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ईरान से समझौते पर ट्रंप की पार्टी के सांसदों में मतभेद
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BBC हिंदी5/25/2026Politics4 min readIndia

ईरान से समझौते पर ट्रंप की पार्टी के सांसदों में मतभेद

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रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अटकलें तेज हो गईं, लेकिन रात तक यह स्पष्ट हो गया कि कोई समझौता नहीं हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जल्दबाजी न करने की हिदायत दी, जबकि इजराइल ने अपनी शर्तें बताईं। ट्रंप की पार्टी के सांसदों में भी इस मुद्दे पर मतभेद दिखे।

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ईरान से समझौते पर किन बातों को लेकर बंटे राष्ट्रपति ट्रंप की पार्टी के सांसद

प्रकाशित 3 मिनट पहले

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रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते पर पहुंचने को लेकर काफी हलचल देखने को मिली.

रविवार को दिन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए. उन्होंने कहा कि 'शायद आज थोड़ी देर में और ख़बरें सामने आएंगी.'

लेकिन रात तक यह तस्वीर साफ हो गई कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा है कि ईरान के साथ समझौते की बातचीत चल रही है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को समय लेकर सही तरीके से करना चाहिए.

ट्रंप ने ये भी साफ़ कर दिया कि ईरान को समझना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बना सकता. वहीं उन्होंने अमेरिकी वार्ताकारों को निर्देश दिया है कि किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी न करें.

इसी बीच, रविवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा कि पिछले एक हफ्ते में अमेरिका और ईरान के बीच रुख़ में नज़दीकी ज़रूर आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अहम मुद्दों पर समझौता हो जाएगा.

रविवार को समझौते को लेकर जो बातें सामने आईं उन पर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी प्रतिक्रिया दी और इसराइल की शर्तों के बारे में बताया.

उन्होंने कहा, "किसी भी अंतिम समझौते में 'परमाणु ख़तरे को हटाना ज़रूरी है' और उनकी नीति यही है कि 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे.'"

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बीबीसी को एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी ने बताया कि नेतन्याहू ने यह भी ज़ोर दिया कि इसराइल 'हर क्षेत्र में ख़तरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की स्वतंत्रता बनाए रखेगा', जिसमें लेबनान भी शामिल है.

समझौते को लेकर ट्रंप की पार्टी में मतभेद

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रविवार को समझौते की ख़बरों पर राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद भी प्रतिक्रिया देते हुए नज़र आए. लेकिन उनकी राय आपस में बंटी हुई भी दिखी.

सीनेटर टेड क्रूज़ ने कहा कि वह समझौते की संभावित शर्तों को लेकर 'गंभीर रूप से चिंतित' हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ट्रंप का ईरान पर हमला करना 'सही' था. उन्होंने कहा कि लेकिन अगर नतीजा यह हुआ कि ईरानी शासन को अरबों डॉलर मिलें, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियार बनाने की क्षमता मिले और होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण हो जाए, तो यह 'विनाशकारी गलती' होगी.

हालांकि ये बताना ज़रूरी है कि अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है और बीबीसी को इस बात की जानकारी नहीं है कि संभावित समझौते में क्या-क्या शामिल हो सकता है.

कांग्रेसमैन थॉमस मैसी ने एनबीसी को बताया कि अगर सीनेटर लिंडसे ग्राहम और टेड क्रूज़ इसका विरोध कर रहे हैं, तो यह शायद 'काफी अच्छा समझौता' है.

मैसी ने पिछले साल एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई नहीं कर सकता.

सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि संभावित समझौते पर हो रही बातें 'समझ में नहीं आ रही हैं. उन्होंने पूछा, "क्यों यह सुझाव दिया जा रहा है कि 'हम ईरान में बचा हुआ न्यूक्लियर मटेरियल स्वीकार कर सकते हैं', जबकि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कुछ हफ्ते पहले कहा था कि 'उन्होंने ईरान की रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया है और यह सिर्फ़ समय की बात है कि हमारे पास न्यूक्लियर मटेरियल होगा.'"

सीनेट मेजॉरिटी व्हिप जॉन बरासो ज्यादा पॉजिटिव नज़र आए. उन्होंने कहा, "ट्रंप अमेरिकी ताकत को दिखाते हुए ईरान को बातचीत की टेबल पर लेकर आए."

लेकिन उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि फिलहाल समझौते की बहुत सारी बातों के बारे में जानकारी नहीं मिली है.

रिपब्लिकन पार्टी के अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद रो खन्ना ने भी रविवार की हलचल पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने एनबीसी न्यूज़ के 'मीट द प्रेस' कार्यक्रम में कहा कि अब कांग्रेस में वॉर पावर्स प्रस्ताव पारित करने के लिए पर्याप्त वोट मौजूद हैं.

खन्ना ने कहा, "कई रिपब्लिकन मानते हैं कि युद्ध खत्म होना चाहिए. मैंने किसानों से बात की है. किसान कह रहे हैं कि नाइट्रोजन, अमोनिया और यूरिया की कीमतें आसमान छू रही हैं, क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट पर नाकेबंदी और नियंत्रण है."

खन्ना ने यह भी कहा कि उनके क्षेत्र के लोग पेट्रोल की ऊंची कीमतों से परेशान हैं.

उन्होंने कहा, "ये बातें ट्रंप पर बातचीत करने का दबाव डाल रही हैं. यही वजह है कि कांग्रेस मायने रखती है. भले ही हम वोट पास न कर पाएं. लेकिन हम राष्ट्रपति पर दबाव डाल सकते हैं. उम्मीद है कि यह युद्ध जल्द खत्म होगा."

बीबीसी को क्या पता है?

समझौते को लेकर जो जानकारी बीबीसी के पास है उसके मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि किसी भी तरह के समझौते पर पहुंचने के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना होगा.

ईरान की तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि 30 दिनों में यातायात युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगा, लेकिन 'युद्ध से पहले की स्थिति' पूरी तरह शायद बहाल नहीं होगी.

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि पिछले दो दिन में जिस तरह से बातचीत आगे बढ़ी है उससे संभावना बनती है कि होर्मुज़ स्ट्रेट बिना किसी शुल्क के खुल सकता है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझना होगा कि वह 'परमाणु हथियार विकसित या हासिल' नहीं कर सकता.

वहीं तसनीम ने कहा कि ईरान ने मसौदे में अपने न्यूक्लियर मटेरियल सौंपने की कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है और इस मुद्दे पर बातचीत 'युद्ध समाप्त होने के बाद' संभव होगी.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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