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Backजेडी वेंस का इसराइल को कड़ा संदेश, 'दुनिया में इकलौते बचे अपने दोस्त पर हमला मत करो'
जेडी वेंस का इसराइल को कड़ा संदेश, 'दुनिया में इकलौते बचे अपने दोस्त पर हमला मत करो'
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BBC हिंदी6/19/2026Politics4 min readIndia

जेडी वेंस का इसराइल को कड़ा संदेश, 'दुनिया में इकलौते बचे अपने दोस्त पर हमला मत करो'

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसराइल को ईरान के साथ हुए समझौते पर राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप ही एकमात्र नेता हैं जो इसराइल का समर्थन कर रहे हैं।

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जेडी वेंस का इसराइल को कड़ा संदेश, 'दुनिया में इकलौते बचे अपने दोस्त पर हमला मत करो'

प्रकाशित 4 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 4 मिनट

गुरुवार को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने करीब 45 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

इसमें उन्होंने ईरान के साथ हुए समझौते के बारे में जानकारी दी. लेकिन साथ ही उन्होंने अमेरिका के निकट सहयोगी इसराइल और वहां के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को नसीहत भी दी.

इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेतन्याहू को हिदायत देते हुए कहा था कि उन्हें लेबनान और हिज़्बुल्लाह के मामले में और ज़्यादा ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है.

दरअसल, इसराइली कैबिनेट के कुछ सदस्यों ने अमेरिका-ईरान समझौते से असहमति जताई थी. ख़ुद नेतन्याहू इससे ज़्यादा ख़ुश नज़र नहीं आ रहे हैं और उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ आक्रामक रवैया जारी रखने के संकेत दिए थे.

इससे पहले जब ईरान से समझौते पर बात चल ही रही थी, उसी बीच इसराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर अटैक कर दिया था. इससे भी ट्रंप नाराज़ नज़र आए क्योंकि ईरान की मांग रही है कि समझौते में लेबनान में भी पूर्ण सीज़फ़ायर की बात लागू हो.

व्हाइट हाउस में जेडी वेंस ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता तीन मुख्य बातों पर आधारित है.

ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा.

होर्मुज़ स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय आवागमन के लिए खुला रहेगा.

ईरान को आर्थिक लाभ तभी मिलेगा, जब वह अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा.

'ईरान शर्तें पूरी करेगा तभी फ़ायदा मिलेगा'

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वेंस ने बार-बार कहा कि यह "प्रदर्शन-आधारित" समझौता है. यानी ईरान को तभी फ़ायदा मिलेगा, जब वह अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि बातचीत के लिए 60 दिनों की अवधि गुरुवार, 18 जून से शुरू हो गई है.

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उन्होंने कहा कि मौजूदा समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैडिंग) अंतिम समझौता नहीं है. यह बातचीत का एक खाका है. इसका मकसद अधिकतम 60 दिनों के भीतर एक व्यापक समझौते तक पहुंचना है. अगर दोनों पक्ष चाहें, तो इस समय-सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

वेंस ने कहा कि अमेरिकी सरकार का मानना है कि ईरान ने अब तक अपनी शुरुआती प्रतिबद्धताओं का पालन किया है. अब दोनों देश बातचीत के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस का बड़ा हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित रहा. इस दौरान वेंस ने पत्रकारों से कई अहम बातें कहीं.

उन्होंने कहा कि ईरान ने एक बार फिर वादा किया है कि वह परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार का भविष्य बातचीत के दौरान तय किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि फिलहाल न्यूनतम सहमति यह बनी है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम किया जाएगा.

समझौते के पालन की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक भी दोबारा अपना काम शुरू करेंगे.

इसराइल की आलोचना पर जवाब

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इसराइली कैबिनेट के धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों, इतामार बेन-ग्वीर और बेजालेल स्मोट्रिच ने ईरान के साथ हुए इस समझौते की कड़ी आलोचना की है, उसके और हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ आक्रामक कार्रवाई जारी रखने की वकालत की.

ख़ुद प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने घरेलू दबाव के बाद एक वीडियो संदेश में कहा कि जब तक वो पीएम हैं ईरान परमाणु हथियार कभी नहीं बना पाएगा.

जब वेंस से इसी संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने खुलकर ईरान के साथ समझौते और राष्ट्रपति ट्रंप का बचाव किया.

उन्होंने कहा, "सबसे पहली बात ये है कि पूरी दुनिया में सिर्फ़ डोनाल्ड ट्रंप ही इकलौते नेता हैं जो इसराइल के प्रति सहानुभूति और समर्थन दिखा रहे हैं. साथ ही, वह दुनिया के सबसे ताकतवर देश के नेता भी हैं."

उन्होंने आगे कहा, "अगर मैं इसराइली कैबिनेट का सदस्य होता, तो शायद मैं दुनिया में बचे अपने इकलौते ताकतवर सहयोगी पर सार्वजनिक रूप से हमला नहीं करता."

वेंस ने आगे कहा, "मेरा दूसरा संदेश इसराइली मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों के लिए है. हालांकि, निष्पक्षता के लिए मुझे यह भी कहना होगा कि बीबी, यानी बिन्यामिन नेतन्याहू ने ऐसा कोई रवैया नहीं अपनाया है."

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना करने वाले इसराइली मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा, "पिछले तीन महीनों में आपके देश की रक्षा करने वाले दो-तिहाई रक्षा उपकरण अमेरिकियों ने बनाए हैं. उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं ने उठाया है."

अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने आगे कहा कि इसराइल की समस्या डोनाल्ड ट्रंप नहीं हैं.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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