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यूक्रेन ने रूसी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए निकाला ये हाई-टेक तरीका
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BBC हिंदी5/25/2026Defense6 min readIndia

यूक्रेन ने रूसी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए निकाला ये हाई-टेक तरीका

Quick Look

यूक्रेन रूसी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए हाई-टेक तरीके अपना रहा है, जिसमें स्काई मैप सॉफ्टवेयर, सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन और निजी कंपनियों की भागीदारी शामिल है। ये तरीके यूक्रेन की वायु रक्षा को बेहतर बना रहे हैं।

AI-generated summary

Why It Matters

यूक्रेन रूसी हवाई हमलों का सामना कर रहा है, जिसमें हाल ही में कीव में 24 नागरिकों की मौत हुई। यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों ने पहले की तुलना में अधिक रूसी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया है।

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यूक्रेन ने रूसी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए निकाला ये हाई-टेक तरीका

Author, जोनाथन बील

पदनाम, रक्षा संवाददाता

प्रकाशित 7 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

इस हफ़्ते, जब दूर कहीं हवाई हमलों की चेतावनी वाले साइरन बज रहे थे, तब कीव में दो बहनों का अंतिम संस्कार किया गया.

12 साल की ल्यूबावा और उसकी 17 साल की बहन वीरा उन 24 आम नागरिकों में शामिल थीं, जो इस महीने की शुरुआत में एक रूसी मिसाइल हमले में मारे गए थे. इस हमले ने उनके रिहायशी अपार्टमेंट ब्लॉक को मलबे में बदल दिया था.

वे पहले ही मोर्चे पर लड़ रहे अपने पिता को खो चुकी थीं. उनकी शोकाकुल मां अब परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य हैं.

यह अब तक के सबसे बड़े लगातार रूसी हवाई हमले की इंसानी जानों से चुकाई गई कीमत है. इस हमले में 48 घंटों के भीतर यूक्रेन पर 1,500 ड्रोन और 56 मिसाइलें दागी गई थीं.

लेकिन जान-माल की हानि इससे भी ज़्यादा हो सकती थी. यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों ने और ज़्यादा नुक़सान होने से रोक दिया.

राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के अनुसार, लंबी दूरी के ड्रोन्स में से 94% और मिसाइलों में से 73% को सफलतापूर्वक रोक लिया गया. इसकी तुलना में 14 मई 2025 को, कीएव की सेनाओं ने देश भर में छोड़े गए रूसी ड्रोन में से 55% को ही गिराया था. यूक्रेन अपने आसमान की रक्षा में बेहतर होता जा रहा है.

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय में इंस्पेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट कर्नल यूरी मायरोनेंको कहते हैं, "दुर्भाग्य से अब हम दुनिया में सबसे बेहतर हैं".

हालांकि वह मानते हैं कि रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों को गिराना 'इतना आसान नहीं है'.

'बहुत घातक हथियार'

युद्ध की शुरुआत में यूक्रेन पुराने सोवियत दौर के हथियारों पर निर्भर था. इसके बाद पश्चिमी देशों ने महंगे और ज़्यादा उन्नत हथियारों के साथ उसकी रक्षा को मज़बूत करने में मदद की. इनमें पैट्रियट एयर डिफ़ेंस मिसाइलें भी शामिल हैं.

लेकिन यूक्रेन ने अपने खुद के स्वदेशी समाधान भी विकसित किए हैं. ट्रकों पर भारी मशीनगनों के साथ काम करने वाली मोबाइल फ़ायर टीमों से लेकर सस्ते, बड़े पैमाने पर बनाए गए इंटरसेप्टर तक.

इनोवेशन और तकनीक को अपनाना यूक्रेन को बढ़त दे रहा है. यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली के केंद्र में वह सॉफ्टवेयर है, जो रूस की तरफ से छोड़े गए हर ग्लाइड बम, मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक करता है.

स्काई मैप नाम का यह सिस्टम रडार, हज़ारों सेंसर्स, वीडियो फीड और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके ख़तरों का पता लगाता है और अपनी वायु रक्षा प्रणालियों का मार्गदर्शन करता है.

शुरुआत में यूक्रेन ने टेलीग्राफ़ के खंभों पर लगाए गए मोबाइल फ़ोनों के एक नेटवर्क पर भरोसा किया, जो पास आते ड्रोन की आवाज़ सुनने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे. अब यह सिस्टम ज़्यादा आधुनिक सेंसरों का उपयोग करता है.

अमेरिका भी मिडिल ईस्ट में अपने एक सैन्य अड्डे की सुरक्षा के लिए स्काई मैप का इस्तेमाल कर रहा है.

और एक ऐसा हथियार, जो किसी भी दूसरी चीज़ से ज़्यादा रूसी ड्रोन को गिराने में मदद कर रहा है, वह है सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन्स.

इनका आकार एक बड़ी गोली जैसा होता है और इनके निचले हिस्से में चार रोटर्स लगे होते हैं, जो इन्हें आगे बढ़ाते हैं. यूक्रेन अब ऐसे 1,000 से ज़्यादा ड्रोन हर दिन बना रहा है. यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, इस साल मार्च में इन्होंने 30,000 से ज़्यादा रूसी ड्रोन नष्ट किए.

खेरसॉन शहर के बाहर एक मैदान में, यूक्रेन की मरीन कॉर्प्स की मानव रहित सिस्टम रेजिमेंट ने इसका प्रदर्शन किया.

स्थिर लॉन्च से उनका P1-SUN इंटरसेप्टर 300 किमी/घंटा से ज़्यादा की गति हासिल कर सकता है और इसकी रेंज 30 किलोमीटर से ज़्यादा है. यह यूनिट अभी-अभी रूसी ड्रोन को मार गिराने के एक मिशन को पूरा करके आई थी.

कमांडर वेलकोस इसे एक 'बहुत घातक हथियार' कहते हैं. वह कहते हैं, "यह दिखाता है कि हम कितनी जल्दी ख़ुद को ढाल सकते हैं, हम कैसे मोर्चे को बनाए रख सकते हैं और कितनी तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं."

P1-SUN 3D प्रिंटिंग से बनाया जाता है और इसकी कीमत लगभग 1,000 डॉलर है. यह उन एकतरफ़ा हमले वाले बड़े 50,000 डॉलर के डेल्टा-विंग्ड शाहेद ड्रोन की तुलना में बहुत कम है, जिन्हें नष्ट करने के लिए इसे डिज़ाइन किया गया है.

निजी कंपनियां भी इस सिस्टम से जुड़ रही हैं.

इस पहल की निगरानी कर रहे मायरोनेंको बताते हैं, "हमें पूरे यूक्रेन को कवर करना है और सभी लक्ष्यों को देखना है. इसलिए हम अपने पास मौजूद सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं."

पच्चीस कंपनियां पहले ही इस योजना में शामिल हो चुकी हैं. इसके पीछे की प्रेरणा साफ़ है. अपनी फैक्ट्रियों और बुनियादी ढांचे की रक्षा करना. सर्दियों के दौरान यूक्रेन के ऊर्जा तंत्र पर हुए रूसी हमलों की वजह से लाखों लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा था.

'कंप्यूटर गेम जैसा'

कारमाइन स्काई उन निजी कंपनियों में से एक है, जो अब अन्य निजी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए वायु रक्षा सेवाएं प्रदान कर रही हैं. उन्होंने पहले ही रूस की सीमा के पास, खारकीव क्षेत्र में, रिमोट से नियंत्रित मशीन गनों से लैस टावरों का एक नेटवर्क तैयार कर लिया है.

हमने एक इमारत के बेसमेंट में उनके कंट्रोल रूम का दौरा किया. स्क्रीन की कई कतारों पर यूक्रेन का स्काई मैप दिखाई देता है, जो रूसी ड्रोन और जेट विमानों को ट्रैक करता है.

इन स्क्रीन के पीछे आम नागरिक बैठे हैं- माएं, टैक्सी ड्राइवर और पूर्व सैनिक. हर व्यक्ति को जांच-परख के बाद कुछ हफ्तों का प्रशिक्षण दिया जाता है, फिर उन्हें इन रिमोट से नियंत्रित बंदूकों को चलाने की अनुमति मिलती है.

कंपनी के प्रवक्ता रुसलान बताते हैं कि उनका काम 'मुश्किल नहीं है'. वह कहते हैं कि ड्रोन को मार गिराने के लिए रिमोट मशीन गनों को चलाना 'एक कंप्यूटर गेम जैसा है- बिलकुल Xbox या PlayStation की तरह'.

रुसलान अपने काम को 'देश की वायु रक्षा प्रणाली का पूरक' बताते हैं.

वह कहते हैं, "हम सैन्य प्रणाली में एकीकृत हैं. यह कोई अनियंत्रित स्थिति नहीं है, इसलिए हम सेना के निर्देशों और आदेशों का पालन करते हैं."

रुसलान का कहना है कि निजी क्षेत्र को शामिल करने के और भी फायदे हैं, "हम सरकारी क्षेत्र की तुलना में बहुत तेज़ी से विस्तार कर सकते हैं."

अभी यह शुरुआती दौर है, लेकिन ये निजी कंपनियां पहले ही दर्जनों रूसी ड्रोन मार गिरा चुकी हैं.

'यूक्रेनी हमलों का डर'

यूक्रेन ने रूस पर अपने हमले भी तेज़ कर दिए हैं. हाल के हमलों से पूरे रूस में तेल रिफाइनरियों में भीषण आग लग गई है और ये हमले सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को जैसे बड़े शहरों तक पहुंच गए हैं. यूक्रेनी हमले के डर से क्रेमलिन ने मई में आयोजित होने वाली द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस परेड का आकार कम कर दिया.

इसके परिणामस्वरूप अब दोनों पक्ष इस जंग में बढ़त हासिल करने के लिए जितनी जल्दी हो सके, उतनी तेज़ी से नए-नए तरीके विकसित करने की दौड़ में लगे हैं. रूस ने तेज़ जेट-संचालित ड्रोन विकसित करना शुरू कर दिया है. अब वह यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों के स्थानों का पता लगाने के लिए धोखा देने वाले (डिकॉय) ड्रोन्स भी उड़ा रहा है.

यूक्रेन की वायु रक्षा में अभी भी स्पष्ट कमियां बनी हुई हैं.

एक तरफ, अत्यधिक उन्नत और महंगे मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी है. यूक्रेन को अब भी अमेरिकी पैट्रियट मिसाइलों की ज़रूरत है. फिलहाल, रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को गिराने के लिए वे ही एकमात्र प्रभावी हथियार हैं. ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध की वजह से इनकी आपूर्ति कम हो गई है.

मोर्चे के नज़दीक, रूस की तरह यूक्रेन भी छोटे लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे फर्स्ट-पर्सन-व्यू (FPV) ड्रोन्स के ख़तरे से निपटने में संघर्ष कर रहा है. ऑपरेटर दूर से इनका अपने लक्ष्य तक मार्गदर्शन करते हैं. ये अब भी ज़्यादातर लोगों के मारे जाने की वजह बन रहे हैं.

अतिरिक्त रिपोर्टिं- फ़र्ल डेविस, अनास्तासिया लेवचेंको और मरियाना मतवेइचुक

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • Ukraine will continue to develop and deploy indigenous drone interception technologies.

    Very likely · Within months

  • Russia will increase its use of decoy drones to locate Ukrainian air defense systems.

    Likely · Within weeks

  • There will be increased demand for advanced air defense systems like Patriot missiles globally.

    Possible · Long term

Open Questions

  • What is the long-term impact of the supply chain issues for Patriot missiles?
  • How will Russia adapt its drone and missile tactics in response to Ukraine's improved air defense?
  • What is the full extent of private sector involvement in Ukraine's defense industry?
  • Will Ukraine's success in developing indigenous defense technologies be sustainable?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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