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नेतन्याहू ने जेडी वेंस की किस बात का जवाब देते हुए भारत से दोस्ती का किया ज़िक्र
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नेतन्याहू ने जेडी वेंस की किस बात का जवाब देते हुए भारत से दोस्ती का किया ज़िक्र

Quick Look

इसराइल के पीएम नेतन्याहू ने अमेरिकी नेता जेडी वेंस की आलोचना का जवाब देते हुए भारत के साथ अपनी दोस्ती का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें अपार समर्थन मिलता है, जो अमेरिका के अलावा उनके अन्य दोस्तों में से एक है.

AI-generated summary

Why It Matters

इसराइल के पीएम नेतन्याहू ने अमेरिकी नेता जेडी वेंस की आलोचना का जवाब देते हुए भारत के साथ अपनी दोस्ती का ज़िक्र किया. यह बयान तब आया जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही थी और इसराइल लेबनान पर हमले कर रहा था.

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नेतन्याहू ने जेडी वेंस की किस बात का जवाब देते हुए भारत से दोस्ती का किया ज़िक्र

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 5 मिनट

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की एक नसीहत का जवाब देते हुए भारत का ज़िक्र किया.

नेतन्याहू ने दावा किया कि भारत में उनको प्यार करने वाले बहुत सारे लोग हैं और उनको भारत में अपार समर्थन मिलता है.

नेतन्याहू ने यह बात फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए कही. जेडी वेंस ने जून में इसराइल को अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करने से बचने की सलाह दी थी.

नेतन्याहू ने उसी के जवाब में भारत से दोस्ती का हवाला देते हुए दावा किया कि अमेरिका ही नहीं कई और देश भी उसके दोस्त हैं.

ग़ौरतलब है कि जून में जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही थी तब इसराइल के लेबनान पर हमले लगातार जारी थे. ईरान चेतावनी दे रहा था कि लेबनान पर हो रहे ये हमले बातचीत बिगाड़ सकते हैं. तब पहले डोनाल्ड ट्रंप ने और फिर जेडी वेंस ने इसराइल के प्रति कड़ा रवैया अख़्तियार किया था.

ट्रंप ने लेबनान पर इसराइली हमलों को ग़ैरज़रूरी बताया था. अमेरिका को आशंका थी कि इसराइली कार्रवाई ईरान के साथ संभावित सीज़फ़ायर को ख़तरे में डाल सकती है जिससे अमेरिका की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंच सकता है.

ट्रंप के बयान की और ईरान के साथ चल रही अमेरिकी बातचीत की इसराइली कैबिनेट के कुछ सदस्यों ने आलोचना की थी और ईरान को अपने लिए बड़ा ख़तरा बताया था. नेतन्याहू ने भी कहा था कि ट्रंप से उनके बहुत अच्छे रिश्ते हैं लेकिन ज़रूरी नहीं कि वे ट्रंप की हर बात से सहमत हों. उन्होंने यह भी कहा था कि उनके जीते जी ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा. इन सभी बयानों और आरोप-प्रत्यारोप को अमेरिका और इसराइल के बीच बढ़ती तल्ख़ी के तौर पर देखा गया.

क्या बोले नेतन्याहू

18 जून को जेडी वेंस ने व्हाइट हाउस में हुई एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था, "पूरी दुनिया में सिर्फ़ डोनाल्ड ट्रंप ही इकलौते नेता हैं जो इसराइल के प्रति सहानुभूति और समर्थन दिखा रहे हैं. साथ ही, वह दुनिया के सबसे ताकतवर देश के नेता भी हैं."

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उन्होंने कहा, "अगर मैं इसराइली कैबिनेट का सदस्य होता, तो शायद मैं दुनिया में बचे अपने इकलौते ताकतवर सहयोगी पर सार्वजनिक रूप से हमला नहीं करता."

फॉक्स न्यूज़ की एंकर ने जेडी वेंस के इसी बयान का ज़िक्र करते हुए नेतन्याहू से उनकी प्रतिक्रिया पूछी.

नेतन्याहू ने कहा, "मैं जेडी वेंस की बहुत इज़्ज़त करता हूं. मेरे उनके साथ अच्छे रिश्ते हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि मैं उनकी हर बात से सहमत रहूं."

'भारत में मुझे अपार समर्थन'

नेतन्याहू ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी तारीफ़ करते हुए उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताया और कहा कि अमेरिका के किसी और राष्ट्रपति से वो इतना क़रीब नहीं थे जितना ट्रंप के क़रीब हैं.

उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका ही नहीं बल्कि हमारे दूसरे दोस्त भी हैं, जैसे भारत. 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में हमें बहुत ज़्यादा समर्थन हासिल है. फ़ेसबुक पर, सोशल मीडिया पर मुझे भारत से मिले अपार समर्थन के लगातार मैसेज आते रहते हैं."

उन्होंने कहा कि कई देशों में इसराइल की आलोचना करना फ़ैशन सा हो गया है. उन्होंने इसके लिए मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराया जहां इसराइल विरोधी ख़बरें चलाई जाती हैं.

नेतन्याहू ने दावा किया, "कई देशों के नेता मुझे फ़ोन करके बताते हैं कि पब्लिक ओपिनियन के कारण हमें दिक़्क़त हो रही है लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि आपकी हम बहुत इज़्ज़त करते हैं. क्या हम आपके साथ डील कर सकते हैं. क्या आपकी सेना हमें कुछ सिखा सकती है. क्या आप हमें एआई और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी बातें सिखा सकते हो. तो रिश्ते जैसे दिखते हैं वैसे होते नहीं. हमारे कई दोस्त हैं."

ट्रंप और नेतन्याहू ने एक-दूसरे के बारे में क्या कहा था?

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जून में जी-7 समिट में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की तीखी आलोचना की थी और कहा था कि इसराइल के लेबनान में किए गए हमले ग़ैर-ज़रूरी थे.

उससे पहले नेतन्याहू ने अमेरिका और ईरान की पीस डील के प्रति कोई ख़ास सकारात्मक रवैया नहीं दिखाया था और संकेत दिए थे कि ईरान के साथ उसका मौजूदा कड़ा रवैया जारी रहेगा.

ट्रंप ने इसराइल के बारे में कहा, "इसराइल हिज़्बुल्लाह से कुछ ज़्यादा ही लंबे समय से लड़ रहा है, जिसकी वजह से बहुत सारे लोग मारे जा रहे हैं. जब आप किसी की खोज में रहते हो तो पूरे इलाक़े को तबाह करना कोई समझदारी नहीं है क्योंकि वहां आम लोग भी रहते हैं. वहां रह रहे सब लोग हिज़्बुल्लाह के नहीं हैं."

उन्होंने आगे यह भी कहा, "हमारे बिना इसराइल ही नहीं होता. मेरे बिना इसराइल नहीं होता क्योंकि उनके लिए किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वह किया ही नहीं जो मैंने किया."

ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ अपने रिश्तों के बारे में कहा, "मेरे बीबी (बिन्यामिन नेतन्याहू) के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. लेकिन बीबी को अब लेबनान के मामले में और ज़्यादा ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है. लेबनान एक महान देश हुआ करता था जहां बड़े-बड़े प्रोफ़ेसर, डॉक्टर और वकील हुआ करते थे."

उस दौरान नेतन्याहू और ट्रंप के रिश्तों में तल्ख़ी देखी गई.

ईरान और अमेरिका की पीस डील को लेकर भी इसराइल में कोई ख़ास सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देखी गई. घरेलू राजनीतिक दबाव के बाद नेतन्याहू ने बयान दिया था, "समझौता हो या न हो, जब तक मैं इसराइल का प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा."

जब ईरान के साथ अमेरिका की शांति वार्ता चल रही थी, उसी दौरान इसराइल ने लेबनान पर कई हमले किए. इस पर ईरान ने गहरी नाराज़गी जताई और दावा किया कि लेबनान में युद्धविराम भी इस पीस डील का हिस्सा है.

Open Questions

  • क्या भारत इसराइल के साथ अपने संबंधों को और मज़बूत करेगा?
  • क्या नेतन्याहू के बयान से अमेरिका-इसराइल संबंधों पर असर पड़ेगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.