीबीसी बांग्ला के वरिष्ठ संवाददाता शुभज्योति घोष से बातचीत की है.

शुभज्योति घोष कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार को बने तीन हफ़्ते से ज़्यादा समय हो चुका है और जो भी घटनाक्रम लगातार सामने आ रहे हैं वो काफ़ी दिलचस्प हैं.

वो कहते हैं, "तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस पार्टी के बाद सबसे ताक़तवर विपक्ष माना जाता था, अब ऐसा लगता है कि उनका घर टूट रहा है. वहीं बीजेपी की ओर हम देखें तो रोज़ाना नए फ़ैसले लिए जा रहे हैं, जिसको लेकर विवाद भी हो रहा है. हालांकि सबसे चौंकाने वाली बात तृणमूल कांग्रेस को लेकर ही है कि उसमें क्यों दरार पड़ती जा रही है."

हाल में कई कार्यकर्ताओं के टीएमसी को छोड़ने का मामला सामने आया है. इसकी वजहें क्या नज़र आती हैं? इस सवाल पर शुभज्योति घोष कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी पर आधारित पार्टी है और वो किसी राजनीतिक वाद में कभी भी नहीं रही है.

वो कहते हैं, "ममता बनर्जी की कामयाबी से ही पार्टी कार्यकर्ता इतनी दूर तक आ पाए. जब ममता बनर्जी करारी हार के बाद अपनी भवानीपुर सीट ही खो बैठीं तो पार्टी की एकजुटता में टूट साफ़ दिखने लगी. आज की तारीख़ में भी ममता बनर्जी के पास लोकसभा और राज्यसभा में 42 सांसद हैं और 80 विधायक हैं, 41 फ़ीसदी वोट हैं. फिर भी जो प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है वो एक तरह से ममता बनर्जी को ही निशाना बना रही है कि आपने अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया और परिवार को लेकर आंखें मूंदें रखीं."

"इतिहास में पार्टियों के बुरे दिन आते रहे हैं लेकिन इस तरह की टूट देखने को नहीं मिली है. साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीतिक संस्कृति ऐसी बन चुकी है कि जो भी पार्टी सत्ता में आती है उसके पास पुलिस-प्रशासन के अलावा दैनिक सामाजिक जीवन भी नियंत्रण में आ जाता है."

"टीएमसी के कार्यकाल में देखने को मिला है जब विपक्षी विधायक टीएमसी में आ जाते थे. अमित शाह का जैसे कांग्रेस मुक्त भारत का स्वप्न था वैसे ही ममता बनर्जी ने विरोधी मुक्त बंगाल बनाने की कोशिश की. अब ऐसा लगता है कि उसी की क़ीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है क्योंकि टीएमसी के टिकट पर जो चुनाव जीतकर 80 विधायक आए हैं, उन्हें लग रहा है कि वो राजनीति में अप्रासंगिक हो जाएंगे."

टीएमसी क्या टूट जाएगी?

क्या टीएमसी में टूट होगी या वर्तमान हालात सिर्फ़ नाराज़गी भर है? इस सवाल पर शुभज्योति कहते हैं, "बीजेपी नेताओं से जो मेरी बात हुई है तो उनका कहना है कि वो टीएमसी नेताओं को तुरंत पार्टी में नहीं लेंगे. लेकिन एक इशारा दिया है कि अगर दो तिहाई से ज़्यादा विधायक ममता से अलग होकर पार्टी बना लेते हैं तो उसको अपना समर्थन देंगे."

टीएमसी नेताओं अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर कथित हमलों के बाद से बीजेपी की ओर से कोई कड़ा बयान नहीं आया. इस पर शुभज्योति घोष कहते हैं कि बीजेपी ने कोई निंदा नहीं की क्योंकि उसे लगता है कि जनता में नेताओं को लेकर ग़ुस्सा है, बीजेपी इसी का फ़ायदा ले रही है.

सोमवार को ही पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और पार्टी के 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली.

इनमें से 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली है, बाक़ी राज्य मंत्री बने हैं. इसके साथ ही राज्य में मंत्रियों की संख्या 41 हो गई है.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • बीजेपी टीएमसी के उन विधायकों को समर्थन दे सकती है जो ममता बनर्जी से अलग होकर नई पार्टी बनाते हैं.

    Possible · Within months

Open Questions

  • क्या टीएमसी में और टूट होगी?
  • क्या बीजेपी टीएमसी के बागी विधायकों को समर्थन देगी?
  • जाली हस्ताक्षर कांड की जांच का क्या नतीजा निकलेगा?
  • ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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