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Geriकिएर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इन वजहों से दिया इस्तीफ़ा
किएर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इन वजहों से दिया इस्तीफ़ा
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BBC हिंदी23.06.2026Siyaset7 dk okumaIndia

किएर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इन वजहों से दिया इस्तीफ़ा

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किएर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि पार्टी ने अगले आम चुनाव में नेतृत्व के लिए उनके उपयुक्त न होने का जवाब सुन लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि वे देश को पहले रखते हैं.

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किएर स्टार्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है.

10 डाउनिंग स्ट्रीट पर अपने फ़ैसले के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या वह अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही हैं.

उनका कहना है कि उन्होंने इस सवाल पर अपनी पार्टी का "जवाब सुन लिया है" और "उस जवाब को अच्छे से स्वीकार करते हैं."

उनका कहना है कि उन्होंने जो भी फ़ैसला लिया है, वह "अपने देश को सबसे पहले रखने" के बारे में रहा है, जिससे वह प्यार करते हैं.

उन्होंने कहा, "मैं लेबर पार्टी के लीडर के पद से इस्तीफ़ा दे दूंगा."

स्टार्मर का कहना है कि उन्होंने सोमवार की सुबह किंग से बात करके उन्हें अपने इस्तीफ़े के फ़ैसले के बारे में बताया.

उन्होंने लेबर पार्टी की नेशनल एग्ज़ीक्यूटिव कमेटी से कहा है कि वे एक टाइमटेबल तय करे जिसमें लीडरशिप के लिए नॉमिनेशन 9 जुलाई से शुरू हों और इसकी प्रक्रिया गर्मियों की छुट्टियों तक पूरी हो जाए.

इसका मतलब है कि सितंबर में संसद के शुरू होने से पहले एक नया लीडर बन जाएगा.

उन्होंने कहा कि तब तक वो प्रधानमंत्री के पद पर बने रहेंगे.

स्टार्मर ने क्यों लिया फ़ैसला

मेकरफ़ील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम की शानदार जीत के बाद किएर स्टार्मर से डाउनिंग स्ट्रीट से अपने जाने का टाइमटेबल तय करने के लिए कहा जा रहा था.

लेबर पार्टी के ज़्यादा से ज़्यादा सांसद किएर स्टार्मर से कह रहे थे कि वे ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर को सत्ता सौंपने के प्लान की घोषणा करें.

लेकिन प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा था कि वह किसी भी चुनौती का सामना करेंगे और "पीछे नहीं हटेंगे."

यह साफ़ नहीं है कि अगले लेबर लीडर के लिए कोई मुकाबला होगा या नहीं.

उदाहरण के लिए, अगर एंडी बर्नहैम 9 जुलाई को मुकाबला शुरू होने पर बिना किसी चुनौती के चुनाव लड़ते हैं, तो नॉमिनेशन बंद होने के बाद वो लेबर लीडर बन सकते हैं.

किएर स्टार्मर अप्रैल 2020 में लेबर पार्टी के नेता चुने गए और लेबर की आम चुनाव में जीत के बाद 5 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री बने.

उनके पद छोड़ने के फैसले का मतलब है कि ब्रिटेन को जल्द ही 2016 के बाद से अपना सातवां प्रधानमंत्री मिलेगा.

इस्तीफ़े की घोषणा से पहले क्या बोले

स्टार्मर ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा करने से पहले कहा कि उन्हें विरासत में लेबर पार्टी मिली थी जो "पॉलिटिकली, फ़ाइनेंशियली और नैतिक रूप से दिवालिया" थी.

उन्होंने कहा कि उन्हें "बार-बार" कहा गया कि पार्टी "ख़त्म" हो चुकी है, लेकिन उन्होंने "उन लोगों को ग़लत साबित कर दिया."

उन्होंने कहा कि उन्होंने "एंटीसेमिटिज़्म के ज़हर को निकालकर" पार्टी को बदल दिया.

उन्होंने आगे कहा, "इकॉनमी, डिफ़ेंस और नेशनल सिक्योरिटी पर भरोसा वापस लाया."

किएर स्टार्मर ने कहा कि वो सत्ता का सही तरीक़े से हस्तांतरण पक्का करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे, और अपने वारिस को पूरा सपोर्ट देंगे.

उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि उन्हें एक ऐसा ब्रिटेन विरासत में मिल रहा है जो दो साल पहले से ज़्यादा मज़बूत और निष्पक्ष है.

इसके साथ ही स्टार्मर ने अपने उन दोस्तों और साथियों का शुक्रिया कहा जो छह साल से उनके साथ हैं, साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय के स्टाफ़ और "बहुत बढ़िया सिविल सर्विस" को भी धन्यवाद देते हैं.

बीते चुनाव में लेबर पार्टी के ख़राब प्रदर्शन किएर स्टार्मर के इस्तीफ़े की वजह मानी जा रही है लेकिन इसके अलावा कई और कारण थे जिसने स्टार्मर पर दबाव बढ़ाया.

आर्थिक मुश्किलें

शुरुआत से ही सर किएर स्टार्मर के कार्यकाल में समस्याओं के संकेत दिखाई देने लगे थे.

प्रधानमंत्री बनने के सिर्फ तीन महीने बाद ही उन्हें 6,000 पाउंड से अधिक मूल्य के उपहारों और मेहमाननवाज़ी का ख़र्च वापस करना पड़ा, जो उन्हें प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला था. इनमें टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट के टिकट भी शामिल थे.

हालांकि किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ था, लेकिन मंत्रियों द्वारा मुफ्त सुविधाएं स्वीकार करने की ख़बरें जनता को पसंद नहीं आईं, खासकर ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था सुस्त बनी हुई थी और सरकार अपने किए गए सुधार वादों को लागू करने की क्षमता को लेकर सवालों के घेरे में थी.

किएर स्टार्मर को कई नीतिगत यू-टर्न (फ़ैसले बदलने) के लिए भी कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी. इनमें हरित निवेश (ग्रीन इन्वेस्टमेंट) के वादे को छोड़ना, कल्याणकारी लाभों (वेलफेयर बेनिफिट्स) में बदलाव और विरासत कर (इनहेरिटेंस टैक्स) से जुड़ी नीतियों में परिवर्तन शामिल थे.

साथ ही दक्षिणपंथी वर्ग ने भी उनकी आलोचना की, क्योंकि वे फ्रांस से इंग्लिश चैनल पार कर अवैध रूप से ब्रिटेन आने वाले प्रवासियों की संख्या को रोकने में असफल दिखाई दिए.

जनमत सर्वेक्षण करने वाली संस्थाओं ने लगातार पाया कि किएर स्टार्मर जनता के बीच बेहद अलोकप्रिय हो गए थे. कई बार उनकी लोकप्रियता रेटिंग ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के लिए रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई थी.

एपस्टीन और राजदूत

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के कार्यकाल को घेरने वाले सबसे बड़े विवादों में से एक तब सामने आया, जब अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत लॉर्ड पीटर मेंडेलसन का नाम जेफ़्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आया.

टोनी ब्लेयर के दौर में एक शानदार राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले लॉर्ड मेंडेलसन इससे पहले भी दो बार लेबर सरकारों से विवादों के बीच बाहर हुए थे.

किएर स्टार्मर ने लॉर्ड मेंडेलसन को ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी अमेरिका में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया था, जबकि उन्हें यह पता था कि मेंडेलसन की जेफ्री एपस्टीन से दोस्ती बनी हुई थी, यहां तक कि एपस्टीन को एक नाबालिग लड़की से देह व्यापार के लिए संपर्क करने के अपराध में दोषी ठहराए जाने के बाद भी.

जनवरी में अमेरिकी सरकार द्वारा जारी दस्तावेज़ों से एपस्टीन और लॉर्ड मेंडेलसन के बीच संपर्क को लेकर नई जानकारी सामने आई.

इसके बाद उन सामग्रियों की पुलिस जांच शुरू हुई, जिनसे यह संकेत मिलता है कि लॉर्ड मेंडेलसन ने एपस्टीन के साथ गोपनीय सरकारी जानकारी साझा की हो सकती है.

लॉर्ड मेंडेलसन ने इन ईमेलों पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बीबीसी की जानकारी के अनुसार उनका कहना है कि उन्होंने कोई आपराधिक काम नहीं किया और न ही उनका उद्देश्य किसी प्रकार का आर्थिक लाभ हासिल करना था.

सितंबर में स्टार्मर ने लॉर्ड मेंडेलसन को उनके पद से हटा दिया, लेकिन इस पूरे मामले ने प्रधानमंत्री के निर्णय पर सवाल खड़े कर दिए और एक स्थिर और सक्षम नेता की जो छवि वे पेश करना चाहते थे, उसे भी कमज़ोर कर दिया.

ट्रंप के साथ बिगड़ते रिश्ते

किएर स्टार्मर ने लॉर्ड पीटर मेंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने का एक बड़ा कारण यह था कि उन्हें उम्मीद थी कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ और करीबी संबंध स्थापित कर सकेंगे.

हालांकि शुरुआत में अमेरिका और ब्रिटेन के नेताओं के बीच मुलाक़ातें काफ़ी सौहार्दपूर्ण रहीं, लेकिन जब किएर ने शुरू में ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया, तो दोनों देशों के बीच तथाकथित "विशेष संबंध" में धीरे-धीरे तनाव बढ़ने लगा.

बाद में प्रधानमंत्री ने अपना रुख़ बदला और अमेरिकी सेना को ईरानी मिसाइल ठिकानों पर "रक्षात्मक" हमले करने के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी.

लेकिन यह बीच का रास्ता अपनाने वाला क़दम भी ट्रंप को संतुष्ट नहीं कर सका. ट्रंप लगातार किएर पर तीखे हमले करते रहे, जबकि लेबर पार्टी के पारंपरिक समर्थक भी नाराज़ हो गए क्योंकि वो इस संघर्ष में किसी भी प्रकार की भागीदारी के विरोधी थे.

रविवार को सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि किएर "प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे" और उन पर आव्रजन (इमिग्रेशन) और ऊर्जा नीति के मामलों में "बुरी तरह विफल" रहने का आरोप लगाया.

ट्रंप ने अपने संदेश के अंत में लिखा, "मैं उनके लिए शुभकामनाएं देता हूं!"

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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