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मुंबई में मुहर्रम जुलूस में ज़हरीले कैप्सूल बांटने वाला गिरफ़्तार
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BBC हिंदी6/30/2026Crime5 min readIndia

मुंबई में मुहर्रम जुलूस में ज़हरीले कैप्सूल बांटने वाला गिरफ़्तार

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मुंबई के भायखला में मुहर्रम जुलूस के दौरान चूहे मारने के ज़हर से भरे कैप्सूल बांटने के आरोप में पुणे के फ़ैयाज़ प्रेमजी को गिरफ़्तार किया गया है। इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद नामक दो महिलाओं की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया, जिन्होंने संदिग्ध को पकड़ा और पुलिस को सूचित किया। चार लोग कैप्सूल खाने से बीमार हुए, लेकिन अब स्थिर हैं।

AI-generated summary

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बीते 26 जून को मुंबई के भायखला इलाक़े में मुहर्रम के जुलूस के दौरान चूहे मारने के ज़हर से भरे कैप्सूल बांटने वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ़्तार किया।

हज़ारों लोगों की मौजूदगी वाले इस जुलूस में दो महिलाओं, इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।

इस मामले में पुलिस ने पुणे के फ़ैयाज़ प्रेमजी को गिरफ़्तार किया है। उसके पास से 14,900 कैप्सूल बरामद किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक़, इनमें ज़िंक फ़ॉस्फ़ाइड नाम का एक ज़हरीला रसायन मिला था। इन कैप्सूलों को जांच के लिए लैब भेजा गया है और मामले की आगे जांच जारी है।

इस जुलूस में वॉलंटियर के तौर पर काम कर रहीं इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद को कैप्सूल बांटते देख शक़ हुआ। इसके बाद उन्होंने अभियुक्त को पकड़ लिया और पुलिस को जानकारी दी।

बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। इसी वजह से यह पूरा मामला सामने आया।

इहलाम और रुख़सार को शक़ कैसे हुआ?

26 जून की शाम अंजीरवाड़ी इलाक़े से रहमत बाग क़ब्रिस्तान की ओर मुहर्रम का जुलूस जा रहा था। इस जुलूस में क़रीब 30 हज़ार लोग शामिल थे।

जुलूस के दौरान अलग-अलग धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं। इसी दौरान यह घटना हुई। दोनों महिलाओं ने मौक़े पर ही इसके ख़तरे को भांप लिया।

ये दोनों महिलाएं शिक्षित हैं और कई सालों से समाजसेवा में सक्रिय हैं।

इहलाम हमीदी कॉफ़ी का कारोबार करती हैं। वह अपने परिवार के साथ मुंबई के भायखला इलाक़े में रहती हैं। कई वर्षों से वह मुहर्रम के जुलूस का हिस्सा बनती रही हैं।

वहीं, रुख़सार सैयद मुंबई के उपनगर में रहती हैं। वह कॉस्मेटिक उत्पादों की बिक्री का काम करती हैं। दोनों आपस में अच्छी दोस्त भी हैं।

26 जून को जुलूस के दौरान दोनों को एक मस्जिद के पास लोगों की मदद के लिए तैनात किया गया था। उसी जगह यह घटना हुई। इस पर दोनों को शक़ हुआ और इसके बाद यह मामला सामने आया।

कैप्सूल के पैकेट को देखकर हुआ शक़

रुख़सार सैयद ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए बताया, "मैं और इहलाम माझगांव मस्जिद के बाहर तैनात थे। वहां जुलूस में शामिल कुछ लोग थककर आराम कर रहे थे। उसी समय एक व्यक्ति बड़ी संख्या में कैप्सूल बांट रहा था।

वह कह रहा था कि ये हर तरह की परेशानी का इलाज है।"

वह आगे बोलीं, "'नियाज़-ए-हुसैन' मानकर लोग उसे ले रहे थे। रात का समय होने के कारण पैकेट पर क्या लिखा था, यह साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था।"

वे आगे बताती हैं, "इहलाम ने एक कैप्सूल का पैकेट हाथ में लिया। उस पर कुछ भी साफ़ नहीं लिखा था। इससे हमें शक़ हुआ। हमने एक कैप्सूल खोलकर देखा तो उसमें काले रंग का पाउडर था।

हमने उस पर दी गई जानकारी को गूगल पर खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। तब हमें लगा कि यह कुछ ख़तरनाक़ हो सकता है।"

रुख़सार आगे कहती हैं, "वह व्यक्ति हमारे सामने ही था। वह वहां से जाने लगा था। हमने उसे रोक लिया। उसके हाथ में नीले रंग का बड़ा बैग था। उसमें बहुत सारे कैप्सूल थे।

हमने उससे सवाल किया तो वह घबरा गया। उसके साथ दो और लोग भी थे। उनके थैलों में भी कैप्सूल थे। मैंने उसकी कॉलर पकड़ ली। फिर तुरंत पुलिस को जानकारी दी।

हमने जुलूस में घोषणा करवाने के लिए कहा कि लोग इन कैप्सूल का इस्तेमाल न करें। इसके बाद हमने स्वयंसेवकों की मदद से लोगों से कैप्सूल इकट्ठे किए और पुलिस के हवाले कर दिए।"

'उसके कैप्सूल फेंकने के तरीक़े पर शक़ हुआ'

इहलाम हमीदी ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए बताया, "वह व्यक्ति कैप्सूल फेंककर बांट रहा था। इस तरह तबर्रुक (प्रसाद) नहीं बांटा जाता। इसलिए मुझे शक़ हुआ।"

उन्होंने आगे कहा, "उसकी फेंकी हुई एक कैप्सूल मेरे पैर के पास गिर गई। मैंने उसे खोलकर देखा। पहले लगा कि यह कोई देसी दवा होगी। लेकिन उसकी गंध बहुत तेज़ और अजीब थी।"

वह आगे कहती हैं, "पैकेट पर कुछ जानकारी लिखी थी। लेकिन हमारे मन में सवाल उठा कि सिर्फ़ तीन कैप्सूल से इतने सारे रोग, जैसे कि वो दावा कर रहा था, कैसे ठीक हो सकते हैं। रुख़सार को भी शक़ हुआ।"

वह कहती हैं, "जब वह व्यक्ति हमें सामने दिखा तो हमने उसे रोक लिया और पकड़ लिया। वह बोला, 'मैंने क्या किया?' हमने कहा, 'यह पुलिस बताएगी।'"

"मैंने उसके हाथ से बैग छीन लिया।"

"हमने लोगों से कहा कि कोई भी ये कैप्सूल न ले। साथ ही, इन्हें स्वयंसेवकों या पुलिस के पास जमा कर दें। यह पूरा घटनाक्रम क़रीब 20 मिनट तक चला।"

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

इस घटना में गिरफ़्तार किया गया अभियुक्त 39 साल का फ़ैयाज़ निसार प्रेमजी है। वह पुणे के विमान नगर का रहने वाला है। उसके ख़िलाफ़ बीएनएस की धारा 109, 110 और 123 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई ज़ोन-1 के डीसीपी जयंत मीणा के अनुसार, "27 जून को जुलूस के दौरान भायखला पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया।

वह व्यक्ति इन कैप्सूलों को दर्द निवारक दवा बता रहा था। लेकिन एक व्यक्ति ने जब इसका सेवन किया तो उसे उल्टी और बेचैनी जैसी दिक्कतें होने लगीं। यह व्यक्ति अब ख़तरे से बाहर है।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन कैप्सूलों के वितरण को रोक दिया था।

पीड़ित की शिकायत के आधार पर भायखला पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 123 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।"

पुलिस के मुताबिक़, "इस जुलूस को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचाने की साज़िश थी। अभियुक्त ने पूछताछ में बताया कि उसने 50 किलो ज़िंक फ़ॉस्फ़ाइड खरीदा था। साथ ही, 30 हज़ार ख़ाली कैप्सूल भी लिए थे।

मुंबई में रहते हुए उसने पिछले 15 दिनों में इन कैप्सूलों को भरा था। उसकी योजना इन्हें दर्द की दवा बताकर लोगों में बांटने की थी।"

कैप्सूल खाने से चार लोग बीमार हुए

पुलिस के अनुसार, इन कैप्सूल का सेवन करने वाले अब तक चार लोगों के मामले सामने आए हैं। इन सभी का इलाज अस्पताल में चल रहा है। फ़िलहाल उनकी हालत स्थिर है।

शिवाजीनगर के रहने वाले सलमान सैयद की तबीयत कैप्सूल लेने के बाद बिगड़ गई थी।

उन्होंने बताया, "जुलूस के दौरान मुझे कमज़ोरी लग रही थी। इसलिए मैंने वहां बांटे जा रहे कैप्सूलों में से एक ले लिया। कुछ देर बाद मुझे उल्टी होने लगी और बेचैनी महसूस हुई। इसके बाद आसपास के लोगों ने मुझे हबीब अस्पताल में भर्ती कराया।"

इसी तरह सैयद अब्बास को भी कैप्सूल लेने के बाद परेशानी हुई।

उन्होंने बताया, "जुलूस के दौरान एक व्यक्ति ने मुझे यह कैप्सूल विटामिन-सी की गोली बताकर दिया। वह कह रहा था कि यह विटामिन-सी की गोली है।

इसे छोटे बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक सभी ले सकते हैं। उसने कहा कि इससे कोई नुक़सान नहीं होगा। लेकिन कुछ ही देर बाद मेरी तबीयत बिगड़ गई।

मैं पास में खड़ी अपनी गाड़ी में जाकर बैठ गया। इसके बाद मेरे परिवार वालों ने मुझे अस्पताल में भर्ती कराया। इस मामले में पुलिस ने मेरा बयान दर्ज किया है।"

पुलिस ने दोनों महिलाओं को लेकर क्या कहा

जुलूस के दौरान हुई इस घटना को लेकर पुलिस ने दोनों स्वयंसेवी महिलाओं की सराहना की है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "सतर्क महिला नागरिकों ने तुरंत जानकारी दी। इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया। अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।"

पुलिस इस मामले की आगे जांच कर रही है। गिरफ़्तार अभियुक्त फ़ैयाज़ प्रेमजी को 28 जून को अदालत में पेश किया गया।

अदालत ने उसे दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अभियुक्त ने यह काम अकेले किया या उसके साथ और लोग भी शामिल थे।

किसी भी मक़सद पर अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच कई दिशाओं में चल रही है।

इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद की सतर्कता से यह मामला समय रहते सामने आया।

अब आगे की जांच से ही साफ़ होगा कि इसके पीछे अभियुक्त का असली मक़सद क्या था और क्या इसमें और लोग भी शामिल थे।

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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