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यूक्रेन में स्वास्थ्य सेवाओं और एंबुलेंस पर रूसी हमलों का बढ़ना
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BBC हिंदी5 hours agoDefense4 min readIndia

यूक्रेन में स्वास्थ्य सेवाओं और एंबुलेंस पर रूसी हमलों का बढ़ना

यूक्रेन में अस्पताल और एंबुलेंस लगातार रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों का निशाना बन रहे हैं, जिसे पैरामेडिक्स ने 'सफारी हंटिंग' कहा है।

Quick Look

यूक्रेन में रूस द्वारा अस्पतालों, एंबुलेंसों और चिकित्सा कर्मियों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा रहे हैं, जिन्हें 'सफारी हंटिंग' कहा गया है। डब्ल्यूएचओ और एमएसएफ जैसी संस्थाओं ने इन सुनियोजित हमलों पर गंभीर चिंता जताई है।

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Why It Matters

डब्ल्यूएचओ ने फरवरी 2022 में रूस के आक्रमण की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं पर 3,118 हमले दर्ज किए हैं।

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इन्ना लित्विनेंको जब भी किसी इमरजेंसी कॉल पर जाती हैं, तो हमेशा चमकीले नारंगी रंग का बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहनती हैं.

पिछले साल जुलाई में खेरसोन में एक रूसी ड्रोन हमले में घायल हुई महिला का इलाज करने के लिए इस पैरामेडिक को भेजा गया था, तभी एक एफ़पीवी ड्रोन उनकी एंबुलेंस से टकरा गया.

कुछ सेकंड बाद उन्होंने आसमान में भनभनाहट की आवाज सुनी. एक और ड्रोन बहुत तेजी से सीधे उनकी ओर आ रहा था.

वह याद करते हुए कहती हैं, "मैं घबरा गई. मैंने अपना मेडिकल बैग उठाया और भागने लगी. मैं चिल्ला रही थी. मुझे पता था कि अगर मैं रुक गई, तो मारी जाऊंगी."

करीब 10 मिनट तक उनका पीछा करने के बाद ड्रोन वहां से चला गया. इसके तुरंत बाद पुलिस ने लित्विनेंको को वहां से निकाला.

लेकिन जिस घटना को उन्होंने "सफारी हंटिंग" कहा, वह ख़त्म नहीं हुई.

घायल महिला को अस्पताल ले जाने पहुंची दो और गाड़ियों पर भी ड्रोन ने हमला किया. कई घंटे बाद पुलिस की तीसरी गाड़ी उन्हें वहां से सुरक्षित निकालने में सफल हुई.

इस सप्ताह की शुरुआत में एक और "सफ़ारी हंटिंग" के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने मांग की है कि नागरिकों पर जानबूझकर किए जा रहे "शिकारियों जैसे हमलों" को रोकने के लिए रूस पर और अधिक दबाव डाला जाए.

यूक्रेन में अस्पताल और एंबुलेंस लगातार रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों का निशाना बन रहे हैं, जबकि जिनेवा कन्वेंशन के अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों के अनुसार, संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को इनकी सुरक्षा करनी चाहिए.

यूक्रेन में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि डॉ. यार्नो हाबिख़्त कहते हैं, "यह एक नई आम बात बन गई है, जबकि इसे सामान्य नहीं होना चाहिए."

डब्ल्यूएचओ ने फ़रवरी 2022 में रूस के आक्रमण की शुरुआत के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं पर 3,118 हमले दर्ज किए हैं. हाबिख्त कहते हैं, "यानी हर दिन औसतन दो मामले."

2023 के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2024 में इसमें 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

पिछले साल इसमें और 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस साल भी यह सिलसिला जारी रहने की आशंका है.

हाल ही में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ़) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि रूस व्यवस्थित तरीके से और कई बार जानबूझकर यूक्रेन की चिकित्सा सुविधाओं को निशाना बना रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार हो रहे हमले यह दिखाते हैं कि वे युद्ध का स्थायी हिस्सा बन चुके हैं, न कि केवल बड़े सैन्य अभियानों का कभी-कभार होने वाला परिणाम.

पिछले महीने रूसी मिसाइलों ने खेरसोन के एक अस्पताल को निशाना बनाया. इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और एक डॉक्टर की मौत हो गई.

अस्पताल की निदेशक ओलेना तिमोशेंको का मानना है कि यह हमला जानबूझकर किया गया था.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं थी. कुछ ही मिनटों के अंतराल में तीन मिसाइलें अस्पताल पर गिरीं. यह दुर्घटना नहीं हो सकती."

मॉस्को अक्सर 'डबल टैप' रणनीति भी अपनाता है, जिसमें एक ही जगह पर थोड़े समय के अंतराल में दो बार हमला किया जाता है.

कई लोगों का मानना है कि दूसरा हमला जानबूझकर उन बचावकर्मियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है जो पहले हमले के बाद लोगों को बचाने पहुंचते हैं.

हाल ही में कीएव पर हुए बड़े रूसी हवाई हमले में उसी स्थान पर दूसरी बार हमला होने से सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक पुलिस अधिकारी और एक वालंटियर शामिल थे.

हाल के दिनों में रूसी सेना मानवीय सहायता संगठनों के गोदामों को भी निशाना बना रही है.

केवल पिछले महीने डब्ल्यूएचओ सहित संयुक्त राष्ट्र की तीन एजेंसियों के गोदाम हवाई हमलों में क्षतिग्रस्त हो गए.

हाबिख्त के अनुसार, संगठन अपनी सुविधाओं के स्थान की जानकारी मॉस्को और कीएव दोनों को देता है, ताकि उन पर हमला न हो.

हालांकि मिसाइल और ड्रोन हमले कई बार बिना भेदभाव के हो सकते हैं, लेकिन फर्स्ट पर्सन व्यू यानी एफपीवी ड्रोन हमले लगभग हमेशा जानबूझकर किए जाते हैं.

यूक्रेन में एमएसएफ़ के समन्वयक रॉबिन मेल्ड्रम कहते हैं, "ड्रोन संचालक कैमरे से लक्ष्य को सीधा देख सकता है. इसलिए जब कोई ड्रोन एंबुलेंस पर हमला करता है, तो वह जानबूझकर किया गया हमला होता है."

डॉ. इन्ना लित्विनेंको कहती हैं कि उन्होंने मेडिकल कर्मी की पहचान वाली वर्दी पहन रखी थी.

एंबुलेंस पर भी साफ़ निशान बने हुए थे. इसलिए उनका मानना है कि ड्रोन ऑपरेटर ने जानबूझकर उन्हें निशाना बनाया.

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एंबुलेंस पर हमले यूक्रेन की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हुए कुल हमलों का लगभग 20 प्रतिशत हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

लगातार हो रहे इन हमलों का असर यह हुआ है कि मोर्चे के पास रहने वाली आम आबादी धीरे-धीरे स्वास्थ्य सेवाओं से कटती जा रही है.

इन इलाकों में बचे ज़्यादातर लोग बुजुर्ग हैं और उनमें से कई पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं. अगर वे हवाई हमलों और गोलाबारी से बच भी जाएं, तो दवाइयों और नियमित जांच के बिना उनकी मौत धीरे-धीरे हो सकती है.

और अगर ख़तरा बहुत अधिक हो, तो एंबुलेंस उनके पास पहुंच भी नहीं पाएंगी.

लित्विनेंको और उनके साथी ख़तरों की जानकारी के लिए लगातार सोशल मीडिया पर नज़र रखते हैं.

वह कहती हैं, "यह बहुत डरावना है. हर बार जब हम किसी मरीज को अस्पताल ले जाते हैं, तो बस दुआ करते हैं. ये ड्रोन कहीं से भी आ सकते हैं. वे एंटी-ड्रोन जाल को भी पार कर सकते हैं."

कुछ मामलों में एंबुलेंस की जगह पुलिस को भेजा जाता है.

जैसे-जैसे एफ़पीवी ड्रोन के संचालन वाला ख़तरनाक क्षेत्र बढ़ रहा है और यूक्रेन और रूस दोनों अधिक दूरी तक मार करने वाले ड्रोन विकसित कर रहे हैं.

मेल्ड्रम कहते हैं, "दो साल पहले हम मोर्चे से 5 से 8 किलोमीटर तक जा सकते थे. अब हम 30 किलोमीटर के भीतर कहीं नहीं जाते और यह दूरी लगातार बढ़ रही है."

मेल्ड्रम के अनुसार, पिछले 18 महीनों में एमएसएफ़ ने मोर्चे के पास स्थित लगभग 80 गांवों में अपनी नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी हैं. हाल ही में संगठन ने पूर्वी यूक्रेन के प्रमुख शहर स्लोवियांस्क में एंबुलेंस सेवाएं भी रोक दी हैं.

Open Questions

  • इन हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्या कदम उठाएगा?
  • क्या स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा के नए उपाय लागू किए जाएंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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