
24 अगस्त को गुरुग्राम में हुई भारी बारिश के कारण शहर की सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात ठप हो गया और स्कूली बच्चे घंटों बसों में फंसे रहे।
24 अगस्त 2026 को गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण व्यापक जलभराव हुआ। स्कूली बसें घंटों जाम में फंसी रहीं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। प्रशासन ने 25 अगस्त के लिए वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन कक्षाओं की सलाह दी है।
AI-generated summary
गुरुग्राम में हर मानसून के दौरान जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिसे विशेषज्ञ तेज़ शहरीकरण और खराब ड्रेनेज सिस्टम का परिणाम मानते हैं।
पानी से भरी हुई सड़कें.
घंटों तक जाम में फंसी स्कूली बसें और परेशान होते, रोते बच्चे.
गुरुग्राम से 24 अगस्त को परेशान करने वाली तस्वीरें आईं.
शहर में बारिश शुरू होने के कुछ ही देर बाद कई सड़कें पानी में डूब गईं. ट्रैफिक की रफ़्तार थम गई और कई जगह गाड़ियां पानी के बीच फंस गईं.
लेकिन इस बार सबसे परेशान करने वाली तस्वीरें स्कूल बसों की थीं.
कई स्कूल बसें घंटों पानी और जाम के बीच फंसी रहीं. बसों में बैठे बच्चे घर पहुंचने का इंतज़ार करते रहे. उनके माता-पिता स्कूलों और बस ड्राइवरों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे.
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, कई बच्चे तीन से छह घंटे तक बसों में फंसे रहे.
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, सुभाष चौक, राजीव चौक, आईएफ़एफ़सीओ चौक, नरसिंहपुर और पुराने गुरुग्राम के कई हिस्सों में पानी भरने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने गुरुग्राम को फिर से 'साइबर सिटी' से 'स्ट्रेट ऑफ़ गुरुग्राम' तक कहकर तंज़ कसा.
कुछ पोस्ट में शहर के आधुनिक दफ़्तरों और महंगे रिहायशी इलाक़ों के बावजूद हर मानसून में होने वाले जलभराव पर सवाल उठाए गए.
24 अगस्त को कितनी बारिश हुई?
गुरुग्राम ज़िला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक़, 24 अगस्त को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच गुरुग्राम तहसील में 75 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. बादशाहपुर में 65 मि.मी., वज़ीराबाद में 64 मि.मी., कादीपुर और हर्सरू में 40-40 मि.मी. और मानेसर में 36 मि.मी. बारिश दर्ज हुई.
दोपहर 1.30 बजे तक गुरुग्राम में करीब 70 मि.मी. बारिश दर्ज हो चुकी थी.
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था. बारिश के बाद गुरुग्राम प्रशासन ने 25 अगस्त को कॉरपोरेट दफ़्तरों में वर्क फ्रॉम होम और स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं की सलाह दी.
गुरुग्राम में सालाना औसत बारिश क़रीब 500-600 मिलीमीटर के आसपास बताई जाती है. हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ज़िला पर्यावरण प्लान में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर औसत सालाना बारिश 505.4 मि.मी. बताई गई है.
लोग क्या बोले?
लेखक और कमेंटेटर सुहैल सेठ गुरुग्राम में रहते हैं.
उन्होंने एक्स पर तंज़ करते हुए लिखा, "गुरुग्राम के अधिकारियों को निशाना बनाना बेहद नाइंसाफ़ी है. भला किसे उम्मीद थी कि मानसून के दौरान बारिश होगी? मानसून के मौसम में बारिश तो कभी होती ही नहीं. यह तो हाल के दिनों में ही शुरू हुई है. पिछले 4,000 सालों से."
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, "शहरी बुनियादी ढांचे की तस्वीर: गुरुग्राम में कथित तौर पर प्रति वर्ग किलोमीटर सबसे ज़्यादा नेटवर्थ वाले लोग रहते हैं, मुंबई के मालाबार हिल्स के अलावा. लेकिन शहर में बारिश के पानी के ड्रेनेज के कोई पुख़्ता इंतज़ाम नहीं हैं. बारिश का एक और दिन और वही पुरानी कहानी- जगह-जगह जलभराव. लोग सोशल मीडिया पर नाराज़गी ज़ाहिर करेंगे, लेकिन ज़मीन पर बहुत कुछ बदलता हुआ नहीं दिखता."
एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा, "गुरुग्राम रातों-रात वेनिस बन गया. अब यहां नाव की सवारी का एक शानदार अनुभव भी होना चाहिए! हर साल वही लापरवाही और उदासीनता!"
साइबर सिटी लेकिन बेहाल क्यों?
गुरुग्राम की पहचान देश के बड़े कॉरपोरेट और आईटी केंद्र के रूप में है. यहां ऊंची इमारतें, बड़े मॉल, महंगे रिहायशी प्रोजेक्ट और आधुनिक दफ़्तर शहर की तस्वीर बनाते हैं.
लेकिन शहर का इन्फ़्रास्ट्रक्चर उस रफ़्तार से नहीं बदला जिस रफ़्तार से उसका विस्तार हुआ.
एक तरफ़ ऐसे रिहायशी इलाक़े हैं जहां घरों की कीमत करोड़ों रुपये है. दूसरी तरफ़ उन्हीं इलाक़ों के बाहर कुछ घंटों की बारिश के बाद सड़कें पानी से डूब जाती हैं. ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जहां बेहद महंगे अपार्टमेंट के बाहर की सड़कें पानी से भरी हैं.
भारी बारिश के दौरान गोल्फ कोर्स रोड, डीएलएफ़ और दूसरे पॉश इलाकों में जलभराव की तस्वीरें सामने आई हैं.
तेज़ शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी और जल निकायों में बदलाव, ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण समस्या और जटिल बन रही है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट में अर्बन प्लानर और काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य पुनीत सेठी ने कहा कि गुरुग्राम में समस्या दो स्तरों पर है- मैक्रो लेवल और माइक्रो लेवल पर.
उनके मुताबिक़ शहर का ड्रेनेज सिस्टम यहां की मुख्य समस्या है.
वो ये भी कहते हैं कि गुरुग्राम के हर इलाके में उसकी ज़रूरत के हिसाब से उसका अपना ड्रेनेज सिस्टम होना चाहिए जो नहीं है.
गुरुग्राम की अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट साधिका तिवारी ने द क्विंट में लिखे एक लेख में कहा कि गुरुग्राम में ड्रेनेज की समस्या को केवल भारी बारिश से नहीं समझा जा सकता.
उनके मुताबिक गुरुग्राम के विकास और प्लानिंग ने प्राकृतिक ड्रेनेज को प्रभावित किया है. तिवारी के मुताबिक, गुरुग्राम में बेतरतीब शहरी विकास और प्राकृतिक ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव ने शहर की फ़्लडिंग की समस्या को बढ़ाया है.
इसी साल जुलाई में हुई भारी मानसूनी बारिश के कारण गुरुग्राम पानी से भर गया था.
सिर्फ़ 33 घंटे में शहर में 115 मिलीमीटर बारिश हुई और इसका असर तुरंत दिखा.
सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि गुरुग्राम में कितनी बारिश होती है. असली सवाल यह है कि बारिश का पानी जाता कहां है?
इस सवाल पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ास्टर मैनेजमेंट यानी एनआईडीएम ने भी गुरुग्राम को शहरी बाढ़ के केस स्टडी के तौर पर लिया है.
एनआईडीएम ने सितंबर 2021 में "अर्बन फ़्लडिंग इन गुरुग्राम: एक्सपीरिएंस एंड इनीशिएटिव्स" नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था. इसकी आधिकारिक सामग्री में गुरुग्राम में शहरी बाढ़ और उससे निपटने की पहलों पर चर्चा का उल्लेख है.
एनआईडीएम और इंडिया वॉटर पार्टनरशिप ने अक्तूबर 2020 में "अर्बन फ़्लडिंग: चैलेंजेस टू सॉल्यूशंस" नाम से एक और कार्यक्रम किया था.
इसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी इलाकों में बाढ़ के जोखिम और ड्रेनेज प्लानिंग की चुनौतियों को समझने के लिए पटना और गुरुग्राम को केस स्टडीज़ के तौर पर शामिल किया गया था.
रिपोर्ट में वॉटर-सेसेंटिव अर्बन डिज़ाइन और लो-इंपेक्ट डेवलपमेंट जैसे तरीकों को अपनाने की ज़रूरत भी बताई गई है. गुरुग्राम की समस्या में तेज़ शहरीकरण और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में बदलाव अहम हैं.
शहर में बड़ी संख्या में सड़कें, इमारतें और दूसरी कंक्रीट की सतहें बन गई हैं. इससे बारिश का पानी ज़मीन में जाने के बजाय तेज़ी से सतह पर बहता है.
गुरुग्राम की ड्रेनेज प्लानिंग पर गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटिन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी जीएमडीए के दस्तावेज़ों में भी व्यापक ड्रेनेज प्लान और बादशाहपुर ड्रेन जैसे अहम ड्रेनेज चैनल्स का ज़िक्र मिलता है.
सरकार का दावा
सरकार दावा करती रही है कि गुरुग्राम में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार और स्थानीय एजेंसियां कई योजनाओं पर काम कर रही हैं.
केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में लोकसभा में बताया था कि गुरुग्राम में 2019 में क़रीब 90 क्रिटिकल वॉटरलॉगिंग पॉइंट्स की पहचान की गई थी.
साल 2024 तक इनकी संख्या घटकर 30 रह गई.
AI outlook — possibilities, not facts
प्रशासन द्वारा जलभराव वाले क्षेत्रों में ड्रेनेज सुधार के लिए नई योजनाओं की घोषणा।
Likely · Within months
At least 35,000 excess deaths occurred across Europe during four record-breaking summer heatwaves. Germany, France, and Spain account for over 25,000 of these fatalities, with experts noting that the final toll will likely increase as more data becomes available.
Knoxville-based Carbon Rivers is using a heat-based pyrolysis process to recover 99.9% pure glass fibre from retired wind turbine blades. Supported by US Department of Energy funding, the technology aims to turn composite waste into manufacturing feedstock.
Czech authorities are reconsidering plans to flood former lignite mines in the Ústí Region as climate change reduces water availability. New strategies include natural ecological restoration, renewable energy sites, and integrating pits into water management infrastructure.
A PNAS study reveals that Antarctic glaciers, once a long-term storage site for atmospheric mercury, are now releasing the toxic metal into the Southern Ocean due to rapid melting, potentially threatening marine food webs and commercial fisheries.
San Francisco opens RFP for private partners to redevelop the 9.5-acre former Pacific Rod and Gun Club site into a public park and recreation centre, following a multi-year environmental cleanup.
The Hawk Fire in Reno, Nevada, has forced 23,000 to evacuate and destroyed 32 homes. Meanwhile, California lawmakers are debating a new liability proposal for utility-linked wildfires, and scientists warn that climate change may prevent forest regrowth.