Breaking
INTLWildfires in British Columbia, Canada, Declare State of Emergency with 102 Active BlazesAUWestern United A-Leagues participation agreement terminatedTRAvrupa'da doğal gaz fiyatları Hürmüz Boğazı endişeleriyle yükseldiARمقترح بريطاني لتقييد "الشرب العمودي" يثير موجة غضب واسعةUKOctopus Energy urges customers to cut electricity use during solar eclipseITSiccità in Italia: costi stimati fino a 74 miliardi e quasi un milione di posti a rischioDEKritik an Fifa-Präsident Infantino: Uefa, AFC und Concacaf legen nachINMecca pact: Pakistan, Saudi Arabia & Turkey’s defence deal might end up being a big headache for ChinaESEl turismo español alerta sobre los efectos de la disputa con Italia en la temporada altaUSHistorian Jill Lepore Warns of Tech's "Artificial State" Replacing Democratic GovernanceINTLWildfires in British Columbia, Canada, Declare State of Emergency with 102 Active BlazesAUWestern United A-Leagues participation agreement terminatedTRAvrupa'da doğal gaz fiyatları Hürmüz Boğazı endişeleriyle yükseldiARمقترح بريطاني لتقييد "الشرب العمودي" يثير موجة غضب واسعةUKOctopus Energy urges customers to cut electricity use during solar eclipseITSiccità in Italia: costi stimati fino a 74 miliardi e quasi un milione di posti a rischioDEKritik an Fifa-Präsident Infantino: Uefa, AFC und Concacaf legen nachINMecca pact: Pakistan, Saudi Arabia & Turkey’s defence deal might end up being a big headache for ChinaESEl turismo español alerta sobre los efectos de la disputa con Italia en la temporada altaUSHistorian Jill Lepore Warns of Tech's "Artificial State" Replacing Democratic Governance
Newsgather
Backधर्मेंद्र प्रधान ने बताया शिक्षा मंत्री पद से क्यों दिया इस्तीफ़ा, बोले- जेन ज़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया शिक्षा मंत्री पद से क्यों दिया इस्तीफ़ा, बोले- जेन ज़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई
Developing
BBC हिंदी6 hours agoPolitics5 min readIndia

धर्मेंद्र प्रधान ने बताया शिक्षा मंत्री पद से क्यों दिया इस्तीफ़ा, बोले- जेन ज़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई

Quick Look

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़े के दो हफ़्ते बाद कहा कि नीट पेपर लीक के दौरान जेन ज़ी को गुमराह किया गया था। विपक्ष ने उनके इस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

AI-generated summary

Why It Matters

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को नीट पेपर लीक और जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शनों के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

Font size

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा देने के दो हफ़्ते बाद पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'कुछ लोगों ने जेन ज़ी को गुमराह करने की कोशिश' की.

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था. इससे पहले जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में कई हफ़्तों तक स्टूडेंट्स और युवाओं ने प्रदर्शन किए थे.

अपने गृह राज्य ओडिशा के संबलपुर की जीएम यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "जेन ज़ी हमारे बच्चे हैं. कुछ लोगों ने उन्हें 'भ्रमित' करने की कोशिश की."

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "उस समय मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं था. भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं. पिछले 10 सालों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं. उनके सपने हैं और वही भारत को विश्व गुरु बनाएंगे. मेरे लिए मंत्री पद महत्वपूर्ण नहीं था."

धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि उन्होंने ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी.

हालांकि विपक्षी नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा और कहा है कि जेन ज़ी प्रदर्शन के दबाव के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की एक स्टोरी के मुताबिक़, "धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की घोषणा से 48 घंटे पहले तक सरकार के स्तर पर ऐसा कोई फैसला नहीं माना जा रहा था. लेकिन लगातार बढ़ते प्रदर्शन, संसद में हंगामा और सरकार की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों का बढ़ता गुस्सा इस फैसले की वजह बना."

हालांकि जिस समय जेन ज़ी आंदोलन चल रहा था, उस समय मीडिया में अटकलें लगाई जा रही थीं कि मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान धर्मेंद्र प्रधान का विभाग बदल दिया जाएगा लेकिन प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफ़े की मांग पर अड़े रहे.

बाद में एक अन्य कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "जेन ज़ी हमारा अपना है. कुछ लोगों ने उन्हें धोखा देने की कोशिश की. मंत्री पद मेरे लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं था. नई पीढ़ी के संकल्प के सामने मेरी ज़िम्मेदारी बहुत छोटी है."

"मैंने प्रधानमंत्री को नई पीढ़ी के संकल्प की सच्चाई समझाने की कोशिश की. देशहित से बड़ा कुछ नहीं है और हम युवाओं की आकांक्षाएं पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

धर्मेंद्र प्रधान के ताज़ा बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और भ्रमित करने वाली टिप्पणी पर आपत्ति जताई है.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "छात्रों को साफ़ पता था कि यह धर्मेंद्र प्रधान की ग़लती थी, क्योंकि वही उस मंत्रालय को संभाल रहे थे."

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "मुझे लगा था कि इस्तीफ़े के बाद अकल ठिकाने आ गई होगी, लेकिन वो अब भी दूसरी दुनिया में हैं. आपके कार्यकाल में शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ, पैसे लेकर 152 पेपर लीक हुए. आपके ही कार्यकाल में जो एक स्वतंत्र शिक्षा व्यवस्था थी, वहां आपने आरएसएसकरण किया. आपको बहुत पहले इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था और अभी भी आपको सीबीआई जांच के दायरे में आना चाहिए."

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, "अगर धर्मेंद्र प्रधान समझते हैं कि जो आंदोलन था उसे गुमराह किया गया था, बच्चों को ग़लतफ़हमी का शिकार बनाया गया था, तो फिर उन्होंने इस्तीफ़ा क्यों दिया? फिर तो वो मानें कि उन्होंने दबाव और डर के मारे इस्तीफ़ा दिया है."

उन्होंने पूछा, "वो मंत्री थे, वो बताएं कि क्या जेन ज़ी ग़लत थे और ग़लत लोग उन्हें गाइड कर रहे थे?"

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा, "मुझे एक चीज़ बताइए पेपर लीक हुआ है या नहीं हुआ है? 21 बच्चों ने अपनी जान दी है कि नहीं दी है. अगर ये दोनों बातें सच हैं तो उन्हें (जेन ज़ी) भटकाने की क्या बात है? पेपर लीक हुआ है, 21 बच्चों ने जान दी है भटकाने का सवाल क्या है?"

तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने कहा, "अगर धर्मेंद्र प्रधान पहले इस्तीफ़ा दे देते तो हालात इतने नहीं बिगड़ते. बीजेपी को जेन ज़ी आंदोलन के दबाव में उन्हें हटाना पड़ा. इसलिए उन्होंने इस्तीफ़ा दिया. जेन ज़ी के विचार और विज़न बीजेपी के साथ मेल नहीं खा रहे हैं. इसीलिए लोगों को परेशान किया जा रहा है. समाज नए तरीक़े से चीज़ों को देखना चाहती है."

जेडीयू नेता राजीव रंजन ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव कहते हुए कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीआई जांच के आदेश दिए, गिरफ़्तारियां कराईं और अधिकारियों पर कार्रवाई की. बाद में उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के किसी निर्देश के बिना इस्तीफ़ा दिया."

ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा, "कल उन्होंने कहा था कि यदि देश के युवाओं और जेन ज़ी को उनसे लाभ मिला है, तो यह त्याग उन्हें कई बार स्वीकार है. देशहित में युवाओं के लिए आगे बढ़ना हम सबका लक्ष्य है."

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, "शिक्षा मंत्रालय को जिस तरह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान चला रहे थे, जिस तरह पेपर लीक और दूसरे मामले थे, उसने जेन ज़ी को नाराज़ किया. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नितिन नबीन और आरएसएस चीफ़ मोहन भागवत के साथ बैठना चाहिए और तय करना चाहिए कि जेन ज़ी को गुमराह किया गया या उकसाया गया. अगर जेन ज़ी को गुमराह किया गया तो किसने किया, अगर उन्हें उकसाया गया तो किसने उकसाया. इन सवालों के जवाब आने चाहिए."

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, "मैं धर्मेंद्र प्रधान से पूछना चाहता हूं कि क्या पेपर लीक की पुष्टि हुई या नहीं? आप बताएं, क्या परीक्षा देने वाले 20–22 लाख छात्रों को नुकसान हुआ या नहीं? क्या कई छात्रों ने आत्महत्या नहीं की? अगर ये बच्चे हमारे भविष्य हैं, तो यह समझना होगा कि उन्हें गुमराह किसने किया."

इस्तीफ़ा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान 27 जुलाई को संसद के मानसून सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे, जहां बीजेपी और एनडीए सांसदों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया.

जैसे ही अपनी कार से उतरकर वो संसद की ओर बढ़ रहे थे, तभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एनडीए के सांसदों ने उन्हें घेर लिया. उनसे मिलने की, उनसे हाथ मिलाने की होड़-सी लग गई.

ये नज़ारा कुछ ऐसा था, जैसे किसी ऐसे शख़्स का स्वागत किया जा रहा हो, जिसने हाल-फ़िलहाल कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो.

इस पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तंज़ करते हुए एक्स पर लिखा था, "धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत के बर्बाद एजुकेशन सिस्टम के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे. उसी सिस्टम ने 26 बच्चों की जान ली, और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया. इस्तीफ़ा भी नैतिकता से नहीं, युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा. और आज उसी व्यक्ति को संसद में बीजेपी माला पहना रही है. यह कोई सम्मान नहीं, लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है. देश का हर छात्र ये देख रहा है. और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा."

सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफ़ी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं.

उल्लेखनीय है कि जंतर मंतर पर कई हफ़्ते से चल रहे सीजेपी के आंदोलन के दौरान जब 20 जुलाई को संसद चलो की कॉल दी गई तो उस दिन काफ़ी हिंसा हुई.

स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दाए गए. बीबीसी कम से कम चार ऐसे मामलों की पुष्टि कर पाया जिनमें प्रदर्शनकारियों का अस्पताल में इलाज हुआ. यह मामला उच्च अदालतों तक पहुंचा.

आख़िरकार धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया.

उस समय गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ़ की थी.

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने भी उनकी तारीफ़ करते हुए कहा था, "धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दिया और उनका सार्वजनिक जीवन समर्पण का उदाहरण है."

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेताओं ने प्रधान के इस्तीफ़े के बाद उनकी सराहना की थी.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • संसद के आगामी सत्र में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरेगा

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • जेन ज़ी को गुमराह करने वाले लोग कौन थे?
  • क्या पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच में नए खुलासे होंगे?

Related Topics

This article was originally published by BBC हिंदी.

Related Stories

झारखंड स्टूडेंट प्रोटेस्ट: मांगें, सरकार का रुख और गतिरोध के कारण
Developing·4 hours ago

झारखंड स्टूडेंट प्रोटेस्ट: मांगें, सरकार का रुख और गतिरोध के कारण

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर जुलाई के आखिरी सप्ताह से रांची में विद्यार्थियों का प्रदर्शन जारी है। सरकार ने 98 फ़ीसदी मांगें मानने का दावा किया है, लेकिन जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर गतिरोध बना हुआ है।

BBC हिंदी
5 min read
संसद का मॉनसून सत्र: एफसीआरए, उच्च शिक्षा और वंदे मातरम जैसे बिलों पर घमासान के आसार
Developing·4 hours ago

संसद का मॉनसून सत्र: एफसीआरए, उच्च शिक्षा और वंदे मातरम जैसे बिलों पर घमासान के आसार

संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम सप्ताह में एफसीआरए संशोधन, उच्च शिक्षा, वंदे मातरम और ट्रिब्यूनल सुधार बिलों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।

BBC हिंदी
6 min read
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के ख़िलाफ़ स्टूडेंट आंदोलन का 16वां दिन, सरकार के साथ कई मांगों पर बनी सहमति
Developing·5 hours ago

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के ख़िलाफ़ स्टूडेंट आंदोलन का 16वां दिन, सरकार के साथ कई मांगों पर बनी सहमति

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ छात्र आंदोलन के 16वें दिन सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच रांची में बातचीत हुई। 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी, जबकि छात्र सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं।

BBC हिंदी
5 min read