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Geriपाकिस्तान की भारत को चेतावनी: सिंधु जल संधि को निलंबित करना 'युद्ध जैसी कार्रवाई' होगी
पाकिस्तान की भारत को चेतावनी: सिंधु जल संधि को निलंबित करना 'युद्ध जैसी कार्रवाई' होगी
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पाकिस्तान की भारत को चेतावनी: सिंधु जल संधि को निलंबित करना 'युद्ध जैसी कार्रवाई' होगी

Hızlı Bakış

पाकिस्तान ने भारत को चेतावनी दी है कि सिंधु जल संधि के तहत उसके जल संसाधनों को रोकने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' माना जाएगा। उप प्रधानमंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि भारत का एकतरफ़ा निलंबन अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है।

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पाकिस्तान ने भारत को चेतावनी दी है कि सिंधु जल संधि के तहत उसके जल संसाधनों को रोकने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' माना जाएगा। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाते हुए जवाबी क़दम के तौर पर सिंधु जल संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित कर दिया था।

Yazı boyutu

प्रकाशित 5 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि वह भारत के साथ किसी 'टकराव' या 'विवाद' की स्थिति नहीं चाहता, लेकिन सिंधु जल संधि के तहत देश के जल संसाधनों को रोकने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' माना जाएगा.

मंगलवार को सिंधु जल संधि पर इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि को 'एकतरफ़ा तरीके़ से निलंबित करने का कोई आधार नहीं है और न ही अंतरराष्ट्रीय क़ानून में इसकी कोई गुंजाइश है.'

भारत ने इसहाक डार के ताज़ा बयान पर फ़िलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाते हुए जवाबी क़दम के तौर पर सिंधु जल संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित कर दिया था.

पाकिस्तान ने भारत के इस क़दम को ख़ारिज कर दिया था और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का रुख़ किया था.

नीदरलैंड्स के शहर द हेग में स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन यानी मध्यस्थता अदालत ने स्पष्ट किया था कि भारत इस संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित नहीं कर सकता.

लेकिन भारत ने इस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था और सिंधु जल संधि के निलंबन को जारी रखने की घोषणा की थी.

पहलगाम हमले और भारत की ओर से सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने कहा था कि भारत की ओर से पाकिस्तान का पानी रोकने या उसका रुख़ बदलने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' माना जाएगा.

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पाँच जून को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा था कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान 'सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं कर देता.'

इसहाक़ डार ने क्या कहा?

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पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक़ डार ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान अब भी उसी रुख़ पर कायम है और वह 'यह सुनिश्चित करेगा कि उसके अधिकारों का हनन न हो.'

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने हमेशा मतभेदों के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और दोनों पक्षों के सहमत तंत्र का रास्ता अपनाने की बात की है. हालांकि इस मामले में किसी तरह की कोई ग़लतफ़हमी नहीं होनी चाहिए कि सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को मिले जल अधिकारों से वंचित करने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गहरे और दूरगामी असर डालेगी."

मंगलवार को हुए इस सेमिनार में पाकिस्तानी सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया था.

इस मौके पर पाकिस्तान में इंडस वाटर कमिश्नर सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने कहा कि पिछले साल अप्रैल के बाद से वो चिनाब नदी के प्रवाह में बदलाव के मामले पर अपने भारतीय समकक्ष को चार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.

उन्होंने आगे कहा कि चिनाब नदी में पानी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव कोई 'तकनीकी समस्या' नहीं बल्कि 'रणनीतिक ख़तरा' है.

सिंधु जल संधि के निलंबन से पाकिस्तान के सामने ख़तरे

अपने संबोधन में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री डार ने कहा कि "अप्रैल 2025 से पाकिस्तान ने ऐसे कदमों की एक श्रृंखला देखी है जिसने गंभीर चिंताओं को जन्म दिया है. इनमें चिनाब और झेलम नदियों में पानी के प्रवाह में अचानक और असामान्य उतार-चढ़ाव और सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के लिए निर्धारित जल को नियंत्रित करने की क्षमता वाले बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तार करने की कोशिशें शामिल हैं."

उन्होंने कहा, "हमें उस कीमत के बारे में भी जागरूक रहना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से गुज़रने वाली नदियों से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय समझौते को नुकसान पहुंचाने, साझा जल संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने, टकराव का रास्ता अपनाने और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करने की स्थिति में चुकानी पड़ सकती है."

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह सिर्फ़ एक क़ानूनी बहस नहीं है, "पानी 25 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन का आधार है. हमारी कृषि, हमारी सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक विकास निर्बाध जल प्रवाह पर निर्भर है."

इसहाक़ डार ने कहा कि नदियों की सुरक्षा 'हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.'

उन्होंने कहा, "हम पूरी गंभीरता के साथ भारत को सलाह देते हैं कि वह युद्ध की स्थितियां पैदा करने, साझा जल संसाधनों को विवाद का माध्यम बनाने और हमारे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को ख़तरे में डालने से बचे."

नदियों पर भारत की योजनाएं

भारत ने हाल ही में चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना की घोषणा की थी, जिसके तहत चिनाब नदी से लगभग 19 लाख एकड़ फीट पानी को भारत की ब्यास नहर प्रणाली की ओर मोड़ा जा सकता है.

भारत ने इस परियोजना के लिए कंपनियों से निविदाएं भी आमंत्रित की हैं.

22 मई को अपने फेसबुक अकाउंट पर बीजेपी ने लिखा था कि "सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद अब आखिरकार भारत अपनी पश्चिमी नदियों की क्षमता का इस्तेमाल हाइड्रो पावर, जल सुरक्षा और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए करेगा."

बीजेपी की इस पोस्ट के मुताबिक यह टनल 8.7 किलोमीटर लंबी होगी, जो चंद्रा नदी से अतिरिक्त पानी को ब्यास की ओर मोड़ देगी.

भारत की सरकारी संस्था नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन ने पिछले महीने हिमाचल प्रदेश में टनल निर्माण के लिए टेंडर जारी किया है.

यह टनल हिमाचल प्रदेश के कोकसार इलाक़े में बनाई जाएगी.

भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना 2620 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी.

कुछ दिन पहले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भी इस परियोजना पर बात की थी और कहा था कि यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय हित में है और इसके ज़रिए देश को अपने जल संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा.

एएनआई के अनुसार, शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल गुप्ता ने कहा था कि 'चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना राष्ट्रीय हित के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. भारत के पानी का इस्तेमाल पहले उसके लोगों और राज्यों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए.'

पाकिस्तान इन परियोजनाओं को सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन बताते हुए इस मामले को संबंधित ट्रिब्यूनल में ले गया है.

Bundan Sonra Ne Olabilir?

Yapay zekâ öngörüsü — kesinlik taşımaz

  • भारत चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना पर काम जारी रखेगा।

    Muhtemel · Aylar içinde

  • पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा।

    Çok muhtemel · Haftalar içinde

Açık Sorular

  • क्या भारत अपने रुख़ पर कायम रहेगा?
  • क्या पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा लेगा?
  • क्या दोनों देश बातचीत से हल निकालेंगे?

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Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

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